Category Archives: Hindi

शोभायात्रा के चलते दिल्ली रोड पर लगी वाहनों की लंबी कतार

delhi road jaam during yaatra
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
शहर का जाम ट्रैफिक पुलिस के लिए मुसीबत बना हुआ है। मंगलवार को शहर में अलग-अलग स्थानों पर लोग जाम से जूझते देखे गए। दिल्ली रोड पर एक शोभायात्रा के चलते पुलिस ने वाहनों को रोकते हुए शोभायात्रा निकलवाई। इसके चलते वाहनों की लंबी कतार लग गई।

दोपहर के समय कचहरी पुल पर भीषण जाम की स्थिति बनी रही। लालकुर्ती पैठ बाजार से लेकर जीरो माइल तक भी वाहन जाम में फंसे रहे। जीरो माइल से बेगमपुल चौराहे तक भी जाम लगा रहा। दिल्ली रोड पर भैंसाली बस अड्डा, फैज-ए आम कॉलेज, केसरगंज, रेलवे रोड चौराहा और मेट्रो प्लाजा पर भी जाम की स्थिति बनी रही। घंटाघर, खैरनगर, सराफा बाजार, कबाड़ी बाजार, भूमिया का पुल और हापुड़ अड्डा चौराहा पर भी शाम को वाहन जाम में फंसे रहे। हापुड़ अड्डा पर पुलिया निर्माण के चलते ट्रैफिक पुलिस ने सौ मीटर तक बैरियर लगाकर वनवे कर रखा है, जिसके चलते सिटी बसों को गांधी आश्रम चौराहे से सूरजकुंड की तरफ निकाला गया। इसके अलावा मुख्य चौराहों पर भी जाम की समस्या बनी रही।

बसों को 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा रहे चालक, स्पीड लिमिट है 60 की

roadways bus speed 80 km
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
यात्री सुविधा के नाम पर सीएम योगी से पुरस्कार लेने वाला रोडवेज विभाग ही यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहा है। बसों की गति निर्धारित होने के बावजूद रोडवेज चालक लगातार स्पीड लिमिट क्रॉस कर रहे हैं। रोजाना करीब 150 बसों के ओवर स्पीड करने के अलर्ट कंट्रोल रूम को मिल रहे हैं, लेकिन अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।
यात्रियों के जीवन को सुरक्षित करने और डीजल औसत बेहतर करने के लिए सभी बसों की गति 60 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की है। बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लगाए गए हैं। वीटीएस के जरिये बसों की गति, लोकेशन आदि पर नजर रखने के लिए आरएम आफिस में वीटीएस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। सोमवार को अमर उजाला टीम ने कंट्रोल रूम का दौरा किया। वहां से मिले आंकड़ों के अनुसार दोपहर एक बजे तक रूटों पर गई बसों में से करीब 150 बसों का निर्धारित गति से ज्यादा गति पर चलाए जाने के अलर्ट आ चुके थे। इसमें सबसे ज्यादा सोहराबगेट डिपो की बसों के 71 अलर्ट थे। इसके बाद भैसाली डिपो की 27 बसें ओवर स्पीड मिली। सोहराबगेट डिपो की बस संख्या यूपी 15एटी-7943 16 बार ओवर स्पीड कर चुकी थी। जबकि बस संख्या यूपी 11टी-7372 ने 12 बार, यूपी 86टी-1059 ने 11 बार और मेरठ से मुजफ्फरनगर जा रही भैसाली डिपो की बस संख्या यूपी 82टी-4173 10 बार ओवर स्पीड कर चुकी थी। इस बस के 80 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक के अलर्ट मिले थे। इतना ही ऐसी अनेक बसें थी जो 10 से 16 बार ओवर स्पीड क्रास कर चुकी थी।

