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सर्दी ने दिखाया दम, तो डेंगू हो गया कम

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denguPC: meerut news
 ठंड ने दम दिखाना शुरू कर दिया है। इस कारण डेंगू भी काफी कम होने लगा है। पिछले दो दिन से डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला है। इससे स्वास्थ्य विभाग ने भी थोड़ी राहत की सांस ली है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गर्मी में लोग कूलर चलाते हैं, जिसमें पानी भरा रहने से डेंगू के मच्छर सबसे ज्यादा पनपते हैं। लोग कम कपड़े पहनते हैं, जिससे मच्छरों को काटने में आसानी होती है। पिछले दिनों कराई गई स्वास्थ्य विभाग की सर्वे रिपोर्ट में भी यही खुलासा हुआ था कि फैशनेबल युवाओं को मच्छरों ने ज्यादा काटा है। दूसरी तरफ, ठंड में कूलर बंद हो जाते हैं, उसमें पानी भी नहीं रहता है।
ऐसे में डेंगू के मच्छर के लार्वा कम पैदा होते हैं। वहीं, लोग पूरे कपड़े पहनने लगते हैं, यानि शरीर ढका रहता है। इससे मच्छरों को काटने के लिए शरीर का खुला स्थान कम मिलता है, जिस कारण डेंगू के मरीजों की संख्या कम हो जाती है। मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब की पिछले एक सप्ताह की रिपोर्ट में यही आंकड़े सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि आने वाले दिनों में डेंगू बिल्कुल खत्म हो जाएगा, क्योंकि ठंड और बढ़ेगी।

अक्तूबर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहा, तब प्रतिदिन मरीजों की संख्या 10 या इससे ज्यादा रही। लेकिन नवंबर शुरू होने के बाद जैसे-जैसे तापमान घटा, मरीजों की संख्या भी कम होने लगी। इस साल जिले में अब तक 643 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। ये पांच सालों में डेंगू के मरीजों की मेरठ में सबसे ज्यादा संख्या है। पिछले साल डेंगू के 195 मरीज ही मिले थे। 2015 में 205, 2014 में शून्य और 2013 में 180 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। हालांकि डेंगू अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। अभी भी इक्का-दुक्का मरीज मिल रहे हैं।

ठंड बढ़ना अहम वजह
सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ये राहत की बात है। इसकी वजह ठंड का बढ़ना और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार एंटी लार्वा स्प्रे और फॉगिंग कराना रहा है।

मरीजों का आंकड़ा
तारीख         सैंपल         डेंगू पॉजिटिव
13 नवंबर       30                04
14 नवंबर       32                04
15 नवंबर       30                04
16 नवंबर       16                02
17 नवंबर       12                01
18 नवंबर       16                00

मौसम का हाल
तारीख             अधिकतम         न्यूनतम
13 नवंबर            27.4            10.8
14 नवंबर            27.4             9.7
15 नवंबर            26.4             12.5
16 नवंबर            28.8             12.5
17 नवंबर             26.2             12.1
18 नवंबर             25.0             12.6
(तापमान डिग्री सेल्सियस में है।)

सिम को आधार से जोड़ने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं, एक दिसंबर से नई व्यवस्था


यूआईडीएआई का कहना है कि आईवीआर पर भाषा इंग्लिश, हिंदी समेत दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में भी होगी।

सिम को अपने आधार नंबर से लिंक करना जरूरी कर दिया गया है। 6 फरवरी 2018 तक सभी मोबाइल यूजर्स को अपने नंबर को आधार से लिंक कराना है। इसके लिए अभी यूजर को टेलिफोन सर्विस प्रोवाइडर के सेंटर पर जाना पड़ता है। अब एक नई व्यवस्था लागू होने वाली है। अब सिम को आधार से जोड़ने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक दिसंबर से नई व्यवस्था लागू होने वाली है।

आपका नंबर जिस कंपनी का है उसकी वेबसाइट पर जाकर अपना मोबाइल नंबर डालना है। इसके बाद मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा। अब इसे वेबसाइट पर डालना है। याद रहे कि वो मोबाइल नंबर आपके पास ही होना चाहिए जो आपके आधार नंबर के साथ रजिस्टर है। इसके बाद वेबसाइट पर एक मैसेज आएगा और यहां आधार नंबर डालना होगा। इसके बाद UIDAI (आधार) की तरफ से एक ओटीपी आएगा। अब इस ओटीपी को वेबसाइट पर आ रहे ओटीपी के बॉक्स में डालना होगा। इसे डालने के बाद आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक हो जाएगा।

