Top of the Town: Ravindra Bhadana, MLA Indian politician and a member of the 16th Legislative Assembly of Uttar Pradesh of India

1. आपका बचपन में प्रेरणा स्त्रोत कौन था?

मेरे पूज्य बाबाजी स्वर्गीय श्री रामसिंह जी । जो एक कृषक थे, एक सामाजिक व्यक्ति थे। उन्होंने जिंदगी में मुझे जीना सीखाया। प्ररेणा भी वही से मिली। उनका कहना होता था कि मिटा दे अपनी हस्ती को अगर तू मरतबा चाहे जैसे दाना खाक में मिलकर, गुले गुलजार होता है। बिल्कुल उनके जो उस समय कहे हुए जो वाक्य थे और जो चीजें वो रोज की समझाते थे, उस समय बचपन में तो वो चीजें समझ नही आती थी लेकिन धीमे-धीमे जैसे शिक्षा आगे ढ़ी और ज्ञान उस तरफ आगे बढा मैं राष्ट्रीयसंघ सेवा संघ के सम्पर्क में आया। राष्ट्रीय संघ सेवा संघ आर० एस० एस० और आर० एस० एस० की शाखाओं में मेरा जाना आरम्भ हुआ तो शाखा के अन्दर व्यक्ति निर्माण का कार्य होता है।े वहाँ व्यक्ति को एक तरह से डवलप किया जाता है व्यक्ति निर्माण तो उस व्यक्ति निर्माण के अन्दर सारी चीजें हैं, संस्कार भी है, शिक्षा भी है, शारीरिक विकास भी है, मानसिक विकास भी है,बौद्धिक विकास भी है, सब चीजों का सामान्जय से मिलाजुला है और खेल – खेल में सारी चीजें व्यक्ति सीखता चला जाता है मैं भी लम्बे समय संघ में रहकर के काम करते करते, वहाँ सीखते-सीखते शाखा में जाते-जाते जो भी चीजें पहले बचपन में घर से बाबाजी से मुझे सब चीजें मिली लेकिन जब मैं थोडा समाज की तरफ आया तो वहाँ मुझे सारी चीजें जो आज मैं कुछ भी हूँ मेरे पास जो भी संस्कार है जो भी है वो मेरे उस मातृत्व संघटन की देन है राष्ट्र संघ सेवा संघ की। जिसने मुझे तैयार किया है।

2. किन महान नायकों ने आपकी विचार धारा को प्रभावित किया?

देखिए मैं एक बात मानता हूँ कि देश के अन्दर जो आप लीडर शब्द कह रही है आज लीडर शब्द कहने पर मेरे को थोडा अजीब सा लगता है अगर देश का कोई नेता था जिसको हम नेता बोल सकते थे तो उनका नाम था नेताजी सुभाषचन्द्र बोस वो देश के नेता थे। हम लोग है या कोई भी और है तो वो जन प्रतिनिधि है, हम जन सेवक हो सकते है। हम जनता के सेवक है, जनता ने हमें चुना है, जनता ने हमें माना है तो हम जन सेवक है। ठीक है उसका दायित्व पद नाम कुछ अलग होगें कुछ मन्त्री होंगे, कुछ प्रधानमंत्री होंगे लेकिन सब जन सेवक है यही मेरे देश के नेता भी मानते है।
मैं अपने जीवन को स्वामी विवेकानन्द जी के आदर्शो पर चलाना चाहता हूँ। स्वामी विवेकानन्द जी, जो अपने लिए नही जिये, समाज ओर राष्ट्र के लिए जिये े। जो भी कुछ उन्होंने किया वो अपने लिए या अपने परिवार के लिए नही अपितु देश, समाज और राष्ट्र के लिए सब कुछ समर्पित था। तो मेरे वो आदर्श रहे उन्हीं आदर्शो पर चलते हुए मैं आगे बढ़ा और तब मैने विचार किया सोचा कि अगर सब कुछ पूरे देश के अन्दर ऐसा ही रहा तो राजनैतिक दिशा और दशा कैसे ठीक हो पायेगी। सब लोग अगर विरक्त रहेंगे इन चीजों से तो वो साफ-सफाई कैसे होगी और जैसे-जैसे थोडा मेरी समझ में आया। देखिए, अगर कमल भी खिलता है तो वो भी कींचड़ में खिलता है । कींचड़ की सफाई कैसे होगी वहाँ पर कैसे कमल खिल पायेंगे। उसका यत्न ओर प्रयत्न हम जीवन भर करेगें।

