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जयललिता के बंगले पोएस गार्डन पर इनकम टैक्स का छापा

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित पोएस गार्डन पर 17 नवंबर की रात आयकर विभाग का छापा पड़ा। यह वही बंगला है, जिसमे राज्य की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता रहती थीं। उनकी करीबी शशिकला भी वहीं रहती थीं। आजकल शशिकला जेल में हैं। उन्हीं की कथित अवैध संपत्ति का पता लगाने के लिए यह छापामारी हुई। उनके ठिकानों पर कई दिन से छापामारी हो रही है। कुछ दिन पहले 150 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए थे। इसके लिए किराए की गाड़ियों में शादी का स्टिकर लगा कर अफसर पहुंचे थे, ताकि किसी को शक न हो।

पोएस गार्डन पर इन दिनों सन्नाटा रहता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पोएस गार्डेन के गार्ड ने बताया था कि ये जगह इतनी भयानक हो चुकी है कि कोई भी यहां लंबे समय तक नहीं रहना चाहता। अब तक इस हवेली में मरम्मत का काम चल रहा था, लेकिन अब इसे पूरा कर लिया गया है। गार्ड ने बताया कि यहां के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। शशिकला के जेल जाने के बाद यहां कोई आया नहीं। जिन गार्डों को नाईट शिफ्ट में यहां ड्यूटी पर लगाया गया है वे यहां काम नहीं करना चाहते हैं।

प्रतिबंधित वाहनों पर आरटीओ सख्त, 60 सीज किए

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
एनजीटी द्वारा प्रतिबंधित किए गए 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने वाहनों के खिलाफ शासन से आदेश मिलते ही आरटीओ ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। मंडलायुक्त के निर्देश के बाद शुक्रवार को आरटीओ की चार टीमें सड़क पर उतर गई और शाम तक 60 प्रतिबंधित वाहनों को सीज कर दिया।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गत 7 अप्रैल 2015 को दिल्ली सहित एनसीआर में शामिल जनपदों में 10 साल पुराने डीजल वाहन और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों का संचालन प्रतिबंधित कर दिया था। इसके बाद देश के तमाम ट्रांसपोर्टरों ने हड़ताल का विरोध जताते हुए केंद्र सरकार से मामले में दखल देने की अपील की थी। इस पर केंद्रीय परिवहन मंत्रालय की ओर से ट्रिब्यूनल में अपील कर राहत देने की प्रार्थना की गई थी, लेकिन एनजीटी ने मांग नहीं मानते हुए आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद काफी वाहन स्वामियों ने तो प्रभावित जिलों से एनओसी लेकर गाड़ियों को बाहरी जिलों में बेच दिया, लेकिन काफी लोगों के पास अभी तक ये वाहन चल रहे हैं। दिल्ली में प्रदूषण को लेकर फिर से मचे बवाल के बाद एक बार फिर से इस आदेश पर सख्ती शुरू हो गई है। प्रदेश सरकार ने एनसीआर में शामिल मेरठ, गाजियाबाद, बागपत, नोएडा, हापुड़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और शामली में चल रहे पुराने वाहनों को सीज करने का आदेश जारी किया था। इसकी जिम्मेदारी शासन ने मंडलायुक्तों को दी है। मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार ने आरटीओ डॉ. विजय कुमार को सुबह तलब कर प्रतिबंधित वाहनों को सीज करने के निर्देश दिए। इसके बाद आरटीओ का प्रवर्तन अमला सड़क पर उतर गया। चार टीमों ने बागपत रोड, गढ़ रोड, मवाना रोड और दिल्ली रोड पर सघन अभियान चलाते हुए शाम तक 60 वाहनों को पकड़कर सीज कर दिया। इन वाहनों में एनसीआर जिलों के प्रतिबंधित वाहनों के अलावा हरियाणा, दिल्ली और उत्तराखंड राज्यों के भी पुराने वाहन पकड़े गए हैं। शाम को आरटीओ डॉ. विजय कुमार ने मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार के पास पहुंचकर कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट सौंपी। मंडलायुक्त ने अभियान जारी रखने को कहा है।

