Impacting Lives of Beginners: Mrs. Neena Bhatia, Principal ABC Public School

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  Who was your inspiration in Childhood ? My father was my inspiration in Childhood. He always preached us that luck sure comes at the door and knocks too but your efforts More »

Top of the Town: Ravindra Bhadana, MLA  Indian politician and a member of the 16th Legislative Assembly of Uttar Pradesh of India

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1. आपका बचपन में प्रेरणा स्त्रोत कौन था? मेरे पूज्य बाबाजी स्वर्गीय श्री रामसिंह जी । जो एक कृषक थे, एक सामाजिक व्यक्ति थे। उन्होंने जिंदगी में मुझे जीना सीखाया। प्ररेणा भी More »

Top of the Town: Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd.

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Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd. with 300+ Centers all across India Who was your inspiration in Childhood ? My mother and father were my source More »

Top of the town: Dr. Mohini Lamba, Director in American Kids Play School, Early Childhood Curriculum Developer, Montessori Teachers Trainer

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Who was your inspiration in Childhood ? My inspiration was my family. I was surrounded by educators in my family. Ma Nanaji, Mamaji, my mother everybody was into academics. My Mamaji was More »

Top of the Town: Mrs. Monika Kohli, 52 years young model and actor, into print ads, T.V. commercials and movies

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Who was your inspiration in Childhood ? I always believed that inspiration is from inside and not from outside. Only you can inspire yourself. Outward inspirations are momentary and do not stay More »

Top of the town: Respected Rajendra Aggarwal, MP

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  Who was your inspiration in Childhood ? My dad and my uncle were my inspiration in my childhood. Both of them were associated with RSS. They inspired me to join RSS More »

Top of the town: Dr. Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker

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Dr.Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker Who was your inspiration in Childhood ? My mother was my inspiration in my childhood and she is still my inspiration. My brother had also More »

Top of the town: Mr. Rakesh Kohli, Chairman, Stag International known for sporting goods in different countries of the world.

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Who was your inspiration in Childhood ? My grandfather was my biggest inspiration. I had learnt the minutest details of life from him. I learnt a lot from him about business. Like More »

Top of the town: Mr. Prem Mehta, Principal City Vocational Public School

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Who was your inspiration in Childhood ? I think in my childhood it was the national leaders like Gandhi ji and Nehru ji who inspired me the most because our exposure at More »

Top of the town: Dr. Mamta Varshney, Lecturer and Poetess

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Who was your inspiration in Childhood? Radio was my source of inspiration as I used to listen to loads of music and radio and tape recorder were the only source to listen More »

 

FIR: बेवफाई के शक़ में पति ने काट ली पत्नी की नाक

पीड़िता के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है लेकिन आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में बुधवार (14 सितंबर) को  एक व्यक्ति पर अपनी पत्नी की नाक काट लेने का मामला दर्ज कराया गया। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार संजीव राठौर को शक़ था कि उसकी पत्नी कमलेश का सात सालों से विवाहेत्तर संबंध है इसलिए उनसे अपनी पत्नी को बदसूरत बनाने के लिए उसकी नाक काटी। संजीव और कमलेश अपनी छह साल की बेटी के साथ स्थानीय नरोठा हंसराम गांव में रहते हैं।

पड़ोसियों के अनुसार संजीव का स्वभाव उग्र है और वो बुधवार सुबह फोन पर किसी से बात करने के साथ ही कमलेश से भी झगड़ा कर रहा था। एक पड़ोसी ने मीडिया को बताया कि झगड़े के वक्त संजीव ने शराब पी रखी थी। झगड़े के दौरान ही उसने कमलेश की नाक काट ली। संजीव के एक अन्य पड़ोसी राजीव राठौर ने टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार को बताया कि कमलेश के माता-पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी है लेकिन संजीव अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