इसके अलावा कंपनी के आईवीआर सिस्टम के माध्यम से भी अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिकं किया जा सकता है। इसके लिए कंपनी के कस्टमर केयर पर कॉल करना होगा। यहां आपको आधार से मोबाइल नंबर को लिंक करने का ऑप्शन सिलेक्ट करना है। यहां से भी लिंक करने के लिए आधार के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। ओटीपी को आईवीआर पर डालना होगा और मोबाइल नंबर आधार से लिंक हो जाएगा। यूआईडीएआई का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क कंपनियों आईवीआर पर इंग्लिश, हिंदी समेत दूसरी क्षेत्रीय भाषाएं भी होंगी।

शहर में जाम का रिकॉर्ड बना रहा यातायात माह

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
एक नवंबर से यातायात माह चला रही ट्रैफिक पुलिस शहर में रोजाना जाम लगने का नया रिकॉर्ड भी कायम रही है। जाम से जूझते अंदरूनी मार्गों से लेकर मुख्य चौराहों को देखकर यही लगता है कि इसे यातायात माह कहें या जाम का महीना। क्योंकि ट्रैफिक के होमगार्ड वाहन चालकों को रोकने और ट्रैफिक के सिपाही उनका चालान कटवाने में व्यस्त हैं। ऐसे में जाम खुलवाने की तरफ किसी का ध्यान ही नहीं है।
शहर में यातायात व्यवस्था सुचारु रूप से चले इसके लिए एसपी ट्रैफिक, दो सीओ, एक इंस्पेक्टर, दो टीएसआई, 21 एचसीपी, 107 सिपाही और 60 होमगार्ड हैं। ट्रैफिक पुलिस रोजाना औसतन 450-500 तक वाहनों के चालान काट रही है। मौके पर ही शमन शुल्क भी वसूला जा रहा है।

चेकिंग के बजाय चालान
ट्रैफिक पुलिस तो अपने असल मुद्दे से भटक ही रही है, थानों की पुलिस का भी यही हाल है। थाने के दरोगाओं को सुबह और शाम निर्धारित प्वाइंटों पर संदिग्ध लोगों की चेकिंग करने के निर्देश हैं। लेकिन साथ में रोजाना दस वाहनों का चालान काटने का टारगेट भी रहता है। इसलिए दरोगा जी जिस चौराहे या तिराहे पर बैठते हैं, वहां चेकिंग के बजाय 10 चालान काटकर निकल लेते हैं।

यह जाम हुआ अब आम
शहर में जाम की समस्या अब आम हो गई है। जीरो माइल, बेगमपुल, भैसाली बस अड्डा के सामने, केसरंगज, रेलवे रोड चौराहा, मेट्रो प्लाजा, बागपत रोड, दिल्ली रोड स्थित मंडी गेट, बुढ़ाना गेट, घंटाघर, खैरनगर, हापुड़ अड्डा चौराहा और भूमिया पुल पर तो रोजाना ही जाम रहता है। हापुड़ रोड पर शास्त्रीनगर एल ब्लॉक तिराहा भी लगातार जाम से जूझ रहा है।

होमगार्ड करते हैं कागज चेक
शहर में अवैध तरीके से सड़क पर वाहन खड़ा रहे या फिर जाम लगे, होमगार्ड तो वाहन के कागज चेक करने में मशगूल रहते हैं। खासकर दूसरे जिलों या राज्यों का नंबर देखकर होमगार्ड डंडा दिखाकर बीच सड़क पर चेकिंग के नाम पर वाहन रोक लेते हैं। सवाल यह है कि होमगार्डों को ट्रैफिक कंट्रोल की ड्यूटी छोड़कर कागज चेक करने का अधिकार किसने दे दिया। इसका जवाब ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों के पास नहीं है।

जुगाड़ भी बन रहे मुसीबत:
शहर की यातायात व्यवस्था के लिए जुगाड़ भी मुसीबत बन रहे हैं। दिल्ली रोड पर सबसे ज्यादा अवैध तरीके से जुगाड़ दौड़ रहे हैं। गढ़ रोड, हापुड़ रोड और शहर के अन्य स्थानों पर भी जुगाड़ पर सामान लादकर ले जाया जाता है। यह प्रदूषण को तो बढ़ा रही ही रहे हैं, कभी भी इनसे बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन ट्रैफिक पुलिस का कोई ध्यान इस तरफ नहीं है।

सोमवार को जाम से जूझा शहर
सोमवार को शहर में कई स्थानों पर जाम की समस्या बनी रही। शाम होते ही फिर से दिल्ली रोड पर जाम लग गया। रात में दिल्ली- देहरादून हाईवे पर मोहिउद्दीनपुर के पास भी जाम लगा रहा। दोपहर के समय मवाना रोड पर कसेरूबक्सर और डिफेंस कालोनी के सामने जाम की स्थिति बनी रही। जीरो माइल चौराहे से लेकर बेगपमुल तक भी सड़क पर आड़े तिरछे वाहनों के सड़क पर खड़े होने से जाम लगा रहा। दिल्ली रोड पर केसरगंज और रेलवे रोड चौराहे पर भीषण जाम लगा रहा। बागपत रोड पर भी आधा किमी तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं।

