Impacting Lives of Beginners: Mrs. Neena Bhatia, Principal ABC Public School

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  Who was your inspiration in Childhood ? My father was my inspiration in Childhood. He always preached us that luck sure comes at the door and knocks too but your efforts More »

Top of the Town: Ravindra Bhadana, MLA  Indian politician and a member of the 16th Legislative Assembly of Uttar Pradesh of India

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1. आपका बचपन में प्रेरणा स्त्रोत कौन था? मेरे पूज्य बाबाजी स्वर्गीय श्री रामसिंह जी । जो एक कृषक थे, एक सामाजिक व्यक्ति थे। उन्होंने जिंदगी में मुझे जीना सीखाया। प्ररेणा भी More »

Top of the Town: Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd.

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Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd. with 300+ Centers all across India Who was your inspiration in Childhood ? My mother and father were my source More »

Top of the town: Dr. Mohini Lamba, Director in American Kids Play School, Early Childhood Curriculum Developer, Montessori Teachers Trainer

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Who was your inspiration in Childhood ? My inspiration was my family. I was surrounded by educators in my family. Ma Nanaji, Mamaji, my mother everybody was into academics. My Mamaji was More »

Top of the Town: Mrs. Monika Kohli, 52 years young model and actor, into print ads, T.V. commercials and movies

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Who was your inspiration in Childhood ? I always believed that inspiration is from inside and not from outside. Only you can inspire yourself. Outward inspirations are momentary and do not stay More »

Top of the town: Respected Rajendra Aggarwal, MP

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  Who was your inspiration in Childhood ? My dad and my uncle were my inspiration in my childhood. Both of them were associated with RSS. They inspired me to join RSS More »

Top of the town: Dr. Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker

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Dr.Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker Who was your inspiration in Childhood ? My mother was my inspiration in my childhood and she is still my inspiration. My brother had also More »

Top of the town: Mr. Rakesh Kohli, Chairman, Stag International known for sporting goods in different countries of the world.

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Who was your inspiration in Childhood ? My grandfather was my biggest inspiration. I had learnt the minutest details of life from him. I learnt a lot from him about business. Like More »

Top of the town: Mr. Prem Mehta, Principal City Vocational Public School

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Who was your inspiration in Childhood ? I think in my childhood it was the national leaders like Gandhi ji and Nehru ji who inspired me the most because our exposure at More »

Top of the town: Dr. Mamta Varshney, Lecturer and Poetess

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Who was your inspiration in Childhood? Radio was my source of inspiration as I used to listen to loads of music and radio and tape recorder were the only source to listen More »

 

Kitchen hacks: 10 secrets no one told you

To master the art of cooking it is not necessary to be a great cook. It is important to be a smart one though.

To master the art of it is not necessary to be a great cook. It is important to be a smart one though.

If you know some basic tips and tricks that come only with experience or are handed over down to generations, you can actually become a czar of perfect cooking.

Try out these amazing secrets that our readers and staffers have shared to make cooking easier.

Gunjan Arora : If your milk is almost at the point of getting spoilt, add a pinch of baking soda and you can save your milk!

Ankita Shukla : If your curd is not being set, add a slit green chilly to it.

Jamuna Das: To prevent ants in your kitchen and also disinfect the floor and slabs, add turmeric and salt to the water used in wiping.

Shruti : Add a pinch of sugar while heating oil. It will give your veggies a rich look.

Inam Sarah Pangin: Wrap the ends of bananas in silver foil to keep them fresh for long.

Kalpana Sharma: To make softer rotis knead the dough in whey (paneer) water.

Muneet Walia: To do away with the smell of garlic in your hands, rub your hands in your sink or against a stainless steel container.

Pallavi Bansal: Add 2-3 bay leaves and a bunch of dried curry leaves in rice to prevent rice moths.

Bhavjit Kaur: Add a tbsp of hot cooking oil to ginger-garlic paste, mix well and store it in the refrigerator.

Deepika Singh : To keep fresh for long, store them with apples. from apples prevent potatoes from sprouting.

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शास्त्रीनगर, जागृति विहार डेंगू की चपेट में