नई दिल्ली: डीटीसी बस ने भाई-बहन को कुचला, माताम में मां की हालत भी बिगड़ी

साकेत के सैदुला जाब इलाके में बुधवार सुबह एक तेज रफ्तार दिल्ली परिवहन निगम की बस ने दादा के साथ स्कूल जा रहे भाई-बहन को कुचल दिया। जख्मी हालत में तीनों को अस्पताल पहुंचाया गया जहां बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया। घायल बुजुर्ग की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद आरोपी चालक मौके पर ही बस छोड़कर फरार हो गया। पुलिस के मुताबिक मृतकों की पहचान पांच साल की ऋषिका और उसके भाई सात साल के शैलेश के रूप में हुई है। घायल बुजुर्ग की पहचान 60 साल के भगवान पासवान के रूप में हुई है। भगवान बच्चों के दादा हैं। वे बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए जा रहे थे तभी तेज रफ्तार बस ने तीनों को कुचल दिया। हादसे में मारी गई ऋषिका कक्षा एक में पढ़ती थी जबकि भाई शैलेश कक्षा दो का छात्र था।

दक्षिणी दिल्ली की अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नुपुर प्रसाद ने बताया कि घटना सुबह करीब पौने आठ बजे की है। बुजुर्ग भगवान दोनों बच्चों को लेकर साकेत स्थित नगर निगम प्राथमिक स्कूल छोड़ने जा रहे थे तभी खानपुर की तरफ से रूट नंबर-717 पर चलने वाली डीटीसी की बस उन्हें रौंदते हुए आगे बढ़ गई। मामले की जांच में जुटी पुलिस आरोपी चालक के बारे में दिल्ली परिवहन निगम प्रशासन से जानकारी मांग उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। अपने दोनों बच्चों को खो देने के गम में मां की हालत भी बिगड़ गई है।

