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रात का पारा 4.5 डिग्री चढ़ा

raat ka paara 4.5 degree chada
फाइल फोटो – फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

सुबह आसमान पर बादलों के बीच दोपहर में धूप खिली तो तापमान एक डिग्री चढ़ गया। रात का पारा 4.5 डिग्री सेल्सियस बढ़ गया। मौसम वैज्ञानिकों की मानें तो बुधवार से मौसम साफ रहेगा।

तीन दिन तक आसमान पर बादल रहने के बाद अब मौसम का मिजाज फिर से बदलेगा। बारिश तो नहीं हुई, लेकिन बादलों से तापमान गिर गया। हवा ने मौसम भी ठंडा कर दिया। मौसम में उतार चढ़ाव के बीच रात का तापमान अधिकतम स्तर पर पहुंच गया। सुबह बादलों के बीच चल रही हवा से मौसम में नमी बनी हुई थी। दोपहर तक धीरे-धीरे मौसम साफ हुआ और फिर से धूप खिली। धूप खिली तो पारा भी बढ़ गया। मौसम कार्यालय पर दिन का अधिकतम तापमान 22.4 डिग्री व रात का न्यूनतम तापमान 12.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अधिकतम आर्द्रता 70 व न्यूनतम 36 प्रतिशत दर्ज की गई। कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि रात का तापमान इस सीजन में सबसे अधिक रिकॉर्ड किया गया है। अब बुधवार से मौसम साफ रहेगा और दिन के तापमान में भी बढ़ोतरी होगी। दिन का पारा फिर से 25 डिग्री के पार पहुंचेगा। रात का तापमान थोड़ा कम होगा। अभी रात का तापमान सामान्य से 6 डिग्री ऊपर पहुंच गया है। दिन का 2 डिग्री अधिक है।

हृदय रोगी रहें सावधान, ठंड न कर दे परेशान

heart patient be alert
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 बदलता मौसम अपने साथ कई तरह की बीमारियां भी लेकर आता है। ठंड के मौसम में सांस के मरीजों केसाथ-साथ दिल के मरीजों को भी सावधान रहने की जरूरत है। दरअसल, इस मौसम में रक्त धमनियां सिकुड़ने लगती हैं, रक्तचाप बढ़ जाता जाता है और हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा रहता है।
हालांकि थोड़ी सी सावधानी बरतने से इससे काफी हद तक बचा जा सकता है। मॉर्निंग वॉक पर नियमित जाने वाले लोगों को बिस्तर छोड़ने के तुरंत बाद घर से निकलने के बजाय घर पर ही थोड़ी एक्सरसाइज कर लेनी चाहिए। गर्म कपडेृ में ही घर से बाहर निकलना चाहिए। वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव अग्रवाल और डॉ. ममतेश बताते हैं कि ठंड में हार्ट अटैक की वजह यह होती है कि हार्ट तक खून पहुंचाने वाली धमनी में जमी फैट के थक्के से रक्त फ्लो रुक जाता है और रक्त न मिलने से दिल की मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे धीरे-धीरे मांसपेशियों की रफ्तार कम हो जाती है। लिहाजा सूरज निकलने के बाद ही घूमने जाएं तो बेहतर है। खराब मौसम में घूमने न जाएं, अपनी दवाएं जरूर खाएं। सीने के बीच में दर्द हो तो ईसीजी जरूर कराएं। इसे सिर्फ गैस का दर्द न मानें।

हार्ट अटैक के लक्षण
– सीने में दर्द या ऐंठन होना
– थकान और कमजोरी महसूस होना
– पसीना, चक्कर आना, सांस फूलना और नींद न आना
– हाथों, कंधों, जबड़ों आदि में दर्द होना या उल्टी आना

ये करें फौरन
– अटैक की आशंका होते ही तुरंत डॉक्टर या इमरजेंसी कॉल करें
– दर्द होने पर मरीज केसीने पर हाथ रखकर पंपिंग करते हुए दबाएं
– डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा लें