ये वाहन आएंगे जद में, होंगे सीज 
आरटीओ डॉ. विजय कुमार ने बताया कि जिले में रजिस्टर्ड यूपी 15एटी-0750 से पहले के नंबर और सीरीज वाले 10 साल पुराने सभी डीजल वाहन प्रतिबंधित है। वहीं 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों में यूपी 15 एन 6050 नंबर से पहले के सभी पेट्रोल वाहन प्रतिबंधित हैं। ये सभी वाहन एनजीटी के आदेश के दायरे में आ रहे हैं। ये चलते पाए गए तो इन्हें पुलिस भी विदाउट लिस्ट बंद कर सकती है।

खेतों में जला रहे पराली, डस्टबिन में फूंक रहे कूड़ा

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 प्रदूषण की लगातार होती जा रही भयावह स्थिति, स्मॉग से खतरे और एनजीटी के सख्त आदेश के बावजूद कई स्थानों पर लोगों पर असर नहीं हो रहा है। खेतों में पत्तियां और सड़कों पर कूड़ा जलाया जाना बंद नहीं हो रहा है।
गांव जेई में किसानों र्ने इंख की पत्तियां खेतों में इकट्ठा की और जला दीं। इससे भारी धुआं निकला। इधर शहर में भी यही हाल है। खास तौर पर कूड़े में ढेर लगाया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में भी ऐसा ही हाल है। औद्योगिक इकाइयों से निकला सारा कूड़ा एक साथ बडे़  कूड़ेदान में इकट्ठा कर आग लगा दी जाती है। हाल ही में मेला नौचंदी मैदान में कूड़े में आग लगाने से भारी प्रदूषण हुआ। इस पर आयुक्त डा.प्रभात ने सख्त कदम उठाया और दस सफाई  कर्मियों पर पांच पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश भी दिये थे।

नोटबंदी के बाद मेरठ में एक भी नया प्रोजेक्ट नहीं

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
नोटबंदी का बड़ा असर रीयल एस्टेट पर पड़ा। इस एक साल में मेरठ में एक भी नया प्रोजेक्ट सही तरीके से लांच नहीं हो पाया। बड़े उद्यमियों ने अपने हाथ रोके रखे। इसका तगड़ा असर मेरठ विकास प्राधिकरण भी पड़ा और विकास शुल्क के नाम पर एमडीए का कोष भी खाली ही रहा। यहां तक कि कई छोटे छोटे प्रोजेक्ट ऐसे हैं जो नोटबंदी के बाद तत्काल बीच में अटक गए थे, जो आज तक भी शुरू नहीं हो पाए।
दिल्ली के नजदीक होने के कारण मेरठ में डेवलेपमेंट के संभावनाएं लगातार आकार ले रही थीं। हालांकि रीयल एस्टेट पिछले कई साल से कुछ मंदा ही चल रहा था पर नोटबंदी ने इस धंधे को तगड़ा झटका दे दिया। कई बड़े प्रोजेक्ट पर काम बंद हो गया तो कई ऐसे प्रोजेक्ट रहे शुरू होने से पहले ही बंद हो गए। मेरठ विकास प्राधिकरण में इस एक साल में एक भी अहम प्रोजेक्ट लांच करने के लिए मानचित्र का आवेदन ही नहीं किया गया। इसका परिणाम यह रहा कि विकास शुल्क के नाम पर एमडीए के पास पैसा नहीं आया।

बस समेट रहे पुराने प्रोजेक्ट को
एडको डेवलेपर की बात करें तो इस साल एक भी नया प्रोजेक्ट इस डेवलेपर ने लांच नहीं किया। यही हाल एपेक्स डेवलेपर का भी है। अंसल डेवलेपर के कई प्रोजेक्ट को निपटाने पर जोर दिया गया तो सुशांत सिटी जैसे कई अहम प्रोजेक्ट अभी अटके ही हैं। हालांकि कवायद तेजी से चल रही है कि ये प्रोजेक्ट आगे बढें। सुपरटेक का भी अपना पूरा जोर पाम ग्रीन प्रोजेक्ट को ही पूरा करने पर है।

सिमट गए छोटे बिल्डर
जमीन लेकर छोटे छोटे मकान बनाने वाले बिल्डराें का धंधा नोटबंदी में सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ। शहर की कई बड़ी कालोनियों में ऐसे कई बड़े भूखंड खाली पड़े हैं जहां काम शुरू ही नहीं हो पाया।