सीबीआइ जांच की तलवार के बाद दो मंत्री बर्खास्त

राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को वापस लेने के लिए अर्जी दी थी, मगर न्यायालय ने गत नौ सितंबर को उसे खारिज कर दिया था।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को अपने दो मंत्रियों गायत्री प्रसाद प्रजापति और राजकिशोर सिंह को बर्खास्त कर दिया। प्रदेश में बीते कई वर्षों से लगातार आ रही अवैध खनन की शिकायतों को संज्ञान में लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कुछ समय पहले मामले की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश दिया था। प्रदेश सरकार ने सीबीआइ जांच से बचने के लिए याचिका दायर की थी जिसे हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। गायत्री प्रसाद प्रजापति की बर्खास्तगी को इलाहाबाद हाई कोर्ट के इसी फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है।  इस सिलसिले में राजभवन को सोमवार को ही पत्रावली भेजी गई थी, जिस पर राज्यपाल राम नाईक ने अपनी मंजूरी दे दी। बयान के मुताबिक राज्यपाल ने उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मूलचंद चौहान को खनन विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है, जबकि समाज कल्याण मंत्री रामगोविंद चौधरी को पंचायती राज विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है। राजकिशोर सिंह के पास रहे लघु सिंचाई और पशुधन विभाग को मुख्यमंत्री के हवाले किया गया है। मालूम हो कि प्रजापति पर अवैध खनन को बढ़ावा देने और भ्रष्टाचार के आरोप अर्से से लगते रहे हैं। इसके अलावा सिंह पर भी ऐसे इल्जाम लगाए गए थे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश में जगह-जगह बड़े पैमाने पर जारी अवैध खनन को गंभीरता से लेते हुए गत 28 जुलाई को प्रदेश में हुए अवैध खनन और इसमें शामिल सरकारी अधिकारियों की भूमिका की सीबीआइ से जांच कराकर छह महीने के अंदर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के इस फैसले को वापस लेने के लिए अर्जी दी थी, मगर न्यायालय ने गत नौ सितंबर को उसे खारिज कर दिया था। वर्ष 2012 में पहली बार अमेठी से विधायक बने प्रजापति ने कामयाबी की सीढ़ियों पर काफी तेजी से कदम रखे। उन्हें फरवरी 2013 में सिंचाई राज्यमंत्री बनाया गया था। बाद में उन्हें खनन राज्यमंत्री के पद पर नियुक्त किया गया था। जुलाई 2013 में प्रजापति को स्वतंत्र प्रभार का राज्यमंत्री बनाया गया था और जनवरी 2014 में उन्हें कैबिनेट मंत्री बना दिया गया था।इसके अलावा वर्ष 2012 में बस्ती जिले की हर्रैया सीट से विधायक चुने गए राजकिशोर पर भ्रष्टाचार और जमीन हड़पने के आरोप लगे थे। वे सपा की पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति का विभाग खास तौर से बीते ढाई वर्षों से लगातार विवादों में था। जानकारों का कहना है कि अवैध खनन की सीबीआइ जांच हुई तो प्रजापति उसकी जद में आ सकते हैं। इसीलिए मुख्यमंत्री ने ऐन चुनाव के पहले उनसे तौबा कर ली। वहीं पंचायती राजमंत्री राजकिशोर सिंह पर अपने विभाग में हुई भर्ती में गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य विवादों में उनका नाम आने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।  प्रदेश के दो मंत्रियों की बर्खास्तगी पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता आइपी सिंह ने कहा कि 2012 में उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने के बाद सत्रह महीने तक खनन विभाग मुख्यमंत्री के पास रहा। उसके बाद गायत्री प्रसाद प्रजापति को इस विभाग की जिम्मेदारी दी गई। इस दौरान प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये का अवैध खनन किया गया। जिसकी जानकारी प्रदेश सरकार को भलीभांति थी। उसके बाद भी उक्त मंत्री के खिलाफ इसलिए कोई कार्रवाई नहीं की गई क्योंकि वे समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठतम नेता के बेहद अजीज माने जाते थे। अवैध खनन की सीबीआइ जांच के अदालती आदेश के तुरंत बाद प्रजापति को हटाना कई सवालों को जन्म देता है। इन सवालों की जद में आने से न ही सपा सरकार बच सकती है और न ही पार्टी।

कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि गायत्री प्रजापति को सपा के एक वरिष्ठतम नेता का संरक्षण प्राप्त था। यह बात किसी से छिपी नहीं है। इसी वजह से उत्तर प्रदेश में मनमाने तरीके से अवैध खनन किया गया जिसने प्रदेश के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। अवैध खनन पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के सीबीआइ जांच के आदेश के बाद खनन मंत्री की बर्खास्तगी इस बात का प्रमाण है कि सरकार में कई लोग खुद को बचाने की कोशिश में हैं।  वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक के विक्रम राव ने प्रदेश के दो मंत्रियों की बर्खास्तगी के मुख्यमंत्री के एलान को इलाहाबाद हाई कोर्ट के दबाव में उठाया गया कदम करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि इन मंत्रियों की बर्खास्तगी राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिणाम होती तो बेहतर होता। राव ने सवाल उठाया कि देखना यह है कि कब तक इन दोनों मंत्रियों की बर्खास्तगी रहती है। इसके पूर्व भी अखिलेश यादव ने अपने कई मंत्रियों को बर्खास्त किया और कुछ समय बाद उन्हें फिर मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया।  हालांकि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने इस फैसले पर कहा कि समाजवादी पार्टी और उसकी सरकार में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं है। मुख्यमंत्री का यह फैसला स्वागत योग्य और सराहनीय है।

बदमानी से बचने के लिए

अखिलेश सरकार को आशंका थी कि हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई सीबीआइ जांच के लपेटे में खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति भी आ सकते हैं। इसलिए चुनाव के वक्त किसी तरह की बदनामी से बचने के लिए सरकार ने उनको चलता कर दिया। हालांकि सरकार ने पुरजोर कोशिश की कि सीबीआइ जांच हो ही नहीं। पर इस बाबत उसकी अर्जी हाई कोर्ट में खारिज हो गई। बर्खास्तगी को इलाहाबाद हाई कोर्ट के इसी फैसले से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरे बर्खास्त मंत्री राजकिशोर सिंह पर भ्रष्टाचार और जमीन हड़पने के आरोप लगे थे। वे सपा की पिछली सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

