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ट्र्रैफिक की पहली परीक्षा में फे ल हुए होमगार्ड

ट्रैफिक पुलिस की पहली ही परीक्षा में होमगार्ड फेल हो गए। एसपी ट्रैफिक के आदेश पर मंगलवार को होमगार्डों की एक घंटे की लिखित परीक्षा कराई गई। परीक्षा के बाद सभी को यातायात नियमों की जानकारी की भी दी गई। जांच में सामने आया है कि 50 प्रतिशत होमगार्ड के पास ड्राइविंग लाइसेंस नहीं हैं।

जिले में ट्रैफिक पुलिस में सौ होमगार्ड तैनात हैं। मंगलवार को एसपी ट्रैफिक किरन यादव के आदेश पर पहले चरण में 45 होमगार्डों की लिखित परीक्षा कराई गई। जिसमें ट्रैफिक के नियम संबंधी 20 आसान से सवाल पूछे गये। लाल बत्ती, नीली बत्ती पर क्या करना चाहिए। इस पर भी होमगार्ड जवाब नहीं दे सके। चौराहे पर वाहनों को कैसे पार करायें इसके बारे भी नहीं बता सके। दो होमगार्ड ही बीस अंकों में से 16 अंक प्राप्त कर सके। जिसके बाद राजस्नेह मारुति ड्राइविंग स्कूल के एजीएम अश्विनी गुप्ता ने होमगार्डाें को ट्रेनिंग दी। एसपी ट्रैफिक किरन यादव और ट्रैफिक इंस्पेक्टर सुनील कुमार ने यातायात नियमों के बारे में बताया। एसपी ट्रैफिक ने बताया कि दूसरे चरण में उन होमगार्डों को ट्रेनिंग दी जाएगी जिनकी ड्यूटी रात्रि में लगी हुई है। ट्रेनिंग एक सप्ताह तक दी जाएगी। जांच में पता चला है कि ट्रैफिक में सौ होमगार्डों में से 52 के पास डीएल नहीं है। पूछने पर होमगार्डाें ने बताया कि वह बिना डीएल के वाहन चलाते हैं, उन्हें कोई रोकता नहीं है। एसपी ट्रैफिक ने कहा कि एक सप्ताह की ट्रेनिंग के बाद सभी के डीएल बनवाए जाएंगे।

बेसिक शिक्षा विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग में बड़ा खेल, शिक्षकों से मांगे गये आवेदन

बेसिक शिक्षा विभाग में ट्रांसफर, पोस्टिंग में बड़ा खेल कर दिया गया है। नियमों और मानकों को ताक पर रखकर शिक्षकों से ट्रांसफर आवेदन मांगे गये हैं। ट्रांसफर के लिए जिन स्कूलों की सूची तैयार की गयी है, उनमें ऐसे भी स्कूल शामिल हैं, जहां किसी खास विषय का शिक्षक या तो पहले से है या वहां शिक्षक मानक के अनुरूप हैं। इसके अलावा आवेदन की अंतिम तिथि पर ही सूची एनआईसी पर अपलोड की गई।

ये है पूरा मामला
बेसिक शिक्षा विभाग में शासन से 8 अगस्त को नई ट्रांसफर नियमावली जारी हुई थी। लेकिन तब इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। जबकि दूसरे जनपदों में ट्रांसफर पोस्टिंग कर दी गयी। अब दिसंबर माह में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के भीतर ही ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू की और सीडीओ के पास फाइल भेजी। सीडीओ ने आपत्ति लगाते हुए फाइल लौटा दी। सीडीओ ने कहा कि पहले सूची एनआईसी पर अपलोड की जाये। बीएसए कार्यालय ने इसमें भी खेल कर दिया। ट्रांसफर के लिए आवेदन पत्र लेने की अंतिम तिथि 15 दिसंबर दिखाते हुए 15 दिसंबर को ही अपलोड कर दी गई। अपलोड किया गया पत्र बैकडेट में 9 दिसंबर को जारी दिखाया गया। इससे शिक्षक सूची देखने से वंचित रह गये। जबकि चहेते शिक्षकों को पहले से सूची दिखाकर उनके आवेदन भरवा दिये गये।

ऐसे खुला मामला
जब कुछ शिक्षकों ने 15 दिसंबर को सूची एनआईसी पर देखी और आवेदन पत्र भरकर अपने खंड शिक्षा अधिकारी के पास पहुंचे तो वहां आवेदन लेने से इंकार कर दिया गया। शिक्षकों ने विरोध जताया, लेकिन उनके आवेदन स्वीकार नहीं किये गये। शिक्षकों का आरोप है कि आवेदन पत्र लेने में भी खेल किया गया है। गणित विषय वाले शिक्षकों को विज्ञान विषय के रिक्त पदों पर ट्रांसफर की तैयार हो रही है, तो विज्ञान विषय के रिक्त पद पर सामान्य विषय के शिक्षक को भेजे जाने की तैयारी करते हुए आवेदन पत्र लिये गये हैं।

