Category Archives: मेरठ न्यूज़

शहर के बीचोंबीच हत्या, बेखबर रही पुलिस

murder in meerut city center point
police capPC: अमर उजाला
लोहा कारोबारी की अपहरण के बाद शहर के बीचोंबीच हत्या कर दी गई और पुलिस को भनक तक नहीं लगी। ऐसे समय जब निकाय चुनाव को लेकर शहर अलर्ट पर है। कारोबारी के परिजन जहां रंजिश से इंकार कर रहे हैं तो पुलिस अधिकारी लेन-देन में हत्या होना मान रहे हैं।
लोहा कारोबारी सुनील गर्ग पुत्र शिवकुमार गर्ग रविवार शाम करीब 4 बजे घर से बाइक से निकले थे। परिजनों से कहा था कि उन्हें फूलबाग कॉलोनी में जरूरी काम से जाना है। करीब एक घंटे बाद उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। काफी तलाश के बाद परिजन रात करीब दस बजे सिविल लाइन थाने पहुंचे और तहरीर दी। इस बीच उनकी बाइक सूरजकुंड के पास शिवलोक अस्पताल के सामने खड़ी मिली। सूरजकुंड पुलिस चौकी पर दो थानों का बार्डर लगता है। रात में भीड़भाड़ वाले इलाके में कारोबारी की हत्या कर दी जाती है। पुलिस का कहना है कि कारोबारी की हत्या या तो किसी कार में या मकान में की गई।

नाले के पास छोड़कर भागे
पुलिस के अनुसार जहां से कारोबारी का शव बोरे में बंद मिला, पास ही एक राजनैतिक दल का कार्यालय है। संभवत: हत्यारे बोरे को नाले में फेंकना चाहते थे। लेकिन हो सकता है कि चुनावी चहल-पहल के चलते किसी को आता देख शव नाले के पास फेंक दिया गया हो। पुलिस को एक जगह सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से कुछ सफलता मिली है।
मिलनसार थे सुनील
कारोबारी सुनील मिलनसार थे। जिनका किसी से कोई विवाद नहीं होना बताया गया। बेटा शुभम भी पिता के साथ हाथ बंटाता है। दो बेटियों में एक की शादी हो चुकी है। सुनील के भाई संजीव गर्ग ने बताया कि रंजिश जैसी कोई बात नहीं है।

बचाव के लिए किया संघर्ष
कारोबारी के एक हाथ की अंगुली कटी मिली। हाथ और चेहरे पर भी चाकू से कई वार किए गए। पुलिस का मानना है कि सुनील ने बचाव के लिए संघर्ष किया था।
मोबाइल खोलेगा राज
कारोबारी के मोबाइल फोन पर दोपहर बाद आधा दर्जन कॉल आई थीं। जिनमें एक नंबर को पुलिस संदिग्ध मान रही है। बीच में उन्होंने एक बार कॉल भी की थी। पुलिस का कहना है कि सीडीआर से कामयाबी मिल सकती है।

बड़ी रकम लेनी थी लोगों से
पुलिस के अनुसार कारोबारी ने नौचंदी व लिसाड़ी गेट की कई फैक्ट्रियों में लाखों रुपये का उधार माल दिया था। एक सप्ताह पूर्व शहर के एक व्यापारी ने होटल में सुसाइड कर लिया था। जिस पर भी कारोबारी का उधार था। लिसाड़ी गेट से भी हत्या के तार जुड़ रहे हैं।
कोट
परिजनों ने किसी रंजिश से इंकार किया है। कई बिंदुओं पर गहनता से जांच हो रही है। बेटे से भी जानकारी ली गई है। जल्द ही हत्याकांड का खुलासा करेंगे। -मंजिल सैनी, एसएसपी