पेमेंट ने कर दिया परेशान
डेवलेपर का कहना है कि प्रत्येक प्रोजेक्ट में काफी काम ऐसा होता है,  जिसके लिए डेवलेपर को सीधा भुगतान करना होता है। मजदूरी कैश दी जाती है। काफी निर्माण सामग्री ऐसी होती है, जिसका भुगतान भी सीधा दिया जाता है। मसलन रोड़ी, डस्ट, लोहे का सामान, सेटरिंग का सामान यहां तक कि सामान की ढुलाई भी कैश दी जाती है। नोटबंदी बंद होने का असर इसी भुगतान पर सबसे ज्यादा आया है। पाई पाई का हिसाब रखने के लिए अब पूरा सिस्टम बनाना पड़ रहा है।

नोटबंदी के बाद सीधा असर रीयल एस्टेट पर आया, जिससे अभी तक यह व्यवसाय उठा नहीं है। नया कोई प्रोजेक्ट शुरू नहीं हुआ है। केवल पुराने प्रोजेक्ट को ही समेटने का काम चल रहा है। रही सही कसर रेरा पूरी कर रहा है।
– वरूण अग्रवाल डायरेक्टर एडको डेवलेपर

नया कोई काम शुरू नहीं किया बल्कि अन्य व्यवसायों की तरफ अब बिल्डर अग्रसर हो रहे हैं। कारण कि यह धंधा अब आसान नहीं रहा है। मुश्किल बढ़ती जा रही हैं। नोटबंदी का अच्छा असर इस धंधे पर नहीं हुआ।
– अतुल गुप्ता, डायरेक्टर एपेक्स डेवलेपर

नोटबंदी ने रीयल एस्टेट की कमर तोड़ दी है। सड़कों आदि के निर्माण कार्य भी  प्रभावित हुए हैं। इतना ही नहीं, प्राधिकरण की आवासीय योजनाआें पर भी काम नहीं हो पाया है। यह व्यवसाय एक  साल से समझो ठप ही है।
-मुकेश चौहान कंाट्रेक्टर

नोटबंदी से काम बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। पूरे साल नए काम शुरू नहीं हो पाए। कारण स्पष्ट है कि निर्माण के काफी काम सीधे कैश में होते हैं। यह  भी व्यवस्था का एक अंग है। अब रीयल एस्टेट बिल्कुल ठहरा है।- ओमपाल सिंह, काट्रेक्टर

नोटबंदी का एक साल ओवरऑल खराब नहीं है। हालांकि एक साथ सारे काम कराने से सरकार की प्रतिबद्धता साबित नहीं हो रही है। टैक्स बढ गए हैं। जीएसटी लागू हो गया। मार्केट में उपभोक्ता तो वही हैं। सुविधाएं दे तो निर्णय सही साबित हो। हालांकि सही खरीददार निकलकर सामने आ रहा है।- सुनील तनेजा, सीनियर जनरल मैनेजर मार्केटिंग, अंसल डेवलेपर

फौजी पिता ने मोबाइल पर पढ़ा बेटे की मौत का समाचार

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 आर्मी पब्लिक स्कूल के कक्षा आठ के छात्र अभय प्रताप सिंह की मौत की खबर उनके पिता सूबेदार मेजर ने अपने मोबाइल फोन पर पढ़ी। ऑनलाइन न्यूजपेपर से उन्हें अपने इकलौते बेटे की मौत का पता चला। मंगलवार को शव का पोस्टमार्टम किया गया। लेकिन मौत का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। जांच के लिए बिसरा सुरक्षित रखा गया है। अंतिम संस्कार पैतृक गांव मुहारपुर में बुधवार को किया जाएगा।
रोहटा रोड पर सरस्वती विहार कॉलोनी निवासी अभय प्रताप सिंह (13) पुत्र पृथ्वीपाल सिंह आर्मी पब्लिक स्कूल में कक्षा आठ का छात्र था। सोमवार को उसकी स्कूल में अचानक से चक्कर आने के बाद मौत हो गई थी। घर का इकलौता चिराग बुझने से परिजनों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। मां अनीता प्रताप का बुरा हाल है। परिजनों के अनुसार अभय के हार्ट के वॉल्व में समस्या थी। लेकिन वह छह साल से ठीक था।

