निगम की वेबसाइट से ‘जनहित’ ही लापता

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फाइल फोटोPC: अमर उजाला
केंद्र सरकार जहां लेनदेन से लेकर हर योजना ऑनलाइन कर रही है, वहां नगर निगम की वेबसाइट पूरी तरह से ऑफलाइन मोड पर है। आलम यह है कि केंद्र और राज्य की योजनाओं का वेबसाइट पर कहीं अता-पता नहीं है। न ही शहर की जनता अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकती है। जिसके कारण टैक्स जमा करने, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने, संपत्ति में नाम परिवर्तन कराने, सड़क बनवाने के लिए मांग पत्र देने जैसी सुविधा पाने के लिए लोगों को निगम के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जबकि यदि यही सुविधा ऑनलाइन मिले तो जनता को राहत मिलने के साथ ही भ्रष्टाचार से मुक्ति मिलेगी। निगम की यह पोल केंद्रीय योजनाओं की जानकारी करने पहुंची निगरानी टीम ने खोली है।
अफसरों के नाम तक नहीं
‘अमर उजाला’ ने नगर निगम की वेबसाइट खोली तो योजनाएं के बजाय सच्चाई खुलकर सामने आ गयी। वेबसाइट पर ऐसा कोई लिंक नहीं खुला जो जनहित में होना अति आवश्यक है। हैरानी की बात यह है कि वेबसाइट पर न तो नगर निगम मुख्यालय का फोटो है और न ही नगरायुक्त और महापौर का नाम और ब्यौरा। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिस वेबसाइट में उसके अफसरों का जिक्र नहीं है तो वहां जनहित की योजनाएं कितनी प्रसारित हो रही होंगी।
इन बिंदुओं पर अटका शहर का विकास

ई गवर्नेंस : वेबसाइट के इस लिंक पर नगर निगम महानगर की जनता को उन सभी योजनाओं की जानकारी देगा। जो केंद्र, राज्य सरकार और निगम की तरफ से जनता के लिए जारी की गई है। लेकिन नगर निगम प्रशासन अभी तक अपनी वेबसाइट पर ई-गवर्नेंस शुरू ही नहीं कर पाया है। यही कारण है कि महानगर की जनता सरकारी योजनाओं से अनभिज्ञ है।
जन शिकायत प्रणाली : वेबसाइट के इस लिंक पर महानगर की जनता पथ प्रकाश, पानी, सीवर, सड़क, गंदगी , टैक्स आदि में असुविधा होने पर शिकायत कर सकती है। निगम प्रशासन अभी तक अपनी वेबसाइट पर जनता को यह सुविधा नहीं दे पाया है। निगम ने केवल टोल फ्री नंबर 180018039, व्हाट्सएप नंबर 9395881001 दिया हुआ है। जिस पर शिकायत दर्ज करने के बाद न तो जनता के काम हो पा रहे हैं और न ही प्रमाणिकता के साथ समस्या का समाधान हो रहा है।

संपत्ति कर : वेबसाइट के इस लिंक पर महानगर की जनता जहां ऑनलाइन अपना टैक्स लगवाने के लिए आवेदन कर सकेगी। वहीं, टैक्स जमा करने, पूर्व में जमा किए गए टैक्स की स्थिति देखने और टैक्स संबंधी अनेकों जानकारी भी प्राप्त कर सकेगी। जो यहां नहीं है।

विज्ञापन कर: वेबसाइट के इस लिंक पर वह सभी व्यक्ति जो शहर में किसी भी प्रकार का विज्ञापन करना चाहते हैं, आवेदन कर सकेंगे। जिस पर निगम को एरिया वार विज्ञापन दर डालनी होगी। विज्ञापन का भुगतान भी जनता ऑनलाइन कर सकेगी।

लाइसेंस कर : वेबसाइट के इस लिंक पर प्रत्येक  वह व्यक्ति जो निगम से रिक्शा, थ्री-व्हीलर, डेरी आदि लाइसेंस बनवाने की जानकारी ले या शुल्क जमा कर सकेगा। जो यहां नहीं है।
सरकारी संपत्ति पर कार्यक्रम की परमिशन : वेबसाइट के इस लिंक पर जाकर कोई भी व्यक्ति उदाहरण के लिए अगर जिमखाना मैदान पर कार्यक्रम करना चाहता है और निगम की निर्धारित दरों के आधार पर किराए पर लेना चाहता है तो वह ऑनलाइन जहां आवेदन कर सकेगा, वहीं निर्धारित राशि भी जमा कर सकेगा। जो अभी तक मैनुअल ही सुविधा है।
संपत्ति निस्तारण : वेबसाइट के इस लिंक जाकर वह कोई भी व्यक्ति जिसको निगम की सरकारी संपत्ति जिसको किराये पर लिया हुआ है, जैसे दुकानें आदि तो उनमें नाम परिवर्तन कराने, अपनी निजी संपत्ति में नाम परिवर्तन कराने आदि की सुविधा ले सकेगा।

पेरोल : वेबसाइट के इस लिंक पर नगर निगम के प्रत्येक कर्मचारी, अधिकारी के वेतन से लेकर पेंशन तक की स्थिति मिलेगी। कर्मचारी और अधिकारी को अपनी समस्या बताने का भी अवसर प्राप्त होगा।

कर्मचारी प्रबंधन प्रणाली : वेबसाइट के इस लिंक पर जाकर कोई भी व्यक्ति नगर निगम के विभागवार अधिकारी व कर्मचारी की तैनाती और उसका मोबाइल नंबर तक देख पाएंगे। ताकि कोई भी शिकायत अथवा फोन पर जानकारी ली जा सके। जो नहीं है।

अमृत योजना की टीम भी खाली हाथ  
भारत सरकार की अमृत योजना के लिए सिटी मिशन मैनेजमेंट यूनिट पर तैनात आईटी अधिकारी अंचुल गुप्ता को नगर निगम मेरठ की वेबसाइट पर कुछ भी नहीं मिल रहा है। निगम की वेबसाइट को देखकर वह हैरान हैं। इनका कहना है कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता निगम की सभी सुविधाएं, आय-व्यय का ब्यौरा सहित जनहित की जानकारी ऑनलाइन कराना है। अभी तक नगर निगम की वेबसाइट पर कुछ भी अपडेट नहीं है। नगरायुक्त और महापौर तक के नाम भी नहीं हैं।

यूं लगा पलीता
स्मार्ट सिटी का मुद्दा हो या फिर केंद्र  सरकार की जेएनएनयूआरएम योजना में पलीता लगने के पीछे भी यही कुछ कारण हैं। सरकार ने योजना का धन जारी करने से पहले सब कुछ ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन कुछ नहीं हुआ। यही कारण है कि जेएनएनयूआरएम योजना के करोड़ों रुपये का सही इस्तेमाल ही नहीं हो सका। महानगर की जनता न तो ऑनलाइन अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है और न ही योजनाओं की जानकारी पा रही है।

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