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नए बिजली घर होंगे 139

MEERUT। मेरठ समेत पश्चिमांचल के सभी शहरों में 24 घंटे पावर सप्लाई को मेंटेन करने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी की है। इसके लिए प्रदेश सरकार के साथ केन्द्र सरकार ने भी बिजली के बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए हैं। केन्द्र की आईपीडीएस और डीयूजीजेवाई योजना के अंतर्गत मार्च- 2017 तक 139 बिजली घर पीवीवीएनएल के बेड़े में शामिल कर लिए जाएंगे।
मार्च- 17 तक 139 बिजली घर
दरअसल, केन्द्र सरकार की आईपीडीएस (इंटीग्रेटेड पॉवर डेवलपमेंट स्कीम) व डीयूजीजेवाई (दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण ज्योति योजना) के अंतर्गत पश्चिमांचल में 139 नए बिजली घर बनाने की शुरुआत की गई है। जिसमें से 95 बिजली घरों का निर्माण अब तक पूर्ण कर लिया गया है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के चीफ इंजीनियर (एमएम) जीके गुप्ता ने बताया कि आईपीडीएस योजना के अंतर्गत कुल 139 बिजली घर बनने प्रस्तावित हैं, जिनमें से 96 का सर्वे पूर्ण कर लिया गया है और 53 बिजली घरों का निर्माण कार्य लगभग पूर्ण कर लिया गया है। वहीं डीडीयूजीजेवाई के अंतर्गत कुल 140 बिजली घरों की क्षमता वृद्धि होनी है, जिसमें से 42 पर काम पूर्ण कर लिया गया है।
मेरठ जोन होंगे 16 बिजली घर
योजना के अंतर्गत मेरठ जोन में 33/11 केवीए के 16 बिजली घर, गाजियाबाद में 26, मुरादाबाद में 20 व सहारनपुर में 30 नए बिजली घर बनाए जाएंगे। इसके लिए शासन ने 458 करोड़ रुपए की किस्त सैंक्शन की है.
आईपीडीएस व डीडीयूजीजेवाई के अंतर्गत 139 बिजली घरों पर काम किया जाना है। जिनमें से 95 बिजली घरों का काम लगभग पूर्ण कर लिया गया है। इन योजनाओं से पीवीवीएनएल की तस्वीर बदल जाएगी।

