व‌र्ल्ड चैंपियनशिप खेलने वाला देश का पहला साइक्लिस्ट बना अरविंद

मेरठ: भारतीय खेलों में रोमांच, ताकत और हुनर का जिक्र हो तो मेरठ पूरे प्रदेश की साख बढ़ा देता है। मेरठ के तूफानी साइक्लिस्ट अरविंद पंवार रफ्तार के दम पर व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में स्थान बनाने वाले देश के पहले साइक्लिस्ट होंगे। इसके लिए अरविंद ने बेल्जियम में अपने खर्च पर कड़ी ट्रेनिंग ली, और दोहा में नौ अक्टूबर से शुरू हो रही व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में ओलंपियन एथलीटों के साथ फर्राटा भरते नजर आएंगे।

ग्लास्गो कामनवेल्थ खेलों में भारत की ओर से खेलने वाले अरविंद ने विदेशों में जमकर प्रशिक्षण लिया। मेरठ के जटौली गांव के अरविंद करीब 47 किमी प्रति घंटा की गति के साथ देश का सबसे तेज एथलीट हैं। दोहा में होने वाली यूसीआई रोड साइक्लिंग व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में दो सौ देशों के एथलीट फर्राटा भरेंगे। 40 किमी व्यक्तिगत ट्रैक स्पर्धा में पहली बार दो भारतीय एथलीटों का चयन हुआ है।

हाइवे पर सीखी साइक्लिंग

अरविंद ने एनएच-58 पर तूफानी रफ्तार से साइकिल चलाने के साथ ही यूएसए से ऑनलाइन ट्रेनिंग लिया है। वर्ष 2005 में एनएच पर साइकिलंग करते हुए अरविंद ने 2010 नई दिल्ली कामनवेल्थ में दावा ठोंका, जहां पर ट्रायल में महज एक सेकंड से स्थान बनाने से चूक गए। अरविंद ने ऋषिकेश से देहरादून की पहाड़ियों से होते हुए मेरठ तक कड़ी प्रैक्टिस की, और वर्ष 2012-13 में देश में साइकिलंग के तमाम रिकार्ड तोड़ दिए। अरविंद ने उस वक्त 45.6 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से साइकिलंग कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया। देश में कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा में साइकिलंग का जबदस्त रोमांच है।

तीन लाख की साइकिल

25 वर्षीय अरविंद पंवार ने ग्लास्गो कॉमनवेल्थ से पहले तीन लाख रुपए की साइकिल खरीदी। कार्बन फाइबर से बनी इन यूरोपीय साइकिलों में 45 हजार रुपए का डिजिटल मीटर लगा होता है। इसमें चालक की हृदय गति, रक्तचाप एवं हवा की गति का पता चलता रहता है। स्पर्धा के आसपास चालक प्रैक्टिस के लिए ऋषिकेश चले जाते हैं, जहां से देहरादून, मसूरी, धनावल्टी, चंबा से नरेन्द्र नगर और फिर वापस आने तक 250 किमी की यात्रा करीब साढ़े आठ घंटों में पूरी करते हैं। अरविंद के पिता ऋषिपाल सिंह कहते हैं कि सैफ एशियन गेम्स में दो गोल्ड, महाराष्ट्र की ओर से नेशनल गेम्स में तीन मेडल जीतने के बावजूद अब तक प्राइज मनी नहीं मिली।

क्या कहता है एथलीट

बेल्जियम में दुनिया के तमाम धुरंधर साइक्लिस्टों के साथ ट्रेनिंग का फायदा मेरी रफ्तार में हुआ है। करीब 47 किमी प्रति घंटा की गति के बाद मेरा हौसला बुलंद है। दोहा की व‌र्ल्ड चैंपियनशिप में पदक का प्रयास करूंगा।

अरविंद पंवार, अंतरराष्ट्रीय एथलीट

 

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