डेढ़ महीने में पांच बड़े एक्सीडेंट
ओवर स्पीड और लापरवाही के चलते छोटे-बड़े एक्सीडेंट तो अक्सर रोज ही होते हैं, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में पांच बड़ी दुर्घटना हुई हैं, जिनमें दो सिपाहियों, बस चालक समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। सोहराबगेट डिपो की बस संख्या यूपी 15बीटी-3109 का गत 30 अगस्त को मेरठ से फिरोजाबाद जाते समय रास्ते में एक्सीडेंट हुआ जिसमें 2 पुलिस वालों की मौत हो गई। बस संख्या यूपी 15बीटी- 4565 का गत 31 अगस्त का एक्सीडेंट हुआ जिमसें कई लोग घायल हुए। अनुबंधित बस संख्या यूपी 15बीटी-6039 का बुलंदशहर जाते समय एक्सीडेंट हुआ जिसमें बस चालक की मौत हो गई। इसके अलावा यूपी 15एटी-6283, यूपी 15एटी-7941 का भी एक्सीडेंट हुआ था जिसमें कई लोग घायल हुए थे।

तोड़ देते है वीटीएस का तार 
बस चालक अपना जुर्म छिपाने या ओवर स्पीड कर जल्द से जल्द चक्कर लगाने के लिए बस में लगे वीटीएस का तार तोड़ देते है ताकि वीटीएस में उनका जुर्म पकड़ में न आ सके। अधिकारियों का कहना है कि वीटीएस के तारे टूटने या खराब होने के आधा दर्जन से ज्यादा केस रोज आते हैं।

ओवर स्पीड से घटता है डीजल औसत
विभाग ने बेहतर डीजल औसत लाने वाले चालकों को पुरस्कृत करने नियम बना रखा है। तय स्पीड पर बस चलाने से ही यह संभव होता है। ओवर स्पीड करने पर डीजल औसत खराब हो जाता है। लेकिन अधिकतर बस चालक निर्धारित किलोमीटर पूरे करने के चक्कर में निर्धारित गति से अधिक गति से बस संचालित करते हैं।

रोडवेज बस के फर्स्ट एड बॉक्स में म्यूजिक सिस्टम

roadways bus fist aid box become music system
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक उपचार पेटिका) तो हैं, लेकिन उनमें प्राथमिक उपचार की दवाइयां ही नहीं हैं। अमर उजाला ने रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की स्थिति जानी तो तस्वीर चौंकाने वाली मिली। किसी बॉक्स में कपड़े रखे मिले तो कोई बिल्कुल खाली मिला। कई बसों में तो इन बॉक्स में म्यूजिक सिस्टम तक लगा दिए गए हैं।
ये है नियम
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स का मकसद यह है कि स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी होने या चोट आदि लगने पर यात्री को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाए। मामला अगर गंभीर हो तो प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाया जाए। रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा अमूमन चालक  के पीछे लगे स्टैंड या फिर ऊपर सामान रखने की जगह छोटा बॉक्स बनाकर देने का नियम है। इन बॉक्स में पेट दर्द, सिर दर्द आदि की दवा और मरहम पट्टी की व्यवस्था होती है। खासकर लंबी दूरी की बसों में तो यह व्यवस्था आवश्यक रूप से रखने के आदेश उच्चाधिकारियों ने दे रखे हैं। लेकिन इन आदेशों की रोडवेज बसों में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

तो नहीं मिलेगा उपचार
सवाल यह है कि रोडवेज बस में सफर करने के दौरान यदि किसी यात्री को प्राथमिक उपचार देने की जरूरत पड़ जाए तो क्या होगा। क्योंकि इन फर्स्ट एड बॉक्स में न तो कोई दर्द निवारक गोली है और न ही कोई मरहम पट्टी की व्यवस्था। ऐसे में यात्रियों को प्राथमिक उपचार मौके पर कैसे मिलेगा।

चालक-परिचालक पर होगी कार्रवाई
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक एसके बनर्जी का कहना है कि फर्स्ट एड बॉक्स में दवाइयां आदि रखनी अनिवार्य हैं। अगर दवाइयां नहीं हैं तो यह बताना चालक-परिचालक की जिम्मेदारी है। ऐसे चालक-परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने इसकी सूचना नहीं दी है। आरएम रोडवेज के अनुसार वे खुद बसों का निरीक्षण करेंगे। जिन बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में दवाइयां नहीं मिलेंगी, उसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करेंगे।

