Category Archives: Health

डेंगू का वायरस डाउन

मौसम में आई ठंडक से डेंगू का वायरस डाउन पड़ गया है। यही कारण है कि पिछले एक हफ्ते में डेंगू के मामलों में कमी देखने को मिली है। हालांकि चिकनगुनिया का प्रकोप आज भी सिर चढ़ कर बोल रहा है। जिसमें सबसे अधिक परेशानी का कारण बॉडी में पेन बना हुआ है। एक हफ्ते में डाउन हुआ डेंगू तारीख डेंगू चिकनगुनिया 01 अक्टूबर – 2 23 02 अक्टूबर – 4 13 03 अक्टूबर – 1 8 04 अक्टूबर – 2 26 05 अक्टूबर – 2 5 06 अक्टूबर – 4 18 07 अक्टूबर – 4 22 08 अक्टूबर – 2 20 दर्द का रहा बेहाल डेंगू का खौफ और चिकनगुनिया का असहनीय दर्द लोगों का दम निकाल रहा है। शरीर में अजीब तरह का असहनीय दर्द पैदा करने वाला यह बुखार स्वास्थ्य विभाग के लिए भी आफत बन गया है। विभाग के पास बुखार का तो इलाज है, लेकिन दर्द का कोई स्थाई उपचार नहीं है. अपना खास ख्याल रखें तो न लें पेन किलर डॉक्टर्स की मानें तो चिकनगुनिया में कोई भी पेन किलर लेने से पूर्व प्लेटलेट्स चेक कराएं। यदि प्लेटलेट्स डाउन हैं तो पेन किलर से परहेज रहीं रखें. कहीं ठहर न जाए दर्द चिकनगुनिया लंबे समय तक पीड़ादायक रोग है। हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक 5 प्रतिशत लोगों में 10 सालों तक …