सर्दी ने दिखाया दम, तो डेंगू हो गया कम

dengu news
denguPC: meerut news
 ठंड ने दम दिखाना शुरू कर दिया है। इस कारण डेंगू भी काफी कम होने लगा है। पिछले दो दिन से डेंगू का एक भी मरीज नहीं मिला है। इससे स्वास्थ्य विभाग ने भी थोड़ी राहत की सांस ली है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि गर्मी में लोग कूलर चलाते हैं, जिसमें पानी भरा रहने से डेंगू के मच्छर सबसे ज्यादा पनपते हैं। लोग कम कपड़े पहनते हैं, जिससे मच्छरों को काटने में आसानी होती है। पिछले दिनों कराई गई स्वास्थ्य विभाग की सर्वे रिपोर्ट में भी यही खुलासा हुआ था कि फैशनेबल युवाओं को मच्छरों ने ज्यादा काटा है। दूसरी तरफ, ठंड में कूलर बंद हो जाते हैं, उसमें पानी भी नहीं रहता है।
ऐसे में डेंगू के मच्छर के लार्वा कम पैदा होते हैं। वहीं, लोग पूरे कपड़े पहनने लगते हैं, यानि शरीर ढका रहता है। इससे मच्छरों को काटने के लिए शरीर का खुला स्थान कम मिलता है, जिस कारण डेंगू के मरीजों की संख्या कम हो जाती है। मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब की पिछले एक सप्ताह की रिपोर्ट में यही आंकड़े सामने आए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि आने वाले दिनों में डेंगू बिल्कुल खत्म हो जाएगा, क्योंकि ठंड और बढ़ेगी।

अक्तूबर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा रहा, तब प्रतिदिन मरीजों की संख्या 10 या इससे ज्यादा रही। लेकिन नवंबर शुरू होने के बाद जैसे-जैसे तापमान घटा, मरीजों की संख्या भी कम होने लगी। इस साल जिले में अब तक 643 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। ये पांच सालों में डेंगू के मरीजों की मेरठ में सबसे ज्यादा संख्या है। पिछले साल डेंगू के 195 मरीज ही मिले थे। 2015 में 205, 2014 में शून्य और 2013 में 180 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई थी। हालांकि डेंगू अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ है। अभी भी इक्का-दुक्का मरीज मिल रहे हैं।

ठंड बढ़ना अहम वजह
सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। ये राहत की बात है। इसकी वजह ठंड का बढ़ना और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार एंटी लार्वा स्प्रे और फॉगिंग कराना रहा है।

मरीजों का आंकड़ा
तारीख         सैंपल         डेंगू पॉजिटिव
13 नवंबर       30                04
14 नवंबर       32                04
15 नवंबर       30                04
16 नवंबर       16                02
17 नवंबर       12                01
18 नवंबर       16                00

मौसम का हाल
तारीख             अधिकतम         न्यूनतम
13 नवंबर            27.4            10.8
14 नवंबर            27.4             9.7
15 नवंबर            26.4             12.5
16 नवंबर            28.8             12.5
17 नवंबर             26.2             12.1
18 नवंबर             25.0             12.6
(तापमान डिग्री सेल्सियस में है।)

सिम को आधार से जोड़ने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं, एक दिसंबर से नई व्यवस्था


यूआईडीएआई का कहना है कि आईवीआर पर भाषा इंग्लिश, हिंदी समेत दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं में भी होगी।

सिम को अपने आधार नंबर से लिंक करना जरूरी कर दिया गया है। 6 फरवरी 2018 तक सभी मोबाइल यूजर्स को अपने नंबर को आधार से लिंक कराना है। इसके लिए अभी यूजर को टेलिफोन सर्विस प्रोवाइडर के सेंटर पर जाना पड़ता है। अब एक नई व्यवस्था लागू होने वाली है। अब सिम को आधार से जोड़ने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एक दिसंबर से नई व्यवस्था लागू होने वाली है।

आपका नंबर जिस कंपनी का है उसकी वेबसाइट पर जाकर अपना मोबाइल नंबर डालना है। इसके बाद मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा। अब इसे वेबसाइट पर डालना है। याद रहे कि वो मोबाइल नंबर आपके पास ही होना चाहिए जो आपके आधार नंबर के साथ रजिस्टर है। इसके बाद वेबसाइट पर एक मैसेज आएगा और यहां आधार नंबर डालना होगा। इसके बाद UIDAI (आधार) की तरफ से एक ओटीपी आएगा। अब इस ओटीपी को वेबसाइट पर आ रहे ओटीपी के बॉक्स में डालना होगा। इसे डालने के बाद आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक हो जाएगा।