बिजली विभाग की योजनाओं में मंद पड़ा करंट

MEERUT। शहर में बिजली की महत्वाकांक्षी योजनाएं एक के बाद एक धड़ाम होती जा रहीं हैं। इसी का नतीजा रहा कि 2016 में बिजली की कई योजनाएं धड़ाम रही। सरकार की मदद से विभाग पॉवर सप्लाई दुरुस्त करने के लिए कई अहम योजनाएं तो लाया लेकिन क्रियान्वयन के धरातल पर अधिकतर योजना खेत रही। हालांकि नवंबर आते- आते पावर सप्लाई की स्थिति जरूर सुधरी.
योजनाएं रहीं खेत
पिछले पांच सालों का रिकार्ड उठाएं तो इस दौरान केन्द्र और राज्य सरकार की मदद से बिजली विभाग आधा दर्जन योजनाएं लेकर आया। इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के माध्यम से बिजली विभाग ने शहर को निर्बाध बिजली आपूर्ति का करने का सपना संजोया था, लेकिन दुर्भाग्य वश विभाग एक भी योजना का मूर्त रूप नहीं दे सका और अधिकतर योजनाएं केवल फाइल और कागजों का हिस्सा बनकर रही रह गई।
ये हैं योजनाएं
– आरएपीडीआरपी- बी ( रि- स्ट्रक्चरड एसेलरेटेड पॉवर डेवलपमेंट एंड रि- फॉर्म प्रोग्राम)
– आरजीजीवाई – राजीव गांधी ग्रामीण ज्योति योजना
– फीडर सेग्रीगेशन
– स्कैडा
– ऑन लाइन बिलिंग
– एसएमएस अलर्ट
– प्रीपेड मीटिरिंग
– रूरल मीटिरिंग
– एलईडी प्रोजेक्ट
आरएपीडीआरपी- बी आरएपीडीआरपी पार्ट ए के बाद पार्ट बी को तीन सालों में समाप्त करने के निर्देश प्राप्त हुए थे, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक यह योजना फाइलों में ही दम तोड़ रही है। इसके अंतर्गत शहर की एलटी, एचटी लाइनों का मेंटीनेंस के साथ- साथ नए फीडरों का निर्माण, फीडरों की क्षमता वृद्धि, 66 11 व 33 11 के नए बिजली घरों का निर्माण, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि, एबीसी कंडक्टर का इस्तेमाल व मोबाइल सब- स्टेशन आदि कार्य कराए जाने थे।
फीडर सेग्रीगेशन – फीडर सेग्रीगेशन योजना के अंतर्गत ग्रामीण इलाकों में बेहतर सप्लाई मुहैया कराना था। योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूपों को मेल सप्लाई से अलग करते हुए उनके लिए अलग से फीडर निर्माण कार्य कराए जाने थे, लेकिन पांच साल बाद भी योजना अपने पॉयलट प्रोजेक्ट से बाहर नहीं आ पाई है.
स्कैडा – स्कैडा भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक है। इस योजना की शुरुआत भी 2008 में की गई थी। योजना का मुख्य उददेश्य शहर की बिजली को सेंट्रलाइज करना था। इसके लिए शहर के समस्त फीडरों का इंटरकनेक्टेड़ करना था। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होता कि टेक्निकल फॉल्ट के चलते एक फीडर की बत्ती गुल होते ही प्रभावित क्षेत्र को तुरंत ही दूसरे फीडर से कनेक्ट कर दिया जाता।
ऑल लाइन बिलिंग
– जन सुविधाओं को आसान व सरल बनाने के लिए विभाग ने 2009 में पूरे सिस्टम के ऑन लाइन बनाने का निर्णय लिया था। हालांकि इस योजना पर काम करते हुए विभाग ने मेरठ समेत पश्चिमांचल के कई जनपदों को ऑन लाइन भी कर दिया, लेकिन योजना का सही प्रचार प्रसार न होने के कारण योजना पूरी तरह से परवान नही चढ़ पाई है और आज भी अधिकांश लोग विंडो पेमेंट के लिए लाइन में लगते नजर आते हैं।
आएपीडीआरपी पार्ट ए को कंप्लीट कर लिया गया है। हालांकि शुरुआत में काम कुछ धीमी गति से चला, लेकिन अब कार्यो में तेजी लाई जा रही है। पावर सप्लाई की स्थिति अब सुधर चुकी है.

