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  शांति निकेतन के विद्यर्थियों ने मतदाता जागरूकता विषय पर पोस्टर बनाए

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जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वीप ( सुनिश्चित मतदाता   शिक्षा एंव निवार्चक  सहभागिता ) की ओर से आयोजित   मतदाता जागरूकता कार्यक्रम के तहत शांति निकेतन के विद्यार्थी  विधानसभा चुनाव को लेकर काफी उत्साहित है।  आज विद्यालय में छात्र छात्राओं ने मतदाता जागरूकता पर आकर्षक चित्र बनाकर जनसरोकार के इस कार्य  में अपनी जमकर भागीदारी प्रर्दशित की।

प्रधानाचार्या विभा  गुप्ता  एंव निदेशक श्री विशाल जैन  ने  बच्चों का उत्साहवर्धन किया   ।

 

जवानों के लिए बीएसएफ ने शुरु की हेल्पलाइन

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 सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने एक विशेष टेलीफोन आधारित हेल्पलाइन शुरू की है ताकि उसके जवान 31 जनवरी तक गुप्त तरीके से अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें। कुछ दिन पहले बल के एक जवान ने सोशल मीडिया पर वीडियो डालकर कथित तौर पर खराब गुणवत्ता वाला खाना मिलने का आरोप लगाया था।

अधिकारियों ने कहा कि बीएसएफ के महानिदेशक केके शर्मा ने गुरुवार देश भर में बल की क्षेत्रीय इकाइयों के साथ उपग्रह आधारित एक सैनिक सम्मेलन किया था। इसमें उन्होंने जवानों से गुप्त तरीके से अपनी शिकायतें उन्हें बताने को कहा। शर्मा ने यहां बीएसएफ मुख्यालय के दो टेलीफोन नंबर भी बताए और कहा कि जवान और अधिकारी इन हेल्पलाइनों पर अपनी कोई भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं, कॉल करते वक्त उनके नाम, रैंक, पदनाम वगैरह नहीं पूछे जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह हेल्पलाइन 31 जनवरी तक काम करेगी। उसके बाद वाजिब शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

बता दें कि इससे पहले रविवार (नौ जनवरी) को बीएसएफ के कांस्टेबल तेज बहादुर यादव ने फेसबुक पर कई वीडियो शेयर करके सैनिकों को खराब खाना दिए जाने की शिकायत की। बुधवार (11 जनवरी) शाम चार बजे तक इस वीडियो को लाखों से ज्यादा लोग देख चुके हैं। तेज बहादुर ने फेसबुक पर तीन और वीडियो शेयर किए हैं। इन वीडियो में जली रोटी, पानी वाली दाल को दिखाया गया है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने तत्काल मामले की जांच का आदेश दे दिया। बीएसएफ ने मामले पर सफायी देते हुए खराब दिए जाने से इनकार किया। लेकिन पूरे मामले में भावनाओं में बहकर इस बात की अनदेखी की जा रही है कि यादव ने अपनी सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है।

42 वर्षीय यादव हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के रहने वाले हैं। वो 1996 में बीएसएफ में भर्ती हुए थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर स्थित राजौरी सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के निकट तैनात किया गया था। वीडियो में यादव ने आरोप लगाया है कि सैनिकों को पिछले 10 दिनों से लगातार जली हुई रोटी और पानी मिली हुई दाल खाने में दी जा रही है। यादव ने आरोप लगाया कि कई बार जवानों को भूखा भी रहना होता है। यादव 2032 में रिटायर होने वाले हैं लेकिन उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) की अर्जी दी है। माना जा रहा है कि वीआरएस स्वीकार किए जाने पर इसी महीने के अंत तक उन्हें सेवा मुक्त किया जा सकता है।

संवेदनशील क्षेत्र में तैनात यादव ने वीडियो पोस्ट करके सुरक्षा बलों पर लागू होने वाली सेवा शर्तों का उल्लंघन किया है। सैन्य बल और अर्ध सैनिक बल की सेवा शर्तें काफी कड़ी होती हैं। इन सेवा शर्तों के अनुसार सुरक्षा बलों के ऊपर से नीचे के पद के अधिकारियों पर अपने विचार सार्वजनिक करने पर रोक होती है, खासकर संवेदनशील मुद्दों पर। यादव द्वारा अपनी दिक्कत को इस तरह फेसबुक पर शेयर करने और उसके वायरल होने से दूसरे सैन्य बलों को भी ऐसा करने की प्रेरणा मिल सकती है।

