Impacting Lives of Beginners: Mrs. Neena Bhatia, Principal ABC Public School

Impacting Lives of Beginners: Mrs. Neena Bhatia, Principal ABC Public School

  Who was your inspiration in Childhood ? My father was my inspiration in Childhood. He always preached us that luck sure comes at the door and knocks too but your efforts More »

Top of the Town: Ravindra Bhadana, MLA  Indian politician and a member of the 16th Legislative Assembly of Uttar Pradesh of India

Top of the Town: Ravindra Bhadana, MLA Indian politician and a member of the 16th Legislative Assembly of Uttar Pradesh of India

1. आपका बचपन में प्रेरणा स्त्रोत कौन था? मेरे पूज्य बाबाजी स्वर्गीय श्री रामसिंह जी । जो एक कृषक थे, एक सामाजिक व्यक्ति थे। उन्होंने जिंदगी में मुझे जीना सीखाया। प्ररेणा भी More »

Top of the Town: Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd.

Top of the Town: Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd.

Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd. with 300+ Centers all across India Who was your inspiration in Childhood ? My mother and father were my source More »

Top of the town: Dr. Mohini Lamba, Director in American Kids Play School, Early Childhood Curriculum Developer, Montessori Teachers Trainer

Top of the town: Dr. Mohini Lamba, Director in American Kids Play School, Early Childhood Curriculum Developer, Montessori Teachers Trainer

Who was your inspiration in Childhood ? My inspiration was my family. I was surrounded by educators in my family. Ma Nanaji, Mamaji, my mother everybody was into academics. My Mamaji was More »

Top of the Town: Mrs. Monika Kohli, 52 years young model and actor, into print ads, T.V. commercials and movies

Top of the Town: Mrs. Monika Kohli, 52 years young model and actor, into print ads, T.V. commercials and movies

Who was your inspiration in Childhood ? I always believed that inspiration is from inside and not from outside. Only you can inspire yourself. Outward inspirations are momentary and do not stay More »

Top of the town: Respected Rajendra Aggarwal, MP

Top of the town: Respected Rajendra Aggarwal, MP

  Who was your inspiration in Childhood ? My dad and my uncle were my inspiration in my childhood. Both of them were associated with RSS. They inspired me to join RSS More »

Top of the town: Dr. Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker

Top of the town: Dr. Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker

Dr.Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker Who was your inspiration in Childhood ? My mother was my inspiration in my childhood and she is still my inspiration. My brother had also More »

Top of the town: Mr. Rakesh Kohli, Chairman, Stag International known for sporting goods in different countries of the world.

Top of the town: Mr. Rakesh Kohli, Chairman, Stag International known for sporting goods in different countries of the world.

Who was your inspiration in Childhood ? My grandfather was my biggest inspiration. I had learnt the minutest details of life from him. I learnt a lot from him about business. Like More »

Top of the town: Mr. Prem Mehta, Principal City Vocational Public School

Top of the town: Mr. Prem Mehta, Principal City Vocational Public School

Who was your inspiration in Childhood ? I think in my childhood it was the national leaders like Gandhi ji and Nehru ji who inspired me the most because our exposure at More »

Top of the town: Dr. Mamta Varshney, Lecturer and Poetess

Top of the town: Dr. Mamta Varshney, Lecturer and Poetess

Who was your inspiration in Childhood? Radio was my source of inspiration as I used to listen to loads of music and radio and tape recorder were the only source to listen More »

 

मेरठ मंडलायुक्त श्री आलोक सिन्हा एवं प्रीति सिन्हा की प्रेरणा से मेरा शहर मेरी पहल की गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने हेतु पेटिंग प्रतियोगिता