दिल्ली रोड पर मंडी गेट के पास डिवाइडर कट पर ट्रक और अन्य भारी वाहनों के मुड़ने के कारण दिनभर जाम की समस्या बनी रही। घंटाघर और बुढ़ाना गेट पर भी वाहन जाम में फंसे रहे।

दारुल उलूम वक्फ के शेखुल हदीस मौलाना असलम क़ासमी का इंतकाल

Shaikh Hadees of Darul Uloom Waqf Maulana Aslam Qasmi dies
मौलाना असलम क़ासमी का फाइल फोटोPC: अमर उजाला
सहारनपुर में इस्लामी तालीम के दूसरे सबसे बड़े इदारे दारुल उलूम वक्फ के उस्ताद-ए-हदीस एवं मोहतमिम मौलाना सुफियान कासमी के चाचा मौलाना असलम कासमी का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को इंतकाल हो गया। वह 80 वर्ष के थे। उनके इंतकाल से इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
लंबे समय तक विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम के मोहतमिम रहे स्व. कारी मोहम्मद तैय्यब के बेटे और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मौलाना सालिम कासमी के छोटे भाई मौलाना असलम कासमी पिछले पांच वर्षों से रीढ़ की हड्डी और सांस की बीमारी से परेशान थे। जिनका दिल्ली के एक हॉस्पिटल में उपचार चल रहा था। सोमवार की सुबह करीब 11.30 बजे उनका इंतकाल हो गया। उन्होंने अपने आवास पर ही अंतिम सांस ली। उनके इंतकाल की खबर मिलते ही इस्लामिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। देखते ही देखते दारुल उलूम, दारुल उलूम वक्फ समेत दूसरे दीनी इदारों के छात्र भारी संख्या में उनके आवास पर पहुंच गए। इसके अलावा दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी, नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, शेखुल हदीस मौलाना अहमद खिजर शाह मसूदी, मौलाना नसीम अख्तर शाह कैसर समेत बड़े उलमा उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। मौलाना असलम कासमी ने दारुल उलूम से शिक्षा प्राप्त की। जिसके बाद वह वहीं पर नौकरी करने लगे। उन्हें नाजिम-ए-बरकियात (बिजली विभाग के प्रभारी) बनाया गया। वर्ष 1982 के बाद वह दारुल उलूम वक्फ में चले गए। जहां वह उस्ताद-ए-हदीस बनाए गए। बेहद सादा मिजाज और हर काम को गंभीरता से लेने वाले मौलाना असलम कासमी को सदर मुदर्रिस और शिक्षा विभाग के प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस दौरान उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं। जबकि वह शायरी का शौक भी रखते थे। जो घर तक ही सीमित था। उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1980 में दारुल उलूम के शताब्दी समारोह का उन्हें प्रभारी बनाया गया था। जिसमें करीब 20 लाख लोगों ने शिरकत की थी। रात्रि करीब 8 बजे दारुल उलूम की आहत-ए-मोलसरी में उनकी नमाज-ए-जनाजा हुई। जिसके उपरांत उन्हें कासमी कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। उनकी अंतिम यात्रा में मदरसा छात्रों समेत हजारों लोग शामिल रहे।

Children’s Day: गूगल ने जवाहरलाल नेहरू, बाल दिवस पर नहीं बनाया Doodle, एक छोटे से यंत्र को किया याद

गूगल का डूडल हमें कई ऐसे दिनों की जानकारी देता है जिसके बारे में हमें नहीं पता होता है। इसी तरह का आज का रंग-बिरंगा डूडल रोज की तरह साधारण ना होकर एक नए ढंग में दिख रहा है। इस डूडल में एक छोटा-सा यंत्र नजर आ रहा है, आज का ये डूडल विशेष तो है लेकिन इसके विशेष होने का कारण भारतीय बाल दिवस नहीं है। आज के दिन भारतीय गूगल ने होल पंचर का डूडल बनाया है। हर किसी को इंतजार था कि आज भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के जन्मदिवस के अवसर पर बाल दिवस का डूडल प्रस्तुत किया जाएगा या बच्चों के किसी कार्यक्रम आदि का डूडल बनाया जाएगा। इसके साथ ही हर किसी को बाल दिवस की महत्वता बताई जाएगी। लेकिन सबकी उम्मीदों से हटकर गूगल ने एक ऐसी मशीन का डूडल बनाया है जो हमारे रोज के काम में कहीं ना कहीं प्रयोग होती है। होल पंचर की 131 वीं सालगिरह पर डूडल प्रस्तुत किया है।