पैतृक गांव में होगा अंतिम संस्कार 
अभय के रिश्तेदारों ने बताया कि अभय के पिता पृथ्वी पाल सिंह मूल रुप से नोएडा के गांव मुहारपुर के रहने वाले हैं। वे आर्मी में सूबेदार मेजर हैं। वर्तमान में चीन की सीमा पर सिक्किम बॉर्डर के पास तैनात हैं। पृथ्वीपाल सिंह चार भाई हैं। जिनमें ऋषिपाल सिंह व हरि पाल सिंह गांव में ही खेती करते हैं। जोधपाल सिंह कृषि विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक हैं। दादा देवराज सिंह हैं। परिवार के मुताबिक अंतिम संस्कार बुधवार को पैतृक गांव में होगा।

पिता ने पूछा, क्या हुआ था मेरे अभय को 
परिजनों के मुताबिक अभय के पिता से उसकी मौत का कारण छिपाया गया। उन्हें सिर्फ इतना ही बताया कि अभय की तबीयत खराब है और मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती है। बेटे की तबीयत खराब बताकर अचानक से घर बुलावे की बात पृथ्वीपाल सिंह को बार-बार खटक रही थी। उन्होंने अपने मोबाइल पर मंगलवार को शहर के सभी न्यूज पेपर इंटरनेट पर देखे और देखने के बाद पत्नी अनीता से फोन पर बात की। वह फूट-फूट कर रोने लगे। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसा क्या हुआ था मेरे अभय को, जो उसकी मौत हो गई। वे चाइना बॉर्डर से सोमवार को ही रवाना हो गए थे। संभवत: मंगलवार देर रात तक पहुंचेंगे। आर्मी की यूनिट उनको दिल्ली से रिसीव कर मिलिट्री हॉस्पिटल लेकर आएगी। उधर, मंगलवार को स्कूल में हुई शिक्षक-अभिभावक मीटिंग में अभिभावकों को छात्रों की मेडिकल हिस्ट्री को लेकर सचेत किया गया। शिक्षक सांत्वना देने अभय के घर पहुंचे।

दो माह पूर्व हुआ प्रमोशन  
रिश्तेदारों ने बताया कि अभय के पिता प्रमोशन पाक दो महीने पहले सूबेदार मेजर बने थे। परिवार में खुशियों का माहौल था। दीपावली पर वह छुट्टी आए थे। अभय से बेहद लगाव था। वह उसे सेना में अफसर बनाना चाहते थे।

आर्मी पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा के छात्र की मौत

army public school student died
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 आर्मी पब्लिक स्कूल में कक्षा आठ (सी) के छात्र अभय प्रताप सिंह की सोमवार सुबह अचानक मौत हो गई। लंच ब्रेक के दौरान छात्र को चक्कर आना और तेज-तेज सांसें लेना बताया गया। स्कूल प्रबंधन के अनुसार चिकित्सकों और बच्चे की मां ने बताया कि बच्चे के दिल के वाल्व कमजोर थे। बच्चे के पिता पूथ्वीपाल सिंह जेसीओ हैं। वर्तमान में नार्थ ईस्ट में तैनात हैं। उनके मंगलवार को मेरठ पहुंचने पर शव का पोस्टमार्टम हो पाएगा।
स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. रीटा गुप्ता ने बताया कि छात्र अभय सुबह करीब 11:06 बजे लंच ब्रेक में खाना खाने के बाद क्लासरूम से बाहर पानी पीने गया था। क्लास फर्स्ट फ्लोर पर है। क्लास के बाहर कॉरीडोर में वाटर कूलर लगा है। पानी पीकर वह बोतल में पानी लेकर क्लास में लौट रहा था। इस दौरान वह चक्कर खाकर गिर पड़ा। प्रिंसिपल के अनुसार छात्र को कोई चोट, बुखार या ब्लीडिंग नहीं थी। लेकिन उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं। छात्र की हालत बिगड़ती देख तुरंत गाड़ी से उसे स्कूल के सामने प्राथमिक उपचार केंद्र ले जाया गया। लेकिन लगातार हालत बिगड़ती देख करीब 11:15 बजे मिलिट्री अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां इलाज के दौरान ही चिकित्सकों ने 11.30 बजे छात्र को मृत घोषित कर दिया। इस बीच सूचना पर छात्र की मां अनीता सिंह (गृहिणी) और स्थानीय रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंच गए थे।