नागरिकों के स्वस्थ्य मानसिक विकास तथा आये दिन होने वाले अपराधों में कमी लाने अपराधियों की सोच में सुधार क्राईम की गति कम करने और नगर के सुनियोजित विकास और सौन्दर्यकरण तथा अच्छी सोच का विस्तार आम आदमी में हो इन पवित्र उद्ेश्यों को लेकर हर दिल अजीज मेरठ मंडलायुक्त श्री आलोक सिन्हा एवं श्रीमति प्रीति सिन्हा द्वारा पूर्व डीएम श्री पंकज यादव और एमडीए के पूर्व वीसी श्री राजेश यादव एवं विद्या प्रकाशन, विद्या नाॅलिज पार्क के चेयरमेन श्री प्रदीप जैन आदि के सहयोग मेरा शहर मेरी पहल संस्था के बैनर पर जो सदअभियान शुरू करवाया उसकी चारों तरफ प्रसंशा एवं सराहनाह हो रही है पूर्व में श्रीविशाल जैन, शांति निकेतन विद्या पीठ आदि के सहयोग से शहर में हुई दौड़, पतंगबाजी, कैरमबोर्ड आदि प्रतियोगिताओं ने आम आदमी को शहर के खुशहाली और विकास के लिए सोचने के लिए मजबूर किया।अब कमिश्नर मेरठ श्री आलोक सिन्हा की प्रेरणा से चाचा नेहरू के नाम से प्रसिद्ध देश के प्रथम प्रधान मंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू जी के जन्मदिवस 14 नवम्बर को शहर में डीएम बी. चंद्रकला की देखरेख में गिनीज बुक आॅफ रिकार्ड में नाम दर्ज कराने हेतु होने जा रही विश्व पेटिंग प्रतियोगिता की तैयारियां जोर शोर से चल रही है अभियान के क्वाडिनेटर श्री विशाल जैन की देखरेख में होने वाली तैयारियों के क्रम मे एमडीए वीसी श्री योगेन्द्र सिंह यादव के मिल रहे सराहनीय सहयोग तथा किरन प्रदीप, नीलीमा, अनीता राणा, इतिका, चंद्र लेखा जैन, ममता वाणेय, ऊषा किरन, प्रीती राणा, डाॅ नुपूर शर्मा, डाॅ पूजा गुप्ता, सोहिनी माइकल, डाॅ नीतू वशिष्ठ, डाॅ ज्योति कुमारी, पूजा शर्मा, सुरेन्द्र शर्मा, अमित नागर, जितेन्द्र परासर, रोहित गुर्जर, विपुल सिंहल, अमित नागर, अंकुश चैधरी, ठाकुर प्रतीश सिंह, महेन्द्र दास, योगेश जैन, मोहित जैन आदि के प्रयासों से पेटिंग प्रतियोगिता अभूर्तपूर्व सफल होगी यह लगता है। 14 नवम्बर को प्रांत 8 बजें से जेल चुंगी से यूनिवर्सिटी रोड पर 1300 मीटर लम्बी पेटिंग बनाने के काम में भाग लेने हेतु लगभग 2700 फार्म अभी तक भरें जा चुके है। उक्त जानकारी देते हुए श्री विशाल जैन का कहना था की मेरठ सिटी पीपल आॅल मेरठ के नाम से आयोजित इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को एक गुडी बैग दिया जायेगा जिसमें टीशर्ट के साथ साथ कलर और ब्रश भी होगे।

स्मरण रहे की गत दिवस डीएम की बी. चंद्रकला की अध्यक्षता ओर संयोजक विशाल जैन के संचालन मे कचहरी स्थित बचत भवन में कई घंटे चली बैठक में जो निर्णय लिये गये वो इस प्रकार है।

मेरा शहर मेरी पहल की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि मेरा शहर मेरी पहल द्वारा कैनवास पर पेन्टिग प्रतियोगिता का आयोजन किसी एक व्यक्ति व संस्था का न होकर पूरे मेरठ शहर के नागरिक का अपना आयोजन है। इसके सफल आयोजन से मेरठ शहर की छवि पूरे देश में अच्छे तथा बौद्धिक नागरिकों के शहर के रूप में पहचान बनाना है। इसलिये उन्होनंे मेरठ के प्रत्येक नागरिक से अपील की है कि वह इस आयोजन में पूरे मनोयोग के साथ हिस्सा लें। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से मेरठ विश्व में अपनी एक नई पहचान स्थापित करेंगां।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी बी चन्द्रकला ने बताया कि 14 नवम्बर को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व0 जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है, उसी दिन मेरठ शहर एक विश्व रिकार्ड बनाने में अग्रसर है। उसदिन मेरठ में एक साथ 1300 मीटर के कैनवास पर पेन्टिग का आयोजन किया जा रहा है। इसके सफल आयोजन पर मेरठ का यह कार्यक्रम गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में शामिल हो जाएगा। क्योकि अब तक का पेंन्टिग विश्व रिकार्ड 959 मीटर का है।

बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि यह एक संगठित एवं सामूहिक प्रयास होगा। आयोजन के दिन 100-100 मीटर के 13 ब्लाॅक होंगे और शहर के 14 हाउसेस का इसमें चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दिन कार्यक्रम के रेखा चित्र मिलेंगे,जिसमें प्रतिभागियों को सिर्फ उसमें रंग भरना होगा। उन्होंने बताया कि इसमें प्रतिभागियों द्वारा 14 रंगो का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वल्र्ड रिकार्ड बनने पर जो सर्टिफिकेट दिया जाएगा उस पर सिर्फ पीपल आफ मेरठ मुद्रित होगा, अर्थात हर एक प्रतिभागी अपने घर में सजा सकेेगा।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए कार्यक्रम के संयोजक विशाल जैन का कहना कि इय कार्यक्रम में भाग लेने वाले प्रतिभागियों का आवेदन शुल्क 400 रखा गया है। जिसमें प्रतिभागियों को टी-सर्ट के साथ हुडडी बैग दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उक्त कार्यकम के लिये अब तक 1200 प्रतिभागियों द्वारा पंजीकरण कराया गया है। उन्होंने अपील की कि इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक प्रतिभाग करें।