आरएसएस समर्थित मुस्लिम संगठन आज बकरीद पर नहीं देगा बकरे की क़ुरबानी

 

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफज़ल ने अवध प्रांत की योजना के बारे में अनभिज्ञता जताई।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) समर्थित संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की अवध इकाई ने मंगलवार (13 सितंबर) को ईद उल अजहा (बकरीद) के मौके पर बकरे या किसी अन्य जानवर की कुरबानी नहीं देने का फैसला किया है। मंच बकरीद के मौके पर बकरे के आकार का केक काटेगा। मंच के लखनऊ कार्यालय में बकरे के आकार का पांच किलो का केक काटा जाएगा। मंच के सदस्य अपने घरों पर बकरीद पर बिरयानी नहीं बनाएंगे। वो अपने दोस्तों को सेवई और दही वड़ा की दावत देंगे। अवध प्रांत के संयोजक रईस खान ने कहा कि वो मुस्लिम समाज को संदेश देना चाहते हैं कि “बकरीद भी केक काटकर मनाई जा सकती है जिस तरह लोग अपनी सालगिरह मानते हैं।” खान ने कहा कि अगर इसे लोगों का समर्थन मिला तो वो दूसरे प्रांतों में भी इसका प्रचार करेंगे।

मंच के सह-संयोजक हसन कौसर ने कहा, “बकरीद मानवत का संदेश देती है। हम अल्लाह को अपने बच्चे भी कुरबान कर सकते हैं लेकिन बगैर किसी वजह से बकरे की हत्या करके उसका मांस खाना जायज नहीं है।” हालांकि मंच के राष्ट्रीय संयोजक मोहम्मद अफज़ल से जब अवध प्रांत के इस योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी से अनभिज्ञता जताई। बीफ के मुद्दे के कारण विभिन्न सरकारें इस बकरीद पर विशेष एहतियात बरत रही हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर में बकरीद पर इस बारे पिछले सालों जैसी रौनक नहीं देखने को मिल रही है। कश्मीर में दो महीने से जारी हिंसा में तीन पुलिसवालों समेत 75 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं सैकड़ों घायल हुए हैं।

क्यों मनाते हैं बकरीद?

ईद-उल-अज़हा का शाब्दिक अर्थ हुआ क़ुरबानी की ईद। मुसलमानों का ये प्रमुख त्योहार है। इसे रमजान के लगभग 70 दिनों बाद मनाया जाता है। इस्लामिक मान्यता के अनुसार पैगंबर इब्राहिम को भगवान को अपनी सबसे प्यारी चीज की कुरबानी देनी थी। इब्राहिम ने अपने पुत्र इस्माइल को अल्लाह के लिए कुरबान करने का फैसला किया क्योंकि वो दुनिया में सबसे ज्यादा प्यार अपने बेटे से करते थे। मान्यता के अनुसार इब्राहिम बेटे की कुरबानी देने ही वाले थे कि भगवान ने उन्हें रोक दिया। तब से मुसलमान इस दिन ईद-उल-अज़हा मनाते हैं। इस दिन मुसलमान ईश्वर के प्रति अपने समर्पण के प्रतीक के तौर पर किसी जानवरी की कुरबानी देते हैं।

1500 किलो वजन वाला 11 लाख का भैंसा बाहुबली, लेता है 20 किलो सेव और 20 लीटर दूध की डेली डाइट

मुरादाबाद में ईदगाह के पास रहने वाले मोहम्मद तौफीक कुरैशी और नदीम इसे खरीदकर लाए हैं। मुर्रा नस्‍ल के इस भैंसे को देखने के लिए काफी लोग आ रहे हैं।