भीड़ सबके साथ पर वोटर किसके हाथ

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला
 सहारनपुर में पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फिर बसपा सुप्रीमो मायावती और अब रालोद की बड़ौत रैली में भारी भीड़ उमड़ी। इसी तरह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के रोड शो में भी अच्छी-खासी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। यही नहीं, मुजफ्फरनगर में पूर्व सांसद संजय चौहान की स्मृति में हुए कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पहुंचे तो उन्हें सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। ऐसे में सियासी गलियारों जनता के मूड को लेकर चर्चा तेज है।
फिलहाल, यह भीड़ वोट में कितनी तब्दील होगी, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन, बड़ौत रैली की भीड़ से रालोद नेता उत्साहित हैं। ऐसा ही उत्साह मोदी की रैली के बाद भाजपा और मायावती की रैली के बाद बसपा नेताओं में दिखा था। सभी दलों के कयास और उत्साहजनक नतीजों की उम्मीद के बीच यह भी कहा जा रहा है कि वोटर अभी अपने-अपने तरीके से हर दल को परख रहा है। वह अभी से किसी निर्णय पर पहुंचने की जल्दबाजी में नहीं है। ऐसे में जाहिर है कि विधानसभा चुनाव करीब आने के बाद ही स्थिति साफ होने की उम्मीद कर सकते हैं।
रालोद की बड़ौत में हुई स्वाभिमान रैली को पार्टी समर्थक संजीवनी के रूप में देख रहे हैं। रैली में दिग्गज नेता पहुंचे तो भीड़ भी उसी अंदाज में मौजूद रही। भारी भीड़ के सामने जब जयंत चौधरी को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया गया तो भीड़ पूरे उत्साह में नजर आई। रालोद के वरिष्ठ नेताओं ने इसे नए युग के आगाज का संकेत बताया। रालोद की रैली पर दूसरे दलों की भी निगाह लगी थी। अब खास बात यह है कि सरकार के दो साल पूरे होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सहारनपुर में विशाल जनसमूह को संबोधित किया था।
मोदी को देखने और सुनने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। भीड़ को देखकर भाजपाइयों ने लोकसभा चुनाव के करिश्मे को विधानसभा चुनाव तक चलने का एलान कर दिया था। पार्टी नेताओं ने पश्चिम के जिलों में यह संदेश भी पहुंचाया। इसके बाद बारी बसपा सुप्रीमो मायावती की रही। उन्होंने सहारनपुर में उसी मैदान में अपनी ताकत का अहसास कराया। एक तरह से मायावती ने बसपा की विधानसभा चुनाव की तैयारियों का अंदाजा दूसरे दलों को करा दिया। इस रैली में भी भीड़ को देखकर सियासी पंडित असमंजस में पड़ गए। सपा भी शक्ति प्रदर्शन में पीछे नहीं रही। अगस्त में मुजफ्फरनगर में हुए कार्यक्रम को रैली जैसा रूप दिया गया। इसमें भी अखिलेश को देखने के लिए युवाओं में काफी उत्साह था। पश्चिम में हुए इस कार्यक्रम की सफलता से सपाई गदगद नजर आए थे।
चार अक्तूबर को बड़ौत में रालोद ने माहरैली का आयोजन किया तो पश्चिम के जिलों में ही राहुल भी रोड शो कर रहे थे। रालोद की महारैली में जहां रिकार्ड भीड़ आई तो वहीं राहुल से संवाद करने को आतुर लोगों का उत्साह भी कम नहीं रहा। बृहस्पतिवार को मेरठ में रोड शो में भी लोग राहुल को देखने के लिए उमड़ पड़े। अपनी जमीन खो चुकी रालोद ने इसे नई उम्मीद की संज्ञा दी तो कांग्रेस का मानना है कि राहुल के करिश्मे के कारण वह पश्चिम में मजबूत ताकत बनकर उभरेगी। ऐसे में अहम सवाल यह है कि रैलियों या रोड शो में उमड़ने वाली इस भीड़ का आशय क्या है। क्या जनता भी अलग-अलग कार्यक्रमों में जाकर नेताओं को परख रही है। क्या यह जनता का टेस्ट है, जिसमें पास होने वाले को ही वह अपना वोट देगी। सियासत से जुड़े लोगों का कहना है कि अभी वोटर अपना मन बनाने के लिए सभी को परख रहा है। ऐसे में यह देखना होगा कि इस भीड़ को वोट में बदलने का किस पार्टी का हुनर काम आएगा।

डेंगू-चिकनगुनिया पर सुप्रीम कोर्ट में सतेंद्र जैन का हलफनामा- मेरी नहीं, एलजी की सुनते हैं स्वास्थ्य सचिव

डेंगू-चिकनगुनिया पर सुप्रीम कोर्ट में सतेंद्र जैन का हलफनामा- मेरी नहीं, एलजी की सुनते हैं स्वास्थ्य सचिव

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की फटकार और जुर्माने के बाद दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि स्वास्थ्य सचिव चंद्राकर भारती कई मीटिंग में कहने के बावजूद शामिल नहीं हुए और न ही मंत्री से मिलने के लिए उपस्थित रहे.

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि सचिव उपराज्यपाल को रिपोर्ट करने में विश्वास रखते हैं न कि मंत्री को. सतेंद्र जैन ने अपने हलफनामे में उपराज्यपाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि मंत्री के मना करने के बावजूद उपराज्यपाल ने उन्हें स्वास्थ्य सचिव बनाया.

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने अपने हलफ़नामे में यह भी कहा कि भारती ने मोहल्ला क्लीनिक को स्थापित करने में कभी दिलचस्पी नहीं दिखाई. उन्होंने छुट्टी पर जाने से पहले मुझसे मिलना भी जरूरी नहीं समझा और यहां तक कि बिना मेरी इजाजत के छुट्टी पर चले गए. मुझे बाद में उपराज्यपाल के दफ्तर से पता चला कि वह 5 सितंबर से 15 सितंबर तक के लिए छुट्टी पर गए हैं.