आज से 131 साल पहले 14 नवंबर 1886 में फ्रेडरिक ने होल पंचर का आविष्कार किया था। फ्रेडरिक एक जर्मन अफसर थे जिन्होनें 1875 में अपनी कंपनी की स्थापना की थी। 131 साल में होल पंचर की मशीन में बहुत बदलाव आया है। इससे पहले गूगल ने छोटे यंत्रों का डूडल नहीं बनाया था। आज इस तरह से गूगल के डूडल ने सबको गूगली देकर सभी को ये अहसास करवाया कि इन छोटे यंत्रों का भी हमारे जीवन में कितना महत्व है। पिछले वर्ष आज के दिन भारत में गूगल नें बाल दिवस के डूडल के लिए प्रतियोगिता आयोजित करवाई थी जिसमें पुणे की एक लड़की विजयी हुई थी। वो रंग-बिरंगा डूडल सभी की आंखे अपनी तरफ आकर्षित कर रहा था। बाल दिवस भारत में 14 नवंबर को मनाया जाता है। पंडित नेहरु बच्चों को बहुत पसंद करते थे और उन्हें प्यार से चाचा नेहरु कहते थे। नेहरु बच्चों में देश का भविष्य देखते थे और चाहते थे कि हर क्षेत्र में देश के बच्चे नाम रौशन करें।

आज भारत के बच्चे हर क्षेत्र में अपने देश का नाम रौशन कर रहे हैं और दुनिया के सामने उदाहरण रख रहे हैं कि कला, विज्ञान, अध्यात्म किसी भी क्षेत्र में भारत किसी से भी कम नहीं है। भारत देश के बच्चों के लिए इसी तरह का सपना चाचा नेहरु ने देखा था। स्कूलों में इस दिन को खास बनाने के लिए कार्यक्रम रखे जाते हैं। फैंसी ड्रेस, डांस, नाटक आदि जैसे कार्यक्रम रखे जाते हैं। इस दिन नेहरु जी की सीख बच्चों को समझाने का प्रयास किया जाता है। इस तरह से बच्चों के जीवन में चाचा नेहरु के महत्व को बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। कई देशों में बाल दिवस 1 जून को मनाया जाता है। वहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बाल दिवस या चिल्ड्रन डे 20 नवंबर को मनाया जाता है। इस दिन के लिए गूगल की तरफ से तो इस वर्ष बधाई नहीं दी गई लेकिन बाल दिवस की महत्वता को जानते और समझते हुए अपने बच्चों को नेहरु के विचारों को तक पहुंचाएं।

धुएं और धुंध से सहमा शहर

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
मौसम में बढ़ती प्रदूषण की मात्रा और समय से पहले कोहरे की दस्तक से मौसम की चाल बदल गई है। मंगलवार सुबह जहां घना कोहरा छाया रहा, वहीं दिन में धुंध का असर भी कम नहीं हुआ। कोहरा और धुंध से दिन में ही अंधेरा छा गया। वाहन चालकों को लाइट जलानी पड़ी।
एनसीआर क्षेत्र में बढ़ रहे प्रदूषण का असर मेरठ तक दिखाई दे रहा है। हरियाणा और पंजाब में जलाई गई पराली और बढ़ते प्रदूषण के असर के चलते मौसम का मिजाज बदल रहा है। इस बार कोहरे ने भी समय से पहले दस्तक दे दी है। सुबह 10 बजे भी ऐसा लगा रहा था कि अभी दिन नहीं निकला है। सुबह के समय जहां हाईवे पर वाहनों की रफ्तार धीमी रही वहीं शाम को भी दिन छिपने से पहले ही चालकों को लाइट जलानी पड़ी।
कृषि विवि के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही का कहना है कि अक्तूबर में बारिश नहीं हुई, हवा भी शांत चल रही है। बढ़ते डस्ट पार्टिकल और वायमुंडल में बन रही नमी के चलते धुंध और कोहरे का असर बना हुआ है। प्रदूषण बढ़ने का असर मौसम पर साफ दिख रहरा है। इस समय चल रहा मौसम ठीक नहंी है। तीन चार दिन तक मौसम ऐसे ही बना रहेगा। -,

पीएम-10 का स्तर 500 पर पहुंचा
मेरठ। एक मनुष्य दिनभर में औसतन 20 हजार सांसें लेता है। वायुमंडल में नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड आदि गैसें निश्चित अनुपात में रहती हैं। इस अनुपात के बिगड़ने पर वायुमंडल अशुद्ध होता है, जो इंसान के लिए बेहद हानिकारक साबित हो रहा है। हवा को दूषित करने वाले कार्बन-डाई-ऑक्साइड, कार्बन-मोनो-ऑक्साइड, नाइट्रोजन-ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, धूल मिट्टी के कण आदि हैं। इनकी वायु में अधिकता लोगों को बीमार कर रही है।