3. आपने अपनी महत्वकांशाओ पर काम करना कब शुरू किया?
पार्टी के लिए संघठन के लिए हमेशा सदैव तत्पर और सर्कियता के साथ सकीर्य भूमिका में रहा और चाहे दायित्व रहे अथवा नही रहे आगे बढता गया । और फिर पार्टी ने मुझे जिले में उपाध्यक्ष बनाया जिले का डिस्टिक वाइस प्रेजिडेन्ट फिर उसके बाद पार्टी का मन हुआ तो मुझे महामंत्री बनाया डिस्टिक का। और फिर उसके बाद मैं बीच में खाली रहा फिर जिले का अध्यक्ष भी बना । मुझे जो भी कुछ मिला है मेरे संघठन से मिला है। उस परिवार से मिला जो राष्ट्र संघ सेवा संघ है । मेरे पास इसके अलावा और कुछ नही है ।

4. आप अपने खाली समय को कैसे व्यतीत करना पसंद करते है?

कुछ भी पढना, कुछ विचार, चिन्तन करना जब भी कभी खाली होता हूँ देश का चित्रण सामने आता है मै जोग्रफी का विद्यार्थी रहा हूँ तो देश भौगोलिक स्थिति ओर भौगोलिक नक्सा मेरे सामने आता है। बार-बार पीडा होती है कि मेरा देश कटता गया, बढता गया और छटता गया और खण्डित होता गया ।
मैं बचपन में हॉकी खेलने का शौकीन था जो कि हमारा राष्ट्रीय खेल भी है। आज तरह – तरह के खेल भारत वर्ष में प्रवेश कर रहे है। लेकिन भारतीय खेलों के प्रति मेरी चाहे वह कबड्डी रही, चाहे वह हॉकी रही, या खो-खो रही सभी मुझे प्रिय थे।
घर पर जब खाली समय होता है तो टी०वी० में समाचार सुनता हूँ और अखबार पढ़ता हूँ।

5. आपका पसन्दीदा
1. छुट्टी गंतत्वय . देखिए घूमने का समय नही मिलता है पर मुझे हिन्दुस्तान बहुत प्यारा है, मैं विदेश कभी नही गया और जहाँ पर मै पैदा हुआ हूँ वो भूमि मुझे प्रिय है। कभी कोई पार्टी केकोई कार्यक्रम होते है तो उस बहाने हम घूम लेते है। मैंने चित्रकूट के दर्शन किये जब पार्टी की वहाँ एक बैठक थी और उसमें मुझे बुलाया गया था तो वहाँ दर्शन हो गये। एक बार जम्मू में पार्टी का एक कार्यक्रम था। जम्मू में आन्दोलन था, झण्डा यात्रा थी तो वहाँ पर गया तो माँ वैष्णों देवी के दर्शन किये जो भी दर्शन है, मैं तो ये मानता हूँ कि वो भी मुझे पार्टी और संघटन के कारण ही हुए। जहाँ मुझे बुलाया, जहाँ मेरी आवश्यकता थी तो मैं गया तो फिर वो दर्शन भी कर आया। ऐसी जगह पर भी घूमने का या जाने का कभी सौभाग्य मिला तो भी मुझे मेरे संघटन के कारण ही मुझे अनायास ही प्राप्त हो गया।

2. किताब . छत्रपति शिवाजी को मैंने पढा, स्वामी विवेकानन्दजी को मैने पढा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय को पढा, डॉ० हरिनिवास जी को पढा और उन तमाम ऐसे लोगो को जिनका देश के अन्दर बहुत बडा योगदान रहा है उनका जीवन, जीवन परिचय और जीवन वरित्र उनका कैसा रहा जैसे, डा०बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर और अनेकों ऐसी प्रतिभायें रही है देश के अन्दर जिनके बारे में मैने पढा है। स्वामी दयानन्दजी और उनके विचारों को मैने विस्तार से पढने और समझने की कोशिश की है और दीनदयालजी की सोच से मैं बहुत प्रभावित था ।

3. फिल्म . मुझे सिनेमा देखे हुए मैं समझता हूँ लगभग बीस बाईस वर्ष हो गये होगें पता नही बचपन में कभी देखी होगी जैसे हाथी मेरे साथी देखी थी पर पुरानी चीजें ऐसी कोई ध्यान नही है। देखिए समाज में बहुत सारी विकृतियाँ है जैसे मैने एक पिक्चर देखी थी वो सबसे बडा रूपइया बाप बडा ना भइया, उससे यह ज्ञान मिलता है कि लोग कितनी अन्धी दौड में है और उस पैसे के पीछे भाग रहे है। हम अपनी सभ्यता भुलाकर पाश्चात्य सभ्यता के पीछे भाग रहे है।
4. खाना . खाने में सब चीजें पसन्द है मैं शुद्ध रूप से शाकाहारी हूँ ।