पिछले कुछ समय से सुरक्षा बलों के अनुशासन का मुद्दा उठता रहा है। फेसबुक और ट्विटर के बढ़ते प्रयोग से स्थिति पहले से चिंताजनक हुई है। पिछले साल “वन रैंक वन पेंशन” आंदोलन के समय व्हाट्सऐप के प्रयोग को सरकार विशेष रूप से चिंतित हो गयी थी। सेना में काम करने वाले अधिकारियों और जवानों द्वारा एनक्रिप्टेड मैसेज सर्विस के प्रयोग से सरकार के लिए उनकी निगरानी मुश्किल हो गयी। साल 2012 में लेह में तैनात एक रेजिमेंट में अफसरों और सैनिकों के बीच मारपीट से सभी लोग स्तब्ध रह गये थे।

नोटबंदी: ‘अपमानित’ महसूस कर रहा RBI स्टाफ, गवर्नर को कहा- इतना नुकसान पहुंचा कि दुरूस्त करना मुश्किल

रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल। (File Photo)

नोटबंदी के बाद के घटनाक्रमों से ‘अपमानित’ महसूस कर रहे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के कर्मचारियों ने शुक्रवार (13 जनवरी) को गवर्नर उर्जित पटेल को चिट्ठी लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया। कर्मचारियों ने पत्र में नोटबंदी की प्रक्रिया के परिचालन में ‘कुप्रबंधन’ और सरकार द्वारा करेंसी संयोजन के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति कर केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को चोट पहुंचाने का विरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि इस कुप्रबंधन से आरबीआई की छवि और स्वायत्तता को ‘इतना नुकसान पहुंचा है कि उसे दुरूस्त करना काफी मुश्किल है।’ इसके अलावा मुद्रा प्रबंधन के आरबीआई के विशेष कार्य के लिए वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति को कर्मचारियों ने ‘जबर्दस्त अतिक्रमण’ बताया।

पटेल को संबोधित इस पत्र में यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड इम्पलाइज की ओर से कहा गया है, ‘रिजर्व बैंक की दक्षता और स्वतंत्रता वाली छवि उसके कर्मचारियों के दशकों की मेहनत से बनी थी, लेकिन इसे एक झटके में ही खत्म कर दिया गया। यह अत्यंत क्षोभ का विषय है।’

इस पत्र पर ऑल इंडिया रिजर्व बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के समीर घोष, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक वर्कर्स फेडरेशन के सूर्यकांत महादिक, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सी. एम. पॉलसिल और आरबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के आर. एन. वत्स के हस्ताक्षर हैं। इनमें से घोष और महादिक ने पत्र लिखने की पुष्टि की है।

घोष ने कहा कि यह फोरम केंद्रीय बैंक के 18,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले आरबीआई के तीन पूर्व गवर्नर मनमोहन सिंह (पूर्व प्रधानमंत्री), वाई. वी. रेड्डी और विमल जालान ने रिजर्व बैंक के कामकाज के तरीकों पर सवाल उठाया था। केंद्रीय बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर उच्च्षा थोराट और के. सी. चक्रवर्ती ने भी इस पर चिंता जताई थी।

हरियाणा निकाय चुनावों में भाजपा की बंपर जीत, नोटबंदी के बाद लगातार पांचवां राज्‍य किया फतेह

भाजपा ने हरियाणा में फरीदाबाद नगर निगम और भिवानी नगर परिषद के चुनावों में जोरदार जीत दर्ज की है।