फर्स्ट एड बॉक्स तो घरों से भी गायब
पहले घरों में भी फर्स्ट एड बॉक्स बनाए जाते थे, लेकिन अब जागरूकता के अभाव में वहां भी गायब होते जा रहे हैं। इस संबंध में आईएमए अध्यक्ष डॉ. वीरोत्तम तोमर का कहना है कि सभी घरों में फर्स्ट एड बॉक्स रखना चाहिए। यह काफी मदद करता है। इसमें सामान्य पेट दर्द, सिरदर्द, बुखार की दवाएं, मरहम, पट्टी और थर्मामीटर आदि रखें। प्राथमिक उपचार के बाद जरूरत पड़े तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

नाव हादसा : जान जोखिम में डालकर खेती करने जाते हैं कई गांवों के किसान

Farmers from many villages go to farming at risk
जान जोखिम में डालकर करने जाते हैं खेती
बागपत जनपद में दोघट थाना क्षेत्र के झूंडपुर, मिलाना, तवेला गढ़ी सहित कई अन्य गांवों के हजारों किसान और मजदूर जान जोखिम में डालकर हिंडन नदी पार कर खेती करने के लिए जाते हैं। कई बार बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन ने आज तक किसानों का दर्द नहीं समझा। किसान हिंडन नदी पर वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
क्षेत्र के तवेला गढ़ी, झूंडपुर, मिलाना, पट्टी बंजारन गांव के हजारों किसानों की हिंडन नदी के दूसरी तरफ हजारों बीघा जमीन है। संबंधित किसान और मजदूर हर रोज भैंसा बुग्गी से या फिर तैर कर नदी को पार कर खेतों में काम करने के लिए जाते हैं। हिंडन नदी को पार करने में कई किसान एवं मजदूरों की जान भी जा चुकी है, लेकिन किसान फिर भी नदी पार करने को मजबूर हैं, क्योंकि नदी के उस पार उनकी हजारों बीघा जमीन है। जिस पर खेती करने के लिए जाते हैं। खेती से उनके घरों के चूल्हे चलते हैं।

शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारी ने नहीं ली कोई सुध

विधायक सहेंद्र सिंह रमाला

हिंडन नदी के रास्ते किसान को दो मिनट लगती है अपने खेतों तक जाने में और यदि किसान सरोरा पुल से होकर जाए तो उन्हें तीन से चार घंटे अपने खेतों तक जाने में लगते हैं। इसलिए किसान नदी के रास्ते जाना ही सही समझते हैं। संबंधित गांवों के किसान और मजदूर कई साल से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से हिंडन नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे है, लेकिन आज तक किसी भी जन प्रतिनिधि या शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारी ने उनकी कोई सुध नहीं ली। ग्राम प्रधान संजीव कुमार ने हिंडन नदी पर पुल बनाने की मांग की, ताकि तवेला गढ़ी, पट्टी बंजारन, झूंडपुर, मिलाना आदि गांवों के किसानों और मजदूरों को खेतों में जाने के लिए सुविधा मिल सके। पूर्व विधायक वीरपाल राठी ने भी विधानसभा में भी हिंडन नदी पर पुल बनाने का मुद्दा उठाया, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा।

विधानसभा में उठाएंगे मुद्दा: सहेंद्र सिंह 
रालोद नेता और छपरौली के विधायक सहेंद्र सिंह रमाला ने कहा विधानसभा में नदियों पर पुल के मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री से मिलकर ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान कराएंगे।