5. गायक . देखिए, गायक तो एक से एक लाजवाब मेरे देश के अन्दर प्रतिभा भरी पडी है, कोकिला का जवाब नही, किशोर का जवाब नही, मोहम्मद रफी का जवाब नही, हाँ, प्रतिभाएं है अनेक, कभी भी मैं छोटे-छोटे बच्चों की अवाजें टी० वी० पर सुन लेता हूँ किसी कार्यक्रम में बच्चें लोग जैसे देखते रहते, एक से एक बडी चीज, बडी प्रतिभाए देश के अन्दर उनको सुनता हूँ। आर्ट ऑफ लिविंग में मैने एक भजन सुना था जिसने मुझे मंत्रमुग्ध कर दिया था । किसको कहूँ कौन बडा है कौन छोटा है मेरे लिए तो सारे ही एक समान है।

6. गाना . ‘‘मेरे देश की धरती उगले सोना हीरे मोती’’

6. आप अपनी सेहत के लिए क्या करते है?
देखिए सबसे बडी चीज तो हमारे यहाँ शाखा ही है उसमें सब चीजें होती है। योगा और सभी प्रकार के शारीरिक व्ययाम भी होते है। कई बार अति व्यवस्थाओं के कारण नित्य जाना नही हो पाता परन्तु सप्ताह में दो से तीन दिन तो जरूर जाता हूँ। बाकि हम अपनी दिनचर्या में पूरा कर लेते है। हम किसी गाँव में जब सम्पर्क के लिए जाते है तो गाडी अलग छोड कर हम पैदल गाँव में घूम लेते है सब जगह वॉकिंग भी हो जाती है और उससे सारा काम भी हो जाता। सुबह से हम कोशिश करते है कि जनता के लिए लगभग 11,12 तक हम सिटिंग करे और जनता की समस्याओं का समाधान करे। उसके बाद में दिन के 11 बजे से रात्री के 11 बजे तक फील्ड में रहते है।

7. आपके परिवार में कौन – कौन हैं?

मेरे परिवार में हमारी माताजी है सबसे बडी वही है और हमारी पत्नी है दो बेटे है और एक पोता ओर एक पोती है और एक पुत्रवधु है।

8. आप अपने कार्य संतुलन को कैसे बनाये रखते है?

देखिए मेरा जो व्यवसाय है वो खेती है। उसमें मैं भी यर्थाथ योगदान करता हूँ। पहले तो मैं स्वयं करता था लेकिन अब लगभग 15-20 वर्षो से मैं सहयोगियों से उसमें कराता हूँ और उनको उनका पारितोशित उनको देता हूँ। तो स्वयं से तो नही कर रहा हूँ, मानो स्वयं से मैने ट्रेक्टर चलाया हल जोता है ओर बैल चलाये है सारे काम खुद किये है, फावडा चलाया है कोई काम ऐसा नही छोडा जो मैने ना किया हो । खेती का सब काम मैं खुद करता था। अब उतना समय नही है। समाज ओर राष्ट्र के लिए समय है तो सहयोगियों से ये सब करवाता हूँ । घर का भी कार्य होता है उसे समय मिलने पर पूर्णं करता हूँ। सामाजिक कार्य से जो भी थोडा बहुत समय मिलता है उसे मैं परिवार को देता हूँ और पूर्ति करने का प्रयास करता हूँ।

9. आपका सबसे अच्छा मित्र कौन है? और उसकी कौन-सी खूबी आपको पसंद है?
देखिए, मेरी सबसे अच्छी मित्र मेरी जनता है। वो ही मुझे प्रेरणा भी देती है, वही मुझे शक्ति भी देती है और वही मेरी ताकत है।

10. क्या एक चीज आपको बहुत गुस्सा कर देती है ?
पहले मुझे छोटी-छोटी चीजों पर गुस्सा आ जाता था परन्तु जबसे सामाजिक क्षेत्र में आया हूँ तो बहुत चीजें समझने की और सहने की और उन सब को बर्दास्त करने की एक आदत बन गयी है अब वो गुस्सा नही आता है। अब जो खराब चीजें होती है उस पर हँसी जरूर आती है लेकिन गुस्सा समाप्त हो गया ।

11. क्या एक चीज आपको प्रसन्न कर देती है ?
जो जनता की अपेक्षा और आकांक्षाए हमसे होती है और जब हम उनको विभिन्न प्रकारों के प्रयास से पूर्णं कर पाते है या देश या समाज की हमसे अपेक्षाए है उन्हें हम लोग पूरा कर पाते है। तो उसमें बडी मानसिक शान्ति और मन पसन्न होता है खुशी मिलती है।