भाजपा ने हरियाणा में फरीदाबाद नगर निगम और भिवानी नगर परिषद के चुनावों में जोरदार जीत दर्ज की है। पार्टी ने फरीदाबाद में 40 में से 30 सीटों पर कब्‍जा जमाया। कांग्रेस यहां पर एक भी सीट नहीं जीत पाई। 10 सीटों पर निर्दलीय उम्‍मीवार विजयी रहे हैं। यहां पर पहली बार भाजपा का मेयर बनने जा रहा है। चुनाव में केंद्रीय मंत्री कृष्‍णपाल सिंह गुर्जर के बेटे भी खड़े हुए थे। उन्‍होंने नौ हजार वोट से जीत दर्ज की है। चुनावों के दौरान बसपा ने भी उम्‍मीदवार उतारे थे। पिछली बार उसके तीन पार्षद बने थे लेकिन इस बार उसे एक भी सीट नहीं मिली। चुनावों के दौरान बसपा और निर्दलीयों ने नोटबंदी का मुद्दा उठाया था। फरीदाबाद में 8 जनवरी को निकाय चुनाव हुए थे। वहीं भिवानी में भाजपा ने सिंबल दिए बिना प्रत्‍याशी मैदान में उतारे। इसके चलते उसे फायदा हुआ और उसने 31 में से 18 वार्ड जीते। कांग्रेस को केवल एक और इनेलो को दो सीटों से संतोष करना पड़ा।

हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्रीय मंत्री कृष्‍णपाल सिंह गुर्जर ने जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि नतीजे मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर मुहर है। इससे पहले भाजपा ने चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में भी जबरदस्त जीत दर्ज की थी। भाजपा ने चंडीगढ़ में कुल 26 सीटों में से 20 सीटों पर जीत दर्ज की थी। नोटबंदी के ऐलान के बाद से भाजपा को सभी चुनावों में जीत हासिल हुई है। उसने यहां से पहले गुजरात, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान और मध्य प्रदेश में भी निकाय चुनाव फतेह किए थे। इसमें बड़ी बात यह भी है कि सभी निकाय चुनावों में भाजप की जीत का अंतर बड़ा रहा है। कांग्रेस के लिए कहीं से भी अच्‍छी खबर नहीं मिली। हालांकि यह भी एक तथ्‍य है कि जिन भी राज्‍यों में निकाय चुनाव हुए हैं वहां पर भाजपा का राज है।

इसी साल होने जा रहे पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा के लिए यह उत्‍साहजनक खबर है। हालांकि नोटबंदी के फैसले पर जनता का रुख क्‍या है यह पांच राज्‍यों के चुनावों से पता चलेगा। पंजाब, गोवा, उत्‍तराखंड, उत्‍तर प्रदेश और मणिपुर में चुनावों की शुरुआत फरवरी से होने जा रही है। 11 मार्च को इन चुनावों के नतीजे आएंगे। पंजाब और गोवा में भाजपा सत्‍ता में है। नोटबंदी के बाद यह पहले बड़े चुनाव है। भाजपा नोटबंदी और सर्जिकल स्‍ट्राइक को इन चुनावों में मुद्दा बना रही है। वहीं विपक्ष नोटबंदी से हुर्इ परेशानी को भुनाना चाहेगा। इन राज्‍यों के चुनाव नतीजे नरेंद्र मोदी के नेतृत्‍व वाली केंद्र सरकार के आधे कार्यकाल पर जनमत की तरह होगा।

प्रतिभागियों ने डांस फीवर में दिखाए जलवे

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मेरठ: तानसेन सोशल वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से ‘डांस फीवर नृत्य प्रतियोगिता’ बुधवार को दिल्ली रोड स्थित चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स में आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने दीप जलाकर की। डांस प्रतियोगिता में 30 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिसमें सोलो जूनियर वर्ग में सुहानी गर्ग प्रथम, सोलो सीनियर वर्ग में जयन्त प्रथम और गु्रप डांस में पूनम ने नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया। मुख्य अतिथि अपर आयुक्त आरएन धामा, जावेद राव, कमल ठाकुर, गौरव शर्मा, लल्लू मक्कड़, विकास गिरधर, सुरेंद्र प्रताप, मौलाना हमीदुल्लाह खान राजशाही और संयोजक शकील सैफी भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुषमा सवेरा ने किया।