इतना ही नहीं सचिव ने छुट्टी से लौटने के बाद किसी भी मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया जिसमें यह तय होने था कि डेंगू और चिकनगुनिया पर कैसे रोकथाम लगाई जाए?

स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने अपने हलफ़नामे में यह भी कहा कि पिछले 20 दिनों से उन्होंने दिल्ली के 15 अस्पतालों में खुद विजिट किया और मरीजों और डॉक्टरों के संपर्क में रहे.

एंट्रेंस पास करने वालों से आवेदन मांगेगा विवि

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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय पीएचडी एंट्रेंस पास करने वाले सभी अभ्यर्थियों से कोर्स वर्क के लिए आवेदन आमंत्रित करने जा रहा है। इस सप्ताह यह प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। विषयों में खाली सीट और एंट्रेंस से बाहर रहने वाले आवेदकों का ब्योरा विवि ने तैयार कर लिया है। एंट्रेंस पास करने वालों का भी ब्योरा है, लेकिन उनमें से कोर्स वर्क करने में कितनों की दिलचस्पी है, यह आवेदन से पता चल जाएगा। आर्ट स्ट्रीम के कुछ विषयों में कोर्स वर्क के लिए मेरिट तैयार करनी पड़ सकती है।
 विवि पीएचडी के लिए कोर्स वर्क जल्द शुरू करने जा रहा है। विषयवार खाली सीटों की संख्या, एंट्रेंस से छूट वाले आवेदकों की संख्या और एंट्रेंस क्वालीफाई करने वालों की संख्या विवि के पास है। विवि ने आरडीसी (रिसर्च डेवलेपमेंट कमेटी) की बैठक करानी शुरू कर दी है। राजनीति विज्ञान और अंग्रेजी विषय की हो भी चुकी है। दूसरे विषयों का भी शेड्यूल तय किया जाएगा। विवि पहले एंट्रेंस क्वालीफाई करने वालों से कोर्स वर्क के लिए आवेदन आमंत्रित करेगा।
32 विषयों में करीब 1800 अभ्यर्थियों ने एंट्रेंस क्वालीफाई किया है। साइंस के अधिकांश विषयों में तो सीट को लेकर मारामारी नहीं होगी, लेकिन आर्ट्स में जरूर कुछ विषयों में फाइट है। विवि इस सप्ताह आवेदन मांग सकता है। कोर्स वर्क छह महीने का होगा। जिसमें दो पेपर पास करने होंगे। फीस 25 हजार रुपये है। कोर्स वर्क सीटों के सापेक्ष कराया जाएगा। कुलपति प्रो. एनके तनेजा का कहना है पीएचडी के कोर्स वर्क जल्द शुरू किए जाएंगे। जेआरएफ (जूनियर रिसर्च फेलोशिप) आवेदकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आरडीसी कराई जा रही हैं। उन्हें फेलोशिप के लिए दो साल के अंदर ज्वाइन करना होता है।एक से अधिक जगह भी चल सकते हैं कोर्स वर्क
अभी तक विवि एक विषय का कोर्स वर्क एक ही जगह चलाता रहा है। मेरठ और सहारनपुर मंडल के कॉलेजों के शिक्षक के अंडर पीएचडी कर रहे शोधार्थी रहते हैं। कुछ विषयों में कोर्स वर्क करने वाले 100 से भी अधिक होंगे। ऐसे में एक क्लास में सबको कोर्स वर्क कराना संभव नहीं होगा। इस पर विवि सोच रहा है कि 40 शोधार्थी से अधिक होने पर एक ही विषय का कोर्स वर्क दो जगह या इससे अधिक जगह पर भी कराया जा सकता है।

53 days to our GWR – Celebrating Colours of Life — Different Shades of ‘Grey’