इस अवसर पर जिलाधिकारी बी चन्द्रकला की अपील पर रोटरी क्लब ने 250, आन्नद हाॅस्पिटल ने 200, बींग पंन्टिग हाउस ने 130, श्री राम पैलेस कालोनी ने 50, कोमी एकता सदभाव सभा ने 100, एमसीएमआई ने 100, फर्टीलाइजर एसोसिऐशसन ने 50, विद्या नालेज पार्क ने 200 ममता वाष्र्णेय ने 25, सेन्ट जाॅनस स्कूल ने 50, कस्तूरबा गांधी स्कूल ने 10, अपार चैम्बर ने 10 तथा एस0के0 अग्रवाल द्वारा 50 ऐसे प्रतिभागियों का वित्तीय आयोजन करेंगे जिनके पास पंजीयन कराने के लिये पैसे नहीं होगे।

बैठक में अपर जिलाधिकारी प्रशासन दिनेश चन्द्र, अपर जिलाधिकारी नगर, उप जिलाधिकारी मेरठ हर्षिता माथुर, सरधना राकेश कुमार सिंह, एसीएम भूपेन्द्र कुमार, सन्तोष बहादुर, उप निदेशक सूचना नवल कान्त तिवारी के अलावा एस0के0 शर्मा, अमित नागर, अमित अग्रवाल, किरण प्रदीप, दीपिका गोयल, चन्द्रकला जैन, मोहित जैन, प्रदीप ठाकुर नायब शहर काजी जैनुराशिद्दीन, दुखहरण शर्मा आदि उपस्थित रहे।

भारत सरकार की केन्द्रीय राजभाषा समिति के सदस्य श्री संजय कुमार आॅनलाईन न्यूज चैनल ताजाखबर.काॅम के अंकित विश्नोई, कौमी एकता संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष संदीप गुप्ता ऐल्फा, रिश्तो का संसार के संचालन महेश शर्मा, दा अध्ययन स्कुल के प्रियाशु कुमार, आरकेबी फाउडेशन के अध्यक्ष रवि कुमार बिश्नोई, नागरिक सुरक्षा संगठन के चीफ वार्डन संदीप गोयल, अन्नपूर्णा चेरिटेबल हाॅस्पिटल के महामंत्री श्री ब्रजभुषण गुप्ता, रेड्रकांस सोसाइटी जिला शाखा के चेयरमेन अजय मितल, वरिष्ठ स्वंतत्र पत्रकार टाईम्स आॅफ इंडिया से जुड़े डाॅ संजय गुप्ता, विद्या नाॅलिज पार्क से विशाल जैन, सौरभ जेन, आदि ने नगर वासियों से इस आयोजन को सफल बनाने और इसमेें बढ़चढ़ कर भाग लेने तथा जिस प्रकार का भी सहयोग कर सकते है करने का आग्रह किया है।

News source : http://tazzakhabar.com

विश्व रिकॉर्ड के लिए पेंटिंग, १३०० मीटर के कैनवास पर होगी पेंटिंग

१४ नवंबर को मेरठ में १३०० मीटर के कैनवास पर होगी पेंटिंग

मेरठ : कलक्ट्रेट स्थित बचत भवन में मेरा शहर मेरी पहलज् की बैठक की अध्यक्षता करते हुए डीएम चंद्रकला ने कहा कि मेरी पहल द्वारा कैनवास पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किसी व्यक्ति या संस्था का न होकर पूरे शहर का है। अपील की कि हर नागरिक इसमें योगदान दे। डीएम ने कहा कि १४ नवंबर को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्व. जवाहर लाल नेहरू का जन्मदिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उसी दिन मेरठ शहर एक विश्व रिकॉर्ड बनाने में अग्रसर है। उस दिन मेरठ में एक साथ १३०० मीटर के कैनवास पर पेंटिंग का आयोजन किया जा रहा है। इसके सफल आयोजन पर मेरठ का यह कार्यक्रम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में शामिल हो जाएगा। क्योंकि अब तक का पेंटिंग विश्व रिकॉर्ड ९५९ मीटर का है। यह एक संगठित एवं सामूहिक प्रयास होगा। १००-१०० मीटर के १३ ब्लॉक होंगे और शहर के १४ हाउसेस का इसमें चयन किया गया। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दिन कार्यक्रम के रेखा चित्र मिलेंगे, जिसमें प्रतिभागियों को सिर्फ उसमें रंग भरना होगा। उन्होंने बताया कि इसमें प्रतिभागियों द्वारा १४ रंगों का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वल्र्ड रिकॉर्ड बनने पर जो सर्टिफिकेट दिया जाएगा उस पर सिर्फ पीपल ऑफ मेरठ मुद्रित होगा। यानि हर एक प्रतिभागी अपने घर में सजा सकेगा। संयोजक विशाल जैन ने बताया कि प्रतिभागियों के लिए आवेदन शुल्क ४०० रुपए रखा गया है। १इसमें प्रतिभागियों को टी-शर्ट के साथ हुड्डी बैग दिया जाएगा। बैठक में एडीएम प्रशासन दिनेश चंद्र, अपर जिलाधिकारी नगर, उप जिलाधिकारी हर्षिता माथुर, सरधना राकेश कुमार सिंह, एसीएम भूपेंद्र कुमार, संतोष बहादुर, उप निदेशक सूचना नवल कांत तिवारी, एसके शर्मा, अमित नागर, अमित अग्रवाल, किरण प्रदीप, दीपिका गोयल, चंद्रकला जैन, मोहित जैन, प्रदीप ठाकुर, नायब शहर काजी जैनुर राशिद्दीन, दुख हरण शर्मा आदि मौजूद रहे