हालात में सुधार, पटरी पर आने में लगेगा वक्त

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दृश्य एक – ईस्टर्न कचहरी रोड स्थित एनएएस कॉलेज से सटे बैंक ऑफ महाराष्ट्र में लोग दिनभर कैश के लिए परेशान हुए। दोपहर 12.05 बजे बैंक का मुख्यद्वार बंद कर भीतर ही कुछेक लोगों की कतार लगवाई गई, जबकि जरूरी काम से आए लोगों के काम अटके रहे। यहां किसी को एक तो किसी को तीन हजार रुपये तक का ही भुगतान किया गया। बैंक स्टाफ ने आरबीआइ से मामूली कैश के कारण समस्या गहराने की बात कही।
दृश्य दो – खूनी पुल स्थित यूनियन बैंक की मुख्य शाखा। यहां पासबुक एंट्री, कैश जमा करने समेत तमाम मशीनें खराब पड़ी हैं। बुधवार को प्रति व्यक्ति 5-6 हजार रुपये का भुगतान किया गया। वहीं एटीएम भी गड़बड़ी का शिकार दिखा। दोपहर 12.25 बजे तक तो एटीएम से पैसे निकले। इसके बाद तकनीकी खामी दिखाने लगा और लोग मायूस हुए।
दृश्य तीन- बाउंड्री रोड स्थित आइसीआइसीआइ बैंक में दोपहर 12.50 बजे चेक क्लियरेंस, पासबुक एंट्री के लिए लोग परेशान दिखे। यहां भी 24 हजार रुपये लेने आने वाले लोगों को 6-8 हजार रुपये ही दिए गए, जबकि बैंक के एटीएम के बाहर लंबी कतार लगी रही। दो-दो हजार रुपये एटीएम से निकले तो लोगों ने राहत की सांस ली।
दृश्य चार- हापुड़ अड्डा स्थित इलाहाबाद बैंक के बाहर सुबह से लोगों की कतार के कारण बाहर जाम लगा रहा। दोपहर 1.25 बजे पुलिस ने कतार ठीक से लगवाकर स्थिति सुधारी। यहां कैश की किल्लत बरकरार रही। नो-कैश के नोटिस के कारण लोगों ने हंगामा किया तो मेन गेट बंद करना पड़ा। यहां पासबुक एंट्री, चेक क्लियरेंस समेत तमाम काम के लिए लोग परेशान दिखे।
दृश्य पांच- रुड़की रोड स्थित एसबीआइ शाखा के बाहर दोपहर 1.50 बजे आम लोगों के साथ ही पेंशनर्स व वेतनभोगी परेशान रहे। यहां बैंक के बाहर बने केबिन में कैश डिपोजिट, पासबुक प्रिंटिंग मशीन में तकनीकी खराबी के कारण लोग परेशान हुए, जबकि पासबुक पर एंट्री के लिए जरूरी बारकोड बैंक में नहीं लगाया जा रहा था। वहीं लोगों को कैश का भुगतान पांच-छह हजार रुपये किया गया।
बैंकों की मनमानी बढ़ा रही परेशानी
यूनियन बैंक खूनीपुल में पासबुक एंट्री कराने आए अशोक कुमार गर्ग की बुक में एंट्री नहीं हो सकी। उन्होंने बारकोड के साथ ही तमाम कमियां पूरी कीं, लेकिन मशीन ने प्रिंट नहीं किया। उन्होंने कहा कि बैंक में न तो कैश पूरा न मिल रहा है और न ही अन्य सेवाएं।
यूनियन बैंक खूनीपुल आए इस्लामाबाद निवासी साकिब ने कहा कि बैंक के एटीएम काम नहीं कर रहे। दोपहर 12 बजे तक तो कुछ लोगों के पैसे निकले, इसके बाद एटीएम में पैसे खत्म हो गए।
बैंक ऑफ महाराष्ट्र ईके रोड पर पहुंचे पंकज शर्मा को भुगतान नहीं मिला। उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को कतार में लगाया गया बाद में गेट बंद कर दिया। कैश की किल्लत बताकर कुछेक लोगों को ही कैश दिया गया।
यहीं पर आए एससी शर्मा ने कहा कि दो दिन पहले बीमार परिचित को दिल्ली लेकर गए। गाड़ी का भाड़ा और अस्पताल के खर्च में ही दस हजार रुपये खर्च हो ग,। जबकि बैंक महज तीन हजार रुपये ही बैंक दे रहा है। घंटों बाद नंबर आया। बड़ी जद्दोजहद के बाद तीन हजार रुपये का भुगतान किया गया।

