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सर्दियों का मौसम है, थोड़ा सावधान रहें

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MEERUT। पहले सर्दियों के मौसम को बीमारी के लिहाज से अधिक सिक्योर समझा जाता था। सर्दियों में अपने खानपान और विशेष दिनचर्या के माध्यम से लोग काफी फिट रहते थे। लेकिन इसके विपरीत अब सर्दियों में बीमारी के खतरे गर्मियों की अपेक्षा में अधिक बढ़ गए हैं। सीनियर डायटीशियन डॉ। भावना तोमर इसको खानपान में आए बदलाव और फिजीकल एक्टीविटी में आई बेहद कमी को कारण बताती हैं.
डॉ। वीरोत्तम तोमर ने बताया कि ठंड में तापमान कम होने से बॉडी का टेंप्रेचर मौसम से कोप- अप करता है। ऐसे में वैस्क्यूलर प्रॉब्लम पैदा हो जाती है। ठंड होने से नसे सिकुड़ने लगती है, जिससे एजाइना पेन व हार्ट स्ट्रोक का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ठंड में दमा अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है। खासकर रात में और सुबह इस बीमारी का खतरा अधिक बढ़ जाता है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गो का खास ख्याल रखने की जरूरत होती है.
एयर बोर्न डिजीज
– स्मॉग में खतरनाक वायसर नीचे आ जाते हैं, जो सांस के साथ फेफडों में प्रवेश कर जाते हैं।
– सर्दियों में अधिकांश लोग एक कमरे में रहना पंसद करते हैं, जिससे परिवार के एक सदस्य से बीमारी दूसरों को लगने की आशंका रहती है.
– कमरे में गैस गीजर का यूज न करें। हीटर आदि पर भी पानी से भरा बर्तन रखें, ताकि माइश्चर मेंटेन रहे.
कुछ आदत डालें
– हैंड वॉशिंग टेक्निक को अपनाएं.
– खाने में तरल पदार्थो की संख्या बढ़ाएं.
– मौसमी फलों को अधिक मात्रा में लें.
– खान- पान में बदलाव न करें। प्रयोग से बचें.
इम्यूनिटी बढ़ाएं
– योगा को दिनचर्या में लाएं.
– मानसिक तनाव से बचें, यह इम्यूनिटी वीक करती है.
– ब्रीद कंट्रोलिंग सिस्टम को सीखें.
कॉलोस्ट्रोल पर रखें कंट्रोल
– बॉडी में शुगर की मात्रा न बढ़ने दें.
– रेगुलर एक्सरसाइज कर कैलोरी बर्न करें.
– एल्कोहल से परहेज करें.
– मूंगफली अधिक मात्रा में न लें.
– इंडियन डायट को ही तरजीह दें.
– फलों और सलाद की संख्या बढ़ाएं.
– वॉक पर जरूर निकलें.
– फाइबर युक्त चीजों से परहेज रखें.
– हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें.
– धूप में बैठें, खूब पानी पिएं, नमक कम लें.
– सरसों के तेल का अधिक सेवन करें.
– 3 से 4 घंटे में कुछ न कुछ खाते रहें.
– डिनर में रोटी को अवॉयड करें। दलिया या दाल आदि लें.
– सर्दियों में दही जरूर खाएं।
– रोजाना पांच बादाम और दो अखरोट लें.
ड्रायनेस से बचें
– नहाने से पूर्व बॉडी पर सरसों के तेल से मालिश करें.
– नहाने के बाद गीले शरीर पर मॉइश्चर का यूज करें.
– सर्दियों में साबुन का इस्तेमाल न बराबर करें.
बरतें एहतियात
– दमा रोगी इनहेलर हमेशा रखें.
– बीपी पेशेंट्स रेगुलर बीपी मॉनीटर रखें.
– किडनी पेशेंट्स डॉक्टर्स के रेगुलर टच में रहें.
सर्दियों में हार्ट और दमा पेशेंट को अधिक सावधानी की जरूरत है। खानपान में बदलाव और कुछ एक्सरसाइज के माध्यम से बॉडी को फिट रखा जा सकता है।
– डॉ। वीरोत्तम तोमर, चेस्ट रोग स्पेशलिस्ट, अध्यक्ष आईएमए
सर्दियों में हमें अपने खानपान पर विशेष ध्यान देना चाहिए। जैसे हरे पत्तेदार सब्जी, मौसमी फल व खाने में तरल पदार्थो को बढ़ाकर बीमारियों से बचा जा सकता है।
– डॉ। भावना गांधी, डायटीशियन
चिकनगुनिया के बाद सर्दियों में ज्वाइंट पेन की समस्या अधिक गहरा गई है। ऐसे में इस पेन से बचने के लिए क्या किया जाए। सर्दियों में बॉडी का ख्याल कैसे रखें.