सर्दियों का मौसम है, थोड़ा सावधान रहें

MEERUT। पहले सर्दियों के मौसम को बीमारी के लिहाज से अधिक सिक्योर समझा जाता था। सर्दियों में अपने खानपान और विशेष दिनचर्या के माध्यम से लोग काफी फिट रहते थे। लेकिन इसके विपरीत अब सर्दियों में बीमारी के खतरे गर्मियों की अपेक्षा में अधिक बढ़ गए हैं। सीनियर डायटीशियन डॉ। भावना तोमर इसको खानपान में आए बदलाव और फिजीकल एक्टीविटी में आई बेहद कमी को कारण बताती हैं.
डॉ। वीरोत्तम तोमर ने बताया कि ठंड में तापमान कम होने से बॉडी का टेंप्रेचर मौसम से कोप- अप करता है। ऐसे में वैस्क्यूलर प्रॉब्लम पैदा हो जाती है। ठंड होने से नसे सिकुड़ने लगती है, जिससे एजाइना पेन व हार्ट स्ट्रोक का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ठंड में दमा अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है। खासकर रात में और सुबह इस बीमारी का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गो का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है.
एयर बोर्न डिजीज
– स्मॉग में खतरनाक वायसर नीचे आ जाते हैं, जो सांस के साथ फेफडों में प्रवेश कर जाते हैं।
– सर्दियों में अधिकांश लोग एक कमरे में रहना पंसद करते हैं, जिससे परिवार के एक सदस्य से बीमारी दूसरों को लगने की आशंका रहती है.
– कमरे में गैस गीजर का यूज न करें। हीटर आदि पर भी पानी से भरा बर्तन रखें, ताकि माइश्चर मेंटेन रहे.
कुछ आदत डालें
– हैंड वॉशिंग टेक्निक को अपनाएं.
– खाने में तरल पदार्थो की संख्या बढ़ाएं.
– मौसमी फलों को अधिक मात्रा में लें.
– खान- पान में बदलाव न करें। प्रयोग से बचें.
इम्यूनिटी बढ़ाएं
– योगा को दिनचर्या में लाएं.
– मानसिक तनाव से बचें, यह इम्यूनिटी वीक करती है.
– ब्रीद कंट्रोलिंग सिस्टम को सीखें.
कॉलोस्ट्रोल पर रखें कंट्रोल
– बॉडी में शुगर की मात्रा न बढ़ने दें.
– रेगुलर एक्सरसाइज कर कैलोरी बर्न करें.
– एल्कोहल से परहेज करें.
– मूंगफली अधिक मात्रा में न लें.
– इंडियन डायट को ही तरजीह दें.
– फलों और सलाद की संख्या बढ़ाएं.
– वॉक पर जरूर निकलें.
– फाइबर युक्त चीजों से परहेज रखें.
– हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें.
– धूप में बैठें, खूब पानी पिएं, नमक कम लें.
– सरसों के तेल का अधिक सेवन करें.
– 3 से 4 घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें.
– डिनर में रोटी को अवॉयड करें। दलिया या दाल आदि लें.
– सर्दियों में दही जरूर खाएं।
– रोजाना पांच बादाम और दो अखरोट लें.
ड्रायनेस से बचें
– नहाने से पूर्व बॉडी पर सरसों के तेल से मालिश करें.
– नहाने के बाद गीले शरीर पर मॉइश्चर का यूज करें.
– सर्दियों में साबुन का इस्तेमाल न बराबर करें.
बरतें एहतियात
– दमा रोगी इनहेलर हमेशा रखें.
– बीपी पेशेंट्स रेगुलर बीपी मॉनीटर रखें.
– किडनी पेशेंट्स डॉक्टर्स के रेगुलर टच में रहें.
सर्दियों में हार्ट और दमा पेशेंट को अधिक सावधानी की जरूरत है। खानपान में बदलाव और कुछ एक्सरसाइज के माध्यम से बॉडी को फिट रखा जा सकता है।
– डॉ। वीरोत्तम तोमर, चेस्ट रोग स्पेशलिस्ट, अध्यक्ष आईएमए
सर्दियों में हमें अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जैसे हरे पत्तेदार सब्जी, मौसमी फल व खाने में तरल पदार्थो को बढ़ाकर बीमारियों से बचा जा सकता है।
– डॉ। भावना गांधी, डायटीशियन
चिकनगुनिया के बाद सर्दियों में ज्वाइंट पेन की समस्या अधिक गहरा गई है। ऐसे में इस पेन से बचने के लिए क्या किया जाए। सर्दियों में बॉडी का ख्याल कैसे रखें.

कड़ाके की सर्दी से सहमा मेरठ

MEERUT : सुबह ठंड और शाम होते ही कोहरे का प्रकोप ने रविवार को जनजीवन को हलकान कर दिया। देर शाम होते ही कोहरा इतना सघन हो गया कि एक कए मीटर की दूरी पर आने जाने वाले वहन नजर नहीं आ आए। हाईवे पर वाहन रेंग रेंग कर गुजरे। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सीजन का यह सबसे घना कोहरा है.
देर शाम आई आफत
रविवार सुबह घने कोहरे के बीच करीब साढ़े दस बजे धूप खिली। साफ मौसम को शाम छह बजे जैसे नजर लगी हो। तेज हवाओं के साथ आंधी आई और शाम को कोहरे की धुंध ने अपने आगोश में ले दिया। रात होते- होते घने कोहरे में हाथ को हाथ नहीं दिखाई दे रहा था। सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई। वाहनों से बाहर निकले लोग किसी तरह घर पहुंचे। जिन सड़कों पर स्ट्रीट लाइट नहीं थी वह से गुजरना लोगों के लिए शामत बन गया। आईआईएफएसआर के मौसम कृषि वैज्ञानिक डॉ। एन सुभाष ने बताया कि वातावरण में अत्यधिक नमी और तापमान कम होने के चलते शाम से कोहरा छा गया। हवाओं का रुख शांत होने से कोहरा घना होता गया.
ट्रेनों के थमे पहिए
मौसम में बदलाव का सीधा असर ट्रेनों के आवागमन पर पड़ रहा है। रविवार को इलाहाबाद से मेरठ आने वाली संगम एक्सप्रेस सात घंटे के विलंब सिटी स्टेशन पहुंची। नौचंदी ने भी नखरे दिखाए और चार घंटे की देरी से आयी। आधा दर्जन ट्रेनें तीन से सात घंटे के विलंब से पहुंची। जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अमृतसर से इंदौर जाने वाली एक्सप्रेस छह घंटे, शताब्दी एक्सप्रेस चार घंटे, शालीमार तीन घंटे विलंब से चलती रहीं। सिटी स्टेशन अधीक्षक श्याम सुंदर ने बताया कि शाम को संगम को समय से रवाना किया गया, जबकि नौचंदी सवा घंटे विलंब से भेजी गयीं। उन्होंने कहा कि कोहरे के कारण ट्रेनों का आवागमन प्रभावित हो रहा है.
आज बंद रहेंगे स्कूल
जिलाधिकारी पंकज यादव के निर्देश पर कड़ाके की सदी के चलते सोमवार को स्कूलों को बंद रखने के निर्देश दिए गए। डीएम कार्यालय ने बताया कि नर्सरी से कक्षा आठ तक के सभी आईसीएसई, सीबीएसई और प्राइमरी, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बंद रहेंगे। देर रात्रि शासन से रायशुमारी कर यह फैसला डीएम ने लिया।