12. आपकी अपने जीवन की किस उपलंब्धी पर आपको गर्व है?
जीवन में व्यक्ति कभी खुद कोई चीजें प्राप्ति नही कर सकता है। दुनियाँ का मालिक नारायण है और सब उसी का दिया है, सब कुछ उसने किया है। हम तो कर्ता भी नही है। इसलिए तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा, मेरा तो कुछ है नही ये सब उसका है। दुनिया में रहने आले लोग कठपुतली की तरह है, आये है ये रंगमंच की तरह है अपना-अपना रोल है वो कर रहे है लेकिन आना और जाना ये सतत प्रक्रिया है। इसमें कही कोई दो राय नही है। मैं मानता हूँ जो भी कुछ है वो ईश्वर का है और ईश्वर के लिए ही है वो ही हमसे ये सब चीजें करा रहा है। कठपुतली की भी डोर उसी के हाथ में है वो ही नचा रहा है मंच पर तो हम कुछ नही।
13. आपका अपने शहर मेरठ के लिए क्या योगदान है?
समाज के रचनात्मक कार्य ठीक से होते रहे, समाज आगे बढता रहे और उसी में ही मेरा मेरठ आगे बढेगा। मेरठ की भी उन्नति होगी और हर चीजों में रहता है जैसे मेरठ के अन्दर हाईकोर्ट मंच हो ये बडा अच्छा लगता है बडी परेशानियाँ है। कब होगी ये विषय तो अलग है लेकिन उसका लगातार प्रयास करते रहते है। मेरठ के अन्दर एक हवाई अड्डा हो जो अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डा हो। इसके लिए लगातार प्रयास करते रहते है अब वो जब भी बनेगा उसमें प्रयास है हमारा और मोदी जी ने इतना कुछ किया है पूरे उत्तर प्रदेश और मेरठ के लिए एक्सप्रेस हाइवे दिया है। ये सारी चीजें आकर के मेरठ और मेरठ से होती हुई जायेगी या जा रही है। अभी फिर आगे जो एक्सप्रेस ट्रेन प्रसारित है । तो मेरठ में आगे आने वाले समय में मैट्रों भी आ सकती है ये भी सम्भावित है। तो ये यहाँ के लोगो को जन सुविधा एक तरफ मेरठ है, मेरठ वो एक एतिहासिक भूमि है जो विरोग्य भूमि कही जाती है और वीर नही वीरांग्ना भी रही है और ये बहुत ही बडा एतिहासिक रहा है। ये तो मेरठ है मेरठ के लिए सब कुछ हो ये हमारी आकांशएं, अपेक्षाये है।

14. आपके भविष्य के लक्ष्य क्या है?
हमने अभी माननीय रेलमंत्री के समस्त रखा था कि मेरठ में हम किसी तरह से हस्तिनापुर को जोडते हुए बिजनौर के लिए रेलवे लाइन दे तो उन्होंने माना है ओर उस पर काम भी चल रहा है उसका सर्वे हो गया है। ये एक ड्रीम है आगे का सपना है। हस्तिनापुर के सामने से एक पुल बने गंगा का जो जोड दे बिजनौर और मुरादाबाद की दूरी एकदम से कम हो जायेगी जो गजरोला के बीच में जाकर के मिलेगा। मेरठ के अन्दर हवाई अड्डा े ड्रीम प्रोजेक्ट है जो हमारे लक्ष्य मे शामिल है। सुलभ न्याय मिले इसलिए या तो केन्द्र की सरकार को एन० सी० आर० को दिल्ली में शामिल कर लें। तो अपने आप ही न्याय मिल जायेगा वहाँ हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट सब कुछ है नही तो यहाँ हाईकोर्ट की बैंच नितान्त है। 800 किमी० दूर जाकर के न्याय मिले तो आदमी को बहुत कठिनाई होती है। मेरठ मे इनर रिंग रोड, आउटर रिंग रोड की बहुत बडी आवश्यकता है उसके लिए भी सैक्टरी से बातचीत प्रस्तारित है। हमारा लक्ष्य विकास की गंगा मेरठ सहित सम्पूर्णं उत्तर प्रदेश में बहाना है और मुझे उम्मीद है कि मेरा सपना जरूर पूरा होगा।
15. एक पंक्ति में आप अपने आप की क्या समीक्षा करते है?
मैने कहा कि मै कुछ नही हूँ यहाँ सब कुछ नारायण है मैं तो कुछ नही हूँ मैं तो वो ही बात कह रहा हूँ मैं कुछ नही हूँ सब तू ही है और मेरा ही सब कुछ है और तुझे ही समर्पित है, मैं तो कुछ भी नही हूँ।

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