बकरीद के मौके पर मुरादाबाद शहर में बाहुबली नाम का भैंसा आकर्षण का केंद्र बना रहा। इसका वजन 1500 किलो है और इसे पंजाब के लुधियाना से 11 लाख रुपये में खरीदा गया। रिपोर्ट के अनुसार उसके मालिकों ने नए खरीदार की तलाश की जो उन्‍हें इसके ज्‍यादा पैसे दे सके। मुरादाबाद में ईदगाह के पास रहने वाले मोहम्मद तौफीक कुरैशी और नदीम इसे खरीदकर लाए। मुर्रा नस्‍ल के इस भैंसे को देखने के लिए काफी लोग आए। नदीम ने बताया कि हर रोज लोग बाहुबली को देखने आते।  वे इसे प्‍यार करते हैं और छूते हैं।कई लोगों ने तो इसके साथ सेल्‍फी भी ली।

रिपोर्ट के अनुसार ठाकुरद्वारा के रहने वाले एक व्‍यक्ति ने इसे खरीदने का प्रस्‍ताव रखा था लेकिन मालिकों ने मना कर दिया। उनका कहना है कि वह कम पैसे दे रहा था। कुरैशी ने कहा कि यदि कोई नहीं आया तो वे खुद की बकरीद पर इसकी कुर्बानी दे देंगे। यह भैंसा हर रोज चारे के साथ ही 20 लीटर दूध और 20 किेलो सेव खाता है। बाहुबली केे लिए दो कूलर और एक पंखा लगाया गया। साथ ही सोने के लिए गद्दा भी रखा गया। हल्द्वानी, रामपुर और चंदोसी सहित आसपास के कई शहरों से इस भैंसे को देखने के लिए लोग आए।

देश में ईद उल अदहा या बकरीद मंगलवार को मनाई जा रही है। इस दिन मुस्लिम लोग बकरी, भेड़ और अन्‍य जानवरों की कुर्बानी देते हैं। इस्‍लामिक मान्‍यता के अनुसार पैंगबर अब्राहम ने अल्‍लाह के कहने पर अपने बेटे इस्‍माइल की कुर्बानी दी थी।

राहुल गांधी की यात्रा से कांग्रेस कार्यकर्ता और जनता कंफ्यूज, मुस्लिम ने पूछा- किसान यात्रा में बुनकर के लिए क्‍या है

लोगों को संदेह है कि इस यात्रा का फोकस क्‍या वाकई में किसान है। क्‍योंकि राहुल गांधी के भाषणों में किसानों के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला गया है।

कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी ने ‘देवरिया से दिल्‍ली किसान महायात्रा’ का पहला चरण रविवार को पूरा कर लिया। इस दौरान उन्‍होंने पूर्वी उत्‍तर प्रदेश के 12 जिलों में 824 किलोमीटर का सफर किया। लेकिन सुर्खियों में रहने के बावजूद जनता और कांग्रेस कार्यकर्ता यूपी विधानसभा चुनावों में पार्टी की रणनीति को लेकर कंफ्यूज हैं। लोगों को संदेह है कि इस यात्रा का फोकस क्‍या वाकई में किसान है। क्‍योंकि राहुल गांधी के भाषणों में किसानों के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला गया है। राहुल ने पीएम मोदी की विदेश यात्राओं, उनके महंगे सूट, चुनाव से पहले काला धन लाने और रोजगार देने के वादों का जिक्र किया है। उनके नारे ‘जनता त्रस्‍त, मोदी मस्‍त’ को जौनपुर और मऊ जैसे अल्‍पसंख्‍यक बहुल इलाकों में अच्‍छा रेस्‍पॉन्‍स मिला है लेकिन भीड़ में मौजूद ज्‍यादातर लोग अब भी तय नहीं कर पाए हैं कि वोट किसे देना है।