प्रदूषण और जहरीली गैसों का मिश्रण
मंगलवार तड़के से ही शहर में जमा स्मॉग कई तरह के प्रदूषण के कणों व जहरीली गैसों के मिश्रण से बना है। इसका असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मौसम विभाग की मानें तो यह स्थिति दो दिन तक रहेगी। दरअसल, वाष्पन प्रक्रिया के चलते भारी व दूषित कण पानी के साथ मिलकर स्मॉग का रूप ले रहे हैं। भारी होने से यह सतह से ज्यादा ऊंचाईं तक नहीं जा पाते है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की मानें तो तेज हवा या बारिश होने से ही प्रदूषण के स्तर में कमी आ सकती है।

स्मॉग की वजह से पॉल्यूशन मास्क पहनकर आने को कहा
मेरठ। कोहरे और स्मॉग के बीच अचानक मौसम ने जो करवट ली है, उसे लेकर स्कूल अलर्ट हो गए हैं। वह बच्चों को मास्क पहनकर आने की सलाह दे रहे हैं। मंगलवार देर शाम दीवान पब्लिक स्कूल ने अपने छात्र-छात्राओं के लिए निर्देश जारी किया कि स्मॉग की वजह से हवा की गुणवत्ता बिगड़ी है। एहतियातन बचाव के लिए पॉल्यूशन मॉस्क पहनकर स्कूल आएं। पैरेंट्स को देर शाम यह मैसेज मोबाइल पर मिला। मौसम अभी ऐसा ही रहने का अनुमान है।

सावधान रहे मरीज
मेरठ। मौसम में धुएं और धुंध से बनी स्मोग की चादर फैली हुई है, जिसने आबोहवा को जहरीला कर दिया है, जो किसी को भी सांस का रोगी बना सकती है। लिहाजा सावधान रहने की जरूरत है। खासकर सांस, शुगर, ब्लड प्रेशर के रोगी और साइनस के मरीजों के लिए यह ज्यादा परेशानी का सबब बन सकता है।
सुबह-शाम में तापमान में गिरावट केसाथ ही हवा में पार्टिकल मैटर (पीएम) अति सूक्ष्म कण तेजी से बढ़ रहे हैं। आसमान में गिर रही ओसकेकारण नमी हो गई है। इसकी वजह से धूल के कण ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं, जिसकी वजह से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है। इसकी वजह से धुंध फैल गई है। इससे चिकित्सकों के पास और अस्पतालों में अस्थमा, साइनस और सांस, एलर्जी के मरीजों की तादाद बढ़ने लगी है।
सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि धुंध में खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनकेलिए धुंध काफी खतरनाक है। ऐसे लोगों को धुंध में निकलने से बचना चाहिए। धुंध अस्थमा, साइनस और एलर्जी वालों मरीजों के लिए उत्प्रेरक का काम करती है। ये कण फेफड़े में चले जाते हैं। इसके लिए प्रदूषण भी काफी हद तक जिम्मेदार है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में तो केंद्रीय आईएमए ने मेडिकल इमरजेंसी घोषित कर दी है।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. तनुराज सिरोही ने बताया कि धुंध-धुएं केकारण सांस लेने में दिक्कत होने पर कई तरह की परेशानियां होती हैं। धूल से बुखार होने का खतरा भी बना रहता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए ये कण ज्यादा नुकसानदेह हैं। इस तरह के मौसम और धुंध से नए वायरस फैल जाते हैं, जो लोगों को कई तरह की बीमारियां देते हैं।
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. विश्वजीत बेम्बी ने बताया कि अभी तक डेंगू और वायरल बुखार के मरीज ज्यादा आ रहे थे, मगर मंगलवार को सांस के मरीजों की संख्या काफी बढ़ गई। ऐसा धुंध की वजह से हुआ है। धुंध से सांस के मरीजों की ओपीडी बढ़ जाती है। सावधानी न बरती जाए तो दिल के मरीजों के लिए ये भी यह खतरनाक हो सकता है। ऐसे मौसम में वायरल इंफेक्शन की भी आशंका बनी रहती है। रात दो बजे से सुबह सात बजे तक हार्ट और ब्रेन अटैक का खतरा ज्यादा रहता है।
मेडिकल अस्पताल के फिजिशियन डॉ. तुंगवीर सिंह आर्य ने बताया कि इस मौसम में ज्यादा हल्के कपड़े न पहनें, बल्कि स्वेटर या जैकेट पहनें। नहीं तो बीमार हो सकते हैं। गर्म सूप या पेय पदार्थ ज्यादा पिएं। शरीर में पानी की कमी न होने दें। अगर धूप निकले तो धूप में बैठें। बच्चे और बुजुर्गों को इस मौसम में ज्यादा देखभाल की जरूरत है।

प्रदूषण से हो सकती हैं ये समस्याएं
– आंखों में जलन, श्वास संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन, त्वचा संबंधी बीमारियां प्रदूषण की प्रमुख व तात्कालिक समस्याएं हैं।