अभिभावकों ने स्कूल से छिपायी मेडिकल हिस्ट्री
प्रिंसिपल के अनुसार अभय के नियमित हेल्थ चेकअप में सब कुछ ओके था। छात्र ने कभी शार्ट या लांग मेडिकल लीव नहीं ली। न ही कभी उसकी तबियत स्कूल में खराब हुई। स्कूल का अनुशासित, मेधावी, होनहार छात्र था। पढ़ने में हमेशा अव्वल रहता था। हमेशा हंसता खेलता रहा। आज अचानक उसके साथ ये हादसा हो गया। परिजनों ने कभी विद्यालय में यह नहीं बताया कि उनके बच्चे को बचपन में दिल का वाल्व कमजोर होने की समस्या थी। इसका लंबा इलाज भी चला।

मिलिट्री अस्पताल में चिकित्सकों के बहुत पूछने के बाद मां ने चिकित्सकों को बताया कि बचपन में बच्चे के वाल्व कमजोर थे और वो बीमार रहा था। अभिभावकों से छात्र के दाखिले के वक्त ही मेडिकल डिकलेरेशन फार्म भराते हैं, उसमें भी अभय के परिजनों ने क ोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने ऐसा क्यों किया, नहीं पता। स्कूल में भी छात्र के रूटीन हेल्थ चेकअप में कभी कोई परेशानी नहीं आई। लेकिन अस्पताल में छात्र की मां ने बताया कि बचपन में अभय के वाल्व कमजोर थे, जिसका इलाज भी चला। लेकिन अब वो ठीक था। अगर परिजन हमें बच्चे की सही हेल्थ हिस्ट्री रिपोर्ट देते तो शायद हम कुछ कर पाते। छात्र की मेडिकल हिस्ट्री देना कंपलसरी होता है। स्कूल में स्पेशल स्टूडेंट्स भी पढ़ते हैं, सभी की मेडिकल हिस्ट्री ली जाती है।

इकलौता था अभय
अभय अपनी मां के साथ कैंट एरिया स्थित उमराव एंकलेव में रहता था। ढाई साल से आर्मी स्कूल में पढ़ रहा था। माता-पिता की इकलौती संतान था।

लंच में खाया था पूरा खाना
प्रिंसिपल के अनुसार अभय ने लंच ब्रेक में पूरा खाना खाया था। वहीं, अस्पताल में मम्मी ने बताया कि अभय सुबह भी नाश्ता करके स्कूल गया था।
स्कूल में हुई शोकसभा
छात्र की मौत की सूचना के बाद सोमवार को ही छुट्टी से पहले विद्यालय में शोक सभा करा दी गई थी। सभी छात्रों ने मौन रखा था। मंगलवार को स्कूल में केवल पीटीएम होगी। कक्षाएं नहीं होंगी।

पापा की तरह आर्मी ऑफिसर बनूंगा
शिक्षकों ने बताया कि अभय का सपना देशसेवा करना था। अपने पिताजी की तरह अभय भी सेना में जाना चाहता था। इकलौती संतान होने के कारण अभय अपने सपने के प्रति बहुत गंभीर था। इस समय स्कूल में वार्षिक उत्सव की तैयारी चल रही है। लेकिन अभय ने पढ़ाई प्रभावित होने की बात कहकर इसमें भाग नहीं लिया था।

स्कूल और सख्त करेगा स्वास्थ्य नियम
प्रिंसिपल ने बताया कि अभिभावक बच्चे की कोई भी हेल्थ हिस्ट्री न छिपाएं, इसके लिए सख्त नियम बनाएंगे। अभिभावकों से हर साल बच्चों का हेल्थ डिकलेरेशन लेंगे। बच्चे को कभी भी कोई परेशानी रही हो तो अभिभावक उसके बारे में हमसे जरूर बताएं। स्कूल में छात्रों का नियमित हेल्थ चेकअप होता है। हेल्थ काउंसलर और एमआई भी हैं। लेकिन इस घटना के बाद हेल्थ संबंधी नियमों व सुविधाओं पर सख्त नजर रखेंगे।