Good Morning Meerut. Sound of rain drops at very early morning is one of the best music to my ears… Raag Malhaar.. Ha Ha … While Meerut prepares to select the right colours to paint its largest painting by numbers… these late monsoon showers with clouds of different shades of grey covering the horizon made me wonder… which colour appeals to nature most… I was sure it was black or white… but that I realized nature preferred to mix them in different proportions to play on her canvass to find the right shades of grey… To me grey signifies maturity.. age.. life fading away very slowly… wrinkles on skin… and natures canvass – the sky with multiple shades of grey… I am sure the theme of our GWR will also have lots of variance of grey… So I welcome you to celebrate colours of life with Meerut and dont forget to bring your parents to this festival… it may be their biggest opportunity to take back home the most prestigious experience of painting their favorite shade of grey……  Have a wonderful day with your parents and grand parents..Happy Rain…

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दूसरे बच्‍चों की तुलना में इस लड़की का विकास आठ गुना है अधिक

उम्र सामान्‍य की तुलना में आठ गुना तेजी से बढ़ने लगती है।
समय से पहले बूढ़ा करने वाले रोग है प्रोगेरिया सिंड्रोम।
यह बीमारी अस्‍सी लाख लोगों में से एक को प्रभावित करती है।
कुछ लोग ही 13 साल से अधिक उम्र पार कर पाते हैं।
पांच साल की एक बहादुर बच्‍ची एक दुर्लभ बीमारी से पीड़ि‍त है जिसमें उम्र सामान्‍य की तुलना में आठ गुना तेजी से बढ़ने लगती है। लुर्सी पार्के समय से पहले बूढ़ा करने वाले रोग हसिंचन गिलफोर्ड प्रोगेरिया सिंड्रोम से जूझ रही है- अधिक सामान्‍यत इस बीमारी को प्रोगेरिया के रूप में जाना जाता है।
यह बीमारी अस्‍सी लाख लोगों में से किसी एक को प्रभावित करती है और दुनिया में अब तक इसके केवल 100 मामले सामने आये हैं। अफसोस की बात है कि अभी तक प्रोगेरिया के लिए कोई इलाज नहीं है, और इस सिंड्रोम के साथ कुछ ही लोग 13 साल से अधिक उम्र पार कर पाते हैं। अधिकांश उपचार का ध्‍यान अथेरोस्क्लेरोसिस जैसे हार्ट अटैक और स्‍ट्रोक की जटिलताओं को 90 प्रतिशत कम करने में मदद करता है। हालांकि, दुनिया भर के डॉक्‍टर इलाज के लिए विभिन्‍न दवाओं का परीक्षण कर नए पहलुओं को विकसित कर रहे हैं।

बेलफास्‍ट लाइव रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी भूरी आंखों और मुस्‍कान के साथ लुसी अब अनुदान जुटाने के लिए होने वाले नाइट प्रोगाम की मुख्‍य स्‍टार है और लुसी पार्के प्रोगेरिया फाउंडेशन, लड़की के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करने के लिए स्थापित किया गया है। मित्र और परिवार ने लुसी के लिए उसके छठे जन्‍मदिन से एक सप्‍ताह पहले बहुत बड़ी फन्ड्रैसिंग नाइट का आयोजन किया।
जब लुसी 17 महीने की थी तो उसकी हालत के बारे में बताते हुए उसकी मां स्‍टेफनी बताती है कि उसकी बड़ी बेटी एक खुश छोटी लड़की है। ग्रान्‍थ जर्नल भी उन्‍होंने बताया कि लुसी एक खुशी बच्‍ची है, उसकी मानसिक क्षमता सामान्‍य है और वह अन्‍य बच्‍चों की तरह चलती और घूमती है। लेकिन सही विकास अभाव, बालों की कमी और शरीर में चर्बी के कारण वह अन्‍य बच्‍चों से अलग लगती है।