Should I let her marry someone else?

Question: I am a 22-year-old man, have just completed my engineering and now, am awaiting my joining letter from a respectable IT company. I have been in a with a girl since past 4 years. We have had our share of ups and downs but lately, the problems have seriously increased. The misunderstandings are going to a whole new level and I am not able to take that. Differences have started creeping in. I her and she loves me more. But somehow since of months, things are not going fine. There is another aspect of my relationship too. She is and I am . However, we have come a long way together. All these years, we had a long-distance relationship and there was not a trust issue ever. My problem is that I don’t want to leave her, but now I am just not able to calm things down. We get aggressive over phone during our conversations. Her family is going through a tough time and all these things are making it worse for her. She is getting a lot of proposals and her parents are also not open-minded. Thus, we cannot break the news of our relationship. I need at least 2 years to settle down, but it seems that things aren’t in our favour, at least presently. Should I leave her over uncertainty of our future together, so that she can have a good life? On the other hand, my inner self doesn’t want me to leave her. She is my first love and I want her to be my last too. But with the things happening between us lately, I’ve started getting negative thought. Please guide me, sir.

Answer by Dr Samir Parikh: There are a number of issues that both of you are grappling with, in terms of your relationship, and it would be a good idea to address each of these concerns in their individuality, knowing what can and cannot be fixed. Fights over trivial matters often break out, when there are deeper concerns that are being ignored or postponed, as is probably happening in this case. Understandably, getting a job in a reputed company will still take a few years and is an uncertainty, such matters cannot yet be foreseen and therefore, need not be a reason to stay in or end the relationship in itself. However, concerns about the family and your girlfriend’s prospective marriage do need to be addressed more urgently. If you both are serious about getting married in the future, then delaying that conversation with your parents is no longer prudent – you both need to muster the courage to talk to your parents about this relationship and your plans for the future. It’s essential for you both to know whether getting married to each other is a possibility, and if yes, what the repercussions of that would be for both of you and your families. To stay in a relationship or not is as much about the present as it is about the future; given that you cannot predict what will happen two years down the line, there is still a lot you can do today to secure the future you want for yourselves.

​​​​​​​​​​​​​- Dr. Samir Parikh is a Consultant Psychiatrist with Fortis Healthcare

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‘Baby Doll’ Kanika Kapoor sparkles at Milan Fashion Week

Kanika Kapoor was recently spotted at the much-talked-about Milan Fashion Week.

Not only is she creating a lot of noise in the Indian music scene, but also stirring up the international fashion scene! Well, we are talking about none other than ‘Baby Doll’ singer Kanika Kapoor, who was recently spotted at the much-talked-about Milan Fashion Week.

In Milan to attend Roberto Cavalli, Versace and the Dolce and Gabbana opening, the diva was also spotted at Todd’s dinner party, looking like a million bucks.

Dressed to the nines, Kanika gave us some serious fashion goals, courtesy her impeccable outfits, but the pretty singer conquered us in her lovely Dabiri couture sari, worn for the Cavalli show.

What’s more, the singer was also seen hobnobbing with the likes of Gigi Hadid, Serene Williams and supermodel Anastassia Khozissova.

Image Courtesy: Kanika Kapoor’s Official Facebook page.