हिमाचल-उत्तराखंड में बर्फबारी, वेस्ट में सिहरन

MEERUT: हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी के बाद जहां समूचा उत्तर भारत ठिठुर वहीं वेस्ट यूपी में भी दिनभर धूप नहीं निकली। बर्फबारी का असर है कि मेरठ में तापमान काफी गिर गया। रविवार सुबह से ही यहां धुंध रही और देर शाम तक कोहरा और गहरा गया। सर्द हवाओं ने लोगों को घरों में दुबके रहने के लिए मजबूर कर दिया।
वेस्ट यूपी में बर्फीली हवाएं
मेरठ समेत वेस्ट यूपी में बर्फीली हवाओं से लोग ठिठुर गए। गलन बढ़ गई। खिली धूप भी सर्द हवाओं के सामने नतमस्तक नजर आई। शाम होते- होते हवाएं और तेज हो गईं। जानलेवा हुई ठंड से लोग घरों में दुबके रहे। शुक्रवार रात शुरू हुए कोहरे का कहर जारी है। शनिवार देर रात से सुबह तक कोहरे की चादर धूप निकलने तक तनी रही। दृश्यता बेहद कम होने के चलते कई जगहों पर घना कोहरा छाया रहा।
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वेस्टर्न डिस्टर्बेस के चलते मौसम में बदलाव आया है। आने वाले 48 घंटों तक तापमान में 2- 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की जाएगी। वेस्ट यूपी में शीत लहर और घने कोहरे का असर देखने को मिलेगा।
– डॉ। सुभाष, मौसम वैज्ञानिक, सरदार बल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय
कोहरे के कारण ट्रेनें रहीं लेट
– नौचंदी- संगम समेत ज्यादातर ट्रेनें हुई लेट
मेरठ की प्रमुख संगम एक्सप्रेस 18 घंटे तक लेट थी। खबर लिखे जाने तक ट्रेन स्टेशन पर नहीं पहुंची थी। सुबह 7 बजे मेरठ सिटी स्टेशन पर पहुंचने वाली एक्सप्रेस ट्रेन रात्रि 11 बजे तक पहुंचने की संभावना है। रेलवे का दावा है कि रात्रि 2 बजे तक संगम को रवाना कर दिया जाएगा। नौचंदी 5 घंटे लेट है। इसके अलावा अप एंड डाउन की करीब 80 ट्रेनें 2 से 6 घंटे तक लेट थीं। कोहरे का असर रेलवे के परिचालन पर पड़ा.

प्रधानमंत्री के नाम पर बड़े फर्जीवाडे़ की तैयारी, जानिए क्या ?