ये बरतें सावधानी
– घर से बाहर निकलने पर सिर, कान, नाक, गला आदि अच्छे तरीके से ढक लें।
– खुले में अलाव तापने से बचें, कमरे को हीटर या ब्लोअर आदि से गर्म रखें।
– चिकनाई वाले तैलीय या घी युक्त भोजन के सेवन से बचें।
– दिनभर पानी का सेवन करते रहें।
– खाली पेट न रहें, नशा करने से बचें।
– रक्तचाप और मधुमेह की जांच कराएं, इसे नियंत्रित करने की नियमित दवा लें।

एसएसपी आवास के अंदर जा पहुंचा सीएम सचिवालय का अधिकारी

Officer of the CM Secretariat, went inside the SSP Housing
कार की फाइल फोटो।PC: अमर उजाला
डीएम आवास पर अधिकारियों को गुमराह करके सीएम सचिवालय से जुड़ा अधिकारी एस्कॉर्ट लेकर एसएसपी मंजिल सैनी के आवास जा पहुंचा। आवास के अंदर अपरिचित व्यक्ति को देखकर एसएसपी ने उसे तुरंत वहां से निकाला और गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों को जमकर हड़काया। इस मामले की जानकारी एसएसपी ने सीएम सचिवालय में दी है। पुलिस इसकी जांच करने में जुटी है।

मामला रविवार सुबह 10 बजे का है। डीएम आवास पर एक व्यक्ति बाइक से पहुंचा और खुद का परिचय सीएम के सचिव के रूप में दिया। यहां से गुमराह करके ली गयी एस्कॉर्ट लेकर ये व्यक्ति एसएसपी आवास पहुंचा। यहां इस व्यक्ति ने अपना नाम डॉ. एमएटी रिजवी बताया और खुद को सीएम सचिवालय में सूचना प्रसारण का अधिकारी बताया। एसएसपी के पीआरओ धीरज शुक्ला को विजिटिंग कार्ड देकर रिजवी आवास के अंदर पहुंच गया। ऐसे किसी को संदिग्ध तरीके से घूमता देखकर एसएसपी ने डॉ. रिजवी को वहां से निकाला। रिजवी ने एसएसपी को ये कहकर प्रभाव में लेने का प्रयास किया कि वह सीएम का सचिव है और डीएम की एस्कॉर्ट लेकर आया है।

एसएसपी ने पीआरओ समेत आवास पर तैनात पुलिसकर्मियों को हड़काया और पूछा कि कोई ऐसे अनके आवास में कैसे आ गया। एसएसपी ने लखनऊ में सचिवालय में फोन कर जानकारी ली कि डॉ. रिजवी कौन व कहां पर तैनात है, इसकी कोई पुष्टि न होने पर पुलिस में खलबली मच गई। पीआरओ ने डीएम आवास पर फोन कर एस्कॉर्ट देने की बात पूछी। जहां से जानकारी मिली कि एस्कॉर्ट तो डॉ. रिजवी वापस डीएम आवास पर छोड़ गए हैं।

एस्कॉर्ट का अधिकार नहीं
डॉ. रिजवी को छोटा मवाना का निवासी बताया गया है। डॉ. रिजवी के सीयूजी नंबर पर अमर उजाला ने बात की तो उसने बताया कि वह पहले पत्रकार था। मानवाधिकार आयोग में उसने नौकरी की और अब वह सचिवालय में सूचना प्रसारण विभाग में है। उसको बेटे के चरित्र प्रमाणपत्र का सत्यापन कराना था, इसीलिए वह एसएसपी के पास गया था, लेकिन ढाई घंटे तक एसएसपी नहीं मिलीं। उसने स्वीकार किया कि उसको एस्कॉर्ट का अधिकार नहीं है, डीएम आवास से अनाधिकृत तरीके से एस्कॉर्ट ली।