रोडवेज की मनमानी पर एमडीए का ब्रेक

roadways ki manmaani
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
 एनजीटी में मामला होने के बावजूद बेफिक्र होकर निर्माण कार्य करा रहे रोडवेज अधिकारियों की मनमानी पर एमडीए की रोक लगी है। भैंसाली बस अड्डा मानचित्र केफेर में उलझ गया है। एमडीए की टीम ने मौकेपर जाकर निर्माण कार्य तो रुकवा ही दिया साथ ही मंडलायुक्त को भी रिपोर्ट भेजी है। उधर, कमिश्नर ने बस अड्डे को शिफ्ट करने की फाइल भी तलब कर ली है।
 नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मेरठ के भैंसाली और सोहराबगेट बस अड्डों की शिफ्टिंग को लेकर गंभीरता दिखाई है। कोर्ट ने कहा है कि मेरठ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष सभी पक्षों को सुने। दरअसल, इन बस अड्डों की वजह से जहां शहर की यातायात व्ववस्था कुंद होकर रह गई है तो वहीं लोगों को भारी प्रदूषण की मार झेलनी पड़ रही है। बावूजद इसकेरोडवेज अधिकारियों न केवल भैंसाली अड्डे की पुरानी इमारत को तुड़वा दिया बल्कि पांच करोड़ रुपये खर्च कर नए निर्माण का खाका खींच दिया। इसी के लिए चारदीवारी तथा अन्य निर्माण शुरू कर दिया गया था। जोन ए के प्रभारी करनवीर सिंह ने टीम के साथ मौके पर जाकर काम रुकवा दिया।

उड़ रहे धूल के गुबार
भैंसाली अड्डे पर मिट्टी डालने के कारण यहां चारों तरफ धूल के गुबार उड़ रहे हैं। लोगों को इसके सामने से मुंह ढककर निकला पड़ रहा है। यहां तक कि यहां ड्यूटी कर रहे ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को मास्क लगाना पड़ रहा है। गाड़ियों का प्रदूषण तो है ही। ऐसी ही स्थिति के मद्देनजर एनजीटी ने कहा था कि रोडवेज अपना पक्ष एमडीए उपाध्यक्ष के सामने रखे। इसकी बजाय रोडवेज अधिकारियों ने निर्माण आरंभ कर दिया। यह निर्माण भी प्राधिकरण की मंजूरी के बिना हो रहा था।

कमिश्नर ने दिखाई सख्ती
मंडलायुक्त डा. प्रभात कुमार ने साफ कहा कि नियमों से ही काम होगा। मानचित्र तो रोडवेज विभाग को भी बनवाना होगा। दूसरा एनजीटी के आदेश केमुताबिक काम होगा। पिछले दिनों रोडवेज अधिकारी आयुक्त कार्यालय में जाकर भैंसाली बस अड्डे के सौंदर्यीकरण की योजना पर प्रजेंटेशन देकर आए थे पर बिना मंजूरी के निर्माण होने को कमिश्नर डा. प्रभात ने गंभीरता से लिया। उन्होंने तत्काल इसका मुआयना कर काम रुकवाने को कहा। हालांकि रोडवेज अधिकारियों ने पक्ष रखा था कि भैंसाली बस अड्डे के सौंदर्यीकरण, बस अड्डे का लेवल ऊंचा करने और यात्री शेड बनाने के लिए सरकार की ओर से 5 करोड़ की योजना मंजूर हुई है। 2.5 करोड़ रुपये रिलीज भी कर दिया गया है।

बिल्डर के दो मकानों की होगी कुर्की

bilder do makaano ki kurki
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
छावनी क्षेत्र के बंगला नंबर 210बी के मामले में हाईकोर्ट ने बिल्डर आनंद प्रकाश अग्रवाल के दो घरों की कुर्की का आदेश दिया है। छह महीने की सजा सुनाने के बाद लगातार फरार चल रहे बिल्डर की कुर्की का आदेश शुक्रवार को सुनाया गया। कैंट बोर्ड ने कोर्ट को बिल्डर के दो घर होने की जानकारी दी थी।