प्रधानमंत्री के नाम पर एक और बड़े फर्जीवाडे़ की तैयारी हो रही है। जनपद में इस समय बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत आवेदन पत्र भरवाये जा रहे हैं। जिसमें प्रत्येक बेटी के लिए दो-दो लाख रुपये देने की बात कही जा रही है। अब तक जनपद में मोटे अनुमान के तौर पर डेढ़ लाख से ज्यादा आवेदन पत्र भरवाये जा चुके हैं। वहीं संबंधित विभाग को ही इस योजना की जानकारी नहीं है।

ये है फर्जीवाड़ा
इन दिनों एक आवेदन पत्र चर्चा में है। जिसमें बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना के तहत 8 वर्ष से 32 वर्ष की बेटियों के लिए दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। आवेदन पत्र में सभी जानकारियों के साथ आवेदिका का बैंक शाखा का नाम, बैंक खाता संख्या और आईएफएससी कोड आदि की जानकारी के साथ नीचे एक कॉलम पार्षद या प्रधान के लिए दिया गया है। जो आवेदिका के नाम और माता पिता के नाम की संस्तुति करेगा। इस आवेदन पत्र में नीचे कहा गया है कि प्रधानमंत्री ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना की शुरुआत की है। 200 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि के साथ यह योजना देशभर में शुरू की गई है। जिसके तहत दो-दो लाख रुपये दिए जाएंगे।

प्रधान और पार्षदों के यहां पहुंच रहे लोग
देहात में प्रधान और नगरीय क्षेत्र में पार्षदों के यहां संस्तुति कराने वाले लगातार पहुंच रहे हैं। बाजार में फोटो स्टेट आदि दुकानों पर यह फार्म दो रुपये से 25 रुपये तक का बिक रहा है और आवेदन पत्र भरने वाले भी पचास से सौ रुपये ले रहे हैं। वहीं कुछ लोग आवेदन पत्र जमा कराने के नाम पर भी अशिक्षित और गरीब लोगों से पचास से सौ रुपये ले रहे हैं। लोग विभागों में जाकर आवेदन पत्र जमा करने को चक्कर लगा रहे हैं।

ऐसी कोई योजना नहीं है
इस मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी आशुतोष सिंह ने बताया कि उन्हें ऐसी किसी योजना की कोई जानकारी नहीं है। यह जरूर है कि उनके कार्यालय में भी कुछ आवेदन पत्र जमा कराने के लिए आए हैं। इस मामले में आशुतोष सिंह ने शनिवार को एक अपील भी जारी की है, जिसमें जनता से इस योजना के तहत कोई भी आवेदन न भरने को कहा है।

फर्जीवाड़े के पीछे संगठित गिरोह
इस फर्जीवाड़े के पीछे एक सोची समझी नीति के तहत संगठित गिरोह काम कर रहा है। जिसमें उसने अपना निशाना देहात के साथ ही शहर के उस पिछड़े इलाके को बनाया है, जिसमें लोग अशिक्षित होने के साथ ही गरीब भी हैं। इस गिरोह का पहला काम इस योजना का झूठा प्रचार कर आवेदन पत्र वितरित कराकर उसे भरवाने का चल रहा है। इसके साथ ही अब फार्म जमा कराने के नाम पर भी ये लोग छोटे स्तर पर ठगी करते हुए पचास से सौ रुपये तक वसूल रहे हैं। लेकिन असली ठगी का काम इसके बाद शुरू होगा, जिसमें ये लोग अनुदान स्वीकृत कराने के नाम पर पांच से दस हजार रुपये की वसूली आवेदन पत्र जमा कराने वालों से करेंगे।

प्रधानमंत्री और भाजपा को बदनाम करने की साजिश
इस मामले में सांसद राजेंद्र अग्रवाल का कहना है कि यह भाजपा और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की साजिश है। जब इतनी बड़ी संख्या में फार्म भरे जाएंगे और उनका कोई परिणाम सामने नहीं आयेगा तो निश्चित रूप से जनता के बीच रोष और अविश्वास पैदा होगा। इस मामले में जिला प्रशासन को गहनता से जांच कराने के साथ इस फर्जीवाड़े को करने वालों को चिह्नित करते हुए कार्रवाई तय करनी चाहिए।