जांच बैठी, मामला कितना सही 
एसएसपी आवास से जाने के बाद भी डॉ. रिजवी ने सीयूजी नंबर 9454411834 से एसएसपी के सीयूजी नंबर पर कॉल की। उन्होंने खुद को मुजफ्फरनगर की सीमा में होना बताकर फिर दोबारा आने की बात कही है। उसके बाद एसएसपी के पीआरओ ने उनको फोन कर वापस आने को कहा, लेकिन उन्होंने आने से इंकार कर दिया। एसएसपी ने इस मामले में जांच बैठा दी है कि आखिर मामला कितना सही है। सर्विलांस की टीम इसकी जांच में जुट गई है।

कैसे अंदर आ सकता कोई 
एसएसपी मंजिल सैनी दहल का कहना है कि उनके आवास में अंदर आने का किसी को कोई अधिकार नहीं है। खुद को सचिवालय में अधिकारी बताने वाला उनके आवास में अंदर तक कैसे पहुंच गया। इसकी जांच कराई जा रही है। प्राथमिक जांच की रिपोर्ट के बाद डॉ. रिजवी के खिलाफ कार्रवाई होगी। लखनऊ सीएम सचिवालय से भी इसकी शिकायत की है।

जिले में हुआ 54.09 प्रतिशत मतदान

jile me hua 54.09 percent voteing
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
नगर निकाय सामान्य चुनाव के लिए बुधवार को जिले में 54.09 प्रतिशत मतदान हुआ। छिटपुट घटनाओं ंके बीच मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई। सुबह 7:30 बजे से मतदान प्रारंभ होकर शाम 5 बजे तक चला। कुछ स्थानों पर मतदाताओं की लंबी कतारों के कारण शाम 5:30 बजे तक भी मतदान होता रहा।
जिला निर्वाचन कार्यालय द्वारा मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद नगर निगम में 50.87 प्रतिशत मतदान व दो नगर पालिकाओं व 13 नगर पंचायतों के लिए 70.53 औसत मतदान प्रतिशत की सूचना जारी की गई। निर्वाचन कार्यालय ने यह सूचना चुनाव आयोग को भेज दी। चुनाव कंट्रोल रूम के प्रभारी एडीएम (ई) एसपी पटेल ने बताया कि छिटपुट घटनाओं व ईवीएम की कुछ शिकायतों के अलावा शेष शांतिपूर्वक मतदान संपन्न हुआ है। सभी ईवीएम परतापुर कताई मिल मेें जमा करा दी गई हैं। नगर निगम में 50.87 प्रतिशत व देहात में 70.53 प्रतिशत मतदान हुआ।

इस प्रकार रहा मतदान प्रतिशत
नाम————7.30-9.00 बजे,   9-11 बजे, 11-1बजे, 1-3 बजे,  3-5बजे
नगर निगम मेरठ-   6, 20, 30, 41,  50.87
नगर पालिका सरधना- 13, 31, 37, 50.3, 67.3
नगर पालिका मवाना- 11, 23,38,48,60
नगर पंचायत करनावल- 11.6, 34, 37, 59, 75
नगर पंचायत परीक्षितगढ़- 14.69, 25.99, 36.83, 55, 66.01
नगर पंचायत लावड़- 15,35,39,55,73
नगर पंचायत हस्तिनापुर- 13, 21, 38, 53, 65.97
नगर पंचायत सिवाल- 15, 27, 36, 55.9, 72.59
नगर पंचायत बहसूमा- 13, 27.3, 45, 62, 72
नगर पंचायत खरखौदा- 15, 20, 47, 52, 75
नगर पंचायत दौराला- 12, 22,39, 59, 70
नगर पंचायत फलावदा- 12.5, 31.5, 49.5, 54, 61
नगर पंचायत किठौर- 12, 33, 51, 61, 76.5
नगर पंचायत शाहजहांपुर- 13, 31, 42, 50, 62
नगर पंचायत हर्रा- 15, 30, 51, 65, 78.5
नगर पंचायत खिवाई- 15, 27, 44, 58, 82