अब कलरफुल होंगे मरीजों की बेडशीट

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MEERUT। बेकद्री और बदहाली के लिए प्रसिद्ध सरकारी अस्पताल में अब प्राइवेट हॉस्पिटल से भी अधिक सुविधाएं देखने को मिलेंगी। यही कारण है कि उपकरणों से लेकर इलाज तक में आमूलचूल परिवर्तन किया जा रहा है। यही हॉस्पिटल में साफ- सफाई से लेकर मरीजों की बेडशीट तक पर पूरा फोकस किया गया है। यही कारण है कि निकट भविष्य में जिला अस्पताल में कलर शीट कोड शुरू किया जा रहा है। अब न केवल दिनों के हिसाब से बेड पर कलरफुल शीट बिछाई जाएगी, बल्कि हर आठ घंटे बाद उसको चेंज भी किया जाएगा।
पीपीपी मॉडल पर चलेगी यूनिट
उ.प्र। हेल्थ सिस्टम स्ट्रेंथनिंग परियोजना (यूपीएचएसएसपी) के अंतर्गत मेरठ समेत प्रदेश के 51 जिला अस्पतालों को शामिल किया गया है। परियोजना के अंतर्गत आने वाले अस्पतालों के इलाज और सुविधाओं में आमूलचूल परिवर्तन किया जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय से हुए यूपीएचएसएसपी के इस कांट्रेक्ट में लखनऊ की एजेंसी जेनरेटर प्राइवेट लिमिटेड को सर्विस प्रोवाइडर बनाया गया है। जिला अस्पतालों में होने वाले इस बदलाव के बजट का जिम्मा व‌र्ल्ड बैंक ने उठाया है, जबकि 15 प्रतिशत बजट एरेंज करने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकारी को उठानी होगी.
बनेगी मैकेनाइज्ड लॉंड्री
यूपीएचएसएसपी के अंतर्गत जिला अस्पताल में एक मैकेनाइज्ड लॉंड्री बनने जा रही है। हाईटेक प्रणाली पर बनाई जाने वाले इस लॉंड्री को विदेशी तर्ज पर शुरू किया जाएगा। विदेश से आनी वाली यह लॉंड्री मशीन में 500 से अधिक बेडशीट एक साथ धुल सकेंगी। जबकि ड्रायर के माध्यम से उनकों केवल पांच मिनट के भीतर सुखाया भी जा सकेगा। प्रोजेक्ट मैनेजर नुपूर सिंह ने बताया कि इस मैकेनाइज्ड लॉंड्री को स्पेशली हॉस्पिटल्स के लिए ही डिजाइन किया गया है।
ये होगी खाशियत
– 500 से अधिक बेडशीट एक बार में धुल सकेंगी.
– एस्टीम के माध्यम से बेडशीट होंगी वॉश
– ड्रायर के माध्यम से पांच मिनट मे सुखाया जा सकेगा.
– प्रेस करने का भी होगी ऑटोमेटिक सिस्टम.
दिनों के हिसाब से बदलेगा रंग
नुपूर सिंह ने बताया कि कई बार मरीजों की बेडशीट न बदलने की शिकायत मिलती है। इन शिकायतों के आधार पर अब शीट कोड शुरू किया जा रहा है। अब प्रत्येक दिन नए कलर की बेडशीट बिछाई जाएगी, ताकि शीट न बदले जाने की शिकायत शून्य हो जाऐ। दिनों के हिसाब से कलर बदलते ही पुरानी बेडशीट का पता चल जाएगा.
मैकेनाइज्ड लॉंड्री के प्रस्ताव पर जल्द काम शुरू होने जा रहा है। इससे साफ- सफाई से लेकर मरीजों की शिकायतों में कमी आएगी। दिनों के हिसाब से कलरफुल बेडशीट बिछाई जाएंगी.

