इशारों में पाक को पीएम मोदी का कड़ा संदेश, बोले- कभी-कभी युद्ध भी जरूरी

आनन्द राय, लखनऊ। ‘कभी-कभी परिस्थितिवश युद्ध की ओर भी जाना पड़ता है। लेकिन यह देश युद्ध का नहीं, बुद्ध का है। हमारा अंतिम पथ बुद्ध पथ (शांति) है।’ लखनऊ के दशहरा महोत्सव में इस संदेश के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाम लिए बगैर पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी। कहा-‘आतंकियों की मदद करने वालों और उन्हें पनाह देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।’ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत और समापन ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से किया।

प्रधानमंत्री मोदी ऐशबाग के रामलीला मंच पर 25 मिनट बोले। सभी पक्षों का छुआ। शांति और सद्भावना पर जोर देकर राम के साथ श्रीकृष्ण को भी याद किया। बोले-इन दोनों महापुरुषों के जीवन में युद्ध था। लेकिन हम वे लोग हैं, जो युद्ध से बुद्ध की ओर चले जाते हैं।

 

आतंकवाद को मानवता का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा-‘पूरा विश्र्व तबाह हो रहा है। दो दिन से हम सीरिया की एक छोटी बालिका का चित्र देख रहे हैं। आंख में आंसू आ जाते हैं। 30-40 वर्ष पहले आतंकवाद पर देश चर्चा करता तो कुछ देशों के गले नहीं उतरता था। अमेरिकी अफसर से 1991 में हमारी बात हुई तो उसने कहा कि यह तो आपके यहां कानून-व्यवस्था का मसला है। लेकिन 26/11 (मुंबई हमला) के बाद सारी दुनिया को आतंकवाद पता चल गया। आतंकवाद खत्म किए बिना मानवता की रक्षा नहीं हो सकती। रावण को आतंकवाद का प्रतीक बनाकर सभी तरह की बुराइयों पर विजय का आह्वान किया।

तो जटायु की तरह लड़ें

मोदी ने प्रतीकों के जरिये समाज की बुराइयों को भी दूर करने की नसीहत दी। कहा, आतंक के खिलाफ पहली लड़ाई कोई फौजी, कोई नेता नहीं लड़ा। यह लड़ाई जटायु ने नारी के सम्मान के लिए लड़ी। आमजन का आह्वान करते हुए कहा कि 125 करोड़ जनता अगर राम नहीं बन सकती तो जटायु की भूमिका निभा सकती है। देशवासी अगर आतंकियों की हरकत पर ध्यान रखें तो वे सफल नहीं हो सकते। दुराचार, भ्रष्टाचार हमारे समाज को तबाह कर रहे हैं। ऐसे लोग रावण नहीं तो क्या हैं?

घर में पैदा होने वाली सीता को बचाएं

मोदी ने कहा कि आज विजयदशमी है और पूरा विश्र्व ग‌र्ल्स डे मना रहा है। सीता मां पर अत्याचार करने वाले रावण को हर साल जलाते हैं, लेकिन कभी सोचा कि बेटा-बेटी में फर्क क्यों करते हैं? अपने अंदर का रावण मारिए। घर में पैदा होने वाली सीता को बचाइए। बेटियों के पैदा होने पर भी उत्सव मनाइए। उन्होंने गंदगी को भी रावण का प्रतीक बताया। अशिक्षा को समाज को नष्ट करने वाली शक्ति बताते हुए इस पर भी विजय प्राप्त करने पर जोर दिया।

..ऐसे पहले प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी देश के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने दिल्ली से बाहर रामलीला महोत्सव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। लखनऊ में ऐशबाग के रामलीला महोत्सव में प्रधानमंत्री के शामिल होने को उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव के मद्देनजर संदेश भी दिया। जातिवाद, सांप्रदायिकता और भाई-भतीजावाद को रावण की तरह बताते हुए मोदी ने कहा-‘इन्हें भी मारिए।’ उन्हें पराक्रम के प्रतीक सुदर्शन चक्र और धनुष-बाण भेंट किया गया। इसे सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सम्मान के तौर पर देखा गया। हालांकि उन्होंने अपने संबोधन में सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र तक नहीं किया।

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