क्‍या आप जानते हैं कि मैदे को ब्‍लीज से दिया जाता है सफेद रंग

समोसे से लेकर मोमोज तक मैदा से बनी ऐसी कई चीजें हैं जो लगभग सभी के दिल पर राज करती है। भूख लगने पर हमें सबसे ज्‍यादा इन्‍हीं स्‍नैक्‍स की याद आने लगती है। लेकिन क्‍या कभी आपने सोचा है कि मैदे से बनी यह चीजें आपके स्‍वास्‍थ्‍य को कितना नुकसान पहुंचाती है। अगर नहीं! तो आइए जानें।

मैदे के नुकसान
मैदे के कई साइड इफेक्‍ट होते हैं, जो लंबे समय तक प्रयोग करने के बाद ही पता चलते है। मैदा एक परिष्कृत गेहूं का आटा है। मैदा बनाने के लिए गेहूं के ऊपरी छिलके हटाए जाते हैं। उसके बाद बचे हुए सफेद हिस्से को बारीक पीसकर मैदा बनता है। जबकि सबसे ज्यादा न्यूट्रिएंट्स गेहूं की इसी परत में होते हैं जो मैदा बनते समय पूरी तरह निकल जाते हैं। छिलका हटने से मैदे में फाइबर बिल्कुल नहीं होता। फिर इसके बाद इसे बेंजोइल पेरोक्साइड ब्‍लीच किया जाता है जिससे इसको साफ और सफेद रंग और टेक्‍सचर दिया जाता है। आइए मैदे के स्‍वास्‍थ्‍य पर पड़ने वाले बुरे प्रभाव के बारे में जानते हैं।

डायबिटीज का खतरा
मैदा खाने से शुगर लेवल तुरंत ही बढ़ जाता है, क्‍योंकि इसमें बहुत ज्‍यादा हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्‍स होता है। तो अगर आप बहुत ज्‍यादा मैदे का सेवन करते हैं, तो पैंक्रियास की फिक्र करना शुरु कर दें।

मोटापा बढ़ायें
मैदा में स्‍टार्च की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिए इसे खाने से मोटापा बढ़ता है। बहुत ज्‍यादा मैदा खाने से शरीर का वजन बढ़ना शुरु हो जाता है। यही नहीं इससे कोलेस्‍ट्रॉल और ब्‍लड में ट्राइग्‍लीसराइड स्‍तर भी बढ़ता है। इसलिए अगर आप अपना वजन कम करना चाहते हैं तो यदि अपने आहार में से मैदे को हमेशा के लिये हटा दें।

पेट की समस्‍या और फूड एलर्जी
मैदा पेट के लिए अच्‍छा नहीं होता है, क्‍योंकि इसमें डाइट्री फाइबर बिलकुल भी नहीं होता, इसलिए जब कोई मैदे से बनी सामग्री का सेवन करता है तो ये पूरी तरह से पच नहीं पाता है। सही से पाचन न हो पाने के कारण इसका कुछ हिस्सा आंतों में ही चिपक जाता है और कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके सेवन से अक्सर कब्ज की समस्या हो जाती है। मैदे में भारी मात्रा में ग्‍लूटन पाया जाता है जो खाने को लचीला बना कर उसको मुलायम टेक्‍सचर देता है, फूड एलर्जी का कारण बनता है।

हड्डियां और इम्‍यूनिटी में कमजोरी
गेहूं से मैदा बनाते समय इसमें से प्रोटीन निकाल लिया जाता है, जिसके कारण यह एसिडिक बन जाता है जो हड्डियों से कैल्‍शियम को खींच लेता है। इससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। इसे खाने से मसल्‍स कमजोर होती है और अर्थराइटिस की संभावना बढ़ जाती है। मैदे के नियमित सेवन से शरीर का इम्‍यून सिस्‍टम कमजोर हो जाता है और बार-बार बीमार होने की संभावना बढ़ने लगती है।