जिले में चिकनगुनिया और डेंगू का रोग बेकाबू हो चुका है। खासकर शहर के शास्त्रीनगर और जागृति विहार इलाके इसकी चपेट में हैं। मेडिकल कॉलेज की लैब में कराई गई जांच के बाद डेंगू और चिकनगुनिया के बृहस्पतिवार को 56 नए मामले सामने आये हैं। इससे साफ है कि शहर में एडिस मच्छर को पनपने का पूरा मौका मिल रहा है। इसके अलावा वायरल को जन्म देना वाला बैक्टीरिया भी गंदगी के चलते फैल रहा है। अब जिले में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 55 हो गई है, जबकि चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या ने भी सौ का आंकड़ा छू लिया है।
वायरल बुखार से पीड़ित बड़ी संख्या में लोग सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती हैं। वहीं उससे कहीं ज्यादा संख्या उन मरीजों की है, जो चिकित्सकों की सलाह से घरों पर ही इलाज ले रहे हैं। अलर्ट के बीच स्वास्थ्य विभाग थोड़ा एक्टिव हुआ है तो नगर निगम सफाई, कीटनाशक, चूना छिड़काव और फॉगिंग के मोर्चे पर फेल साबित हो रहा है। जिसके कारण वायरल फैलाने वाला बैक्टीरिया तेजी से सक्रिय हो रहा है।नहीं चल रहा अभियान
जिला मलेरिया विभाग और नगर निगम उन क्षेत्रों को चिन्हित कर अभियान नहीं चला पाया है, जहां एडिस मच्छर सबसे ज्यादा पनप रहा है। जबकि पहले दिन से ही स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम को संकेत मिलने शुरू हो गए थे कि किस क्षेत्र में सबसे ज्यादा लोग डेंगू और चिकनगुनिया के आ रहे हैं।खास एरिया चपेट में
शुरूआत में मेडिकल कॉलेज कैंपस व जागृति विहार से चिकनगुनिया और डेंगू के मामले सामने आये थे। उसके बाद इसका दायरा बढ़ा और उसने मेडिकल से सटी अजंता कॉलोनी व उसके बाद जागृति विहार से मिले शास्त्री नगर को घेरा। लेकिन नगर निगम और जिला मलेरिया विभाग ने महज रस्म अदायगी ही की। जिसके कारण डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छर का दायरा बढ़ता चला गया। अब माछरा और परीक्षितगढ़ ब्लॉक के काफी गांव भी इसकी चपेट में है। अकेले परीक्षितगढ़ और माछरा ब्लॉक से चिकनगुनिया के 30 से अधिक केस सामने आने आ चुके हैं। वहीं डेंगू के भी करीब 15 मामले इन्हीं दोनों ब्लॉक से सामने आये हैं।शहर में गंदगी नहीं दिखती इन्हें
सरकारी अफसरों को शहर में व्याप्त गंदगी नहीं दिखती। जबकि कूड़ा एकत्र करने से लेकर उसके निस्तारण की प्रक्रिया इतनी खराब है कि उसमें बैक्टीरिया जमकर पल रहा है। वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. योगिता सिंह का कहना है कि वायरल के फैलने के पीछे असली वजह गंदगी है, क्योंकि गंदगी की वजह से बैक्टीरिया पैदा होता है और उसी से फैलता है। लेकिन शहर में जगह-जगह गंदगी है, जिससे वायरल के मामले बढ़ना लाजिमी है।

चूने का छिड़काव नहीं
जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत का कहना है कि नियम कहता है कि जहां पर कूड़ा एकत्र किया जाता है वहां दिन में दो दफा अनिवार्य तौर पर चूना गिरना चाहिये। इस शहर में कूड़ा एक ही टाइम उठाया जाता है, इसलिए कूड़े के ऊपर और बराबर मे चूना गिरना चाहिये, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वहीं, डंपिंग जोन में भी कूड़े के ऊपर चूने की पूरी परत होनी चाहिये। अगर नगर निगम थोड़ी सक्रियता से काम करे तो वायरल को ज्यादा प्रभावित तरीके से रोक सकता है।

पुलिस ही लगा रही सरकारी तेल में ‘आग’