जयललिता के बंगले पोएस गार्डन पर इनकम टैक्स का छापा

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित पोएस गार्डन पर 17 नवंबर की रात आयकर विभाग का छापा पड़ा। यह वही बंगला है, जिसमे राज्य की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता रहती थीं। उनकी करीबी शशिकला भी वहीं रहती थीं। आजकल शशिकला जेल में हैं। उन्हीं की कथित अवैध संपत्ति का पता लगाने के लिए यह छापामारी हुई। उनके ठिकानों पर कई दिन से छापामारी हो रही है। कुछ दिन पहले 150 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए थे। इसके लिए किराए की गाड़ियों में शादी का स्टिकर लगा कर अफसर पहुंचे थे, ताकि किसी को शक न हो।

पोएस गार्डन पर इन दिनों सन्नाटा रहता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पोएस गार्डेन के गार्ड ने बताया था कि ये जगह इतनी भयानक हो चुकी है कि कोई भी यहां लंबे समय तक नहीं रहना चाहता। अब तक इस हवेली में मरम्मत का काम चल रहा था, लेकिन अब इसे पूरा कर लिया गया है। गार्ड ने बताया कि यहां के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। शशिकला के जेल जाने के बाद यहां कोई आया नहीं। जिन गार्डों को नाईट शिफ्ट में यहां ड्यूटी पर लगाया गया है वे यहां काम नहीं करना चाहते हैं।

प्रतिबंधित वाहनों पर आरटीओ सख्त, 60 सीज किए

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित किए गए 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने वाहनों के खिलाफ शासन से आदेश मिलते ही आरटीओ ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। मंडलायुक्त के निर्देश के बाद शुक्रवार को आरटीओ की चार टीमें सड़क पर उतर गई और शाम तक 60 प्रतिबंधित वाहनों को सीज कर दिया।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गत 7 अप्रैल 2015 को दिल्ली सहित एनसीआर में शामिल जनपदों में 10 साल पुराने डीजल वाहन और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों का संचालन प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद देश के तमाम ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल का विरोध जताते हुए केंद्र सरकार से मामले में दखल देने की अपील की थी। इस पर केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की ओर से ट्रिब्यूनल में अपील कर राहत देने की प्रार्थना की गई थी, लेकिन एनजीटी ने मांग नहीं मानते हुए आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद काफी वाहन स्वामियों ने तो प्रभावित जिलों से एनओसी लेकर गाड़ियों को बाहरी जिलों में बेच दिया, लेकिन काफी लोगों के पास अभी तक ये वाहन चल रहे हैं। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर फिर से मचे बवाल के बाद एक बार फिर से इस आदेश पर सख्ती शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार ने एनसीआर में शामिल मेरठ, गाजियाबाद, बागपत, नोएडा, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और शामली में चल रहे पुराने वाहनों को सीज करने का आदेश जारी किया था। इसकी जिम्मेदारी शासन ने मंडलायुक्तों को दी है। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने आरटीओ डॉ. विजय कुमार को सुबह तलब कर प्रतिबंधित वाहनों को सीज करने के निर्देश दिए। इसके बाद आरटीओ का प्रवर्तन अमला सड़क पर उतर गया। चार टीमों ने बागपत रोड, गढ़ रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर सघन अभियान चलाते हुए शाम तक 60 वाहनों को पकड़कर सीज कर दिया। इन वाहनों में एनसीआर जिलों के प्रतिबंधित वाहनों के अलावा हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड राज्यों के भी पुराने वाहन पकड़े गए हैं। शाम को आरटीओ डॉ. विजय कुमार ने मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार के पास पहुंचकर कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त ने अभियान जारी रखने को कहा है।

ये वाहन आएंगे जद में, होंगे सीज 
आरटीओ डॉ. विजय कुमार ने बताया कि जिले में रजिस्टर्ड यूपी 15एटी-0750 से पहले के नंबर और सीरीज वाले 10 साल पुराने सभी डीजल वाहन प्रतिबंधित है। वहीं 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों में यूपी 15 एन 6050 नंबर से पहले के सभी पेट्रोल वाहन प्रतिबंधित हैं। ये सभी वाहन एनजीटी के आदेश के दायरे में आ रहे हैं। ये चलते पाए गए तो इन्हें पुलिस भी विदाउट लिस्ट बंद कर सकती है।