भिंडी से दूर हो सकती है पीलिया जैसी घातक बीमारी, जानें इसके 7 फायदे

भिंडी से दूर हो सकती है पीलिया जैसी घातक बीमारी, जानें इसके 7 फायदेभिंडी न सिर्फ खाने में ही स्वादिस्ट लगती है बल्कि इसके कई फायदेमंद गुण भी होते है। भिंडी के सेवन से आपके शरीर से विभिन्न प्रकार की बीमारियां भी दूर रहती हैं। गुणकारी भिंडी भारत में सबसे ज्यादा खाई जाने वाली सब्जियों में से एक है। भिंडी में कई प्रकार के विटामिन्स जैसे विटामिन ए, बी, सी, ई, के, कैल्शियम, आयरन और जिंक पाए जाते हैं। इतना ही नहीं बल्कि भिंडी में उच्च स्तर का फाइबर भी पाया जाता है। आदिवासी इलाकों में भिड़ी को सिर्फ सब्जियों की नजर में नहीं देखा जाता बल्कि इसे कई प्रकार की बीमारियों को दूर करने के लिए प्रयोग में लाते हैं।  भिंडी में पाए जाने वाले कई पोषक तत्वों के बारे में, जिन्हें जानने के बाद आप रोजाना भिंडी जरूर खाना चाहेंगे।

ये हैं भिंडी के 7 फायदेमंद गुण

  1. भिंडी के बीजों को इकठ्ठा कर लें। इन्हें सुखाकर पीस लें। ये बीज प्रोटीनयुक्त होते हैं और उत्तम स्वास्थ्य के लिए बेहतर हैं। इस चूर्ण को बच्चों को खिलाने पर ये टॉनिक की तरह काम करेगा।
  2. डायबिटीज के रोगियों को अक्सर भिंडी की अधकच्ची सब्जी खानी चाहिए। यदि हम ताजी हरी भिंडी का सेवन करते हैं तो डायबिटीज कंट्रोल में रहती है और यह समस्या दूर रहती है।
  3. नपुंसकता दूर करने के लिए पुरुषों को कच्ची भिंडी को चबाने की सलाह दी जाती है। आदिवासी इलाकों के वैद्यों की माने तो शारीरिक कमजोरी दूर करने के लिए भिंडी को बेहतर माना जाता हैं।
  4. 5 ग्राम भिंडी के बीजों का चूर्ण, 5 ग्राम इलायची, 3 ग्राम दालचीनी की छाल का चूर्ण और 5 दाने काली मिर्च लेकर अच्छी तरह से कूट ले। इस मिश्रण को रोजाना दिन में 3 बार गुनगुने पानी में मिलाकर लें। डायबिटीज में तेजी से फायदा होता है।
  5. भिंडी को काटकर और लगभग आधा चम्मच नींबू के रस को अनार और भुई आंवला की पत्तियों के साथ 1 गिलास पानी में डुबोकर रात भर रख दें। अगली सुबह सारे मिश्रण को अच्छी तरह से पीसकर रोजाना लगातार 2 बार सात दिनों तक लें। जानकारों के अनुसान पीलिया जैसा घातक रोग इससे एक सप्ताह में ही नियंत्रित हो जाता है। बुखार और सर्दी-खांसी में भी ये दवा रामबाण है।
  6. भिंडी के कटे हुए सिरों को पीने के पानी में डुबो कर सारी रात रखें। सुबह खाली पेट इस पानी को पीएं। बाद में बचे भिंडी के हिस्सों को फेंक दिया जाना चाहिए। माना जाता है कि डायबिटीज नियंत्रण के लिए यह एक कारगर उपाय है।
  7. करीब 50 ग्राम भिंडी को बारीक काटकर 200 मिली पानी में उबालें। जब यह आधा बच जाए तो इसे सिफलिस के रोगी को दें। एक महीने तक लगातार ये नुस्खा अपनाना चाहिए। इससे जल्द आराम मिल जाता है।