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DM Meerut Ma’am B. Chandrakala ji IAS : Veni Vidi Vici – I came, I saw and I conquered the heart of Meerut

Good Morning Meerut. We are only 50 days away from our Record… but are we ready… oh yes…Absolutely.. So let me update you about the single most worrying factor in our mind… and I am seriously concerned about you… all my friends who will miss the chance of being a part of this huge experience… oh.. you were so close… I told you about the count down to this larger than life experience…on 13th Sept… but I think you did not believe me… We required your participation and I kept requesting you to hurry… and fill your form… but I am sure you smiled and thought… “arey kaun 400 Rupya kharch karega painting karne mein… oh..How it will pain now…cause time and tide waits for none and Meerut DM Maam B. Chandrakala ji IAS… she does not waits for things to happen… She makes them happen… Last evening in Bachat Bhavan…She presided over a meeting with intellectuals, business class, artists and social activists… and in no time… we got 1500 registrations in 10 mins… and I witnessed wonderful collaboration… ok leave aside the numbers… best part of this session was that now kids who cant afford to pay registration fees will also get sponsorship from School Principals, Business community and many more… Our DM Maam has a magic wand and it creates some enchanting chords… She unites people with her simple voice… she is like light… she helps you find your way even in the darkest sections… and people follow her.. like we follow light… She leads and shows the way…. I just wish…all of you could join this leadership course with our elite class of Meerut…some magnificent men and women who destroyed record set by China… Its all right…you may not like to make the record but I am sure you would like to come and watch this record being made….on 14th Nonember..Cheers to Meerut…

One last fact I must share with you with respect to our DM Meerut… its only 10 days that she has taken over her role and responsibilities— we are already witnessing a significant change… I must quote words famous words of Julius Caesar from 47 BC… when he said…Veni..Vedi..Vici.. I came, I saw and I conquered….Thank You Ma’am B. Chandrakala Ji.

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Book Review: A Bridge Too Far

On this September day, over seven decades ago, a most audacious Allied operation, intended to wrap up the Second World War by 1944 itself, ended ignominiously with shattered remnants of their elite forces withdrawing or marching into captivity. With its ambitious, over-optimistic planning but sheer bravery on the ground, Operation Market Garden is possibly one of the war’s best-known episodes, mainly due to a big budget, multi-star Hollywood film, whose most incongruous bits are the truest, and an episode of a popular American TV series. Both owe their origin to books.

The operation aimed at capitalising the German forces’ disorganised retreat through western Europe in August-September 1944 to liberate Holland and secure a launching pad to invade Germany. Paratroopers would seize bridges on/near the Dutch-German border (“Market”), and ground forces link up with them (“Garden”).

But as its most famous account (and film) is named, it proved to be “A Bridge Too Far”, or rather “bridges too far”, despite the valour of the American 82nd and 101st Airborne Divisions, the British 1st Airborne Division and their glider and transport aircraft pilots. It was rather the hubris of the commanders and the planners that doomed the mission, in which everything which could go wrong did so unerringly.

How this happened is told in the first overall account — Irish journalist Cornelius Ryan’s “The Bridge Too Far” (1974).

Ryan, who achieved fame with his multi-perspective account of the Normandy landings in “The Longest Day” (1956), did the same for “Market Garden” in his last book. Taking seven years to research and write, it was published a few months before he lost his own battle to cancer.

Still the definitive work with American, British, Polish, Dutch and German viewpoints in it, Ryan, for the first time, also revealed less than complimentary views of former US President and Allied Supreme Commander Dwight D. Eisenhower on his temperamental subordinate, British Field Marshal Bernard Montgomery, as well as those of Prince Bernhard of The Netherlands.

The 1977 film version, directed by Richard Attenborough (who agreed to fund his own dream project “Gandhi”), mostly remained true to the book, from where some of its most famous dialogues are taken verbatim as well as dramatic events — a US soldier forcing a surgeon at gunpoint to check his apparently dead officer, for one.

However, using one statement out of context — as an unforgettable ending line, it painted the speaker, British First Airborne Corps commander Lt. Gen. Frederick ‘Boy’ Browning (husband of author Daphne Du Maurier) as a villain, or at least unconscionable. (He did make the remark, but at a conference before the operation.)

Browning was, however, guilty of neglecting information that strong German forces were near Arnhem and sending the officer concerned on medical leave (Brian Urquhart, then a major, subsequently went on to a glittering career in the UN, especially in Congo, where he convinced rebels to release him by warning Gurkha soldiers — whom they feared — would come after them if he was harmed).

Arnhem, the furthest objective with the “bridge that turned out to be too far”, has seen most leading British participants share their experiences. Prominent among these are the Division Commander, Maj. Gen. R.E. Urquhart (played by Sean Connery) in his frank but wry “Arnhem” (1958), or “A Drop Too Many” (1980) by then Lt. Col. John Frost, who reached the bridge with his 2nd battalion, was cut off but held on for four desperate days against superior forces.