ये सावधानियां बरतें
– सुबह और शाम केसमय टहलने से बचें
– कमरे में एग्जॉस्ट चलाएं
– घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रूमाल लगा लें
– पेय पदार्थ ज्यादा लें, खासकर गर्म पेय पदार्थ
– घरों की खिड़कियां-दरवाजें बंद रखें
– सांस के मरीज अपनी दवाएं समय से लें
– कोई परेशानी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

कुछ उपाय जो करेंगे प्रदूषण से बचाव
– हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से आप प्रदूषण से लड़ पाएंगे।
– धुंध के समय घर से बाहर न निकलें। खुले में व्यायाम करने से भी बचें।
– तरलीय पदार्थ ज्यादा से ज्यादा लें। धूम्रपान को ना कहें।
– घर के आस-पास कूड़ा-कचरा जल रहा हो तो उसकी सूचना तत्काल प्रशासन को दें।
– हो सके तो घर से बाहर निकलें तो अच्छी क्वालिटी का मास्क लगाएं।

लखनऊ तक गूंजा मामला, एसएसपी ने भेजी रिपोर्ट

Gum case to Lucknow, report sent by SSP
एसएसपी मंजिल सैनी दहल।PC: अमर उजाला

 पं. बंगाल के राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी के विरोध में वकीलों का गुस्सा और पुलिस की कार्रवाई का मामला लखनऊ तक गूंज गया है। जेल चुंगी से विश्वविद्यालय गेट तक प्रदर्शन की वीडियो और रिपोर्ट एसएसपी ने लखनऊ भेजी है। जिसमें शांति व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस द्वारा लाठी चलाने का जिक्र किया गया। शासन ने खुफिया विभाग से भी अलग से जानकारी मांगी है।

वकीलों पर लाठी चलने का मामला रविवार को तूल पकड़ गया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 जिलों के वकील पुलिस की गलती बताकर आक्रोश जता रहे हैं। वहीं, पुलिस-प्रशासन के आला अधिकारी लाठीचार्ज से इंकार कर रहे हैं। मामला लखनऊ तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री और डीजीपी ने एसएसपी और डीएम से जानकारी ली। एसएसपी ने इस प्रकरण की रिपोर्ट बनाकर शनिवार देर रात लखनऊ भेज दी थी। मेडिकल थाने में भी इसका तस्करा डाला गया है। जेल चुंगी से विश्वविद्यालय तक वकीलों के हंगामे की वीडियो पुलिस ने भी बनवाई थी। जिसकी एक सीडी लखनऊ भेजी गई। वीडियो में पुलिस का बल प्रयोग नजर आ रहा है। पुलिस की गोपनीय रिपोर्ट में जिक्र किया गया कि अगर पुलिस बल प्रयोग नहीं करती तो बड़ा बवाल हो सकता था।

वकीलों से समझौते के लिए मंथन
रविवार दिन भर वकीलों से समझौते के लिए पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों में मंथन चला। कभी फोन पर तो कभी बैठक कर आपस में चर्चा करते रहे कि यह मामला शांत कैसे हो। कई अधिकारियों ने सीनियर वकीलों से मामले को शांत कराने की अपील भी की। देर रात तक कोई निर्णय नहीं निकला। सोमवार को केंद्रीय संघर्ष समिति की आम सभा पर पुलिस-प्रशासन नजरें जमाए हुए है।

डॉमिनोज के ऑरिगेनो वाले पैकेट में मिले रेंगते हुए कीड़े, फेसबुक पर पोस्‍ट किया वीडियो

 डॉमिनोज के ऑरिगेनो वाले पैकेट में मिले रेंगते हुए कीड़े, फेसबुक पर पोस्‍ट किया वीडियो

जब राहुल ने ऑरिगेनो का पैकेट खोला तो उसमें से कीड़े बाहर न‍िकलने लगे

खास बातें

  1. कीड़ों का रंग भी ऑरिगेनो की तरह था
  2. पिज्‍जा खाने के बाद राहुल बीमार पड़ गए
  3. राहुल ने कंज्‍यूमर ड‍िपार्टमेंट में भी श‍िकायत की है

नई द‍िल्‍ली : बदलती लाइफस्‍टाइल के साथ हम भारतीयों को भी प‍िज्‍जा खूब भाने लगा है. सिर्फ बच्‍चे ही नहीं बल्‍कि बड़े भी इसे खूब चाव से खाते हैं. और खाएं भी क्‍यों न प‍िज्‍जा होता ही इतना टेस्‍टी है. क्रंची बेस, चीज़ी लेयर और मनपसंद टॉपिंग की वजह से यह सबका फेवरेट बना हुआ है. ऊपर से ऑरिगेनो की सीजनिंग इसे और टेस्‍टी बना देती है. लेकिन तब आप क्‍या करेंगे जब आपको पिज्‍जा सीजनिंग में रेंगते हुए कीड़े दिख जाएं. जी हां, यह बिलकुल सच है. दरअसल, फेसबुक पर एक वीडियो पोस्‍ट किया गया है जिसमें डॉमीनोज के सीजनिंग पैकेट में कीड़े रेंगते हुए दिखाई दे रहे हैं.