जौनपुर में यात्रा के दौरान राहुल ने मोदी के बारे में बहुत कुछ कहा। यहां पर एक मुस्लिम ने पूछा, ”वो सब तो ठीक है पर किसान यात्रा में बुनकर के लिए क्‍या है।” हालांकि उसकी आवाज राहुल तक नहीं पहुंची। वहीं राहुल पीएम के सूट के बारे में बोलते रहे। एक दूसरी समस्‍या यह है कि यह समझ नहीं आ रहा है कि कांग्रेस किन तक अपनी पहुंच बनाना चाहती है। राहुल सबको अपने साथ लेकर चलने की बात करते हैं, एक दिन वे हनुमानगढ़ी में पूजा करते हैं तो अगले दिन जौनपुर में मदरसे में लंच करते दिखते हैं। इसके बाद उन्‍होंने ब्राह्मण समाज पूजा में हिस्‍सा लिया वहां उन्‍होंने माथे पर चंदन का टीका लगाया ओर मंत्र पढ़े। उन्‍होंने अंबेडकर की मूर्ति पर माला चढ़ाई और दो दलितों के घर पर खाना भी खाया।

 

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उत्‍तर प्रदेश: अखिलेश यादव को हटाकर मुलायम ने छोटे भाई शिवपाल को बनाया प्रदेश अध्‍यक्ष

मंगलवार को ही अखिलेश यादव ने मुख्य सचिव दीपक सिंघल को उनके पद से हटा दिया था।

उत्‍तर प्रदेश में सत्‍ताधारी समाजवादी पार्टी ने बड़ा बदलाव किया है। पार्टी अध्‍यक्ष मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जगह शिवपाल सिंह यादव को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया है। पिछले कुछ महीनों से पार्टी के भीतर नियंत्रण को लेकर शिवपाल सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बीच तनातनी की स्थिति चल रही है। मंगलवार को ही अखिलेश यादव ने मुख्य सचिव दीपक सिंघल को उनके पद से हटा दिया था और अब शिवपाल सिंह यादव को पार्टी की कमान सौंप दी गई है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कुछ महीनों पहले समाजवादी पार्टी में हुआ यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है। शिवपाल सिंह यादव सरकार और पार्टी के भीतर खुद को नजरअंदाज किए जाने का आरोप लगाते रहे हैं। खुद मुलायम सिंह यादव ने इसकी पुष्टि करते हुए सार्वजनिक मंच से अखिलेश यादव को चेतावनी भी दी थी।

समाजवादी पार्टी के भीतर वर्चस्‍व की लड़ाई छिड़ी नजर आती है। अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह के बीच लगातार मतभेद की खबरें आती रहती हैं, हर बार अखिलेश किसी न किसी तरीके से अपने मन की करने में कामयाब हो जाते हैं। बीते दिनों माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय भी ऐसा ही मामला था। इस विलय के पीछे शिवपाल सिंह की भूमिका थी। लेकिन अखिलेश यादव की वजह से सपा को इस विलय को रद्द करना पड़ा था।

उत्तर प्रदेश: सीएम अखिलेश ने शिवपाल यादव से वापस लिए तीन मंत्रालय, बढ़ सकती है चाचा-भतीजे की जंग

सीएम अखिलेश ने शिवपाल से पीडब्लयू, सिंचाई, राजस्व विभाग वापस ले लिए हैं।

समाजवादी पार्टी में इन दिनों सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। मंगलवार को भी पूरे दिन पार्टी में हलचल बनी रही है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल सिंह यादव के बीच चल रही खीचतान अब खुल कर सामने आ रही है। सोमवार अखिलेश सरकार द्वारा दो मंत्रियों के बर्खास्त करने के बाद मंगलवार सुबह मुख्य सचिव को पद से हटा दिया गया। इसके बाद सपा सुप्रिमो मुलायम सिंह यादव प्रदेश में पार्टी कमान बेटे अखिलेश से लेकर छोटे शिवपाल सिंह को सौंप दी और शाम को मुख्यमंत्री अखिलेश ने शिवपाल से तीन मंत्रालय छीन लिए।  अखिलेश सरकार में अब तक पीडब्लयू, सिंचाई, राजस्व विभाग और समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी शिवपाल के पास थी मंगलवार को सीएम अखिलेश ने शिवपाल से पीडब्लयू, सिंचाई, राजस्व विभाग वापस ले लिए हैं। अखिलेश ने पीडब्लयू विभाग की जिम्मेदारी अपने पास ही रखी है।