Besides his account of the battle and as POW, Frost also recounts his experience of serving as an consultant to the film, his views of the actor playing him (Anthony Hopkins) and what he particularly disliked about the depiction of his exploits. He also tells us that he later found that his then German opponent, Heinz Harmel of the SS, also thought the same.

Then, there are British historian Middle Middlebrook’s “Arnhem 1944: The Airborne Battle” (1994), commissioned for the battle’s 50th anniversary, Chris Brown’s “Arnhem: Nine Days of Battle”, and ex-SAS director and the Attenborough film’s consultant, Col John Waddy’s “A Tour of the Arnhem Battlefields” (1999).

Robert Kershaw’s “It Never Snows in September: The German View of Market-Garden and the Battle of Arnhem, September 1944” (2007) gives a perspective from the other side.

Meanwhile, paratroopers of 101st Airborne can be seen in action in the fourth episode of Steven Spielberg and Tom Hanks’s 10-episode “Band of Brothers” (telecast 2001), based on American historian Stephen Ambrose’s 1992 book of the same name.

On the other hand, one entry in Miles Noonan’s collection of military anecdotes is telling. Two British paratroopers, trapped in a house, tell a padre who drops in that the Germans have thrown everything at them except “the kitchen sink”. Exactly then another shot hits the building which nearly disintegrates. When the dust clears, what the dumbfounded trio can see before them is precisely this object.

“I knew the bastards were close,” says one soldier, “But I didn’t realise they could hear every word I was saying.”

By Vikas Datta

केवी के शिक्षक टयूशन पढाए तो खैर नहींं

मेरठ- केंद्रीय विद्यालय के शिक्षकों के किसी तरह के को चिंग पढाने पर रोक है। संगठन के सहायक आयुक्त एकेडमिक्स यूएन खावरे ने पत्र जारी कर सभी प्रिंसिपल को ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षकों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। साथ ही कहा कि केंद्रीय विद्यालयों के शिक्षकों पर सरकारी नियम लागू होते हैं। उनके लिए ट्यूशन पढ़ाना सख्त मना है। अगर कोई शिक्षक ट्यूशन पढ़ाते मिला तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर ऐसा हुआ तो प्रिंसिपल और वाइस प्रिंसिपल को भी जिम्मेदार माना जाएगा। मेेरठ में केवी पंजाब लाइंस, केवी सिख लाइन और केवी डोगरा लाइन स्‍कूल है। जिसमें करीब 15 हजार बच्‍चे पढते हैं।

ट्यूशन है निजी व्यापार
केंद्रीय विद्यालय संगठन शिक्षक द्वारा ट्यूशन, कोचिंग पढ़ाने को निजी व्यापार मानता है। संगठन की ओर से नियम है कि केवी का कोई भी शिक्षक न ट्यूशन पढ़ाएगा न अपनी कोचिंग चलाएगा। यह निजी व्यापार है जो शिक्षक की गरिमा को शोभा नहीं देता। केवी के शिक्षकों द्वारा ट्यूशन पढ़ाने को केंद्रीय विद्यालय संगठन में घोर अनुशासनहीनता माना जाता है। ऐसे शिक्षकों पर तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत तबादला किया जाता है। साथ ही अन्य दंड के भी प्रावधान किए हैं।
क्‍लास में गंभीरता से पढाएं शिक्षक ; इसका रखेंं ख्‍याल
अगर किसी शिक्षक द्वारा ट्यूशन की शिकायत मिलती है प्रिंसिपल उस पर तुरंत कार्रवाई कर संगठन को सूचित करेंगे।
प्रिंसिपल, वाइस प्रिंसिपल कक्षा में जाकर छात्रों से ट्यूशन की जानकारी लेंगे।
शिक्षक अभिभावक बैठक में अभिभावकों से भी इसकी जानकारी ली जाएगी।
सेमेटिव असेसमेंट की परीक्षा के मूल्यांकन में प्रिंसिपल स्वयं मूल्यांकन प्रक्रिया की निगरानी करेंगे ताकि ट्यूशन पढ़ाने वाले शिक्षक अपने छात्रों को योग्यता से अधिक नंबर न दें।
प्रैक्टिकल व इंटरनल परीक्षाओं क ा मूल्यांकन भी पारदर्शी तरीके से पूरा किया जाए।
पेपर सेट करते वक्त पूरी गोपनीयता व संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाए।
स्कूल में नियुक्त करियर काउंसलर और मनोचिकित्सक छात्रों को गाइडेंस देंगे।
शिक्षक छात्रों से भेदभाव भरा व्यवहार करें तो उसकी जांच की जाए।
छात्रों की होमवर्क और क्लास की कॉपियां नियमित तौर पर चेक होंगी।