वह सरकारी दफ्तरों में चक्कर लगाता रहा, फाइल दबी रही और युवक की हो गयी मौत

MEERUT:सिस्टम की लेटलतीफी के कारण 21 वर्षीय युवक की जान चली गई। चार महीने पहले किडनी ट्रांसप्लांट के लिए आवेदन किया गया था। परिजनों ने कई बार स्वास्थ्य विभाग से लेकर सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाए, लेकिन फाइल पर मुहर नहीं लगी। जब फाइल पास हुई तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
अहमदनगर निवासी मो. सुहेल (21) पुत्र सलीम की जून में तबियत खराब हुई थी। इलाज के बाद चिकित्सकों ने कहा कि उसकी दोनों किडनी खराब हैं। तत्काल ट्रांसप्लांट कराने की जरूरत है। चिकित्सक ने डोनर तैयार करनी की सलाह दी, जो ब्लड रिलेशन में हो। उसके बाद फाइल जिला स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से स्वीकृति करानी होगी। फाइल स्वीकृति होने के बाद ही ट्रांसप्लांट किया जा सकता है। सुहेल की परिवार की मदद कर रहे काजी जमील बताते हैं कि अगस्त में फाइल लगाई। सलीम का बड़ा भाई 23 वर्षीय शादाब किडनी डोनेट लिए तैयार हो गया। इसके बाद फाइल चक्कर काटती रही। अधिकारियों ने कभी भी फाइल को रिजेक्ट नहीं किया था। हर बार कुछ न कुछ नया जोड़ देते थे। उन्होंने डोनर की पत्नी के माता-पिता (सास व ससुर) से भी शपथ पत्र मांगा था। लेकिन शपथ पत्र पूरे होने से पहले ही 9 नवंबर को सुहेल की मौत हो गई। काजी जमील ने अधिकारियों पर लापरवाही और देरी करने का आरोप लगाया।

पांच बार हुई वीडियो रिकॉर्डिंग
किडनी डोनेट की फाइल की चार महीने में पांच बार वीडियो रिकार्डिंग की गई। 13 अक्तूबर को फाइल रिजेक्ट कर दी गई थी, लेकिन नवंबर के पहले हफ्ते में कुछ शर्तों के साथ स्वीकृति दे दी गई। काजी जमील कहते हैं कि डोनर की पत्नी द्वारा कुछ आपत्ति जताई जा रही थी, लेकिन उसने कभी सामने आपत्ति नहीं जताई। अगर उसकी आपत्ति से फाइल रोकी जा रही थी तो फिर उसमें इतना वक्त नहीं लगना चाहिए था। समय रहते दूसरा डोनर तैयार किया जा सकता था।