बंगला नंबर 210 बी का मामला
कैंट एरिया में बंगला नंबर 210बी करीब दो एकड़ क्षेत्र में फैला है। दस्तावेजों में यह डिफेंस लैंड है। इसकी कीमत करीब 278 करोड़ रुपये आंकी गई है। वर्तमान में इस जमीन पर आनंद प्रकाश अग्रवाल के मकान समेत 92 मकान बने हुए हैं। आनंद प्रकाश अग्रवाल ने इस जमीन पर प्लॉट काटे और अवैध रूप से मॉल का निर्माण किया। केस में हाईकोर्ट ने 2014 में फैसला सुनाया था। अवैध निर्माण को गिराने और बिल्डर को छह महीने जेल की सजा सुनाई गई थी। इस एरिया में रह रहे करीब 15 लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका यह कहते हुए दायर की थी कि उनका पक्ष नहीं सुना गया। कोर्ट ने उनका पक्ष सुनते हुए एक मार्च 2016 को सभी याचिका खारिज कर दी थी। अवैध निर्माण को गिराने का आदेश दिया था। तब से आनंद प्रकाश फरार चल रहा है। कैंट बोर्ड की टीम ने हाईकोर्ट के आदेश के पालन में नौ अगस्त 2016 को बंगले के अवैध निर्माण को गिराया था।अब आया कुर्की का आदेश
हाईकोर्ट ने पिछले दिनों आनंद प्रकाश अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए मेरठ सीजेएम कोर्ट को निर्देश दिया था। सीजेएम कोर्ट से मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा। कैंट बोर्ड ने आनंद प्रकाश के दो आवास बंगला नंबर 210बी में और एक थापरनगर का पता कोर्ट को दिया। यह वो पता हैं, जिनसे आनंद प्रकाश ने कैंट बोर्ड के साथ पत्राचार किया। कैंट बोर्ड सीईओ राजीव श्रीवास्तव के मुताबिक शुक्रवार को हाईकोर्ट ने आनंद प्रकाश के दोनों मकान की कुर्की का आदेश सुनाया है।

लोगों के लिए परेशानी खड़ी हुई
बंगला नंबर 210 बी में रहने वाले लोगों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। कैंट बोर्ड के रिकॉर्ड के मुताबिक उनके मकान का नक्शा पास नहीं है। वह डिफेंस लैंड है। हाल में अवैध निर्माण के खिलाफ होने वाली कार्रवाई टल जरूर गई, लेकिन शुरुआत बंगला नंबर 210 बी से होनी थी। कैंट बोर्ड का कहना है वह अब बिजली कनेक्शन काटने के लिए विद्युत विभाग को लिखेंगे।

950 यात्री बिना टिकट, इससे ज्यादा भागे

950 were without ticket, more than run away
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
रोडवेज के मुकाबले रेल किराया सस्ता होने के बावजूद लोगों की बिना टिकट सफर करने की प्रवृत्ति खत्म नहीं हो पा रही है। इसको रोकने के लिए रेलवे ने टिकट चेकिंग अभियान शुरू कर दिया है। दिल्ली-सहारनपुर रेलवे ट्रैक पर चल रहे संयुक्त चेकिंग अभियान के तहत बृहस्पतिवार को रेलवे मजिस्ट्रेट की निगरानी में सुबह पांच बजे से शाम पांच बजे तक 950 यात्रियों को बिना टिकट के पकड़ा गया। वहीं इससे ज्यादा यात्री टीम को देखकर भागने में कामयाब रहे। 95 लोगों से 3 लाख 73 हजार जुर्माना वसूला गया और जुर्माना नहीं देने वाले 6 लोगों को जेल भेज दिया गया।