यूपी बोर्ड के स्‍टूडेंट़स चले सीबीएसई की ओर

– यूपी बोर्ड में कम हो रहे छात्र

-7 लाख 62 हजार छात्र कम हुए

मेरठ- यूपी बोर्ड  से शायद सीबीएसई की ओर छात्रों का पलायन हो रहा है। वर्ष 2017 के दसवीं और बारहवीं के बोर्ड परीक्षा के लिए हुए आनलाइन आवेदन में गत वर्ष से करीब आठ लाख्‍ा आवेेदन कम आए हैं। आनलाइन आवेदन की 22 सितंबर लास्‍ट डेट थी। जिसमें हाईस्‍कूल में 34 लाख चार हजार आठ सौ 53 आवेदन आए। जबक‍ि इंटर में 26 लाख 25 हजार छह सौ 80 स्‍टूडेंट़स ने आवेदन किए हैं। दोनाें को मिलाकर 60 लाख 59 हजार 533 छात्रों ने आवेदन किए हैं। पिछले साल 2016 में 68 लाख 21 चार सौ 95 छात्रों ने आवेदन‍ किया था। बोर्ड से जुडे अधिकारियोंं का कहना है कि आनलाइन आवेदन करने से फर्जी छात्रों पर रोक लगी है। इसलिए छात्रों में कमी दिख रही है। लेकिन छात्रों में कमी होने का एक बडा कारण अंग्रेजी मीडियम स्‍कूल हैं। जिस ओर तेजी से छात्रों का पलायन हो रहा है। मेरठ को उदाहरण के लिए लिया जा सकता है। हर साल यहां पर सीबीएसई स्‍कूलों की संख्‍या बढ रही हैैंं।जबकि हिंदी माध्‍यम के कम स्‍कूल खुल रहें हैं। 

The new wedding wows

Comfort food, involved grooms, mountain vows, sophisticated minimalism… getting married is a very personal affair these days

Head to the Mountains
Beach wedding fatigue has set in. “People are getting married in misty mountains, and combining it with treks and other activities,” says wedding planner Sonali Thakore. Manali and Leh are the new it destinations. “Mountains are romantic. Think rustic decor with curly willow branches, and wooden signboards, huge tents amid vibrant, wild flowers,” says wedding planner Ajay Modgil.

The involved groom
Bridezillas, take a break. The grooms are taking over. He’s the one planning all the fun activities. Says Raj Kashyap, 28, an investment banker from Florida, “I felt planning the wedding was the first step of my new life as a couple. I researched the look of our wedding and was involved with all the details.”
less drama, more warmth
The big, fat weddings will always be there. But many people are opting to go small. Sophisticated minimalism is their motto. Says wedding planner Candice Pereira, “The rise of minimalism is a result of a generation that cares about its surroundings. Nine-course lunches and dinners are being replaced by brunches or high tea with understated rather than loud decor.” Adds Modgil,
“Couples are also booking small, intimate venues. A simple mandap, extensive use of pastel colours, handmade floral decor are on the rise. There’s less drama, more warmth.”

Comfort food
There was a time when Michelin star chefs were creating customised menus at weddings. They still are. There’s a gradual move, though, towards comforting, traditional home food being served. Also, a lot of health-conscious people do not want to go off their diet. Says Chef Vivek Sagar, “We have observed a lot of people eat from home and come for weddings. Serving comforting, homespun food at weddings is the perfect answer. DIY food bars and bite-sized appetiser bars are also in.”

ENJOY your day
For most, their wedding day is a blur. It’s stressful and not-so-much-fun for the couple while everyone else has a ball. Not anymore. Couples are planning fuss-free weddings, where they are laidback and in a position to enjoy and soak in the moments. The mood is relaxed. The idea is to ease the pressure.

The first look & second outfit

The first time the bride and groom look at each other at the wedding has become a major event. And wedding planners are trying to make this moment memorable by giving the couple lessons in how to make it special. The next hot trend after the first look is the rise of the second outfit post the ceremony. Says Pereira, “Brides are changing their hair and makeup to change their look. Hair and makeup bars are coming up in the wedding area for the guests to quickly go and change their look.”

Gift of life

“I gave mini herbs and adenium plants as a thank you token to our guests. Plants make for great gifts. When they bloom or use our herbs, they’ll feel good and remember us.”

– Gunjan Mehra, 23

Couples are planning fuss-free weddings, where they are laidback and in a position to enjoy and soak in the moments.