बैंक बंद, एटीएम खाली, भटकती रही जनता बेचारी

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खाली पड़ा एटीएम।PC: अमर उजाला
बैंकों की चार दिन की छुट्टी लोगों को भारी पड़ रही है। त्योहारी सीजन के बावजूद लोगों को पैसा नहीं मिल पा रहा है। बैंकों ने एटीएम में कैश डलवाने का इंतजाम नहीं किया। लोग एटीएम से परेशान होकर लौट रहे हैँ। कुछ एटीएम खराब पडे़ है तो अधिकांश में नौ कैश की स्थिति है। बैंकों के परिसर में लगे एटीएम की हालत भी ऐसी ही है। एसबीआई के रीजन ऑफिस परिसर में लगा एटीएम भी खराब है। अमर उजाला ने शहर के एटीएम की पड़ताल की तो मात्र कुछ ही एटीएम में कैश मिला।

एसबीआई रीजनल ऑफिस 
गढ़ रोड ऑफिस के परिसर में लगे एटीएम में डिस्पले नहीं थी। यहां कैश लेने आए मेडिकल के एमबीबीएस छात्र अमित नागर ने बताया कि वह कई एटीएम पर गए लेकिन कैश नहीं मिला। हरिओम ने बताया कि जागृति विहार, शास्त्रीनगर के कई एटीएम चेक किए लेकिन रुपये नहीं मिले। ब्रह्मपुरी के अमित गुप्ता ने बताया कि आज यहां भी कैश नहीं है।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया
ईव्ज चौराहा के निकट यह एटीएम काम नहीं कर रहा था। एटीएम के अंदर बेहद गंदगी पसरी थी। यहां कैश लेने पहुंच रहे लोग खाली हाथ लौट रहे थे। शिवाजी रोड के अरविंद ने बताया कि वे चार एटीएम पर गए, लेकिन कैश कहीं नहीं मिला।

सिंडिकेट बैंक
शिवाजी रोड स्थित एटीएम की डिस्पले पर बैलेंस नहीं की तख्ती लगी थी। केबिन में बैठे गार्ड प्रेमचंद ने बताया छुट्टी से पहले एटीएम में कैश डाला गया था। त्योहार की वजह से एटीएम में शनिवार दोपहर में ही कैश खत्म हो गया। इस एटीएम में बैंक शाखा द्वारा ही कैश डाला जाता है।
प्राइवेट बैंकों के एटीएम ने दी राहत
सरकारी बैंकों की तुलना में प्राइवेट बैंकों की स्थिति बेहतर थी। दिल्ली रोड स्थित यस बैंक के एटीएम में कैश था। यहां काफी भीड़ नजर आई। गढ़ रोड के विजया बैंक, आईसीआईसीआई बैंक में कैश था। यहां दूर दूर से लोग कैश लेने आ रहे थे।

तीन दिन में 35-40  करोड़ निकलने का अनुमान
जिले में 444 बैंक शाखाएं और 400 एटीएम हैं। एक एटीएम में एक बार में 40 लाख कैश आता है। बैंकिंग सूत्रों के अनुसार छुट्टी से पहले एटीएम में आवश्यकतानुसार कैश उपलब्ध कराया जाता है। एक अनुमान के मुताबिक 250 एटीएम में करीब 50 करोड़ की रकम डाली गई। इनमें से 70 से 80 फीसदी रकम की निकासी हुई। कई एटीएम खराब हुए तो कई में नौ कैश की स्थिति बनी हुई है।

कोट
बैंक या आउट सोर्र्िसंग के माध्यम से ही एटीएम में कैश डाला जाता है। चेस्ट ब्रांच ही कैश उपलब्ध कराती हैं। छुट्टी के दिनों में चेस्ट ब्रांच खोलने के लिए आरबीआई से अनुमति लेनी पड़ती है। अनुमति मिलने के बाद कैश डाला जाता है। संभवत: सोमवार को एटीएम में कैश की व्यवस्था हो जाएगी।
अजय गुप्ता ,चैनल मैनेजर एटीएम एसबीआई

हाथों में तिरंगा लिए सोगवारों ने किया शोहदाए कर्बला को याद

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
अब्दुल्लापुर में दोपहर मजलिस के बाद बड़ा कदीमी जुलूस ए जुलजुनाह इमामबाड़ा कोट से बरामद हुआ। इसमें सोगवारों ने हाथों में तिरंगा लेकर शौहदाए कर्बला को याद किया और नौहेख्वानी के बीच मातमपुरसी की। जुलूस मुहल्ला हंडिया, पंडित चौक धर्मशाला होता हुआ गुप्ता चौक पहुंचा, जहां हसन मेहंदी व अली मेहंदी ने अपने साथियों के साथ नौहा पढ़ा।