इसके अलावा कंपनी के आईवीआर सिस्टम के माध्यम से भी अपने मोबाइल नंबर को आधार से लिकं किया जा सकता है। इसके लिए कंपनी के कस्टमर केयर पर कॉल करना होगा। यहां आपको आधार से मोबाइल नंबर को लिंक करने का ऑप्शन सिलेक्ट करना है। यहां से भी लिंक करने के लिए आधार के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा। ओटीपी को आईवीआर पर डालना होगा और मोबाइल नंबर आधार से लिंक हो जाएगा। यूआईडीएआई का कहना है कि मोबाइल नेटवर्क कंपनियों आईवीआर पर इंग्लिश, हिंदी समेत दूसरी क्षेत्रीय भाषाएं भी होंगी।

जयललिता के बंगले पोएस गार्डन पर इनकम टैक्स का छापा

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई स्थित पोएस गार्डन पर 17 नवंबर की रात आयकर विभाग का छापा पड़ा। यह वही बंगला है, जिसमे राज्य की दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता रहती थीं। उनकी करीबी शशिकला भी वहीं रहती थीं। आजकल शशिकला जेल में हैं। उन्हीं की कथित अवैध संपत्ति का पता लगाने के लिए यह छापामारी हुई। उनके ठिकानों पर कई दिन से छापामारी हो रही है। कुछ दिन पहले 150 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ छापे मारे गए थे। इसके लिए किराए की गाड़ियों में शादी का स्टिकर लगा कर अफसर पहुंचे थे, ताकि किसी को शक न हो।

पोएस गार्डन पर इन दिनों सन्नाटा रहता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, पोएस गार्डेन के गार्ड ने बताया था कि ये जगह इतनी भयानक हो चुकी है कि कोई भी यहां लंबे समय तक नहीं रहना चाहता। अब तक इस हवेली में मरम्मत का काम चल रहा था, लेकिन अब इसे पूरा कर लिया गया है। गार्ड ने बताया कि यहां के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया गया है। शशिकला के जेल जाने के बाद यहां कोई आया नहीं। जिन गार्डों को नाईट शिफ्ट में यहां ड्यूटी पर लगाया गया है वे यहां काम नहीं करना चाहते हैं।

मुख्यमंत्री के आगमन पर सुरक्षा कड़ी, आज रहेगा रूट डायवर्जन

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
रामलीला मैदान में सीएम की जनसभा को देखते हुए सुरक्षा का कड़ा पहरा रहेगा। सुरक्षा को देखते हुए एटीएस की टीम और लखनऊ से स्पेशल कमांडो भी पहुंच गये हैं। सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी के लिए एक एसपी अलग से मेरठ आए हैं।
एसपी सिटी मानसिंह चौहान, एसपी  क्राइम शिवराम यादव, एसपी देहात राजेश कुमार और एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई ने सभी सीओ, थाना प्रभारी और दूसरे जिलों से आयी फोर्स के साथ रिहर्सल किया। जनसभा स्थल पर छह एडिशनल एसपी, 14 सीओ, 37 थाना प्रभारी/ इंस्पेक्टर, 252 एसआई, 18 महिला दरोगा, 72 एचसीपी, और एक हजार सिपाही तैनात किए हैं। जनसभा स्थल को पांच भागों में बांटा गया है। प्रत्येक गैलरी और स्थान पर दो दो सीओ ओर तीन तीन थाना प्रभारी लगाये हैं। एक हजार पुलिसकमियों की डयूटी सुरक्षा व्यवस्था के लिए दिल्ली रोड पर लगाई गई है। एसपी सिटी ने बताया कि एटीएस ने मंच को अपने घेरे में ले लिया है। एलआईयू, इंटेलीजेंस की टीम, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वाएड, और फायर ब्रिगेड की गाड़ी तैनात कर दी गई है। पांच सौ मीटर के दायरे में आसपास के घरों की छतों पर पुलिस का पहरा रहेगा। ड्रोन कैमरे से निगरानी की जाएगी।