कैसे रखें रक्तचाप को नियंत्रित

उम्र के हर पड़ाव पर रक्तचाप ऊपर-नीचे रहता है। कुछ लोगों का रक्तचाप जीवन भर ‘लो’ रहता है। वहीं कुछ लोगों का रक्तचाप जीवनभर अधिक रहता है। ब्लड प्रेशर की ट्रेकिंग बहुत जरूरी है। मानसिक तनाव के कारण भी ब्लड प्रेशर बढ़ता है। ध्यान, मंत्र, योग के जरिये तनाव को कम किया जा सकता है। वैज्ञानिक शोध के मुताबिक भारतीय शास्त्रीय संगीत भी तनाव करने का एक कारगर तरीका है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर आप रक्तचाप को होने से रोक सकते हैं।

प्रोटीन से भरे लड्डू खाकर बढ़ाएं अपने मसल्‍स

आज के समय में हर कोई ऋतिक रोशन और जॉन अब्राहम जैसी मसल्‍स बनाने की चाहत रखता है लेकिन इसके लिए काफी मशक्‍कत भी करनी पड़ती है। वो चाहे जिम में घंटों पसीना बहाना हो या फिर अच्‍छा खानपान। बिना वर्कआउट और अच्‍छी डाइट के मसल्‍स बना पाना नामुमकिन है। जो लोग रोजाना जिम करते हैं उन्‍हें प्रोटीन की जरूरत सबसे ज्‍यादा होती है। ऐसे समय में प्रोटीन का सेवन इसलिए किया जाता है क्‍योंकि यह मसल्‍स को ताकत देता है साथ ही जल्‍दी-जल्‍दी भूख नहीं लगने देता। लेकिन सवाल यह है कि भरपूर मात्रा में प्रोटीन मिले कैसे ? तो हम आपके लिए लेकर आएं हैं प्रोटीन का लड्डू, जो स्‍वादिष्‍ठ होने के साथ सेहत का भी ख्‍याल रखेगा। ये लड्डू खुबानी और नारियल से बनाए जाते हैं। इन्‍हें बनाने के बाद करीब 15 दिन तक फ्रिज में सुरक्षित रख सकते हैं। जिम करने के बाद दो लड्डू प्रतिदिन खाने से अपनी मसल्‍स को तेजी से बढ़ा सकते हैं। आइए जानते हैं प्रोटीन के लड्डू बनाने का तरीका।

लड्डू बनाने की सामग्री

15 प्रोटीन के लड्डू बनाने के लिए 30 ग्राम साबुत बादाम, एक बड़ा चम्मच सूरजमुखी के बीज, यह भुना हुआ होना चाहिए। 3 बड़े चम्मच चॉकलेट प्रोटीन पाउडर, छोटे टुकड़ों में कटे हुए 8 खजूर, कटा हुआ 150 ग्राम सूखे खुबानी और दो बड़े चम्मच सूखा नारियल होना जरूरी है। लड्डू तैयार करने में आपको ज्‍यादा समय नही लगेगा। इसे आप 30 से 35 मिनट के अंदर बना सकते हैं।

बनाने की विधि
सबसे पहले सूरजमुखी के बीज और बादाम को मिक्‍सर में एक साथ ब्‍लेंड कर उनका पाउडर बना लें। इसके बाद दोबारा मिक्‍सर में सूरजमुखी, प्रोटीन पाउडर, बादाम और खजूर को एक साथ पीस लें। अच्‍छी तरह से पिस जाने के बाद इन्‍हें एक बर्तन में निकाल कर रख लें और अपने हाथों को गीला कर इस मिश्रण से 20 ग्राम के लड्डू बनाएं। उसके बाद इन्‍हें घिसे हुए नारियल के भूरे में लपेट लें। अब आपका प्रोटीन से भरा लड्डू बनकर तैयार है। इसे आप फ्रिज में सुरक्षित रख दें। प्रतिदिन आप दो लड्डू का सेवन करें और फिर देखें इसका कमाल।