किडनी डोनेट की ये है प्रक्रिया
किडनी ट्रांसप्लांट के लिए संबंधित मरीज और चिकित्सक को डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी से स्वीकृति लेनी होगी। इसमें देखा जाता है कि किडनी डोनेट करने में कोई पैसे का लेन-देन तो नहीं है। या फिर किसी को धमकाकर किडनी डोनेट तो नहीं कराई जा रही है। चिकित्सक अपनी तरफ से यह जानकारी देता है कि मरीज को ट्रांसप्लांट की आवश्यकता है। इसके साथ ही डोनर से जुड़े तमाम कागजात लगाये जाते हैं। फाइल तैयार कर एडीएम सिटी (जिलाधिकारी प्रतिनिधि) के पास जाती है। यहां से फाइल संबंधित थाना क्षेत्र के सीओ व एसडीएम को जाती है। अगर यहां से रिपोर्ट सही आती है तो उसे बाद फाइल सीएमओ दफ्तर जाती है। यहां देखा जाता है कि एचएलए टाइप (एंटीजन) डोनर और मरीज के मेल खाते हैं या नहीं। क्योंकि 50 फीसदी एंटीजन मेल खाने पर ही ट्रांसप्लांट की स्वीकृति दी जा सकती है। उसके बाद मानसिक रोग विशेषज्ञ की रिपोर्ट को देखा जाती है जो डोनर से संबंधित होती है। रिपोर्ट में मानसिक रोग विशेषज्ञ यह सर्टिफाइड करता है कि डोनर मानसिक तौर पर स्वस्थ है और वह डोनेट कर सकता है। उसके बाद फाइल डीएम के पास जाती है, जहां पर एक कमेटी सभी लोगों से बात करती है। इसी बीच एक शर्त यह भी कि अगर डोनर शादीशुदा है तो उसकी पत्नी से शपथपत्र लिया जाता है और डोनर पत्नी है तो उसके पति से शपथपत्र लिया जाता है। अगर सब कुछ ठीक होता है तो स्वीकृति दे दी जाती है।

संस्थागत प्रसव, जननी सुरक्षा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी

स्वास्थ्य विभाग की योजनाएं लापरवाही की भेंट चढ़ गई हैं। जिले में संस्थागत प्रसव और जननी सुरक्षा योजना की हालत खस्ता है। चिकित्सकों की मनमर्जी पोस्टिंग और भ्रष्टाचार के कारण पूरी व्यवस्था धड़ाम हो गई है। अब अधिकारियों को जिला प्रशासन से लेकर शासन तक में शर्मिंदा होना पड़ रहा है।
तमाम प्रोग्रामों से जुड़े नोडल ऑफिसर महज खानापूर्ति करने में लगे हैं। अप्रैल से अक्तूबर तक 12727 संस्थागत प्रसव हुए हैं, यह जिले में होने वाले प्रसव का केवल 21 फीसदी है। अब दो सवाल खड़े होते हैं, कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से तमाम कार्यक्रम संचालित होने के बावजूद समुचित वर्ग को संस्थागत प्रसव कराने का लाभ नहीं मिल पा रहा है। या फिर विभाग आंकड़े नहीं जुटा पा रहा है। ऐसे में विभाग ने तर्क रखा है कि निजी अस्पताल व नर्सिंग होम के आंकड़े इसमें शामिल नहीं है, जिस कारण से संस्थागत प्रसव कम हैं, लेकिन इस तर्क के बाद विभाग के सिस्टम पर सवाल खड़ा हो गया है। क्योंकि प्रसव के बाद टीकाकरण की जिम्मेदारी भी विभाग की है। टीकाकरण के आंकड़े 52 फीसदी तक दिखाए जा रहे हैं।

यहां भी हालत खराब
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए सरकार गर्भवती महिला और आशा को प्रोत्साहन धनराशि देती है। लेकिन प्रोत्साहन राशि पाने के लिए लोगों को चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अप्रैल से अक्तूबर तक 12727 प्रसव हुए, जिसमें से 8600 महिला को ही प्रोत्साहन राशि मिली है, जो 68 प्रतिशत ही बैठता है। आशा को दिये जाने वाले भुगतान का भी यही हाल है। संस्थागत प्रसव के कुल मामलों में से 6932 आशा को ही प्रोत्साहन राशि मिल पाई है, यानी महज 54 प्रतिशत को। स्वास्थ्य विभाग तर्क देता रहा है कि प्रसव के बाद महिला को प्रोत्साहन राशि जारी करने में तमाम दिक्कतें रहती हैं। किसी का अपना एकाउंट नहीं होता है तो किसी के डाक्यूमेंट पूरे नहीं होते हैं।