बुधवार को ही सेक्शन के टीसी की टीम सिटी स्टेशन पर पहुंच गई थी। बृहस्पतिवार सुबह पांच बजे गोल्डन टेंपल एक्सप्रेस के आगमन से ही टीमों ने अपना काम करना शुरू कर दिया था। इसके बाद चेकिंग अभियान सिटी स्टेशन पर पहुंचने वाली अप व डाउन ट्रेनों से लेकर स्टेशन पर पहुंचने वाले बिना टिकट यात्रियों की धरपकड़ का चलता रहा। रेलवे मजिस्ट्रेट गाजियाबाद आलोक दूबे की निगरानी में चले अभियान में टीसी व आरपीएफ की संयुक्त टीमों ने 950 लोगों को पकड़ा। इसमें 849 लोगों ने तो किराये की पर्ची कटवा ली, लेकिन पर्ची नहीं कटवाने वाले 101 लोगों को मजिस्ट्रेट आलोक दूबे के सामने पेश किया गया। इनमें से 95 लोगों ने जुर्माने की राशि अदा कर दी। जुर्माना नहीं देने वाले 6 लोगों को जेल भेज दिया गया। 3 लाख 73 हजार 839 रुपये जुर्माने के रूप में वसूले गए। नार्दन रेलवे के सीपीआरओ नीरज शर्मा ने बताया अभियान जारी रहेगा।

टीम को देखकर भाग गए काफी यात्री
ट्रेनों में बिना टिकट सफर कर रहे काफी लोग चेकिंग टीम को देखकर ट्रेन से कूदकर भाग गए। स्टेशन खुला होने का फायदा उठाते हुए कई युवा तो आउटर पर ही कूद गए। आरपीएफ जवानों ने कई को तो भागकर पकड़ा। चेकिंग अभियान से स्टेशन पर पूरे दिन हड़कंप मचा रहा। वहीं अन्य दिनों के मुकाबले जनरल टिकट काउंटर की कमाई में भी इजाफा हुआ।

सीसीटीवी फुटेज में दिखा, गला रेते जाने के बाद घिसटते हुए टॉयलेट से बाहर आया था प्रद्युम्‍न : पुलिस

सीसीटीवी फुटेज में दिखा, गला रेते जाने के बाद घिसटते हुए टॉयलेट से बाहर आया था प्रद्युम्‍न : पुलिस
 प्रद्युम्‍न ठाकुर गले में चाकू के दो घाव थे, जिसमें से एक घाव काफी गहरा था. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. गुरुग्राम के रयान स्‍कूल के टॉयलेट में हुई थी पद्युम्‍न ठाकुर की हत्‍या
  2. सात साल के बच्‍चे की हत्‍या के बाद के CCTV फुटेज पुलिस को मिले
  3. बस कंडक्‍टर अशोक कुमार पर है प्रद्युम्‍न की हत्‍या का आरोप

नई दिल्‍ली: गुरुग्राम के रयान इंटरनेशल स्‍कूल में सात वर्षीय छात्र प्रद्युम्‍न ठाकुर की हत्‍या के बाद के सीसीटीवी फुटेज पुलिस के हाथ लगे हैं. प्रद्युम्‍न की स्‍कूल के टॉयलेट में नृशंसतापूर्वक गला रेतकर हत्‍या कर दी गई थी. गुरुग्राम पुलिस ने NDTV को बताया कि टॉयलेट के बाहर लगाए गए कैमरे से उसे ये फुटेज हासिल हुई है. पुलिस के अनुसाार, फुटेज में प्रद्युम्‍न को टॉयलेट में प्रवेश करते हुए साफ तौर पर देखा जा सकता है. इसके कुछ मिनट बाद बस कंडक्‍टर अशोक कुमार टॉयलेट पहुंचा है. कुछ मिनटों के बाद खून से लथपथ प्रद्युम्‍न घिसटते हुए टॉयलेट से बाहर आता दिखाई देर रहा है. अशोक कुमार पर ही प्रद्युम्‍न की हत्‍या का आरोप है. वह वॉशरूम के दरवाजे के पास लड़खड़ाकर गिर जाता है. इससे दीवार खून से सन जाती है.