प्राथमिक स्कूलों में और भी बड़ा खेल
शहरी आवासीय भत्ता और आने-जाने की सुविधा वाले स्कूलों में अधिकांश शिक्षक जाने के इच्छुक होते हैं। ऐसे स्कूलों में भले ही शिक्षकों की संख्या पर्याप्त हो, फिर भी जगह रिक्त दर्शायी गयी है। हालांकि यह नियम के तहत दर्शायी गयी है। लेकिन जनपद में इतने शिक्षक नहीं हैं कि दूसरे स्कूल जहां शिक्षक पहले से कम हैं और बच्चे ज्यादा हैं, वहां पर भी तैनाती दे दी जाये। ऐसे स्कूलों में हस्तिनापुर के पहाड़पुर में तीन शिक्षकों के पद रिक्त हैं, लेकिन दूर होने के कारण वहां कोई जाना नहीं चाहता। जबकि तमाम दूसरे स्कूल ऐसे हैं, जहां 125 बच्चों पर 4-5 शिक्षक तैनात हैं, फिर भी वहां एक पद रिक्त दिखाया गया है। जबकि बीएसए आफिस को सिर्फ उन्हीं स्कूलों में रिक्ति दर्शानी चाहिए थी, जहां शिक्षक बहुत कम हैं।

चुनाव के लिए जा चुका है डाटा
दिसंबर में ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि चुनाव में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक ड्यूटी पर लगाये जाते हैं। जिनका डाटा एनआईसी को अपडेट करने के लिए भेज दिया गया है। ऐसे में यदि इन शिक्षकों का ट्रांसफर होता है तो उनके ड्यूटी पत्र सही पते पर नहीं पहुंच पाएंगे और निर्वाचन कार्य बाधित होगा। क्योंकि एनआईसी पर 127 उच्च प्राथमिक और 234 प्राथमिक स्कूलों की सूची अपलोड की गयी है।

हो चुकी है सेटिंग
विभागीय सूत्रों की मानें तो बीएसए कार्यालय में एक माह से इस ट्रांसफर पोस्टिंग को लेकर तैयारी के बीच सेटिंग का खेल चल रहा है। मनचाही पोस्टिंग के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तक के रेट तय हुए हैं। जिसके चलते दिसंबर माह में चुनाव से पहले अचानक प्रक्रिया शुरू हुई है। क्योंकि मई में बीएसए सेवानिवृत्त हो रहे हैं और फरवरी में चुनाव की संभावना है।

एसी और सामान्य बसों में टिकट काट रहीं महिला कंडक्टर

महिला सशक्तिकरण के दौर में मेरठ की बेटियां भी किसी से पीछे नहीं है। पढ़ाई-लिखाई और खेलों में नाम कमाने के साथ ही बेटियों ने अब पुरुष प्रधान नौकरियों में भी हाथ आजमाना शुरू कर दिया है। मेरठी बेटियों ने न केवल रोडवेज परिचालक की परीक्षा पास की, बल्कि ईटीएम थामकर टिकट भी काट रही हैं। अमर उजाला ने भैसाली डिपो में कार्यरत महिला परिचालकों से बात की तो उन्होंने बेबाकी से सफलता की कहानी शेयर की।
परिवार के लिए जरूरी थी नौकरी
मेरठ से दिल्ली के बीच चलने वाली भैसाली डिपो की एसी बस संख्या यूपी-12 एटी 0038 पर तैनात माधवपुरम निवासी परिचालक शीतल अग्रवाल ईटीएम से यात्रियों के टिकट काट रही थी। शीतल ने बताया कि उनके पिता और दो भाई प्राइवेट जॉब करते हैं। घर की आर्थिक जरूरत को पूरा करने के लिए नौकरी जरूरी थी। एमए करने के बाद वर्ष 2015 में परिचालक भर्ती में नंबर आ गया। पांच दिसंबर से रूट पर चल रही हूं। यात्रियों का पूरा सहयोग मिल रहा है।

महिलाएं किसी से नहीं कम
मेरठ-दिल्ली रूट की एसी बस में तैनात माधवपुरम निवासी रीता ने बताया कि उनके पिता बीमार रहते हैं। मां गृहिणी है। मेहनत से पढ़ाई कर परिचालक की नौकरी हासिल की। ऑफिस की बजाय अधिकारियों ने रूट पर चलने को कहा तो मैं भी इसके लिए तैयार हो गई। रूट पर अभी तक र्कोई परेशानी नहीं हुई हैं। आज की महिलाएं किसी से कम नहीं है।