पुलिस महकमे में सरकारी तेल की जमकर कालाबाजारी हो रही है। पुलिस ड्राइवर थाने की जीप से लेकर पुलिस अफसरों की गाड़ियों में पुलिस लाइन स्थित पेट्रोल पंप से डीजल और पेट्रोल डलवाते हैं। उसके बाद सरकारी गाड़ी को प्राइवेट दुकान पर ले जाकर तेल बेच देते हैं।
मेरठ पुलिस के पास 128 गाड़ी और 141 फैंटम बाइक हैं। प्रदेश सरकार हर महीने करीब तीन करोड़ रुपये का पुलिस को डीजल, पेट्रोल और गाड़ियों के मरम्मत के लिए देती है। पुलिस की सुविधा को देखते पुलिस लाइन परिसर में ही पेट्रोल पंप बनवाया हुआ है। जहां से पुलिस की गाड़ियों में डीजल व पेट्रोल भरा जाता है। वहीं पुलिस के ड्राइवर खुलेआम तेल की काला बाजारी कर रहे हैं। दिन निकलते ही एक के बाद एक सरकारी गाड़ियों में तेल भरवाकर पुलिसकर्मी प्राइवेट दुकान पर गाड़ी लेकर पहुंचते हैं। जहां पर गाड़ियों से तेल निकालाकर बेच दिया जाता है। इनमें थाने की गाड़ी से लेकर बंदी वाहन, गश्त की मोबाइल और पुलिस अफसरों की सरकारी गाड़ियां होती हैं। पुलिसकर्मियों की कालाबाजारी से पुलिस विभाग को हर महीने लाखों रुपये का चूना लगा रहा है। पुलिस के ड्राइवरों के साथ पुलिस लाइन के अधिकारी भी इस खेल में शामिल हैं। पुलिसकर्मियों के इस कारनामों को अमर उजाला ने कैमरे में कैद किया और उसकी वीडियो भी हमारे पास है।ऐसा करते हैं खेल
रोजाना सुबह सात बजे से पुलिस लाइन स्थित पेट्रोल पंप से ड्राइवर सरकारी गाड़ियों में तेल लेकर मवाना बस स्टैंड समेत शहर के अलग अलग पांच जगहों पर प्राइवेट दुकान पर पहुंचते हैं। मवाना बस स्टैंड के पास एक पेट्रोल पंप है। जिसके पीछे नगर निगम की दुकानें बनी हुई है, जोकिराये पर दी हुई है। पुलिसकर्मी सरकारी गाड़ी दुकान पर लाते हैं, जिसको देखते ही दुकानदार तेल की केन और पाइप लेकर आता है। पुलिसकर्मी दुकान के बाहर पड़ी कुर्सी पर बैठता है और दुकानदार सरकारी गाड़ी से तेल निकाल लेता है। उसके बाद पुलिसकर्मी गाड़ी को फिर पुलिस लाइन में लाकर खड़ी कर देता है। दिनभर शहर की कई दुकानों पर एक के बाद एक पुलिस विभाग की सरकारी गाड़ियां आकर तेल देती हैं।

माफ कर दो, गलती हो गई
अमर उजाला टीम ने गाड़ी से तेल निकालने का खेल अपने कैमरे में कैद किया तो वहां अफरातफरी मच गई। दुकान पर काम करने वाले बच्चों ने आनन-फानन में पुलिस की गाड़ी से पाइप निकाला और तेल से भरी केन को लेकर दुकान में रखने लगे। जबकि पुलिसकर्मी हाथ जोड़कर माफी मांगने लगा। पुलिसकर्मी बोला कि गलती हो गई माफ कर दो। पुलिसकर्मी खुद ही बताने लगा कि पुलिस के सभी ड्राइवर तेल बेचते हैं।

ऑफिस में बैठे पुलिसकर्मी भी शामिल
इस कालाबाजारी में केवल पुलिस ड्राइवर ही नहीं, बल्कि पुलिस लाइन में ऑफिस में तैनात पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। ऑफिस के पुलिसकर्मी से सेटिंग के बगैर इतनी बड़ी काला बाजारी संभव नहीं। ऑफिस के पुलिसकर्मियों से जब इस संबंध में बात की तो उन्होंने कहा कि ड्राइवरों नेे तेल चोरी के स्टिंग के बारे में उनको बताया है। इससे साफ हो गया कि ऑफिस के पुलिसकर्मी भी इस काला बाजारी में शामिल हैं। पुलिस ड्राइवर ने ऑफिस के पुलिसकर्मियों से साफ कहा कि अगर वो फंसा तो वह सबका नाम उजागर कर देगा।

मेट्रो ट्रेन पर काम से पहले बनाएं यातायात व्यवस्था

शहर में मेट्रो ट्रेन का काम शुरू करने से पहले शासन ने यातायात व्यवस्था बनाने के लिए योजना तैयार करने को कहा है। साथ ही पूछा है कि ऐसी कौन सी तीन कनेक्टिंग रोड हैं जिन पर ट्रैफिक कंट्रोल होना चाहिए। उधर यहां इस बाबत ब्लू प्रिंट तैयार किया जा रहा है। इस बाबत शासन को भी सूचना प्रेषित करने की तैयारी है।

सीएम अखिलेश यादव का मेट्रो ट्रेन ड्रीम प्रोजेक्ट है। लखनऊ में काम शुरू हो चुका है तो मेरठ की डीपीआर प्रदेश सरकार को भेजी जा चुकी है। मुख्य सचिव इसे हरी झंडी भी दे चुके हैं। कवायद यह है कि इस साल यहां काम शुरू हो जाए। इसके दो कॉरिडोर बनाए गए हैं। पहला कॉरिडोर परतापुर से पल्लवपुरम तक है। दूसरा कॉरिडोर श्रद्धापुरी से गोकलपुर तक है। एक कॉरिडोर एलीवेटिड है तो दूसरा अंडर ग्राउंड।व्यवस्था बनाना आसान नहीं
दिल्ली रोड का जाम किसी से छिपा नहीं है। कॉरिडोर एक का बड़ा भाग भी इसी रोड पर है। यहां कहीं एलीवेटिड तो कहीं अंडर ग्राउंड मेट्रो दौड़ेगी। भैंसाली अड्डे केसामने रोज जाम लगता है। ऐसे में जब यहां काम शुरू होगा तो क्या हाल होगा? कही सड़क के  ऊपर ट्रैक जाएगा तो कहीं सड़क के नीचे खुदाई होगी। पूरी टनल बिछाई जाएगी। ऐसे में पूरी तरह से ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। हजारों लोग यहां से दिल्ली तक का सफर तय करते हैं। वे कैसे दिल्ली तक का सफर तय कर सकेंगे।