सपा-कांग्रेस के गठबंधन से बदलेगी सियासी तस्वीर

मेरठ : मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कांग्रेस के साथ सियासी दोस्ती की बात कहकर वेस्ट यूपी का राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। जानकारों का मानना है कि ऐसा मुमकिन हुआ तो यहां की राजनीति की तस्वीर ही बदल जाएगी। दोनों दलों के नेता भी गठबंधन को बीजेपी के खिलाफ बड़ा हथियार मान रहे हैं।

वेस्ट यूपी में समाजवादी पार्टी का वोटबैंक सिर्फ मुसलमानों को माना जाता है। दलित बीएसपी के पक्ष में, वहीं स्वर्ण और पिछड़ी जातियां (यादवों को छोड़कर) बीजेपी के साथ जाती रही हैं। कांग्रेस के पास सभी वर्ग का वोट है, लेकिन उसका प्रतिशत बेहद कम है, वह अपने बल पर जिताऊ आकंड़ा नहीं छू सकती। वहीं आरएलडी जाट और मुस्लिमों के बल पर अपनी ताकत दिखाती आई है, लेकिन मुजफ्फरगनर दंगे के बाद मुसलमान उससे छिटक गए। जनकारों का मानना है कि एसपी के वोटों में कांग्रेस के वोटरों के मिलने पर यहां के राजनीतिक परिणाम अलग होंगे। सपा के पास मेरठ में ही किठौर, सिवालखास और हस्तिनापुर की तीन सीटे हैं। 2 बीजेपी के पास हैं। इसी तरह बाकी जनपदों में भी 2012 में सपा, बीएसपी और बीजेपी ने ही ज्यादातर विधानसभा सीटें जीती थीं। वहीं बुलंदशहर के स्याना से कांग्रेस के दिलनवाज खां और खुर्जा से बंसी पहाड़िया जीते थे। आरएलडी वेस्ट में 9 विधायक जीता पाई थी। तब आरएलडी और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन लोकसभा 2014 के चुनाव में किसी भी दल का एक सांसद वेस्ट यूपी से नहीं जीत सका था।

पार्टियों की राय

कांग्रेस

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर युसूफ कुरैशी का मानना है कि गठबंधन पर फैसला हाईकमान करेगा, लेकिन ऐसा होने से राजनीतिक ताकत बढ़ेगी। कांग्रेस के बुलंदशहर जिलाध्यक्ष सुभाष गांधी और प्रदेश प्रवक्ता मनोज त्यागी का कहना है कि कांग्रेस लगातार सूबे में ताकतवर हो रही है, अगर हाईकमान सपा से दोस्ती करता है तब उसका फायदा मिलना तय है।

समाजवादी पार्टी

एसपी के दर्जाप्राप्त मंत्री चौधरी राजपाल सिंह और रफीक अंसारी का कहना है कि सपा के साथ कांग्रेस के मिलने से ताकत बढ़ना तय है। वैसे फैसला शीर्ष नेतृत्व करेगा। सपा के बुलंदशहर जिलाध्यक्ष दिनेश गुर्जर और सुजात आलम का कहना है कि हाईकमान सूझबूझ के बाद ही कदम उठा रहा होगा। दो दलों या लोगों के मिलने से हमेशा ताकत बढ़ती है। हम हाईकमान के हर फैसले से बंधे हैं।

बीजेपी

बीजेपी के प्रदेश प्रभारी ओम माथुर साफ कर चुके हैं कि अकेले वेस्ट यूपी में ही बीजेपी 50 सीटें जीतेगी। सपा और कांग्रेस का संभावित गठबंधन होने के बाद भी पूरे प्रदेश में वह 100 सीट भी नहीं जीत पाएगी।