यह वीडियो दिल्‍ली के रहने वाले राहुल अरोड़ा ने पोस्‍ट किया है. अपने पोस्‍ट में उन्‍होंने  लिखा है, ‘भारत में डॉमिनोज़ पिज्‍जा प्रेमियों सावधान! वेआपको खाने के लिए ये (कीड़े) दे रहे हैं.’  हालंकि डॉमिनोज़ ने फेसबुक पर राहुल से मांफी मांगते हुए पूरे मामले की जांच का आश्‍वासन दिया है.

राहुल ने यह वीडियो 10 सितंबर को पोस्‍ट किया था. उनका दावा है कि उन्‍होंने शुक्रवार शाम ऑ‍नलाइन पिज्‍जा ऑर्डर किया था और अगले दिन सुबह उन्‍हें ऑरिगेनो में कीड़े दिखाई दिए. राहुल ने एनडीटीवी को बताया, ‘कीड़े बहुत ही छोटे थे और कोई भी उन्‍हें ऑरिगेनो ही समझता क्‍योंकि वो ज्‍़यादा हिल नहीं रहे थे. उनका रंग और आकार भी ऑरिगेनो की ही तरह था. मुझे लगा कि कुछ गड़बड़ है इसलिए जैसे ही मैंने अपनी अंगुली से ऑरिगेनो चेक किया कीड़े बिखर गए.’ इतना ही नहीं राहुल को ऑरिगेनो के बाकि बचे चार पैकेटों में भी कीड़े मिले.


बाद में राहुल को डॉमिनोज़ से ऑडर रिप्‍लेस करने के लिए फोन भी आया. उनके मुताबिक, ‘मैंने उनसे कहा कि यह कोई लेट डिलिवरी का मामला नहीं है. उनका खराब खाना खाकर हम बीमार पड़ गए. इस मामले को हल्‍के में नहीं लेना चाहिए.’

यही नहीं राहुल ने कंज्‍यूमर अफेयर डिपार्टमेंट में भी इस मामले को लेकर श‍िकायत दर्ज की है और उन्‍हें जवाब का इंतज़ार है. उन्‍होंने कहा, ‘मैं सोच रहा हूं कि अगर यह अमेरिका में हुआ होता तो क्‍या होता. भारतीय ग्राहकों के प्रति ‘चलता है’ वाले एटीट्यूड को खत्‍म होना ही चाहिए.’

यूपी के इन-इन जिलों में धारा 144 लागू, समर्थकों ने कई ट्रेनों को रोका, स्कूल बंद

In these districts of UP, Section 144 applies, supporters stopped many trains
सहारनपुर में धारा 144 लागू
हरियाणा से लगते जिलों में पुलिस प्रशासन की ओर से हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। पुलिस को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रदेश में ऐसे किसी भी तत्व को घुसने नहीं देना है जिनसे यूपी में भी उपद्रव की आशंका है। साथ ही सभी अफसर खुफिया इकाईयों को भी सतर्क  कर दिया गया है। सीमाओं पर सभी पुलिस रिस्पांस व्हीकल व कंट्रोल रूम को सूचना मिलने पर तत्काल कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं।
मेरठ जोन और खास तौर पर पश्चिम यूपी के उन जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं, जहां की सीमाएं हरियाणा व दिल्ली से मिलती हैं। बागपत के बरनावा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम पर सुबह से ही पुलिस तैनात रही। बागपत में कासिमपुर खेड़ी और किशनपुर बराल के आधा दर्जन से अधिक लोग हरियाणा के पंचकूला गए हैं। उनके परिजन लगातार खबर ले रहे हैं। वहां फंसे लोगों ने परिवार को सुरक्षित होने की बात कही है। बरनावा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम पर कुछ समर्थक सुबह से ही जमा थे, हालांकि फैसला आने के बाद वह धीरे धीरे यहां से निकल गए।  पंजाब और हरियाणा में भड़की हिंसा के बाद दिल्ली सहारनपुर रूट की करीब 20 से अधिक ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। इनमें छह ट्रेनों कोलकाता-जम्मूतवी एक्सप्रेस, कटिहार-जालंधर, जनसेवा एक्सप्रेस, लखनऊ-चंडीगढ़ मेल, हजरत निजामुद्दीन- अंबाला, दिल्ली-अंबाला एक्सप्रेस को सहारनपुर में ही रोक दिया गया।  मुजफ्फरनगर में एसएसपी ने जिले के सभी थाना प्रभारियों और अधिकारियों को क्षेत्र में भ्रमण करने के निर्देश दिए हैं। शामली में मेरठ-करनाल व पानीपत खटीमा हाईवे और बागपत में गौरीपुर यमुना पुल पर वाहनों की चेकिंग की गई।