दिल्ली रोड पर आज रहेगा रूट डायवर्जन
एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई ने बताया कि मुख्यमंत्री की जनसभा को लेकर दिल्ली रोड पर सभी प्रकार के भारी वाहन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे। रैली के लिए तीन स्थानों पर बसों की पार्किंग बनाई गई है। जीरो माइल व बेगमपुल से बसें शहर में नहीं आएंगी। कमिश्नरी आवास चौराहे से तेजगढ़ी, एल ब्लॉक, बिजली बंबा बाईपास के रास्ते नूरनगर से सीधे माधवपुरम में रैली की बस पहुंचेगी। माधवपुरम में बसों की पार्किंग बनाई गई है। परतापुर तिराहे की तरफ से आने वाली रैली की बसों के लिए दिल्ली रोड स्थित नवीन मंडी में पार्किंग बनाई गई है। बागपत, रोहटा रोड और मोदीपुरम की तरफ से आने वाली रैली की बसें भी परतापुर तिराहे से आकर मंडी में पहुंचेंगी। चार पहिया वाहनों के  लिए ट्रांसपोर्ट नगर में पार्किंग बनाई गई है। वहीं, दिल्ली-गाजियाबाद की तरफ से आने वाली रोडवेज की बसें परतापुर तिराहे से कंकरखेड़ा बाईपास से जीरोमाइल, बेगमपुल होकर भैसाली बस अड्डे पहुंचेगी। इसी रूट से वापस जाएंगी। परतापुर तिराहे से बेगमपुल के बीच सभी प्रकार के वाहन प्रतिबंधित रहेंगे। रूट डायवर्जन व्यवस्था सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक प्रभावी रहेगी।

सीएम साहब ! फाइलों से बाहर कब आएगा शहर का विकास

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
योगी जी आपके सूबे की क्रांतिकारी धरा मेरठ का क्या होगा। यहां न विकास हो रहा है और न पुरानी योजनाएं चल रही हैं। अफसरों का दावा है कि सरकार से धन नहीं मिल रहा है। शहर में नई सड़क बनना तो दूर पुरानी सड़कों का रखरखाव तक बंद है। पार्कों का सौंदर्यीकरण नहीं हो रहा है। कूड़ा निस्तारण, सीवर, गंगाजल योजना रुक गयी हैं। शहर में अगर कुछ चल रहा है तो अवैध कमेले हैं। अगर छह माह ऐसा ही हाल रहा तो शहर दस साल पीछे चला जाएगा। ये सभी सवाल महानगर की जनता के हैं। लोगों को सीएम योगी से काफी उम्मीदें हैं। मेरठ की जनता योगी जी को वैसा ही सीएम देखना चाहती है, जैसा सीएम की कुर्सी पर बैठते समय छह माह पहले देखने को मिला था।

पाइप लाइन में कब आएगा गंगाजल 

महानगर की जनता को गंगाजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार भले ही 350 करोड़ रुपये खर्च चुकी है, लेकिन जनता को गंगाजल नहीं मिल रहा है। पूर्व सपा सरकार के कार्यकाल में गंगाजल योजना शुरू कर दी गयी थी। आधे शहर की जनता को गंगाजल पीने को मिल रहा था, लेकिन योगी सरकार आने के बाद गंगाजल पर भी ब्रेक लग गया। सरकार गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट संचालन के लिए धन तक नहीं उपलब्ध करा पा रही है। संचालन पर खर्च होने वाली धनराशि के लिए शासन स्वीकृति देने को तैयार नहीं है।

अतिक्रमण करने वालों पर मेहरबान क्यों हो गयी सरकार 
मेरठ। महानगर की सड़कों पर अतिक्रमण का जाल है। सरकार बनते ही अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई थी। लेकिन 15 दिन के बाद शहर, सरकारी मशीनरी और नेता वही पुरानी व्यवस्था की तरफ लौटते नजर आए। अतिक्रमण के खिलाफ अभियान बंद होते चले गए। अब शहर का हाल है कि कोई सड़क ऐसी नहीं है जिस पर अतिक्रमण न हो। अतिक्रमण के कारण शहर हर समय जाम की चपेट में रहता है।

अवैध कमेलों पर क्यों हो गयी नरमी 
योगी  के लखनऊ में कुर्सी संभालते ही मेरठ में अवैध कमेलों पर कार्रवाई शुरू हो गयी थी। कुछ दिन बंद भी रहे थे। लेकिन उसके बाद शहर और देहात में अवैध कमेलों की बाढ़ आ गयी। जहां खुले में पशुओं को काटा जा रहा है वहीं सड़क किनारे रखकर मांस बेचा जाता है। न पुलिस कुछ करने को तैयार है और न ही अन्य प्रशासनिक अधिकारी। सरकारी भी चुप्पी साध गयी है।