बीएसपी

बीएसपी के वेस्ट यूपी के कॉर्डिनेटर अतर सिंह राव और पूर्व मंत्री हाजी याकूब कुरैशी का कहना है कि सपा सरकार को जनता ने नकार दिया है। कांग्रेस का कोई वजूद नहीं है। इनकी दोस्ती बेकार है। बीएसपी की सरकार बनना तय है।

फिट रखने के जुनून ने बनाया विजेता

रठ : गढ़ रोड स्थित पल्स जिम में आयोजित समारोह में रविवार को खुद को स्पर्धा में भाग लेकर फिट करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। जिम ने प्रतिभागियों के बीच दो माह में विभिन्न स्पर्धा के माध्यम से टारगेट तय किया था। बीएमआइ (बॉडी मास इंडेक्स) और वजन कम करने के आधार पर विजेताओं का चयन किया गया।

पल्स जिम की ओर से हर्ष कुमार सिंह ने बताया कि आजकल की जीवनशैली ने शरीर को बीमारियों का घर कर दिया है। ऐसे में जिम में कई तरह से लोगों को फिट रखने की स्पर्धा शुरू की गई। स्पर्धा एक अक्टूबर को शुरू हुई, जिसमें 70 से अधिक प्रतिभागियों ने फार्म भरा था। निर्धारित समय में पुरुष वर्ग में नीरज मलिक प्रथम, रोहित अग्रवाल द्वितीय और अनिल तोमर तृतीय स्थान पर रहे। महिला वर्ग में मुकाबले में राधिका भारद्वाज प्रथम, मानसी गिल द्वितीय और सारिका तीसरे स्थान पर रहीं।

इस मौके पर पल्स जिम के संजय गुप्ता ने बताया कि नववर्ष के पहले माह में मेरठ में पहली बार क्रास फिट जिम का शुभारंभ होगा, वह भी इसी परिसर में। इस दौरान मौजूद विशेषज्ञों ने जिम ज्वाइन करने वालों के साथ अपने संस्मरण बांटते हुए सावधानी बरतने की सलाह भी दी। कार्यक्रम में डा. सुभाष बंसल, डा. प्रियंका सिंह ने विजेताओं को सम्मानित किया। अपूर्व गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों को सहभागिता सर्टिफिकेट वितरित किया। मौके पर मुख्य रूप से अमन गुप्ता, नितिन किशोर, अजय ठाकुर, विक्की यादव, सुधांशु गुप्ता, विकास शर्मा, सैंकी पटेल, अमित जयसवाल आदि मौजूद रहे।

ठंड से परेशान रहते हैं, ये फल-सब्जियां खाएं और सर्दी को दूर भगाएं

health experts tips to eat fruits and vegetables in winter season, will stay healthy and active

सर्दियां शुरू हो चुकी हैं, लेकिन इसमें कई लोग काफी परेशान रहते हैं। ऐसे में जरूरी है, ऐसे आहार का सेवन जो आपको हेल्दी और चुस्त-दुरुस्त रखे।

अमरूद : सर्दियों में अमरूद का अपना एक महत्व है। इसमें पोटाशियम, विटामिन ए, विटामिन सी और फाइबर होता है। इसमें संतरे के मुकाबले चार गुना विटामिन सी होता है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। फाइबर की मात्रा होने के कारण ये पेट को साफ करता है। विटामिन बी-6 और मैग्नीशियम होने के कारण ब्लड सर्कुलेशन मेंटेन रहता है। विटामिन ए होने के कारण आंखों की रोशनी के लिए रामबाण का काम करता है।

संतरा : अक्सर कहा जाता है कि एक संतरा रोजाना खाने से एंटी बायोटिक दवाएं खाने की जरूरत नहीं पड़ती। इसमें भी विटामिन सी, ए, विटामिन बी-6, कैल्शियम और मैग्नीशियम की मात्रा होती है, जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाता है। इसके रोजाना सेवन से जुकाम और सर्दी जैसी बीमारियां दूर रहती हैं।