पहले आवासीय योजना में हो चुका है घोटाला
प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर लोगों के साथ धोखा किया जा रहा है। लोग साइबर कैफे पर लाइनों में लगे हैं। यहां उनसे आवेदन के नाम पर धन की उगाही की जा रही है। जबकि, इस योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 15 नवंबर थी, जिसे गुजरे एक माह से भी ज्यादा का समय हो गया है। यही नहीं, सूबे में इस योजना के तहत मकान के लिए करीब 16 लाख लोगों ने आवेदन किया था। इनमें से करीब 10 लाख लोगों को ही पात्र पाया गया है। इसके लिए पहले चरण की डीपीआर भी तैयार कर ली गई है। बावजूद इसके अभी भी लोग इस योजना में आवेदन कर रहे हैं। इस संबंध में अमर उजाला ने 22 दिसंबर के अंक में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था।

क्रिसमस धूमधाम से मनया

क्रिसमस का त्योहार शहरभर में धूमधाम से मनाया गया। चर्च और गिरजाघरों में श्रद्धालुओं ने चरनी में प्रभु यीशु के दर्शन किए। वहीं मिस्सा बलिदान और प्रार्थना सभा की गई। चर्च और गिरजाघरों में मेले जैसा माहौल रहा। सभी ने एक दूसरे को क्रिसमस की बधाई दी। सांता क्लॉज ने जगह-जगह बच्चों को मिठाई और खिलौने बांटे।

क्रिसमस पर सुबह आठ बजे से ही चर्च और गिरजाघरों में लोग पहुंचने शुरू हो गए। बेगमपुल के निकट सेंट जोजफ चर्च में पहुंचे श्रद्धालुओं ने जहां प्रभु यीशु के जन्म की खुशी में मोमबत्तियां जलाई। वहीं मिस्सा बलिदान और प्रार्थना सभा की। फादर टाइटस, फादर संजय, फादर रोशन आदि ने श्रद्धालुओं को प्रभु यीशु के जन्म का संदेश दिया। कहा कि प्रभु यीशु मानव के रूप में मानव जाति से मिलने धरती पर आए और कल्याण किया। प्रभु यीशु ने समस्त मानव जाति को प्रेम, खुशी और आनंद के साथ जीवन जीने का संदेश दिया। बच्चा पार्क स्थित सेंट थॉमस चर्च के रैव्ह पीके जोशी ने चर्च में मिस्सा बलिदान कराया, वहीं प्रार्थना सभा कराई। उन्होंने सभी को प्रभु यीशु के संदेश की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रेम और ईमानदारी से जीवन जीना ही प्रभु यीशु को प्यार करना है। साकेत स्थित सेंट लुक्स चर्च में श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। श्रद्धालुओं ने चरनी में प्रभु यीशु की झांकी के दर्शन किए। वहीं प्रार्थना सभा की। फादर सहाय राज ने सभी को प्रभु यीशु का मानव जाति के प्रति संदेश दिया। रुड़की रोड स्थित सेंट पॉल मैथोडिस्ट चर्च, लालकुर्ती स्थित सेंट्रल मैथोडिस्ट चर्च, सिविल लाइन स्थित सिटी मैथोडिस्ट चर्च में श्रद्धालुओं ने प्रार्थना सभा की। सभी ने गले मिलकर एक दूसरे को बधाई दी। चर्च परिसर और बाहर खेल खिलौने और प्रभु यीशु के पोस्टर आदि की दुकानों पर लोगों खूब खरीदारी की।

मिले दिल से दिल तो जवां हो गई महफिल

मेडिकल कॉलेज में रविवार को चिकित्सकों और उनके परिवारों ने जमकर धमाल मचाया। गीत और संगीत की धुन पर सब झूम उठे। पुराने दोस्तों को देखकर सभी एक-दूसरे के गले से लिपट गए। जूनियर्स ने सीनियर्स से आशीर्वाद लिया। हालचाल पूछा और फिर मस्ती में डूब गए। मौका था 1966 बैच की गोल्ड जुबली और 1991 की सिल्वर जुबली का। सिंगर रितु पाठक की मधुर आवाज ने कार्यक्रम को और रंगीन कर दिया।

