शहर की बेटियों का एक और सरकारी स्कूल

one more school for girls
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
सरकारी स्कूल में कोई अपने बच्चे पढ़ाए भी तो कैसे। यहां तो पढ़ाई के नाम पर होता है सिर्फ मजाक। शिक्षिक अपनी मजबूरी जताते हैं तो अफसर बडे़ अफसरों से बात करने की बात कहते हैं। सालों से यही हालत चल रही है इन स्कूलों की। सुधार की बात छोड़िए, अफसर इन स्कूलों में आकर झांकना भी पसंद नहीं करते। बेटियों के एक और स्कूल ब्रहमपुरी स्थित प्राइमरी स्कूल कन्या नंबर दो में हालत और भी बदतर मिली। पानी नहीं, बिजली नहीं, शौचालय भी नहीं और पढाई के नाम पर यहां खानापूर्ति होती मिली।

सोमवार को अमर उजाला टीम ब्रहमपुरी की मास्टर कालोनी स्थित प्राथमिक स्कूल कन्या नंबर -2 में पुहंची। स्कूल की हालत देखकर बिल्कुल नहीं लगा कि यहां शिक्षा दी जाती है। नगरीय क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की हालत इतनी भयावह कैसे हो सकती है। किराये के भवन में संचालित स्कूल चार बाई आठ की गैलरी में चलता मिला। भवन मालिक का कुत्ता बच्चों के बीच घूम रहा था। बच्चों को डर भी लगता है लेकिन मासूम बच्चे कुछ कह नहीं पाते। कुत्ता बच्चों का काट भी सकता है। विद्यालय परिसर में खड़ी एक कबाड़ मोटर साइकिल पर स्कूल बोर्ड लगा हुआ था। जिस पर शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही थी। स्कूल की प्रधानाचार्य अनीता गुप्ता और एक शिक्षामित्र मिथलेश शर्मा की तैनाती है। प्रधानाचार्य ने बताया स्कूल में पानी की व्यवस्था नहीं हैं, इसलिए वे रोजाना पीने का पानी बोतलों में भरकर घर से ही लाती हैं। स्कूल में छह घंटे तक रहने के लिए एक बोतल के पानी से पूर्ति नहीं हो पाती है। स्कूल के बच्चे आसपास के सरकारी नलोें और नगर निगम की टंकी से पानी पीते हैं। शौचालय के लिए बच्चे आसपास की गलियों में ही चले जाते हैं। बिजली का कनेक्शन विभाग ने नहीं दिया है। भवन मालिकों ने भी बिजली देने से इंकार कर दिया है। कुल मिलाकर स्कूल में कोई सुविधा नहीं मिली।

खंडहरनुमा कमरे बने खतरनाक 
इस प्राथमिक विद्यालय में कमरे तो तीन हैं। लेकिन दो कमरों में भवन मालिक ने कबाड़ और पुराना सामान भर रखा है। तीसरे कमरे की सीलन के कारण हालत इतनी भयावह हो गई है कि बच्चों का कमरे में अंदर जाना खतरे से खाली नहीं है। बच्चों ने बताया कि जिस कमरें के बराबर में वे पढ़ाई कर रहे हैं। उसमें कीड़े, काकरोच और कानखजूरा घूमते रहते हैं। इस कमरे में बच्चे तो क्या शिक्षिकाओं की जाने की हिम्म्त नहीं है। बच्चों के पीछे गंदगी का अंबार लगा हुआ था। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई मानो रामभरोसे ही चल रही है।

बारिश मतलब स्कूल की छुट्टी
स्कूल में तैनात शिक्षिकाओें ने बताया कि करीब 60 सालों से ये स्कूल किराये की बिल्डिंग में चल रहा है। सड़क उपर आ गई और स्कूल नीचा हो गया है। बारिश कम हो या ज्यादा स्कूल में पानी भर जाता है। जिसके बाद बच्चों को पढ़ाना नामुमकिन हो जाता है। ऐसे में बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। इसके अलावा उनके पास कोई उपाय भी नहीं है। कई बार अधिकारियों से शिकायत की है। लेकिन मामले में कोई सुनवाई नहीं होती है। स्कूल की पहचान के लिए यहां कोई बोर्ड तक नहीं लगाया गया।

यह प्राथमिक विद्यालय किराए के भवन में चल रहा है। भवन मालिक जगह खाली कराना चाहता है। किराये के भवनों की शिकायतें विभाग में आ रही हैं। भवन मालिकों के विवाद के कारण स्कूलों में सुधार नहीं हो पा रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए उच्च अधिकारियों से बात कर मामले का हल निकाला जाएगा।
एसके गिरी, नगर शिक्षा अधिकारी

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