खेतों में जला रहे पराली, डस्टबिन में फूंक रहे कूड़ा

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 प्रदूषण की लगातार होती जा रही भयावह स्थिति, स्मॉग से खतरे और एनजीटी के सख्त आदेश के बावजूद कई स्थानों पर लोगों पर असर नहीं हो रहा है। खेतों में पत्तियां और सड़कों पर कूड़ा जलाया जाना बंद नहीं हो रहा है।
गांव जेई में किसानों र्ने इंख की पत्तियां खेतों में इकट्ठा की और जला दीं। इससे भारी धुआं निकला। इधर शहर में भी यही हाल है। खास तौर पर कूड़े में ढेर लगाया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में भी ऐसा ही हाल है। औद्योगिक इकाइयों से निकला सारा कूड़ा एक साथ बडे़  कूड़ेदान में इकट्ठा कर आग लगा दी जाती है। हाल ही में मेला नौचंदी मैदान में कूड़े में आग लगाने से भारी प्रदूषण हुआ। इस पर आयुक्त डा.प्रभात ने सख्त कदम उठाया और दस सफाई  कर्मियों पर पांच पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश भी दिये थे।

नोटबंदी के बाद मेरठ में एक भी नया प्रोजेक्ट नहीं

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
नोटबंदी का बड़ा असर रीयल एस्टेट पर पड़ा। इस एक साल में मेरठ में एक भी नया प्रोजेक्ट सही तरीके से लांच नहीं हो पाया। बड़े उद्यमियों ने अपने हाथ रोके रखे। इसका तगड़ा असर मेरठ विकास प्राधिकरण भी पड़ा और विकास शुल्क के नाम पर एमडीए का कोष भी खाली ही रहा। यहां तक कि कई छोटे छोटे प्रोजेक्ट ऐसे हैं जो नोटबंदी के बाद तत्काल बीच में अटक गए थे, जो आज तक भी शुरू नहीं हो पाए।
दिल्ली के नजदीक होने के कारण मेरठ में डेवलेपमेंट के संभावनाएं लगातार आकार ले रही थीं। हालांकि रीयल एस्टेट पिछले कई साल से कुछ मंदा ही चल रहा था पर नोटबंदी ने इस धंधे को तगड़ा झटका दे दिया। कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम बंद हो गया तो कई ऐसे प्रोजेक्ट रहे शुरू होने से पहले ही बंद हो गए। मेरठ विकास प्राधिकरण में इस एक साल में एक भी अहम प्रोजेक्ट लांच करने के लिए मानचित्र का आवेदन ही नहीं किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि विकास शुल्क के नाम पर एमडीए के पास पैसा नहीं आया।

बस समेट रहे पुराने प्रोजेक्ट को
एडको डेवलेपर की बात करें तो इस साल एक भी नया प्रोजेक्ट इस डेवलेपर ने लांच नहीं किया। यही हाल एपेक्स डेवलेपर का भी है। अंसल डेवलेपर के कई प्रोजेक्ट को निपटाने पर जोर दिया गया तो सुशांत सिटी जैसे कई अहम प्रोजेक्ट अभी अटके ही हैं। हालांकि कवायद तेजी से चल रही है कि ये प्रोजेक्ट आगे बढें। सुपरटेक का भी अपना पूरा जोर पाम ग्रीन प्रोजेक्ट को ही पूरा करने पर है।

सिमट गए छोटे बिल्डर
जमीन लेकर छोटे छोटे मकान बनाने वाले बिल्डराें का धंधा नोटबंदी में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। शहर की कई बड़ी कालोनियों में ऐसे कई बड़े भूखंड खाली पड़े हैं जहां काम शुरू ही नहीं हो पाया।