टर्न पर फिर होगी गड़बड़ी
बेगमपुल होते हुए मेट्रोमेडिकल की तरफ जाएगी तो गढ़ रोड पर भी हाल बुरा होगा। बेगमपुल पर तो वैसे ही जंक्शन है। यहां दोनों कॉरिडोर मिलेंगे। ऐसे में यहां व्यवस्था बनाना चुनौती होगा। गढ़ रोड पर एलीवेटिड ट्रैक रहेगा पर काम शुरू होते ही उस रोड पर भी व्यवस्थाएं पूरी तरह से ध्वस्त हो जाएगी।

शासन ने कहा रोड करो चिह्नित
हालांकि एमडीए इस प्लान पर पहले ही काम कर रहा था पर अब प्रदेश सरकार ने कहा है कि इस बाबत ब्लू प्रिंट तैयार करो। कैसे यातायात व्यवस्था बनाई जाएगी। वहीं यहां प्लान यह है कि  दिल्ली से आने वाले ट्रैफिक को मोदीनगर के पास से डायवर्ट किया जाएगा। हापुड़ रोड पर यहां खरखौदा में रोड दिल्ली रोड को मिला रही है। जोर रहेगा कि उधर जाने वाला ट्रैफिक वहीं से डायवर्ट हो। मोदीनगर से बागपत रोड की तरफ जाने वाले रूट को पहले ही गंगनहर की पटरी से गुजारने का प्लान है। इंटरनल ट्रैफिक प्लान पर भी काम शुरू करने की बात कही जा रही है। हालांकि इस पर बड़ी मशक्कत अभी बाकी है। गंगनहर मार्ग बनाने के लिए पीडब्लूडी ने शासन को रिपोर्ट भेजी है। साथ ही पांच हजार पेड़ काटने का प्रस्ताव भी भेजा है।

बनानी होगी ये सड़कें
इनर रिंग रोड बनानी होगी। यह एकमात्र ऐसी रोड है जो इस समस्या के निदान के लिए सबसे बड़ा काम करेगी। सुपरटेक चौराहा से यह रोड हापुड़ रोड, वहां से बिजनौर रोड को मिला रही है। इधर दिल्ली बाईपास को मिला रही है। दूसरे चरण में बिजनौर रोड से घूमकर इसे फिर से रुड़की रोड से मिलाने का प्रस्ताव है। इस सड़क को बनाकर ही यहां ट्रैफिक व्यवस्था को थोड़ा कंट्रोल किया जा सकेगा।

परतापुर की महायोजना रोड
परतापुर में प्रवेश के बाद हवाई पट्टी को जाने वाली रोड बिजली बंबा बाईपास से मिलना प्रस्तावित है। लेकिन यहां लगभग पांच सौ मीटर हिस्से पर अवैध टाउनशिप डेवलेप हो गई है। यह रोड  बनानी होगी। तभी ट्रैफिक बिजली बंबा चौकी होते हुए शहर में प्रवेश कर सकेगा।

जुर्रानपुर फाटक
यहां रेलवे ने तो हवा में पुल बना दिया है पर इसका अभी पूर्ण निर्माण होना है।हवा में लटके पुल को सड़क से जोड़ना होगा। जमीन लेकर दोनों तरफ मार्ग बनाकर इसे जोड़ना होगा। इस साल हर हाल में ओवरब्रिज बनाना ही होगा। यदि महायोजना की सड़क बन भी गई और यह पुल नहीं बना तो यहां जाम की समस्या होगी, जिससे पार पाना टेढी खीर साबित होगा। किसानों से यहां इस बाबत लगातार प्रयास किया जा रहा है।

कुख्यात मोनू को समाज के ठेकेदार देते पनाह

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस PC: अमर उजाला

दंपति की हत्या में पुलिस की घोर लापरवाही सामने आई है। पुलिस कस्टडी से अंजू शर्मा के भागने के बाद पुलिस ने कुख्यात मोनू की तलाश बंद कर दी थी। जिसके चलते मोनू ने दोबारा से रोहटा में आतंक मचाना शुरू कर दिया है। पुलिस की कमजोरी का फायदा उठाकर मोनू ने दिनदहाड़े डबल मर्डर को अंजाम देकर फिर से सनसनी फैला दी है।