लाल अंगूर: लाल अंगूर में भी भरपूर विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं। इसमें पोटाशियम और कैल्शियम की मात्रा भी काफी अधिक होती है। इसके खाने से कब्ज, थकान और पेट से जुड़ी समस्याएं नहीं होती हैं। अंगूर के रस से माइग्रेन में काफी राहत मिलती है। अंगूर के लगातार सेवन से हीमोग्लोबिन भी बढ़ता है।

कीवी: इसमें भी विटामिन सी, पोटाशियम और कॉपर की मात्रा काफी अधिक रहती है। इसके सेवन से शरीर गर्म रहता है। इससे सर्दी भी नहीं लगेगी। ये भी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी की मात्रा भी काफी अधिक होती है।

गाजर: इसमें विटामिन, एंटी ऑक्सीडेंट और मिनरल्स काफी मात्रा में होते हैं। इसके सेवन से आंखों की रोशनी, त्वचा में चमक बरकरार रहती है। कैल्शियम की मात्रा होने से हड्डियों की दिक्कत दूर होती है। एनीमिया से बचाता है। कोलेस्ट्राल के स्तर को मेंटेन करता है। गाजर की ओवरडाइट नहीं लेनी चाहिए।

मूली: इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, गंधक, आयोडीन व लौह तत्व पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होते हैं। इसमें सोडियम, फॉस्फोरस, क्लोरीन व मैग्नीशियम भी होता है। मूली में विटामिन ए भी होता है। ये ब्लड प्रेशर मेंटेन करता है। चेहरे की लालिमा बढ़ती है। मूली के पत्तों में भी काफी विटामिन होता है। इसकी भी सब्जियां बना सकते हैं।

शकरकंद: इसे ऊर्जा का खजाना कहते हैं। इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट्स, विटामिन और लवण काफी मात्रा में पाए जाते हैं। इसके खाने से होमोसिस्टीन नामक अमीनो एसिड के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। इसका स्तर बढ़ने से बीमारियां बढ़ती हैं। आयरन की कमी दूर होती है। ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। किडनी को भी स्वस्थ्य बनाता है।

पालक: इसमें विटामिन सी और आयरन भरपूर मात्रा में है, जो शरीर के मेटाबोलिक सिस्टम को मेंटेन करने में मददगार साबित होती है। इसके अलावा एंटीऑक्सीडेंट, ओमेगा-3 और फोलिक एसिड भी पाया जाता है, जो हार्ट के लिए फायदेमंद होता है। फाइबर होने के कारण कब्ज के इलाज में सबसे अचूक मानी जाती है। दांतों और आंखों के लिए काफी फायदेमंद होता है। पालक का जूस पीने से त्वचा निखरती है और हड्डियां मजबूत होती हैं।

मैथी: कोलेस्ट्राल के स्तर को मेंटेन करने में मदद मिलती है। ग्लेक्टोमेनन नामक तत्व होने के कारण हार्ट को हेल्दी बनाए रखता है। फाइबर और एंटीआक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत होता है। इससे शरीर के हानिकारक तत्व बाहर निकलते हैं। इसके खाने या बालों में पीसकर लगाने से बालों में चमक बनी रहती है और काले भी रहते हैं।

बथुआ: इसमें विटामिन ए, कैल्शियम, आयरन, पोटोशियम, मैग्नीशियम, जिंक काफी मात्रा में पाया जाता है। यह खून को साफ करने में मदद करता है। पथरी को रोकने में मदद करता है। इसका सेवन सब्जी और रायता के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।

इन मौसमी फल और सब्जियों को संतुलित मात्रा में खाएं। बैलेंस डाइट रखने से स्वास्थ्य पर प्रभावी असर पड़ेगा। इन सब्जियों और फलों का आप सर्दी में खूब अच्छी तरह से लुत्फ उठा सकेंगे।