बीए की छात्रा को दो युवकों ने जबरन खेत में खींच लिया, जानिए इसके बाद क्या हुआ

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परतापुर क्षेत्र में बुधवार दोपहर दो युवकों ने स्कूल से घर जा रही छात्रा को जबरन खेत में खींच लिया और गैंगरेप की कोशिश की। पीड़िता का शोर सुनकर दो लोग वहां पहुंचे तो आरोपी धमकी देते हुए भाग गए। बाद में ग्रामीणों ने घेराबंदी कर दोनों को धुन डाला और पुलिस को सौंप दिया। दोनों आरोपी भाई बताए गए हैं।

परतापुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी 21 वर्षीय युवती मोदीनगर स्थित एक कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर में पढ़ती है। बुधवार दोपहर ढाई बजे छात्रा स्कूल से घर लौट रही थी। उपलेहड़ा मार्ग पर ईख के खेत के पास दो युवकों ने छात्रा के साथ दुष्कर्म की कोशिश की। इस दौरान छात्रा युवकों से भिड़ गई और शोर मचा दिया। इस बीच रास्ते से जा रहे दो युवक शोर सुनकर ईख के खेत में घुस गये। जिसके बाद आरोपी भाग निकले। सूचना पर पहुंचे ग्रामीणों ने दोनों युवकों को पकड़ लिया और पिटाई कर दी। कंट्रोल रूम पर सूचना के बाद यूपी 100 की गाड़ी मौके पर पहुंची। इंस्पेक्टर परतापुर सुशील दूबे भी मौके पर पहुंचे और आरोपी युवकों को थाने भेज दिया। पुलिस ने पीड़िता को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल भेजा है। छात्रा ने आरोपी युवकों के खिलाफ परतापुर थाने में तहरीर दी है। इंस्पेक्टर परतापुर का कहना है कि तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

पुलिस के सामने बिलख पड़ी छात्रा
छात्रा ने पुलिस के सामने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वह आरोपी युवकों से भिड़ गई थी। यदि गांव के दो युवक शोर सुनकर न पहुंचते तो आरोपी उसकी हत्या भी कर सकते थे।

50 दिनों में खूब हुए हंगामे, लगी रहीं लंबी लाइनें

नोटबंदी के इन पचास दिनों में पब्लिक को खूब परेशानी झेलनी पड़ी। देहात क्षेत्र में हालत बहुत खराब रही। लोग अपने ही खाते से कैश निकालने को तरस गए। इस दौरान छह लोगों की मौत हो गई। एटीएम खाली होने के लोग इधर से उधर भटकते रहे। व्यापारियों को काफी नुकसान झेलना पड़ा। उधर, सरकार ने भी कैश लेस ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने को पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन कैश की किल्लत से अभी भी लोगों की जरूरत पूरी नहीं हो रही हैं। काफी फजीहत के बाद सिस्टम पटरी पर आने की उम्मीद जगी है।

आधिकारिक तौर पर नोटबंदी के बाद 10 दिनों में ही जिले के बैंकों में 3665 करोड़ रुपया जमा हुआ था, जबकि निकासी सिर्फ 265 करोड़ थी। हालांकि इसके बाद कोई भी आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं हुआ। लेकिन अनुमान है कि इन 50 दिनों में करीब 750 करोड़ के आसपास नगदी बैंक में जमा हुई है, जबकि निकासी 300 करोड़ के आसपास है।

खूब हुए हंगामे, तोड़फोड़
नोटबंदी के बाद शुरू के 15 दिन बैंकों में पुराने नोट जमा कराने के लिए आपाधापी मची। लेकिन इसके बाद रुपये निकालने वालों की भीड़ बढ़ गई। बैंक के पास करेंसी कम थी और ग्राहक अधिक। कई-कई दिन बैंकों में कैश नहीं आया। लिमिट के मुताबिक भी लोगों को रकम नहीं मिली। कहीं दो तो कहीं चार हजार रुपये मिले। बैंकों में खूब हंगामे और तोड़फोड़ हुई। कई मुकदमे भी दर्ज हुए।