रंगदारी न देने पर दंपति की सरेआम हत्या पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया तो मौके पर पहुंचे एसएसपी जे. रविंदर गौड़ ने ग्रामीणों से कहा कि मोनू जाट को समाज का ठेकेदार बताने वाले कुछ लोग पनाह देते हैं। पुलिस कस्टडी से अंजू शर्मा के भागने पर समाज के उक्त ठेकेदारों ने रोहटा थाने में बवाल काटा था। वह सभी लोग पुलिस ने चिन्हित कर लिए हैं। उनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की जाएगी। अंजू शर्मा को पुलिस ने इसलिए उठाया था कि उस पर मोनू को खाना भेजने का आरोप लगा था। पुलिस मोनू तक पहुंचने ही वाली थी कि यह बखेड़ा कर समाज के ठेकेदारों ने बवाल कर दिया था। पुलिस के खिलाफ अपहरण का केस दर्ज करना पड़ा। थाने में तैनात सिपाहियों को हटाना पड़ा।आखिर कब पकड़ा जाएगा मोनू
दंपति की मौत पर गुस्साए कुछ लोगों ने एसएसपी से कहा कि साहब आप कुख्यात मोनू को गिरफ्तार करो। हम सब लोग आपको सहयोग करेंगे। एसएसपी ने आश्वासन दिया कि कुख्यात मोनू जल्द पकड़ा जाएगा। पुलिस की एक टीम उसकी तलाश में लगाई गई है।

गांव में दहशत का माहौल
दंपति की हत्या के बाद रोहटा गांव में दहशत का माहौल है। लोगों का कहना है कि मोनू ने गांव में करीब 20 लोगों से रंगदारी मांगी हुई है। जिसमें कुछ लोगों ने गुपचुप तरीके से पैसा दे दिया है। जबकि कुछ लोग दहशत में हैं कि आखिर वो करें तो क्या। पुलिस ने लोगों से कहा कि रंगदारी मत देना। गांव में पुलिस का पहरा होगा। मोनू गिरफ्तार हो जाएगा।

…तो बच जाती जान
डबल मर्डर के बाद जब सैकड़ों ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो रोहटा पुलिस के देरी पर पहुंचने पर उनका सब्र जवाब दे गया। ग्रामीणों ने पुलिस को घेरकर खरीखोटी सुनाते हुए कहा कि पुलिस अगर शीशपाल की शिकायत पर गंभीर हो जाती तो उसकी जान बच सकती थी। कुख्यात मोनू लगातार शीशपाल के परिवार को धमकी दे रहा था कि अगर रंगदारी नहीं दी तो वह उनको मार देगा। वारदात के करीब ढाई घंटे बाद एसएसपी मौका-ए-वारदात पर पहुंचे तो ग्रामीणों ने उनसे रोहटा पुलिस की शिकायत की। एसएसपी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि तीन दिन में मोनू जाट को गिरफ्तार कर लेंगे। उसके बाद ही ग्रामीण शांत हुए।

पहले पति अब सास-ससुर का साथ छूटा

शीशपाल और संतोष की दिनदहाड़े हत्या से परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। तीन साल पहले पति खोने वाली सीमा का सास-ससुर से भी साथ छूट गया। पोता-पोती रोते हुए बोले कि अब हमारी परवरिश कैसे होगी। परिवार में कोहराम मचा है तो गांव में मातम छाया हुआ है। ग्रामीणों ने पुलिस के प्रति आक्रोश जताते हुए बाजार बंद रखा।

तीन साल पहले शीशपाल का परिवार खुशी से जीवन काट रहा था। शीशपाल खेतीबाड़ी करता था तो उसका इकलौता बेटे कपिल मोदी शहर में मेट्रो प्लाजा में शेयर ब्रोकर का ऑफिस चलाता था। तीन साल पहले अचानक कपिल को ब्रेन हेमरेज हुआ और उसकी मौत हो गई। कपिल के परिवार में पत्नी सीमा के अलावा नौ साल का बेटा मानव उर्फ मानू और छह साल की बेटी सीमोन हैं।
बेटे की मौत के बाद परिवार पर संकट पैदा हुआ। लेकिन शीशपाल और संतोष ने परिवार को टूटने नहीं दिया। कलेजे पर पत्थर रखकर अपनी पुत्रवधू और पोता-पोती की परवरिश में जुट गए। परिवार इस दु:ख से कुछ बाहर निकला ही था कि बृहस्पतिवार को फिर इस परिवार पर कहर टूट गया। कुख्यात मोनू जाट ने रंगदारी न देने पर असहाय दंपति की गोली मारकर हत्या कर दी। चर्चा यह भी है कि कुख्यात मोनू के चचेरे भाई ने कपिल के शेयर ब्रोकर में दस लाख रुपये लगाए थे, जिसको मोनू मांगता था। दंपति कहता था कि कपिल के साथ उसके पैसे भी चले गए।सीमा के सामने बड़ी चुनौती
पहले पति और अब सास ससुर की मौत के बाद मासूम बच्चों की परवरिश करना सीमा के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। उसका रो रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग सीमा को ढांढस बंधाने में लगे हैं। लेकिन वह कभी पति तो कभी सास-ससुरा को याद कर बेहोश हो जाती है। रोती हुई कहती कि अब वह किसके सहारे जिंदगी कटेगी। कौन देखेगा उसके मासूम बच्चों को।