लखनऊ में अटकी मेरठ की रिंग रोड 
महानगर जाम से जूझता है। परतापुर बाईपास से दिल्ली रोड शताब्दीनगर होते हुए हापुड़ रोड को जोड़ने वाली रिंग रोड के लिए तैयार प्रपोजल लखनऊ में अटका है। सरकार मोहर लगाने को तैयार नहीं है। पीडब्लूडी जैसा महत्वपूर्ण विभाग उप्र के डिप्टी सीएम के पास है। उसके बाद भी रिंग रोड हो या फिर रोहटा रोड का निर्माण सभी अटके हुए हैं। ।

फाइलों में कैद  कान्हा पशु आश्रय योजना 
सुप्रीम कोर्ट ने पशु क्रूरता को खत्म कराने के लिए अत्याधुनिक कांजी हाउस के निर्माण कराने के निर्देश दिए थे। कान्हा पशु आश्रय योजना शुरू करने के निर्देश दिए थे। कान्हा पशु आश्रय योजना का जो हाल है वह किसी से छुपा नहीं है। न कोई काम करने को तैयार है और न ही सरकार संज्ञान ले रही है।

कूड़ा निस्तारण प्लांट की फाइल कब आएगी बाहर 
शहर के कूड़े का निस्तारण करने के लिए 2016 में सब्जबाग दिखाए गए थे। एक जनवरी 2017 को गांवड़ी में नगर निगम की भूमि पर प्लांट का भूमि पूजन किया गया। कमिश्नर, डीएम, नगरायुक्त, सांसद, महापौर, विधायक सभी भूमि भूमि पूजन में शामिल हुए। उसके बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधियों ने कूड़ा निस्तारण प्लांट की तरफ मुड़कर नहीं देखा। अधिकारी ही नहीं बल्कि भाजपा के जनप्रतिनिधि भी केन्द्र सरकार की योजनाओं को संचालित कराने में गंभीर नहीं दिखे।

 शौचालय बने नहीं, नालियों में बहता है मल 
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में 36593 शौचालय बनाए जाने का लक्ष्य था। केन्द्र सरकार की सबसे बड़ी योजना पर भी महानगर में पानी फिर गया। सरकारी मशीनरी सरकारी योजनाओं को लागू करने में कितनी गंभीर है इसकी बानगी स्वच्छ भारत मिशन की स्थिति से स्पष्ट होती है। महानगर में अभी तक केवल 998 शौचालय ही बनकर तैयार हुए हैं। बाकी 2100 शौचालयों पर कार्य संचालित बताया जा रहा है। इनमें भी काफी शौचालय ऐसे हैं जो गलत तरीके से रिकार्ड में अंकित कर दिए गए हैं।

डोर टू डोर कूड़ा उठाने की व्यवस्था का जिन्न भी नहीं आया बाहर 
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर की स्वच्छता, घर में दो रंग के डस्टबिन और डोर टू डोर कूड़ा उठाए जाने के दिखाए गए सपने पल पल टूट रहे हैं। योजना पर सरकारी खजाना खर्च हो रहा है। लेकिन डस्टबिन और कूड़ा डठाने की प्रक्रिया अभी फाइलों में ही कैद है। पांच जून पर्यावरण दिवस पर इस सपने को साकार किया जाना था। लेकिन सपना दिन निकलते ही टूट गया। निगम अधिकारियों की यह घोषणा भी निगम की चार दिवारी में कैद होकर रह गयी।

योगी के सामने बसपा को लग सकता है झटका

yogi ke saamne baspa ko lag sakta hai jatka
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
भाजपा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सभा से जहां ताकत का अहसास कराने की तैयारी में है तो निगम चुनाव में मुख्य प्रतिद्वंदी दल को तगड़ा झटका भी देने की तैयारी में है। बसपा के मेरठ क्षेत्र के एक बड़े नेता और एक पूर्व विधायक भाजपा में जा सकते हैं। इन दोनों को भाजपा में लाने के लिए उनके करीबी नेता पूरी फील्डिंग जमाये हुए हैं।