निभा रही जिम्मेदारी
मेरठ से आगरा रूट की एसी बस पर तैनात मलियाना निवासी रमा की कहानी संघर्ष से भरी है। पिता मजदूरी करते हैं और मां गृहिणी है। परिवार की आर्थिक हालत सुधारने के लिए उन्होंने एमए बीएड किया और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की। परिचालक में नंबर आया तो बेहद खुशी मिली। टीईटी का एग्जाम दिया है। शिक्षक बनने का मौका मिला तो ही वे इस नौकरी को छोड़ने का फैसला करेंगी।

नौकरी पाकर हूं खुश
मेरठ-आगरा रूट की एसी बस पर तैनात मलियाना निवासी ज्योति ने बताया कि चार भाई-बहनों को पिता ने मेहनत कर पढ़ाया। उन्होंने अंग्रेजी विषय से एमए किया है। वे घर में सबसे बड़ी हैं, बाकी भाई बहन पढ़ रहे हैं। परिचालक की नौकरी मिलने से वह और परिवार खुश है।

12 परिचालक मिली है रीजन को
मेरठ रीजन को 120 नए परिचालक मिले हैं। इनमें से 12 महिला परिचालक हैं। मेरठ डिपो को 7, भैसाली डिपो को 4 और सोहराबगेट डिपो को एक महिला परिचालक दी गई है। सभी ने ट्रेनिंग के बाद रूट पर जाना शुरू कर दिया है। -मनोज कुमार पुंडीर, आरएम

Fertiliser sales drop 6 times due to cash crunch, wheat harvest likely to be hit

MEERUT: The government’s decision to allow old currency notes for buying and selling of seeds ensured that sowing of Rabi crops in western UP did not fall below 10% compared to last year, but demonetisation has hit sale of fertilizers hard. According to officials, the sale of fertilisers in the region has dropped nearly six times compared to last year since old notes cannot be used to buy them. Many farmers sowed their crops on time but without the use of fertilisers. This drop, officials said, will severely impact the yield from Rabi crops.
Wheat is the predominant Rabi crop in the region as well as the rest of north India, and fertilisers play a critical role during the period immediately before sowing and up to a few weeks after sowing, when wheat seeds germinate the fastest and require the most amount of nutrients. According to norms by the Food and Agriculture Organisation (FAO), in Indian conditions, an area of approximately 1.4 hectares, expected to produce 4.6 tonnes of wheat, needs nitrogen-supplementing fertilisers equivalent to 128 tonnes at the very least, in addition to other macro and micro nutrients.
“Everybody has been looking at the wrong figures so far. Sowing of seeds itself has not been compromised that much, because the government has allowed the use of old notes for farmers to buy seeds in the market. However, the impact of demonetisation on the sale of fertilisers has been severe. In Bulandshahr district alone, the sale of fertilizers has dipped to about six times. I asked for data from other districts in western UP and the situation is almost exactly the same everywhere,” a senior district official in Bulandshahr told TOI.
The official added, “The most commonly used fertiliser by wheat farmers is di-ammonium phosphate (DAP), which has to be used at the time of sowing. DAP is mixed with the soil before the seeds are planted in the ground. Many farmers were desperate to start the sowing process so they decided to go ahead without using fertiliser. This will also impact the yield from the crop this year.”
Another official said, “While fertiliser purchase is allowed on credit, farmers have to pay it using kisan credit cards, which have a limit of Rs 80,000, which most farmers have already exceeded. Also, they have to repay credit in cash, which they are doing in demonetised notes, which is not permitted now.”
The impact of demonetisation on sowing, while not “significant”, has also been felt. Jasvir Singh, Meerut district agriculture officer, said, “There has only been about a 10% drop in sowing compared to last year. There were some problems in the first week of demonetisation but after the government announced that farmers could use old notes to buy seeds, things picked up again.”
Vinod Jatoli, a wheat farmer in Meerut, said, “By this time of year, I usually buy around 10 kg of DAP. This year, however, I have only been able to buy 2 kg. I was lucky that I had some cash at hand. Some of my friends had to use leftover fertiliser from last year but it was not enough. Others have not been so lucky.”