इसके बाद शाम को जुलूस ए जुलजुनाह में शामिल मातमी दस्ते बाड़े वाली मस्जिद-इमामबाड़े में गए, जहां 45 मिनट तक नौहेख्वानी हुई और सोगवारों ने शौहदाए कर्बला को याद करते हुए मातम किया। इसके बाद जुलूस बाहर आया और अलीशान के मकान के सामने सैकड़ों हुसैनी सोगवारों ने जंजीरों के मातम से अपने शरीर को लहूलुहान कर लिया। इस दौरान यह नौहा पढ़ा जर्रे-जर्रे को सुना दो दास्ताने कर्बला। यहां से जुलूस मुहल्ला बाजार से मुहल्ला गढ़ी पहुंचा, जिसमें नौहेख्वान मीसम, जामीन, अम्मार, इमरान, कमर आलम, तनसीर आदि रहे। इसके बाद जुलूस ए जुलजुनाह विभिन्न मार्गों से होता हुआ मोहल्ला कोट में अजाखाना मौ. आकिल के आवास पर जाकर संपन्न हुआ। इस दौरान जुलूस की व्यवस्था में एडवोकेट नायब अली, नफीस आलम, सरफराज अली, रजा अहमद, हाजी जफर अब्बास, रोशन अब्बास, चांद हुसैन, अब्बास बहादुर, आबिद हुसैन आदि का सहयोग रहा।

छत्ता अली रजा से जुलजुनाह का जुलूस बरामद
मेरठ। मुहर्रम की सात तारीख को शाम शहर क्षेत्र में छत्ता अली रजा से जुलूस ए जुलजुनाह अली हैदर के अजाखाने से बरामद होकर वैली बाजार से गुजरता हुआ मनसबिया घंटाघर पहुंचा। जुलूस के आयोजक चांद मियां व अंजुमन इमामिया रहे, जिसमें इस अंजुमन के वाजिद अली गप्पू व मीसम ने अपने साथियों के साथ नौहेख्वानी कर कर्बला के वाकयात को उजागर किया। जुलूस में शाह अब्बास, हाजी शमशाद अली जैदी, अली हैदर, हामिद अली जमाल, शकील अहमद, हैदर अब्बास, कौसर रजा आदि सोगवार शरीक रहे।

उधर, लोहिया नगर में एल ब्लॉक स्थित नियाज फात्मा के अजाखाने से भी जुलूस ए जुलजुनाह बरामद होकर इमामबारगाह अबू तालिब पहुंच कर संपन्न हुआ, जिसमें अंजुमन जुल्फिकारे हैदरी के मातमदारों और नौहेख्वानों ने नौहे पढ़े। इसी क्रम में रामबाग कालोनी स्थित बाकर जैदी के अजाखाने से जुलूसे अलम-ए-मुबारक बरामद हुआ। इससे पहले यहां आयोजित मजलिस को मौलाना अम्मार हैदर रिजवी ने खिताब करते हुए हजरत इमाम हुसैन के किरदार को बयां किया। जुलूस में रजा नकवी, हसन मियां, अफसर रजा, मेहंदी अली काजमी आदि ने नौहेख्वानी की। जुलूस यहां से जैदी फार्म, कौमी एकता मार्ग, शाहजलाल हॉल के सामने से होता हुआ पंजेतनी इमामबारगाह से जैदी सोसायटी पहुंचा। जुलूस में बाकर जैदी, सगीर जैदी, सुहैल, डॉ. रेहान जैदी, दिलबर जैदी, अब्बास रजा, हाजी शमशाद अली, डॉ. फिरोज जैदी सहित बड़ी संख्या में हुसैनी सोगवार शामिल रहे।

Behind the bombast: NKorea’s genteel foreign minister

The man who called Donald Trump “President Evil” last week at the UN General Assembly is actually a genteel intellectual who studies the memoirs of former US presidents and has taste for fine whiskey, according to ten people who know him.

US planning to draw down embassy staff in Havana

The United States is crafting a plan for a drawdown of staff from the American embassy in Havana in response to still-unexplained incidents that have harmed the health of some US diplomats there, US and congressional officials said on Thursday.


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