छह लोगों की हो गई मौत
नोटबंदी के बाद से लोगों को कई परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। बैंक की लाइनों में घंटों तक लगना और पर्याप्त कैश न मिलने की वजह से जिले में अलग-अलग स्थानों पर छह लोगों की मौत हो गई। किला रोड पर बसंत विहार कॉलोनी में तो बेटी की शादी के लिए कैश न मिलने से दुखी एक रिटायर सरकारी कर्मी ने खुद पर केरोसिन उड़ेलकर आत्मदाह करने की कोशिश तक की।

नियम शर्तों में ही उलझकर रह गए
नोटबंदी के बाद आरबीआई और सरकार के नियम कायदे लोगों पर भारी पडे़। शादी के लिए ढाई लाख की रकम लेने को लगाई गई सख्त शर्तों को लोग पूरी नहीं कर सके। पांच हजार से अधिक के पुराने नोट जमा करने पर बैंकों में इंटरव्यू और पूछताछ का काफी विरोध हुआ। यही वजह रही कि इन 50 दिनों में सरकार ने कई बार नियम शर्तों में फेरबदल किया।

व्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर
बैंकों ने टोकन व्यवस्था लागू कर अपने यहां भीड़ और आपाधापी को कुछ हद तक नियंत्रित कर लिया। कैश की दिक्कत भी धीरे-धीरे कम हो रही है, हालांकि अभी भी लोगों को लिमिट के अनुसार कैश नहीं मिल पा रहा है। बचत खाताधारक को 10 हजार और चालू खाताधारक को 30 हजार रुपये तक मिल रहे हैं। हालांकि आरबीआई से मांग के अनुसार पर्याप्त कैश न मिलने से यह समस्या अभी कुछ दिन और बने रहने की संभावना है।

लॉकर से मिले करोड़ों, बैंकों पर उठे सवाल
नोटबंदी के बाद सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता आरके जैन के सरकारी आवास और बैंक लॉकर्स करोड़ों के पुराने और नए नोट मिले। सिविल लाइन क्षेत्र में चार लोगों से पुलिस ने 8.80 रुपये के दो हजार के नए नोट बरामद किए। जिससे ये संभावना बढ़ गई कि जिले में भी काले धन का कारोबार चल रहा है। नए नोट लोगों पर कैसे आए, इसे लेकर बैंकों की विश्वसनीयता भी संदेह के दायरे में आई।

धाराओं में फंसी करोड़ों की जमीन

धाराओं के खेल में जागृति विहार एक्सटेंशन की लगभग 400 एकड़ जमीन फंस गई है। एक तरफ विशेष भू अध्यापित अधिकारी ने आवास विकास अधिकारियों से कहा है कि वर्तमान अधिग्रहण प्रक्रिया इस पर लागू हो सकती है, तो आवास विकास ने इससे इंकार कर दिया है। उधर, बिजलीघर को दिए गए एक रास्ते का लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बिजलीघर निर्माण पर यह रास्ता बंद कर दिया गया है।

यह है प्रकरण
आवास विकास परिषद ने वर्ष 2002 में जागृति विहार एक्सटेंशन के लिए काजीपुर, घोसीपुर, सरायकाजी आदि गांवों की जमीन का अधिग्रहण किया था। 265 हेक्टेयर की यह पूरी योजना है। इस योजना के प्रथम फेज में करीब 171 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। सेकेंड फेज में 94 हेक्टेयर जमीन का और अधिग्रहण कर लिया गया। इस बाबत किसानों से करार हुए तो घोसीपुर निवासी किसान जावेद अली ने उच्च न्यायालय की शरण ली। उन्होंने दावा किया कि उन्हें नई भू अधिग्रहण नीति के हिसाब से प्रतिकर दिया जाए। अदालत ने आदेश दिए कि इस मामले का निस्तारण किया जाए। इस पर एडीएम भू अध्यापित मुकेश चंद्र ने अधिशासी अभियंता उप्र आवास विकास को पत्र लिखकर कहा कि नई नीति के हिसाब से इन किसानाें का दावा बनता है।

आवास विकास ने दिया था झटका
इस प्रकरण पर आवास विकास अधिकारियों ने किसानों को तगड़ा झटका दिया है। कहा है कि इन किसानों का दावा नई भू अधिग्रहण नीति के हिसाब से बनता ही नहीं है? 60-70 प्रतिशत जमीन पर जब अर्जन निकाय का कब्जा है, तो नया एक्ट इन पर लागू ही नहीं होता। 600 एकड़ से ज्यादा जमीन पर आवास विकास का कब्जा है। लगभग 400 एकड़ पर ही विवाद है।