 

Drinking alcohol in moderate amount may cut the risk of stroke

As per a new controversial study people who drink one or two glasses of alcohol per day are less likely to suffer a common type of  stroke known as ischemic stroke.     An ischemic stroke is caused by a blocked brain artery and account for about 88% of all strokes. This study covered the volunteers from Asia, US and Europe. It was found that the women who drink 1-2 glass of alcohol daily were at 9% lower risk to encounter ischemic stroke than non drinking women. For men the risk was 6% less.  Previous research has found an association between alcohol consumption and lower levels of fibrinogen. This protein helps the formation of blood clots thus increasing the chances of stroke. With a moderate drinking the amount of fibrinogen released was less, thus ensuring the proper supply of blood. Alcohol consumption in moderation has been linked with increased high-density lipoprotein cholesterol, improved insulin sensitivity, and decreased levels of fibrinogen and inflammatory markers. This study suggests the moderate use of drinks with less alcohol percentage.  Image Souce: GettyRead More: Health News

Drink green tea to minimise the side effect of anti-cancer drugs

As per a new study conducted at AIIMS, a compound present in green tea is effective in reducing the toxic effect of anti-cancer drug cisplatin on kidney. Cisplatin is known to cause significant damage to kidney that could be life threatening in patients with cancer taking this drug.
 It is well known that green tea is loaded with antioxidants and potential chemicals that can help to prevent many diseases and minimize the risks of stroke and diabetes. green tea This study was conducted by AIIMS professor Jagriti Bhatia from the Pharmacology department and her team. In this study, scientists studied the usefulness of a polyphenolic compound called epicatechin gallate (ECG) present in green tea. It was found that this compound reduced the level of damage of kidney induced by cisplatin. The most effective dose was 5mg/kg that was injected in the rats for a period of 10 days. Further, ECG reduced inflammation and cell death (apoptosis) in rats.
It is estimated that approx. 30% patients develop kidney toxicity and damage after initial doses of cisplatin. Cisplatin causes production of free radicals inside cells in kidney which leads to oxidative stress and inflammation. This finding has raised the hope to develop a therapeutic agent to counter the side effect of drug Cisplatin. Image Source: GettyRead More: Health News

Indian health start-up bags global award

Two years ago, when 39-year-old senior journalist Syed Nazakat took a detour from traditional journalism to create a disruption, he had not anticipated an overwhelming response to his endeavour. Nazakat founded a start-up to better inform those interested in health policies and understanding medical problems, which went on to win laurels at the British Medical Journal awards. The start-up – Health Analytics India won the award for ‘Promoting transparency and integrity in Health Care.’

This year, BMJ had received 1523 nominations from Bangladesh, India, the Maldives, Myanmar, Nepal, Pakistan and Sri Lanka. Started with no external funding, the web portal has gone on to become self-sustainable now. “As a web portal, we make sense of data sets and documents related to health, released by various states in India as also data that has international significance,” said Nazakat.

Journalists, policy makers and medical experts are primary subscribers to the web portal. “No journalist has time to mull over tens of thousands of pages in documents. We visualise the health data and simplify concepts for them to take the story forward,” Nazakat said. Nazakat was left astonished with the health numbers in India. There were shockingly high number of suicides including deaths due to depression. “Every thing in India is at a very large level. The number of suicides that we encountered were the most though,” he said. “Another shocking instance of data was that close to 80 per cent of deaths in India are not registered.”

Also there is a huge mismatch of resources in the health care sector in India. He pointed out, “We observed that 50 per cent of the doctors in India were coming from six states while the other 50 per cent hailed from the remaining 23 states.

This data should further be probed into. It should become the heart of discussion in health care. Such pieces of data if analysed properly will help make journalists and policymakers, informed decisions,” Nazakat said. “We faced tough competition from Rajasthan Government who were nominated for starting a model of direct payment of benefits to the patients and a reputed Sri Lankan Hospital who had propagated a unique data centre model,” he added.