अब शिवपाल के पास केवल समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी बची है। इसके बाद सूत्रों से खबर आ रही है कि शिवपाल से उत्तर प्रदेश मंत्रिमडल से इस्तिफा भी दे सकते हैं। सपा में चल रही गुटबाजी अब साफ देखी जा सकती है। हटाए गए मुख्य सचिव दीपक सिंघल को शिवपाल यादव का करीबी माना जाता है। अखिलेश यादव और शिवपाल सिंह के बीच लगातार मतभेद की खबरें आती रहती हैं, हर बार अखिलेश किसी न किसी तरीके से अपने मन की करने में कामयाब हो जाते हैं। बीते दिनों माफिया से नेता बने मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का सपा में विलय भी ऐसा ही मामला था। इस विलय के पीछे शिवपाल सिंह की भूमिका थी। लेकिन अखिलेश यादव की वजह से सपा को इस विलय को रद्द करना पड़ा था।

 

उत्तर प्रदेश: शिवपाल के हाथों में प्रदेश सपा की कमान

उत्तर प्रदेश की सपा की सरकार में शिवपाल सिंह यादव अपना रुतबा गंवा चुके हैं।

लंबे समय से समाजवादी पार्टी में शिवपाल सिंह यादव को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मंगलवार की देर शाम मुलायम सिंह यादव ने उन्हें पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्टÑीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव से यह जिम्मेदारी लेकर शिवपाल यादव को सौंपी गई है। मंगलवार की सुबह अचानक शिवपाल के करीबी अधिकारी कहे जाने वाले दीपक सिंघल को मुख्य सचिव पद से हटाए जाने के बाद शिवपाल यादव की प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर ताजपोशी के कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। देर शाम मुख्यमंत्री ने शिवपाल यादव से सभी विभागों का प्रभार लेकर उन्हें सिर्फ समाज कल्याण विभाग की ही जिम्मेदारी सौंपी है। काफी समय से अखिलेश यादव की कैबिनेट में लोक निर्माण विभाग के साथ ही कई अन्य विभागों के मंत्री रहे चाचा शिवपाल सिंह यादव की नाराजगी की खबरें आम थीं। बीते एक साल से शिवपाल सिंह यादव और मुख्यमंत्री के बीच संबंध तल्खियत की हद तक पहुंच गए। इसी का नतीजा रहा कि कई मर्तबा शिवपाल यादव ने अपनी नाराजगी का सार्वजनिक मंचों से इजहार भी किया। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि अखिलेश सरकार में जमीन कब्जा करने वाले मंत्री और पार्टी में आपराधिक कृत्यों में लिप्त विधायकों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे अपना मंत्रिपद भी छोड़ सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार में बेहद कद्दावर मंत्री के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले शिवपाल सिंह यादव के मंत्रिपद से त्यागपत्र देने की मंशा जाहिर करने के एक महीने के भीतर ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार की रात उनसे सभी प्रमुख विभाग ले लिए। राजभवन ने इस बात की पुष्टि भी कर दी है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के प्रस्ताव को संज्ञान लेते हुए शिवपाल सिंह यादव के लोक निर्माण विभाग का कार्यभार मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को आबंटित किया है। इसके अलावा शिवपाल के अन्य विभाग सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण की जिम्मेदारी अखिलेश काबीना मंत्री अवधेश प्रसाद को सौंप दी है। शिवपाल सिंह यादव के पास रहे राजस्व, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास और लोक सेवा प्रबंधन विभाग के साथ ही सहकारिता विभाग का कार्यभार मंत्री बलराम यादव को सौंप दिया गया है।