पेमेंट ने कर दिया परेशान
डेवलेपर का कहना है कि प्रत्येक प्रोजेक्ट में काफी काम ऐसा होता है,  जिसके लिए डेवलेपर को सीधा भुगतान करना होता है। मजदूरी कैश दी जाती है। काफी निर्माण सामग्री ऐसी होती है, जिसका भुगतान भी सीधा दिया जाता है। मसलन रोड़ी, डस्ट, लोहे का सामान, सेटरिंग का सामान यहां तक कि सामान की ढुलाई भी कैश दी जाती है। नोटबंदी बंद होने का असर इसी भुगतान पर सबसे ज्यादा आया है। पाई पाई का हिसाब रखने के लिए अब पूरा सिस्टम बनाना पड़ रहा है।

नोटबंदी के बाद सीधा असर रीयल एस्टेट पर आया, जिससे अभी तक यह व्यवसाय उठा नहीं है। नया कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है। केवल पुराने प्रोजेक्ट को ही समेटने का काम चल रहा है। रही सही कसर रेरा पूरी कर रहा है।
– वरूण अग्रवाल डायरेक्टर एडको डेवलेपर

नया कोई काम शुरू नहीं किया बल्कि अन्य व्यवसायों की तरफ अब बिल्डर अग्रसर हो रहे हैं। कारण कि यह धंधा अब आसान नहीं रहा है। मुश्किल बढ़ती जा रही हैं। नोटबंदी का अच्छा असर इस धंधे पर नहीं हुआ।
– अतुल गुप्ता, डायरेक्टर एपेक्स डेवलेपर

नोटबंदी ने रीयल एस्टेट की कमर तोड़ दी है। सड़कों आदि के निर्माण कार्य भी  प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं, प्राधिकरण की आवासीय योजनाआें पर भी काम नहीं हो पाया है। यह व्यवसाय एक  साल से समझो ठप ही है।
-मुकेश चौहान कंाट्रेक्टर

नोटबंदी से काम बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। पूरे साल नए काम शुरू नहीं हो पाए। कारण स्पष्ट है कि निर्माण के काफी काम सीधे कैश में होते हैं। यह  भी व्यवस्था का एक अंग है। अब रीयल एस्टेट बिल्कुल ठहरा है।- ओमपाल सिंह, काट्रेक्टर

नोटबंदी का एक साल ओवरऑल खराब नहीं है। हालांकि एक साथ सारे काम कराने से सरकार की प्रतिबद्धता साबित नहीं हो रही है। टैक्स बढ गए हैं। जीएसटी लागू हो गया। मार्केट में उपभोक्ता तो वही हैं। सुविधाएं दे तो निर्णय सही साबित हो। हालांकि सही खरीददार निकलकर सामने आ रहा है।- सुनील तनेजा, सीनियर जनरल मैनेजर मार्केटिंग, अंसल डेवलेपर

फौजी पिता ने मोबाइल पर पढ़ा बेटे की मौत का समाचार

army person read the news of death of his son
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 आर्मी पब्लिक स्कूल के कक्षा आठ के छात्र अभय प्रताप सिंह की मौत की खबर उनके पिता सूबेदार मेजर ने अपने मोबाइल फोन पर पढ़ी। ऑनलाइन न्यूजपेपर से उन्हें अपने इकलौते बेटे की मौत का पता चला। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम किया गया। लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। जांच के लिए बिसरा सुरक्षित रखा गया है। अंतिम संस्कार पैतृक गांव मुहारपुर में बुधवार को किया जाएगा।
रोहटा रोड पर सरस्वती विहार कॉलोनी निवासी अभय प्रताप सिंह (13) पुत्र पृथ्वीपाल सिंह आर्मी पब्लिक स्कूल में कक्षा आठ का छात्र था। सोमवार को उसकी स्कूल में अचानक से चक्कर आने के बाद मौत हो गई थी। घर का इकलौता चिराग बुझने से परिजनों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां अनीता प्रताप का बुरा हाल है। परिजनों के अनुसार अभय के हार्ट के वॉल्व में समस्या थी। लेकिन वह छह साल से ठीक था।