बसपा से विधानसभा का चुनाव लड़ चुके मेरठ महानगर के चर्चित नेता की भाजपा के कुछ नेताओं से नजदीकी छिपी नहीं है। यह बात अलग है कि पिछले दस सालों से यह नेता बसपा में ही राजनीति कर रहे हैं और उनके साथी दल बदल के साथ घूमते हुए अब भाजपा में आ चुके हैं। बसपा में बिना पद के भी इस नेता का कद मेरठ की राजनीति में अच्छा माना जाता है। कैंट क्षेत्र में इनका दबदबा सबसे ज्यादा है। ऐसे में अब इनके करीबी निगम चुनाव में बसपा को तगड़ा झटका देने के लिए उन्हें भाजपा ज्वाइन कराने में जुट गये हैं। पूरी चर्चा है कि शनिवार को योगी आदित्यनाथ की सभा में वह भाजपा ज्वाइन कर महापौर प्रत्याशी कांता कर्दम के लिए प्रचार में जुट जाएं। इसके अलावा बसपा के ही एक पूर्व विधायक भी कल भाजपा ज्वाइन कर सकते हैं।

शहर में कई स्थानों पर जाम से जूझे लोग

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
शहर में कुछ स्थानों पर यातायात की व्यवस्था में सुधार हुआ तो कहीं जाम लगा रहा। जाम की सूचना पर मंगलवार को दिनभर ट्रैफिक पुलिस दौड़ती रही। हापुड़ अड्डे के पास पुलिया निर्माण भी चौराहे पर जाम का कारण बना हुआ है।

बेगमपुल से जीरो माइल तक सड़क पर आड़े तिरछे वाहन खड़े होने से जाम की स्थिति बनी रही। दिल्ली रोड पर के सरगंज, रेलवे रोड चौराहा और बागपत रोड पर भी जाम लगा रहा। हापुड़ अड्डा चौराहे से भूमिया पुल तक भी लोग जाम से जूझते रहे। शाम को रिठानी, परतापुर तिराहा, दिल्ली- देहरादून हाईवे पर मोहिउद्ीनपुर के पास वाहनों की लाइन लगी रही। एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेयी का कहना है कि वाहनों की संख्या शहर में लगातार बढ़ रही है। कुछ स्थानों पर लाल बत्ती के समय ही जाम लगता है। यातायात व्यवस्था में कुछ स्थानों पर सुधार भी हुआ है।

वायु प्रदूषण के कारण बढ़ रहे सांस के रोगी

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
वायु प्रदूषण के कारण सांस के रोगी बढ़ रहे हैं। हालत यह है कि धूम्रपान नहीं करने वाले भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। इस बीमारी के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से 15 नवंबर को वर्ल्ड क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज (सीओपीडी) डे मनाया जा रहा है। यह हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार को मनाया जाता है। इसे आम भाषा में सांस और फेफड़ों की बीमारी कहते हैं। इसमें सांस की नलियां सिकुड़ जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है।

सीओपीडी दुनियाभर में 5वां सबसे घातक रोग बन चुका है। पहले यह धूम्रपान करने वालों का रोग माना जाता रहा है, लेकिन अब ऐसा नहीं है। छाती और सांस रोग विशेषज्ञ डॉ. वीरोत्तम तोमर ने बताया कि शहरी भारत में 32 प्रतिशत घरों में अब भी बायोमास स्टोव का उपयोग होता है, 22 प्रतिशत लकड़ी का और 8 प्रतिशत केरोसिन का, बाकी लिक्विड पेट्रोलियम गैस या नेचुरल गैस का। विकासशील देशों में सीओपीडी से होने वाली करीब 50 प्रतिशत मौत बायोमास के धुएं के कारण होती हैं, जिसमें से 75 प्रतिशत महिलाएं होती हैं। बायोमास ईंधन जैसे लकड़ी, पशुओं का गोबर और फसल के अवशेष धूम्रपान करने जितना ही सक्रिय जोखिम पैदा करती हैं। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में महिलाएं और लड़कियां रसोइघर में अधिक समय बिताती हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण इलाकों में श्वसन संबंधी रोगों से ग्रस्त 300 से अधिक मरीजों के विश्लेषण से पता चला कि 75 प्रतिशत दमा ग्रस्त मरीजों में सीओपीडी जैसे लक्षण उभरे थे।

सीओपीडी के प्रमुख लक्षण
लंबे समय तक बलगम वाली खांसी।
सांस की कमी महसूस होना।
सीने में घरघराहट और जकड़न।

ये करना होगा 
धूम्रपान न करें। घरों में चूल्हे, अंगीठी और स्टोव का प्रयोग न कर गैस चूल्हे का प्रयोग करना चाहिए। वायु प्रदूषण रोकने के प्रयास करने होंगे। कूड़े को जलाने की आदत को बदलें, पुराने डीजल और खटारा वाहनों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए।