मम्मी! हमें कौन ले जाएगा स्कूल
मानव कक्षा तीन और सीमोन कक्षा एक में पढ़ती है। रोजाना उनकी दादी संतोष ही स्कूल लेकर जाती और वही उन्हें लेकर आती थी। दादा शीशपाल भी बच्चों को बहुत प्यार करते थे। दादा-दादी की मौत का पता चला तो दोनों बच्चे अपनी मम्मी से पूछ रहे हैं कि अब कौन उनको स्कूल लेकर जाएगा। यह सुनकर मां सीमा ही नहीं, बल्कि परिवार के अन्य लोग भी आंसू नहीं रोक पाए। इन मासूम और बेबस बच्चों को कोई जवाब नहीं दे पाया।

पहले पति और फिर पत्नी को मारा
पुलिस के मुताबिक चश्मदीद कंवरपाल सिंह ने बताया कि उसका भाई शीशपाल बुग्गी पर बैठा था। वह कई दिनों से बीमार चल रहे थे। शीशपाल की पत्नी संतोष चारा काट रही थी। मोनू व उसके साथियों ने पहले शीशपाल फिर संतोष को गोली मारी। गोलियां बरसाने के बाद देखा भी कि कहीं दंपति जिंदा तो नहीं बच गया। शीशपाल की सांस चलती देख मोनू ने उसके सिर से सटाकर एक ओर गोली मारी। संतोष के सिर पर भी गोली लगी है।

दोहरे हत्याकांड के बाद बाजार बंद
शीशपाल और संतोष की हत्या की खबर फैली तो गांव का बाजार बंद होता चला गया। बदमाशों की दहशत के चलते देखते ही देखते कुछ ही समय में बाजार में सन्नाटा पसर गया और गांव की गलियां सुनसान हो गईं।

चार लोगों को पहले मार चुका मोनू
मोनू और भरतू नाई का रोहटा इलाके में गैंग बना हुआ है। भरतू नाई फिलहाल जेल में है। मोनू लोगों से रंगदारी मांगता है। विरोध करने पर हत्या कर देता है। दंपति के अलावा पहले भी रंगदारी न देने पर मोनू चार लोगों की हत्या कर चुका है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद पुलिस गंभीर नहीं है। पुलिस जानकारी के बावजूद भी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

रंगदारी न देने पर कुख्यात ने दंपति को गोलियों से भूना

रोहटा गांव में बृहस्पतिवार सुबह डबल मर्डर से सनसनी फैल गई। कुख्यात मोनू जाट ने दो लाख रुपये की रंगदारी न देने पर दंपति को गोलियों से भून डाला। सूचना मिलने के एक घंटा बाद पुलिस पहुंची तो ग्रामीणों ने जमकर हंगामा काटा। एसएसपी ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को शांत किया। तभी शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए।

रोहटा गांव निवासी शीशपाल (58) पुत्र चतर सिंह किसान था। तीन साल पहले शीशपाल के इकलौते बेटे कपिल की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। शीशपाल के कंधों पर विधवा पुत्रवधू सीमा व पोते-पोती की जिम्मेदारी थी। शीशपाल से कुख्यात अमित उर्फ मोनू जाट ने दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी। उसने यह शिकायत रोहटा थाने में की थी। लेकिन पुलिस ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
बृहस्पतिवार सुबह 8:30 बजे शीशपाल पत्नी संतोष (55) के साथ खेत पर चारा लेने गया था। शीशपाल का भाई कंवरपाल सिंह भी साथ था। दंपति चारा काटने लगा तो कंवरपाल अपना ईख का खेत देखने लगा। तभी कुख्यात मोनू अपने दो साथियों के साथ दंपति के पास पहुंचा। बदमाशों ने रंगदारी न देने पर शीशपाल पर गोलियां बरसा दीं। यह देख संतोष बदमाशों पर टूटी तो बदमाशों ने उसे भी गोलियों से भून दिया। शीशपाल को पांच गोलियां मारी गईं। दंपति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। गोलियों की आवाज सुन कंवरपाल वहां पहुंचा तो बदमाशों ने उस पर भी गोलियां चला दीं। हालांकि कंवरपाल बाल-बाल बच गया।पुलिस को जमकर सुनाई खरीखोटी
दंपति की हत्या की जानकारी लगते ही ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। एक घंटे बाद रोहटा थाने की पुलिस पहुंची। ग्रामीणों ने पुलिस को जमकर खरीखोटी सुनाई। ग्रामीणों का आरोप है कि रोहटा पुलिस अगर शीशपाल की शिकायत पर गंभीर हो जाती तो उसकी जान बच सकती थी। कुख्यात मोनू लगातार शीशपाल के परिवार को धमकी दे रहा था कि अगर रंगदारी नहीं दी तो वह उनको मार देगा।