पैतृक गांव में होगा अंतिम संस्कार 
अभय के रिश्तेदारों ने बताया कि अभय के पिता पृथ्वी पाल सिंह मूल रुप से नोएडा के गांव मुहारपुर के रहने वाले हैं। वे आर्मी में सूबेदार मेजर हैं। वर्तमान में चीन की सीमा पर सिक्किम बॉर्डर के पास तैनात हैं। पृथ्वीपाल सिंह चार भाई हैं। जिनमें ऋषिपाल सिंह व हरि पाल सिंह गांव में ही खेती करते हैं। जोधपाल सिंह कृषि विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक हैं। दादा देवराज सिंह हैं। परिवार के मुताबिक अंतिम संस्कार बुधवार को पैतृक गांव में होगा।

पिता ने पूछा, क्या हुआ था मेरे अभय को 
परिजनों के मुताबिक अभय के पिता से उसकी मौत का कारण छिपाया गया। उन्हें सिर्फ इतना ही बताया कि अभय की तबीयत खराब है और मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती है। बेटे की तबीयत खराब बताकर अचानक से घर बुलावे की बात पृथ्वीपाल सिंह को बार-बार खटक रही थी। उन्होंने अपने मोबाइल पर मंगलवार को शहर के सभी न्यूज पेपर इंटरनेट पर देखे और देखने के बाद पत्नी अनीता से फोन पर बात की। वह फूट-फूट कर रोने लगे। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसा क्या हुआ था मेरे अभय को, जो उसकी मौत हो गई। वे चाइना बॉर्डर से सोमवार को ही रवाना हो गए थे। संभवत: मंगलवार देर रात तक पहुंचेंगे। आर्मी की यूनिट उनको दिल्ली से रिसीव कर मिलिट्री हॉस्पिटल लेकर आएगी। उधर, मंगलवार को स्कूल में हुई शिक्षक-अभिभावक मीटिंग में अभिभावकों को छात्रों की मेडिकल हिस्ट्री को लेकर सचेत किया गया। शिक्षक सांत्वना देने अभय के घर पहुंचे।

दो माह पूर्व हुआ प्रमोशन  
रिश्तेदारों ने बताया कि अभय के पिता प्रमोशन पाक दो महीने पहले सूबेदार मेजर बने थे। परिवार में खुशियों का माहौल था। दीपावली पर वह छुट्टी आए थे। अभय से बेहद लगाव था। वह उसे सेना में अफसर बनाना चाहते थे।

आर्मी पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र की मौत

army public school student died
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 आर्मी पब्लिक स्कूल में कक्षा आठ (सी) के छात्र अभय प्रताप सिंह की सोमवार सुबह अचानक मौत हो गई। लंच ब्रेक के दौरान छात्र को चक्कर आना और तेज-तेज सांसें लेना बताया गया। स्कूल प्रबंधन के अनुसार चिकित्सकों और बच्चे की मां ने बताया कि बच्चे के दिल के वाल्व कमजोर थे। बच्चे के पिता पूथ्वीपाल सिंह जेसीओ हैं। वर्तमान में नार्थ ईस्ट में तैनात हैं। उनके मंगलवार को मेरठ पहुंचने पर शव का पोस्टमार्टम हो पाएगा।
स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. रीटा गुप्ता ने बताया कि छात्र अभय सुबह करीब 11:06 बजे लंच ब्रेक में खाना खाने के बाद क्लासरूम से बाहर पानी पीने गया था। क्लास फर्स्ट फ्लोर पर है। क्लास के बाहर कॉरीडोर में वाटर कूलर लगा है। पानी पीकर वह बोतल में पानी लेकर क्लास में लौट रहा था। इस दौरान वह चक्कर खाकर गिर पड़ा। प्रिंसिपल के अनुसार छात्र को कोई चोट, बुखार या ब्लीडिंग नहीं थी। लेकिन उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं। छात्र की हालत बिगड़ती देख तुरंत गाड़ी से उसे स्कूल के सामने प्राथमिक उपचार केंद्र ले जाया गया। लेकिन लगातार हालत बिगड़ती देख करीब 11:15 बजे मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान ही चिकित्सकों ने 11.30 बजे छात्र को मृत घोषित कर दिया। इस बीच सूचना पर छात्र की मां अनीता सिंह (गृहिणी) और स्थानीय रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंच गए थे।