सहारनपुर, मुजफ्फरनगर शामली, और बागपत जिलों में धारा 144 लगा दी गई। सूचना मिल रही है कि सहारनपुर में कई ट्रेनों को रोक दिया गया। यात्री जमकर हंगामा कर रहे हैं। बताया जाता है कि यात्री सुबह से भूखे प्यासे हैं और अब एक जगह खड़ी ट्रेन में परेशान हो रहे हैं। वहीं बागपत में भी बाबा गुरमीत राम रहीम के बरनावा आश्रम को छावनी में तब्दील कर दिया गया। पूरे बागपत जिले में पुलिसफोर्स तैनात कर दी गई है।

उधर, मेरठ में भी सहोदय ने पब्लिक स्कूलों को बंद रखने का निर्णय लिया है। मेरठ सहोदय के सदस्यों ने देर रात बैठक कर स्कूलों को शनिवार को बंद रखने का निर्णय लिया। मेरठ सहोदय के अध्यक्ष व केएल इंटरनेशनल स्कूल के प्रिसिंपल सुधांशु शेखर ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से शनिवार को सभी स्कूल बंद रहेंगे।

उधर, मुजफ्फरनगर में भी अलर्ट घोषित कर दिया गया है। एसएसपी अनंत देव ने जिले के सभी थाना प्रभारियों और अधिकारियों को अपने क्षेत्र में भ्रमण करने के निर्देश दिए हैं। गांधी कालोनी स्थित रामचर्चा भवन पर ताला लटका हुआ है। शहर में राम रहीम के अनुयायी करीब सात हजार से अधिक बताए गए हैं, जबकि जिले में इनकी संख्या 20 हजार से अधिक बताई गई है। रद्द होने वाली ट्रेनों में कालका पैसेंजर, शालीमार एक्सप्रेस आदि शामिल हैं। जालंधर एक्सप्रेस को अंबाला तक चलाया गया है। बाकी ट्रेनों का संचालन सहारनपुर तक कर दिया गया है। अचानक ट्रेनों के रद्द होने से यात्री परेशान हैं।

खतौली में पुलिस शुक्रवार को सुबह से ही अलर्ट रही। पुलिस ने रेलवे स्टेशन, बस अड्डा समेत देहात क्षेत्र में गश्त किया। खतौली क्षेत्र में भी डेरा सच्चा सौदा के समर्थकों की काफी संख्या है।

बुढ़ाना में कोर्ट में आरोप सिद्ध होने का समाचार मिलते ही उनके समर्थकों में रोष फैल गया। कस्बे में राजबीर, रोहिताश, मांगेराम, अश्वनी, अंकित तथा महिला रोशनी, बीरी आदि ने कहा कि बाबा उनके भगवान हैं। भगवान पर आरोप लगाना गलत है। न्यायालय के निर्णय से उनके समर्थकों की भावनाएं आहत हुई हैं।

सितंबर से मार्केट में आएगा 200 रुपये का नोट, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

rbi to introduce new rupees 200 note by september first week
200 rupee note
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सितंबर के पहले हफ्ते में या फिर इस महीने के आखिर तक मार्केट में 200 रुपये का नया नोट जारी कर देगा। देश में ऐसा पहली बार होगा, जब 200 रुपये का नोट लोग प्रयोग कर पाएंगे। आरबीआई इस नोट को बैंकों और एटीएम मशीनों के जरिए देश भर में उपलब्ध कराएगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए उठाया कदम
इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, 200 रुपये के नोट की ब्लैक मार्केटिंग न हो इसके लिए आरबीआई ने पहले से ही कदम उठा लिए हैं। आरबीआई को उम्मीद है कि नए नोट को लोग हाथों-हाथ ले लेंगे और जमाखोरी कर सकते हैं। इससे बचने के लिए 50 करोड़ नोट छापे गए हैं, ताकि इनकी पूरे देश में कमी न हो।

100 और 500 के बीच नहीं है कोई करेंसी नोट
आरबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि 100 और 500 रुपये के नोट के बीच कोई नोट नहीं है। इस कारण से लोग इस नए करेंसी नोट का ज्यादा प्रयोग कर सकते हैं। छोटे खर्चों में यह नोट ज्यादा प्रयोग होने की उम्मीद है।

2000 के नोट की हुई थी जमाखोरी
नोटबंदी के बाद जब आरबीआई ने 2000 का नोट जारी किया था, तो लोगों ने इसकी जमाखोरी करना शुरू कर दिया था। इससे सबक लेते हुए और जमाखोरी रोकने के  लिए आरबीआई पूरी तैयारी के बाद ही 200 का नया नोट बाजार में उतारने जा रहा है। बता दें कि नोटबंदी से पहले 500 के 1,717 करोड़ नोट थे और 1000 के 686 करोड़ नोट थे। SBI की रिसर्च के मुताबिक नोटबंदी के बाद बड़े नोटों के शेयर में 70 फीसदी की कमी आई है।


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