एसएसपी पहुंचे तो उठे शव
ग्रामीणों के आक्रोश को देखकर पुलिस की हिम्मत शवों का पंचनामा भरने और पोस्टमार्टम के लिए भेजने की नहीं हुई। डबल मर्डर और हंगामे की सूचना पर जानी, सरूरपुर, कंकरखेड़ा, समेत कई थानों की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। करीब 11 बजे एसएसपी जे. रविंदर गौड़ मौके पर पहुंचे। एसएसपी ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि तीन दिन में आरोपी मोनू जाट को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। तभी ग्रामीण शांत हुए और शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए। कंवरपाल की तहरीर पर मोनू जाट और उसके साथियों पर केस दर्ज हुआ। तहरीर में मोनू के अलावा शिव कुमार पुत्र ब्रह्म सिंह, पवन पुत्र राजवीर, यशपाल पुत्र धर्मवीर, रतन पुत्र बारू को हत्या का षड्यंत्र रचने में नामजद किया गया है।

Shakespeare-famed phrases were not his?

Did you have any idea that Shakespearean phrase like “it’s all Greek to me” from Julius Ceaser was actually not given by William Shakespeare?

A leading scholar David McInnis recently claimed that Shakespeare did not come up with most of the famous phrases in his plays but was credited with them because of a fault with the Oxford English dictionary, reports the Daily Mail.

Dr David McInnis said that internet searches reveal usage of many such phrases before the play was written.

McInnis, a lecturer in Shakespeare Studies in Australia, argued that it is actually the Oxford English Dictionary (OED) that has attributed the phrases to Shakespeare, but it is ‘biased’.

He explained how the OED contains quotations when defining words and when looking for these, it ‘preferred literary examples, and famous ones at that.’

“The Complete Works of Shakespeare was frequently raided for early examples of word use, even though words or phrases might have been used earlier, by less famous or less literary people,” he wrote in the University of Melbourne magazine.

As a result more than 33,000 Shakespeare quotations have been found in the OED, including 1,500 listed as the first time a word was used, and 7,500 examples of it being the first evidence of usage.

“A wild goose chase,” is credited as first appearing in ‘Romeo and Juliet’ by the OED, but it had appeared at least six times in English poet Gervase Markham’s book about horsemanship a few years earlier in 1593.

“Eaten out of house and home” is thought to first appear in ‘Henry IV’ part two, written in the 1590s, but examples from as early as 1578 have been found.

He did still invent most of his famous quotations, including “to make an ass of oneself,” however, he would have risked alienating his audience if he had invented too many phrases and words.

“His audiences had to understand at least the gist of what he meant, so his words were mostly in circulation already or were logical combinations of pre-existing concepts,” wrote McInnis.

“He invented some; more usually he came up with the most memorable combinations or uses; and frequently we can find earlier uses that the Oxford English Dictionary simply hasn’t cited yet,” he added.

‘Modern startups solve real problems’

The desire to change the world drives successful entrepreneurs. They are the ones who love the journey more than the destination. Capturing the reality behind the balloon of ‘Startup India’, wants the world to read his latest book ‘Tip of the Iceberg’ and believes, “Anyone thinking of setting up their own company or in any way interested in the start-up revolution sweeping the country should read my book to know the reality and the romance of it, to know what it really takes. At times it is extremely rewarding, but not always.”

A journalist for about 21 years, Suveen Sinha discusses all you would ever want to know about !

While others believe that the era of startups is about to end, but you say that it is just the tip of an iceberg.

One and a half to two years ago, a lot of people in India wanted to be Steve Jobs. So I started meeting Indian entrepreneurs to see if they had gone through the kind of ordeals Jobs had faced, or if they had it in them to survive those ordeals. After all, being an entrepreneur entails constantly worrying about money, sacrificing your personal life, and the responsibility of other people’s lives and families.

went to Tihar, Vijay Shekhar Sharma used to go back to his house only in the dead of the night to avoid the landlord, scraped plastic off things at a factory for Rs 6,550 a month, Phanindra Sama had to take refuge in Vipassana, Mu Sigma founder went to a dinner on a day he had three of his wisdom teeth taken out because he did not want to miss the deal. I found fascinating stories of bleak struggle, abysmal failure, and astounding success.

All the people I mentioned bounced back. They are made of stern stuff. What’s more, they have the confidence and swagger of someone who faced adversity before and came out triumphant. They look at the current lean times as a blip. They will come back.