पोस्‍टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सात वर्षीय प्रद्युम्‍न की मौत कुछ ही मिनटों में बड़ी मात्रा में खून बहने के कारण हो गई थी. उसे गले में चाकू के दो घाव थे, इनमें से एक घाव काफी  गहरा और गंभीर था. उससे उसकी सांस लेने वाली नली बुरी तरह क्षतिग्रस्‍त हो गई और इसी कारण वह मदद के लिए चिल्‍ला नहीं सका था. पुलिस के मुताबिक, मामले में गिरफ्तार किए गए बस कंडक्‍टर अशोक ने हत्‍या की बात स्‍वीकार कर ली है. पुलिस की जानकारी के अनुसार, अशोक ने बताया है कि उसने बच्‍चे को यौन हमले का शिकार बनापने की कोशिश की थी, इसका विरोध करने पर उसने बच्‍चे की हत्‍या कर दी थी.

स्‍कूल में घटना के समय मौजूद प्रत्‍यक्षदर्शियों ने बताया कि प्रद्युम्‍न को टॉयलेट के बाहर खून से लथपथ मिलने के बाद अशोक ही बच्‍चे को अस्‍पताल पहुंचाने के लिए कार तक लेकर गया. बाद में वापस लौटकर उसने खून से सनी अपनी शर्ट को धोया था. शुक्रवार को हुई इस घटना के समय स्‍कूल में मौजूद एक अभिभावक सुभाष गर्ग ने कहा कि खून देखकर उसे नफरत होती है.

यूपी के बागपत में नाव पलटी, अभी तक 19 की मौत, तलाशी अभियान जारी

Baghpat: many people dead after a boat carrying over 24 people capsized in Yamuna river
यूपी। बागपत के काठा गांव में यमुना में नाव पलटने की खबर सामने आयी है। बताया जा रहा है कि हादसे में करीब 50 लोग नदी में डूबे हैं। मौके पर बचाव कार्य के लिए सैंकड़ो ग्रामीण पहुंचकर कर तलाशी कार्य में मदद कर रहे हैं। अब तक 19 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं। वहीं, 25 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

जानकारी के मुताबिक ये लोग काठा से नाव में सवार होकर सोनीपत मजदूरी के लिए जा रहे थे। लोगों का कहना है कि नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार थे। इसीलिए यह पलट गई। हालांकि हादसे के कारणों का आधिकारिक तौर पर कोई खुलासा नहीं हुआ है।

राहत और बचाव का कार्य अभी जारी है। यमुना से निकाले गए 16 लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया है। इनमें 8 को मेरठ के लिए रेफर किया गया है।

गड्ढों से अछूती नहीं हैं छावनी की सड़कें

pit in cantt road
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
शहर में नगर निगम, पीडब्लूडी, आवास एवं विकास परिषद् और एमडीए की सड़कों में ही गड्ढ़े नहीं हैं बल्कि छावनी क्षेत्र की सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। सुंदर और टिकाऊ रूप में देखी जाने वाली सड़कों का बुरा हाल है। छावनी परिषद् ने भी गड्ढे भरने शुरू नहीं किए हैं।
छावनी क्षेत्र स्थित महताब सिनेमा से भैसाली मैदान मार्ग, शहीद स्मारक मार्ग, सेंट जोंस स्कूल मार्ग समेत काफी सड़कें गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। गहरे गड्ढों के चलते दोपहिया वाहनों का चलाना मुश्किल हो गया है। अमर उजाला टूटी सड़कों को लेकर छावनी परिषद् के अधिकारियों को जगाने का काम कर रहा है। हालांकि अभी तक उनकी कुंभकर्णी नींद नहीं टूटी है। वहीं, कैंट बोर्ड के प्रवक्ता एमए जफर का कहना है कि बारिश के चलते गड्ढे हो गए हैं। उन्हें शीघ्र भरा जाएगा।

उधर, शहर में एमडीए की सड़कों का बुरा हाल है। एसएसपी कार्यालय के सामने, घंटाघर से रेलवे रोड चौराहा, छतरी वाले पीर से बच्चापार्क, वेस्टर्न  कचहरी मार्ग और सरस्वती लोक मार्ग इसे बताने के लिए पर्याप्त है। अभी तक भी सड़क को गड्ढा मुक्त करने की पहल नहीं की गई है।