एडीएम को करना है निर्णय
आवास विकास अधिकारियों के इस जवाब पर निर्णय एडीएम एलए को करना है, पर यह तय है कि यदि नई नीति से मुआवजा तय हुआ, तोे आवास विकास अदालत की शरण लेगा। इसकी तैयारी की जा रही है। इस चक्कर में यह जमीन फंस गई है। न तो सही तरीके से इस पर डेवलपमेंट हो रहा है और न ही अन्य कार्य।

अब खड़ा हुआ रास्ते का विवाद
आवास विकास ने यहां पावर कारपोरेशन को जमीन दी है। यहां बिजलीघर का निर्माण हो रहा है। ऐसे में यहां एक चकरोड काटकर बिजलीघर की दीवार बना दी गई है। इस पर किसान जावेद आदि का कहना है कि यह खेतों की तरफ जाने वाला रास्ता है, जो रोक दिया गया है। यह ठीक नहीं। रास्ता तो बचना ही चाहिए था। उधर आवास विकास अधिकारियों का कहना है कि अधिग्रहण रास्तों और नालियां का भी हुआ है। इसी सरकारी जमीन के बदले इसी योजना में एसटीपी लगाने के लिए 10 हेक्टेयर जमीन निशुल्क नगर निगम को दी गई है।

डीएनए रिपोर्ट से सुलझेगी शव और निशि की गुत्थी

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थापर नगर नाले से मिले महिला के शव और दिल्ली से लापता निशि वर्मा की गुत्थी अब डीएनए टेस्ट से सुलझेगी। पुलिस मानकर चल रही है कि यह शव दिल्ली निवासी निशि वर्मा का है। हालांकि निशि के पति हरीश इससे इंकार कर चुके हैं। ऐसे में पुलिस शव के बिसरे की जांच आगरा एफएसएल से कराएगी। वहीं, निशि के बच्चों का भी डीएनए टेस्ट होगा। पुलिस दोनों रिपोर्टों का मिलान करने के बाद स्थिति स्पष्ट करेगी। वहीं, पुलिस आरोपी सलमान की तलाश में भी दबिश दे रही है।

दरअसल भजनपुरा दिल्ली निवासी कपड़ा कारोबारी हरीश वर्मा मंगलवार को मेरठ पहुंचे थे। उन्होंने पुलिस को बताया था कि उनकी पत्नी निशि वर्मा लापता है। जिसकी गुमशुदगी भजनपुर थाने पर दर्ज है। हरीश ने नाले में मिला शव निशि का होने से इंकार कर दिया था। पोस्टमार्टम के बाद बिसरा सुरक्षित रखते हुए शव का पुलिस ने लावारिस में अंतिम संस्कार कराया था।
सीओ कोतवाली रणविजय सिंह के अनुसार हरीश ने पूछताछ में बताया कि निशि की लिसाड़ी गेट निवासी सलमान से फेसबुक पर दोस्ती हुई थी। जिसके बाद निशि घर से तीन लाख के जेवर लेकर सलमान के साथ चली गई थी। अभी तक की जांच पड़ताल में प्राइम सस्पेक्ट सलमान ही है। उसके पकड़ में आने के बाद ही निशि के बारे में स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। लेकिन हरीश से पूछताछ के बाद इसकी गुत्थी सुलझाने के लिए निशि के बच्चों का डीएनए टेस्ट और बिसरे की आगरा फोरेंसिक लैब से जांच कराई जा रही है।

सलमान की फरारी से शक बढ़ा
सीओ के अनुसार पांच दिसंबर तक निशि और सलमान फोन पर लंबी बातें करते थे। जिसके बाद सलमान ने अपने एक मोबाइल नंबर को पोर्ट करा लिया। जिससे कॉल डिटेल नहीं मिल सकी है। कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस मान रही है कि सलमान ने ही निशि की हत्या की है। एक सप्ताह से सलमान भी घर से फरार है। सलमान के एक रिश्तेदार को हिरासत में लिया गया है। सवाल है कि यदि सलमान निशि को नहीं जानता तो फिर वह घर से फरार क्यों है। सलमान की फरारी ने शक और बढ़ा दिया है।