What triggered the era startups and what is driving the force?

The modern startups, the prominent ones anyway, are borne out of a clear need. They solve real problems. The e-commerce guys provide access to people in big cities and small towns. Ask the mother of a newborn how big a difference it makes to have diapers delivered to your doorstep. What if you want to buy a dress but are too busy on weekdays and too sane to brave the weekend traffic to go to , or to take a train from Ambala to Delhi? Isn’t it a blessing to just order online and have clothes, food, medicine, plumbers, carpenters, and electricians come to you? Then there are the ride-hailing apps. In a country where public transport sucks, these are a real blessing. It is this need for a solution that gave birth to the start-ups, drives them, and will drive them always.

So, everyone produces something and is a consumer to everything?

I doubt that. Most of today’s start-ups are not about production, they are about distribution, delivery, and access. They are facilitators. Uber is the world’s largest transport company but does not manufacture cars, it just brings them to you quickly, efficiently, and cheaply. So I guess currency will remain current, even if it morphs at some point into a digital one such as a mobile wallet or even bitcoin.

Startups also need capital. What about people who want to do something but have fewer funds to invest?

The true entrepreneur is driven by her desire to change the status quo, solve a problem, or give shape to her ideas. She does not care much about money. In my book, you will find many instances of people who built great companies despite dealing with an acute shortage of money. Some, in fact, turned their back on money from their salaried jobs to build their own companies. If you are doing something meaningful, if you are solving a real problem, money will come. It’s like what Rancho says in 3 Idiots, chase excellence and money will chase you.

Please suggest few pointers that people need to keep in mind before starting their own business.

1. Do not do it if you do not believe in it.

2. Do not do it for the money.

3. Do not do it for the glamour.

4. Do it because, deep down in your heart, you know you just have to do it, because you know how to do it, and that knowledge is too much to hide inside you.

5. Do it for the love of it. Only then will you be able to cope with the realities of being an entrepreneur, which is very different from billion dollar valuations and being a media celebrity.

When biggest online players end in bankruptcy, what is the way forward for people who aim to base their business on the internet?

The biggest online players may or may not end in bankruptcy. The big ones in India are still doing reasonably well. That is why funding continues to flow in, as seen in the recent infusion in and Hike Messenger at very good valuations. The ones to fall on bad times are those that that burning cash was the best way. Some of them were not by real entrepreneurs. Dhiraj Rajaram of Mu Sigma, one of the heroes in the book, says there is a love marriage entrepreneur and there is an arranged marriage entrepreneur. The love marriage one falls in love with an idea and just has to do it. The arranged marriage one decides to be an entrepreneur and then looks for what to do. The latter ones often find it more difficult, especially if they do it at the behest of overseas fund houses or incubators.

Meditation or vacation? Here’s what is better

Researchers have been using a rigorous study design to assess the biological impact of meditation as compared to going on a vacation.

Examining the effect of meditation on gene expression patterns in both novice and regular meditators, they found that a resort vacation provides a strong and immediate impact on molecular networks associated with stress and immune pathways, in addition to short- term improvements in well-being, as measured by feelings of vitality and distress.

A meditation retreat for those, who already used meditation regularly, was associated with molecular networks characterized by antiviral activity.

The molecular signature of long-term meditators was distinct from the non-meditating vacationers.

The study involved 94 healthy women, aged 30-60. Sixty-four women were recruited who were not regular meditators.

Participants stayed at the same resort in California for six days, and randomized so that half were simply on vacation while the other half joined a meditation training program for Well Being.

The meditation program included training in mantra meditation, yoga, and self reflection exercises.

For greater insight into the long-term effects of what scientists dubbed the “meditation effect” compared to the “vacation effect,” the team also studied a group of 30 experienced meditators who were already enrolled in the retreat that week.

Researchers collected blood samples, and surveys, from all participants immediately before and after their stay, as well as surveys one month and ten months later.

Eric Schadt, the senior author said, “In the spirit of other research efforts we have pioneered with other groups, this work underscores the importance of studies focused on healthy people. By combining an interrogation of gene networks with advanced data analysis and statistics, we have generated clinically meaningful information about stress and aging that is relevant to the broader population.”

The research team examined the changes in 20,000 genes to determine which types of genes were changing before and after the resort experience.

Scientists performed an integrative transcriptomic analysis, comparing gene expression networks across all three groups of participants and finding unique molecular profiles and pathway enrichment patterns.

Study results show that all groups, novice meditators, experienced meditators, and vacationers had significant changes in molecular network patterns after the week at the resort, with a clear signature distinguishing baseline from post-vacation biology.

The most notable changes in gene activity were related to stress response and immune function.

Researchers also assessed self-reported measures of well being.

While all groups showed improvements up to one month later, the novice meditators had fewer symptoms of depression and less stress much longer than the non-meditating vacationers.