मेडिकल कॉलेज की ओल्ड स्टूडेंट्स एसोसिएशन (ओएसए) की तरफ से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अमेरिका, आस्ट्रेलिया से लेकर संयुक्त अरब अमीरात में सेवारत 1991 बैच के चिकित्सक भी पहुंचे। करीब 1100 से अधिक चिकित्सक, उनके परिवारों ने सेलिब्रेशन का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम की शुरुआत में मेडिकल कॉलेज के पहले बैच से जुड़े चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। 1991 बैच को पढ़ाने वाले चिकित्सकों को शॉल व स्मृति चिह्न भेंट किए गए। तमाम प्रतिस्पर्धाओं के लकी ड्रॉ निकाल कर ओएसए की तरफ से कुछ चुनिंदा चिकित्सकों को गिफ्ट भी दिए गए। रितु पाठक की धमाकेदार प्रस्तुति के बीच सब झूमने लगे। दोपहर 12 बजे से शुरू हुआ डांस का सिलसिला शाम चार बजे तक चलता रहा। डॉ. भूपेंद्र चौधरी, डॉ. ममतेश गुप्ता, डॉ. अमित उपाध्याय, डॉ. संजय गुप्ता, डॉ. पूजा शर्मा से लेकर डॉ. सीमा व अन्य चिकित्सकों ने मंच पर ठुमके लगाए।

गैलरी रही आकर्षण का केंद्र
मेडिकल कॉलेज के प्रांगण में आयोजित कार्यक्रम का सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र गैलरी रही, जो 1991 बैच की तरफ से बनी गई थी। गैलरी में पुरानी यादों को संजोया गया था। एंट्री प्वाइंट से लेकर कार्यक्रम स्थल तक टेबल लगाई गईं थीं। इन फोटो से 1991 बैच की यादें ताजा हो गईं।

ड्रेस कोड के हिसाब से थी डेकोरेशन
1991 बैच के सभी चिकित्सक ड्रेस कोड में थे। पुरुष चिकित्सक सफेद शर्ट व ब्लू कोट और पेंट में थे। ऑरेंज कलर की टाई लगाई हुई थी। महिला चिकित्सक ऑरेंज कलर की साड़ी पहने हुईं थीं। डेकोरेशन भी ऑरेंज और व्हाइट कलर से की गई थी। टेंट भी इन्हीं दो रंगों का था।

मौसम ने मारी पलटी, पारा तीन डिग्री गिरा

संडे की छुट्टी कूल कूल बीती। पूरे दिन बर्फीली हवा ने शहरवासियों की कंपकंपी छुड़ा दी। दिन भर कोहरे का असर रहा। शाम होते ही ठंड और बढ़ गई। अगले 48 घंटों तक ठंड अपने तेवर में रहेगी। पहाड़ों पर हुई बर्फबारी के बाद मैदान का मौसम बदला है। एक दिन पहले की अपेक्षा दिन के तापमान में तीन डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है।

सुबह के समय कोहरा हल्का था। थोड़ी देर के लिए धूप भी निकली, लेकिन सूरज फिर से बादलों में छिप गया। दिन भर धुंध छायी रही और बर्फीली हवा ने भी ठंड को बढ़ा दिया। शाम को हाईवे की दृश्यता 20 मीटर तक ही रह गई। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 21.1 डिग्री व रात का न्यूनतम तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम आर्द्रता 93 न्यूनतम 36 प्रतिशत दर्ज की गई। एक दिन पहले की अपेक्षा दिन और रात के तापमान में 3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान के मौसम वैज्ञानिक डॉ. शमीम अहमद का कहना है कि अभी दो दिन तक मौसम का मिजाज ऐसे ही बना रहेगा। सुबह के समय कोहरा रहेगा और दिन में भी हवा से ठंड बनी रहेगी। 28 दिसंबर से फिर मौसम में बदलाव दिखाई देगा।

पिछले छह दिनों का तापमान
तारीख अधिकतम न्यूनतम
20 25.0 9.8
21 24.1 8.6
22 21.7 6.6
23 25.1 7.2
24 24.2 6.4
25 21.1 9.2

फिर से सक्रिय हो रहा है पश्चिमी विक्षोभ
मौसम विभाग की मानें तो बर्फीली हवा पहाड़ों से आ रही है। बर्फबारी और बारिश के चलते मौसम सर्द बना हुआ है, जिसका असर यहां पर भी दिखाई दे रहा है। जब भी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, तभी मौसम में बदलाव दिखाई देगा और ठंड बढे़गी।