60 करोड़ के अवैध कंस्ट्रक्शन पर सेल्स टैक्स की कार्रवाई

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वाणिज्य कर विभाग ने बीते दो दिन के दौरान शहर के अंदर करीब 68 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी के मामले पकड़े हैं, जिसमें से 60 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी अकेले द्वारिका धाम कंस्ट्रक्शन से पकड़ा गया है। सेल्स टैक्स विभाग की तरफ से स्पेशल इंवेस्टिगेशन ब्रांच (एसआईबी) की तरफ से की गई छानबीन कंस्ट्रक्शन के पीछे का काला चिट्टा निकल कर सामने आया है। इसके अलावा बालाजी एग्रो फूड्स लिमिटेड के यहां पर भी करी दो करोड़ रुपये की टैक्स चोरी पकड़ी गई है। उधर, दो दिन की कार्रवाई से गदगद सेल्स टैक्स विभाग की तरफ से विनोद कुमार एडिशनल कमिश्नर विनोद कुमार सिंह ने सारे मामले पर विस्तृत रिपोर्ट कमिश्नर वाणिज्य कर को भी भेजी है।

सेल्स टैक्स विभाग को जानकारी मिली थी कि शहर में कुछ बिल्डर व्यापक पैमाने पर अवैध निर्माण कर रही है। इसी शक की गुंजाइश में एसआईबी की तरफ से द्वारिकाधाम निकट टोल प्लाजा नेशनल हाईवे नंबर 58 की फाइलों को खंगाला गया। छानबीन की गई तो पता चला कि मेरठ विकास प्राधिकरण से द्वारिका धाम नाम से 24 फ्लैट बनाने की परमिशन ली गई है लेकिन मौके पर भौगोलिक सत्यापन किया गया तो टीम ने पाया कि 266 फ्लैट खड़े कर दिये गए हैं। बिल्डर ने सेल्स टैक्स विभाग में भी कोई पंजीकरण नहीं कराया है, ऐसे में सारा निर्माण बिना सेल्स चुकाये ही कर दिया गया है। विनोद कुमार सिंह का कहना है कि फ्लैट निर्माण में करीब 60 रुपये का कंस्ट्रक्शन हुआ है जिस पर कोई टैक्स विभाग को नहीं मिला है।

फर्जी फर्म का खेल   
विभाग ने मैसर्स एसकेजी कंस्ट्रक्शन नाम से चलाई जा रही फर्जी फर्म भी पकड़ी है, जो एक कमरे के मकान में चल रही है। उसने फर्जी तरीके से बिना कोई टैक्स जमा सेनेटरी गुड्स, इलेक्ट्रिकल गुड्स, आयरन स्टील से लेकर अन्य सामान के टैक्स इनवायस काटे लेकिन सेल्स टैक्स को एक पैसा टैक्स के तौर पर नहीं दिया। सचल दल की रिपोर्ट के आधार पर फर्म की जांच कराई तो पता चला कि सारा काम एक किराये के कमरे से चल रहा है, जिस जगह के नाम पर सचिन गुप्ता नाम के व्यक्ति ने एसकेजी फार्म को पंजीकरण कराया था वो जागृति विहार में 116/3 के पते पर चले रही है। मकान मालिक ने बताया कि उन्हें यहां पर कोई फर्म नहीं चल रही है। बस एक व्यक्ति ने उनके मकान में कमरा कराये पर लिया है जो दो – तीन महीने में एक बार आता है। विनोद कुमार सिंह का कहना है कि मोटा अनुमान है कि फर्जी फर्म के नाम पर करीब 5 करोड़ की टैक्स चोरी हुई है। इसलिए संबंधित फर्म का टिन नंबर रद्द कर दिया है।

बिना फैक्ट्री के बना दिया बेसन
अजराड़ा (किठौर) में बालाजी एग्रो फूड्स लिमिटेड ने साल 2015 में बेसन बनाने की फैक्ट्री चलाने के लिए सेल्स टैक्स विभाग से पंजीकरण लिया। विभाग ने भौतिक सत्यापन कराया तो पता चलता कि अभी तक फैक्ट्री चल नहीं है। जबकि उसने दूसरे राज्यों से करीब दो करोड़ रुपये की दाल खरीद है जो भौतिक सत्यापन के दौरान गोदाम में नहीं मिली है। इसका मतलब दाल खरीद कर व्यापारियों को भेजी गई है जिसका कोई टैक्स विभाग को नहीं दिया गया।

सचल दलन भी सक्रिय  
फर्जी बिलों के आधार पर हो रही टैक्स चोरी को रोकने के लिए सेल्स टैक्स विभाग का सचल दल सक्रिय हो गया है। उसने बीते दो दिनों के अंदर 20 लाख रुपये की टैक्स चोरी के मामले पकड़े हैं। इस दौरान टीम ने फर्नीचर डिफेक्टिव फार्म द्वारा 8.60 लाख रुपया का सामान बिना बिल के भेजा जा रहा था। वहीं 7.01 लाख रुपये का परचून व 4.50  लाख रुपये का बैट्री पकड़ी गई है। वाहन की जांच के दौरान बैट्री से जुड़ी कोई बिल नहीं दिखाया गया।