आज लगेगा निशुल्क शिविर
मेरठ। डॉ. वीरोत्तम तोमर ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि बृहस्पतिवार को सुबह नौ से दोपहर 12 बजे तक डॉ. शिवराज मेमोरियल चेस्ट एंड एलर्जी सेंटर पर एक निशुल्क परामर्श शिविर का आयोजन किया जाएगा।

अवैध दुकानों पर खुले में बिक रही मीट

illegal meat shop , open sale of meat
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
शहर की मुख्य सड़कों पर खुलेआम दुकानों पर मीट की बिक्री हो रही है और पुलिस सब कुछ देखकर भी अंजान बनी है। जबकि मुख्यमंत्री बनते ही योगी आदित्यनाथ ने खुले में मीट की बिक्री न होने के आदेश दिए थे। कुछ दिन तो पुलिस ने सख्ती से इस ओर कार्रवाई की, लेकिन अब फिर से पहले जैसा हाल है।
मार्च में सीएम के आदेश के बाद पूर्व एसएसपी जे. रविंदर गौड़ पूरे अमले के साथ सड़क पर उतरे तो दो दिन में अवैध मीट की दुकानें बंद हो र्गइं। इसके बाद मानक पूरा करने वाली ही दुकानें खुलीं और उन पर चटाई या पर्दे लटक गए थे। लेकिन एक या दो माह ही ऐसा हुआ। वहीं नगर निगम के अधिकारी कह चुके हैं कि शहर में ज्यादातर मीट की दुकानें अवैध हैं, जिनके पास लाइसेंस नहीं है। ऐसे में पुलिस और खाद्य विभाग की टीम कार्रवाई करे। लेकिन अफसरों ने एक दूसरे पर मामला टालकर पल्ला ही झाड़ लिया है।

शहर से लेकर देहात तक खुले में बिक्री
सोतीगंज, ऊंचा सद्दीकनगर, घंटाघर, गोला कुआं, लिसाड़ी रोड, हापुड़ रोड, श्यमानगर रोड, लक्खीपुरा, गढ़ रोड, जाकिर कालोनी और मवाना रोड पर गंगानगर में सड़क किनारे ही दुकानों में कटान के बाद मीट बेचा जा रहा है। इन स्थानों पर अवैध मीट की दुकानों की संख्या 200 से अधिक है। यही हाल देहात का भी है। अब्दुल्लापुर में मेन रोड पर मीट की दुकान को लेकर एक माह पहले ही सांप्रदायिक तनाव हो गया था। बहसूमा, परीक्षितगढ़, सरधना और किठौर व अन्य स्थानों पर भी अवैध दुकानें खुली हैं।

अफसरों के बदलते ही मिली छूट
एसएसपी, एसपी सिटी, एसपी देहात के अलावा सभी सीओ भी ट्रांसफर होकर दूसरे जिलों में चले गए। अधिकांश थाना प्रभारी भी नए हैं। अफसर बदलते ही कार्रवाई न के बराबर हो गई। इसके बाद अवैध मीट की दुकानों पर काम फिर से शुरू हो गया। वहीं सोतीगंज और लिसाड़ीगेट में अवैध मीट की दुकानों को लेकर थाने की फैंटम पुलिस पर भी मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। भाजपा नेता कई बार पुलिस अफसरों से इसकी शिकायत भी कर चुके हैं।

अफसर को नहीं जानकारी
खुले में दुकानों पर मीट बेचे जाने का मामला संज्ञान में नहीं है। थाना प्रभारी और सीओ से दुकानों की जानकारी मांगी जा रही है। अवैध मीट की दुकानों को पुलिस सख्ती से बंद कराकर कार्रवाई करेगी। थाना पुलिस की मिलीभगत का आरोप है तो उसकी भी जांच कराई जाएगी।  मानसिंह चौहान, एसपी सिटी

मानक पूरा करने वालों को ही दिया लाइसेंस
मानकों को पूरा करने वाले कुछ मीट कारोबारियों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। जबकि कुछ ने आवेदन किए हैं, उनकी नगर निगम और पुलिस से एनओसी मांगी गई है। एनओसी मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा के नियमों पर उनको परखा जाएगा। इसके बाद लाइसेंस जारी किया जाएगा। – सर्वेश मिश्रा, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी


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