ठंड में भी चिकनगुनिया के मरीज मिले

सर्दी में भी चिकनगुनिया फैलाने वाले एडिस एजिप्टी मच्छर खत्म नहीं हो रहे हैं। पिछले 24 दिनों में ही पांच मरीज चिकनगुनिया के सामने आ चुके हैं। इनमें दो मरीज तो शनिवार को आए हैं। इससे खतरा बढ़ गया है। जैसे ही सर्दी के बाद गर्म दिन शुरू होंगे संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका है।

सामान्य तौर पर सर्दी शुरू होते ही मच्छर खत्म हो जाते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो रहा है। चिकनगुनिया और डेंगू फैलाने वाला एडिस एजिप्टी मच्छर अधिक एक्टिव हैं। शनिवार को लाला लाजपत राय मेमोरियल मेडिकल कालेज स्थित माइक्रो बायोलॉजी विभाग की तरफ से जागृति विहार निवासी सोनिया (27) व शकुंतला (40) में चिकनगुनिया की पुष्टि की गई। सीएमओ डॉ. वीपी सिंह ने एसीएमओ वैक्टर बोन व जिला मलेरिया अधिकारी को निर्देश दिया है कि संबंधित मरीजों के घरों को सर्वे कराया जाए। कीटनाशक दवा का छिड़काव करें। नियमित तौर पर मरीजों से जुड़े क्षेत्र में लगातार फॉगिंग व कीटनाशक का छिड़काव करते रहें। गर्मियों में करीब चार महीने तक चिकनगुनिया और डेंगू के मच्छर ने कहर बरपाया था, जिसकी वजह से हजारों लोगों को अस्पतालों में भर्ती होना पड़ा। कुछ लोगों की जान भी चली गई। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तलब कर लिया था जिसके बाद इसे महामारी घोषित किया गया।

प्राइवेट में भी मरीज
सरकारी रिकॉर्ड में चिकनगुनिया के पांच ही केस इस माह दर्ज हुए हैं। लेकिन स्थिति इससे कहीं ज्यादा खराब है। क्योंकि दर्जनों से अधिक मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं, जिनकी पुष्टि निजी लैब के आधार पर की गई है।

आने वाले समय के लिए खतरा
ठंड में चिकनगुनिया के मरीजों का सामने आना भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। स्वयं मलेरिया विभाग मान रहा है कि अगर ठंड में एडिस एजिप्टी मच्छर एक्टिव है तो गर्मी में इसकी प्रजनन क्षमता बढ़ जाएगी। ऐसी स्थिति में मार्च की शुरुआत से ही चिकनगुनिया के मरीजों की संख्या बढ़ सकती है।

विभाग जनवरी से चलाएगा अभियान
स्थिति को देखते हुए मलेरिया विभाग ने जनवरी से ही अभियान चलाने का प्लान बनाया है। मशीन एवं दवाएं खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। जिला मलेरिया अधिकारी योगेश सारस्वत का कहना है कि जितने भी जगहों पर चिकनगुनिया की पुष्टि हुई है, वहां पर सैंपल सर्व कराकर फॉगिंग कराई जा रही है। कीटनाशकों का भी छिड़काव किया जा रहा है। वहीं आगे की तैयारी के लिए कीटनाशक दवा व फॉगिंग मशीनों को खरीदने की फाइल तैयार कर भेजी गई है। मुख्यालय को पत्र लिखा गया है।

महीने भर से एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं
प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट द्वारा सख्ती दिखाए जाने पर डेंगू और चिकनगुनिया को महामारी घोषित किया था। इसके बाद भी आलम यह है कि जिले में एक माह से एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं किया गया है। एसीएमओ (वेक्टर बोन डिजीज) डॉ. केपी सिंह का कहना है कि एंटी लार्वा खत्म है। इस कारण छिड़काव नहीं हो पा रहा है। एक-दो दिन पहले ही दवा आई है। जल्द ही छिड़काव शुरू करा दिया जाएगा।

चिकनगुनिया के लक्षण
खांसी, सर्दी के साथ तेज बुखार।
जोड़ों में दर्द और सूजन की शिकायत।
सिर में तेज दर्द और गर्दन में जकड़न।
बुखार के साथ जी मिचलाना व भूख में कमी।
बुखार जाने के बाद जोड़ों में दर्द करेगा परेशान।

ऐसे करें बचाव
घर के आसपास साफ पानी न भरने दें।
सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
ज्यादा से ज्यादा गुनगुने पानी व पेय खाद्य पदार्थ लें।