मंगलवार को शिवपाल सिंह यादव के करीबी अधिकारी को मुख्य सचिव के पद से हटाए जाने के कुछ ही घंटों के बाद उनके विभागों को भी वापस लेने से साफ है कि उत्तर प्रदेश की सपा की सरकार में शिवपाल सिंह यादव अपना रुतबा गंवा चुके हैं। राजनीति के जानकार शिवपाल यादव पर की गई कार्रवाई को भी अमर सिंह की उस दावत से जोड़ कर देख रहे हैं जो उन्होंने 11 सितंबर को दिल्ली के एक होटल में दी थी। इस दावत में मुलायम सिंह यादव और शिवपाल यादव के अलावा तत्कालीन मुख्य सचिव दीपक सिंघल ही पहुंचे थे। बड़ा सवाल यह है कि आखिर अमर सिंह की इस दावत में ऐसा क्या हुआ जिसकी बड़ी कीमत शिवपाल यादव और दीपक सिंघल को अपना रसूख गंवा कर चुकानी पड़ी।
समाजवादी पार्टी के उच्चपदस्थ सूत्र बताते हैं कि अखिलेश मंत्रिमंडल से अहम विभाग गंवा देने के बाद शिवपाल यादव बेहद आहत हैं। बुधवार को वे अखिलेश सरकार में मंत्रिपद पर बने रहने को लेकर कोई बड़ा एलान कर सकते हैं।

तकरार का नतीजा

’बीते एक साल से शिवपाल सिंह यादव और मुख्यमंत्री के बीच संबंध तल्खियत की हद तक पहुंच गए। इसी का नतीजा रहा कि कई मर्तबा शिवपाल ने अपनी नाराजगी का सार्वजनिक मंचों से इजहार भी किया।

’मंगलवार देर शाम मुख्यमंत्री ने शिवपाल यादव से सभी विभागों का प्रभार लेकर उन्हें सिर्फ समाज कल्याण विभाग की ही जिम्मेदारी सौंपी है।’ शिवपाल के पास रहे राजस्व, अभाव, सहायता एवं पुनर्वास और लोक सेवा प्रबंधन विभाग के साथ ही सहकारिता विभाग का कार्यभार मंत्री बलराम यादव को सौंप दिया गया है।

नाटक है मंत्रियों की बर्खास्तगी : मायावती

 

भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों और नेताओं को सपा सरकार के ‘मठाधीश’ संरक्षण देते रहे हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से दो मंत्रियों की बर्खास्तगी को ‘दिखावटी ड्रामेबाजी’ करार देते हुए मंगलवार को कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी वर्तमान सपा सरकार का महापाप कम नहीं होने वाला है। मायावती ने एक बयान में कहा यह बात कही। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर प्रदेश की त्रस्त जनता किसी बहकावे में नहीं आने वाली है। खनन मंत्री गायत्री प्रजापति और पंचायती राज मंत्री राजकिशोर की सोमवार को हुई बर्खास्तगी पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय अराजकता और जंगलराज से लोगों का जीवन बेहाल है।

भ्रष्टाचार में लिप्त मंत्रियों और नेताओं को सपा सरकार के ‘मठाधीश’ संरक्षण देते रहे हैं। ऐसा ही संरक्षण गुंडों, माफियाओं, अराजक तत्त्वों और असामाजिक तत्त्वों को भी हासिल है। मायावती ने कहा कि मंत्रियों की बर्खास्तगी दिखावटी ड्रामेबाजी है। सपा सरकार में भ्रष्ट मंत्रियों और नेताओं को जितना संरक्षण मिला है, उतना शायद ही किसी सरकार के कार्यकाल में मिला हो।