अभिभावकों ने स्कूल से छिपायी मेडिकल हिस्ट्री
प्रिंसिपल के अनुसार अभय के नियमित हेल्थ चेकअप में सब कुछ ओके था। छात्र ने कभी शार्ट या लांग मेडिकल लीव नहीं ली। न ही कभी उसकी तबियत स्कूल में खराब हुई। स्कूल का अनुशासित, मेधावी, होनहार छात्र था। पढ़ने में हमेशा अव्वल रहता था। हमेशा हंसता खेलता रहा। आज अचानक उसके साथ ये हादसा हो गया। परिजनों ने कभी विद्यालय में यह नहीं बताया कि उनके बच्चे को बचपन में दिल का वाल्व कमजोर होने की समस्या थी। इसका लंबा इलाज भी चला।

मिलिट्री अस्पताल में चिकित्सकों के बहुत पूछने के बाद मां ने चिकित्सकों को बताया कि बचपन में बच्चे के वाल्व कमजोर थे और वो बीमार रहा था। अभिभावकों से छात्र के दाखिले के वक्त ही मेडिकल डिकलेरेशन फार्म भराते हैं, उसमें भी अभय के परिजनों ने क ोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने ऐसा क्यों किया, नहीं पता। स्कूल में भी छात्र के रूटीन हेल्थ चेकअप में कभी कोई परेशानी नहीं आई। लेकिन अस्पताल में छात्र की मां ने बताया कि बचपन में अभय के वाल्व कमजोर थे, जिसका इलाज भी चला। लेकिन अब वो ठीक था। अगर परिजन हमें बच्चे की सही हेल्थ हिस्ट्री रिपोर्ट देते तो शायद हम कुछ कर पाते। छात्र की मेडिकल हिस्ट्री देना कंपलसरी होता है। स्कूल में स्पेशल स्टूडेंट्स भी पढ़ते हैं, सभी की मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है।

इकलौता था अभय
अभय अपनी मां के साथ कैंट एरिया स्थित उमराव एंकलेव में रहता था। ढाई साल से आर्मी स्कूल में पढ़ रहा था। माता-पिता की इकलौती संतान था।

लंच में खाया था पूरा खाना
प्रिंसिपल के अनुसार अभय ने लंच ब्रेक में पूरा खाना खाया था। वहीं, अस्पताल में मम्मी ने बताया कि अभय सुबह भी नाश्ता करके स्कूल गया था।
स्कूल में हुई शोकसभा
छात्र की मौत की सूचना के बाद सोमवार को ही छुट्टी से पहले विद्यालय में शोक सभा करा दी गई थी। सभी छात्रों ने मौन रखा था। मंगलवार को स्कूल में केवल पीटीएम होगी। कक्षाएं नहीं होंगी।

पापा की तरह आर्मी ऑफिसर बनूंगा
शिक्षकों ने बताया कि अभय का सपना देशसेवा करना था। अपने पिताजी की तरह अभय भी सेना में जाना चाहता था। इकलौती संतान होने के कारण अभय अपने सपने के प्रति बहुत गंभीर था। इस समय स्कूल में वार्षिक उत्सव की तैयारी चल रही है। लेकिन अभय ने पढ़ाई प्रभावित होने की बात कहकर इसमें भाग नहीं लिया था।

स्कूल और सख्त करेगा स्वास्थ्य नियम
प्रिंसिपल ने बताया कि अभिभावक बच्चे की कोई भी हेल्थ हिस्ट्री न छिपाएं, इसके लिए सख्त नियम बनाएंगे। अभिभावकों से हर साल बच्चों का हेल्थ डिकलेरेशन लेंगे। बच्चे को कभी भी कोई परेशानी रही हो तो अभिभावक उसके बारे में हमसे जरूर बताएं। स्कूल में छात्रों का नियमित हेल्थ चेकअप होता है। हेल्थ काउंसलर और एमआई भी हैं। लेकिन इस घटना के बाद हेल्थ संबंधी नियमों व सुविधाओं पर सख्त नजर रखेंगे।


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