UPSRTC employees call of strike after state meets demands

Meerut: The Uttar Pradesh State Road Transport Corporation (UPSRTC) employees called off their strike, which was to begin on December 6, after state authorities agreed to their set of demands, including a fixed minimum wage of Rs 17,000 for contract employees.
Speaking to TOI, Lakhan Singh, Meerut regional secretary, UP Roadways Karamchari Sanyukt Parishad, said, “After the strike we conducted in September this year, we were assured that our demands will be fulfilled but no steps were taken. So, this time we practiced caution. Early morning on Tuesday, most of our demands were met including fixing a minimum wage of Rs 17,000 for contract employees.” The association had taken out a rally to announce the strike on December 2.
Their demands included giving equivalent minimum wage to contract employees as is given to employees on roll, payment of pending dearness allowance to contract workers, solving income disparity issues in the department and many others. The strike was to start from December 6 midnight and go on till December 7 midnight but much before the strike could start, state authorities agreed on most of the demands on Tuesday morning.
“As many as 2,500 employees – including drivers, conductors, clerks and mechanics were to support the strike under our banner starting December 6 but now it has been called off because our demands have been met. The state authorities have paid the pending dearness allowance to contract employees and to those who are on pay-roll. Also, workshop employees who were the only ones without uniforms will be given the same by December 15 – making them equivalent to drivers and conductors,” said Pramod Kumar, president of the employees’ union.
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Police organise self-defence training camp for women

MEERUT: Meerut police organised a day-long self-defence training camp for women in the police lines premises, on Sunday. The training which was conducted by experienced trainers from the Kailash Prakash Stadium, primarily focused on teaching women and children means to protect themselves from criminals or attackers in times of danger.
Women from the police lines area were persuaded to take part in the training programme. Even students from various schools across the city had come to participate. The women and the schoolchildren received intense training in various techniques which focused on incapacitating the attacker.
“Crime against women is a growing concern for the Meerut police. Incidents such as rape and eve-teasing have increased. While the UP police is adept at providing protection to the women, we also thought that it is important for women to be trained in self-defence, so that they are able to protect themselves,” said Paan Singh, public relations officer (PRO), Meerut police.
“The training went on for around three hours, and it was free of charge. Around 70 women in all participated in the exercise. We will organise more such training programmes in the future,” Singh said.

Urgent Job Opportunity for Social Media Expert @ Nageen Group of Schools

In my endeavor to build a stronger and smart Meerut– I am trying to find enterprising individuals… …Nageen Group is inviting applications from smart, dedicated young software engineers… please refer someone who is interested in job profile as posted below– they may post resume to jitendra@nageen.com or call 9008577211

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Urgent Openings for Marketing Executives @ Nageen Group of Schools – Meerut

Nageen Group of Schools is looking for smart, confident and enterprising young individuals for its Marketing Division. Interested Candidates may apply to jitendra@nageen.com with their updated profiles or may contact 9008577211 for urgent requirement. Salary is as per industry standards and no bar for individuals with good communication and proven track record.

केंद्रीय विद्यालयों में होंगी 6 हजार भर्तियां

education_1474483856केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से 2016 की भर्ती प्रक्रिया का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। टीजीटी, पीजीटी, पीआरटी और प्रिंसिपल के 6205 पदों के लिए आवेदन जारी किए जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया 27 सितंबर से ऑनलाइन शुरू होगी।

केवीएस की ओर से जारी नोटिफिकेशन के तहत प्राचार्य पद के 90, पीजीटी के 690, टीजीटी के 926 और प्राथमिक शिक्षक (पीआरटी) के 4499 पदों पर भर्ती की जाएगी। भौतिकी, विज्ञान, हिंदी, संगीत, संस्कृत, गणित, कला, सामाजिक विज्ञान समेत कई अन्य विषयों पर रिक्तियां निकली हैं। गत वर्ष सितंबर में पेपर आउट होने के कारण परीक्षा को निरस्त कर दिया गया था। उन सभी अभ्यर्थियों को, जिन्होंने 2015 की परीक्षा के लिए आवेदन किया था को, पुराने आवेदन शुल्क पर ही आवेदन करने की सुविधा दी गई है। इससे हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलेगी।

पुरानी एजेंसी ब्लैक लिस्टेड हुई
मई 2015 में केवीएस ने स्नातकोत्तर शिक्षकों की विभिन्न विषयों में भर्ती प्रक्रिया के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था। इसके तहत सितंबर 2015 में परीक्षा होनी थी। पहला पेपर होने के बाद दूसरा पेपर आउट हो गया था। इस पर केंद्रीय विद्यालय संगठन ने पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था। केवीएस की ओर से पेपर आउट कराने में डाटा एजेंसी की भूमिका को संदिग्ध माना गया, लिहाजा एजेंसी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया।
इस बार केवीएस ने नए सिरे से आवेदन मांगे हैं। 2015 की भर्ती प्रक्रिया में आवेदन करने वाले अभ्यर्थी यदि आयु सीमा की शर्त पूरी करते हैं तो वे भी आवेदन कर सकते हैं। उन्हें नया शुल्क देने की जरूरत नहीं है। चर्चा है कि इस बार कोई निजी एजेंसी नहीं बल्कि सीबीएसई ही केंद्रीय विद्यालयों की भर्ती परीक्षा आयोजित कराएगा। हालांकि इस बारे में अभी कोई पत्र जारी नहीं हुआ है।


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