अफसरों की साठगांठ से सरकार को लगाया जा रहा टैक्स का चूना, जानिए कैसे ?

अफसर की मेहरबानी हो, तो सरकार को टैक्स का चूना आसानी से लगाया जा सकता है। ‘मेरा शहर मेरी पहल’ संस्था द्वारा नौचंदी मैदान में आयोजित नव वर्ष महोत्सव मेले में ऐसा ही हो रहा है। इस मेले पर मनोरंजन कर विभाग की नजर नहीं है। जिसका बड़ा उदाहरण ये है कि मेले में लगे झूला संचालक जो टिकट दे रहे हैं, वह उत्तराखंड में लगी किसी प्रदर्शनी के हैं।

किसी भी मेला आयोजन में झूला या मनोरंजन आदि के साधनों पर जब शुल्क लगाया जाता है, तो उस पर मनोरंजन कर लगता है। यह मनोरंजन कर 25 प्रतिशत होता है। नौचंदी मैदान में 15 दिसंबर से 8 जनवरी तक के लिए मेरा शहर मेरी पहल संस्था द्वारा नववर्ष महोत्सव मेला आयोजित कराया जा रहा है। छह दिन पूर्व वैरायटी शो (फूहड़ नृत्य) के कार्यक्रम से चर्चा में आये इस मेले में अब मनोरंजन कर की चोरी का मामला सामने आया है। जिसमें विभाग का संरक्षण साफ नजर आ रहा है।

मेला परिसर में छोटे-बड़े करीब डेढ़ दर्जन झूले लगे हैं। इनमें बड़े झूले वाले 40 रुपये और छोटे झूले वाले 20 रुपये शुल्क वसूल रहे हैं। मेला आयोजन की अनुमति देते हुए अपर जिलाधिकारी नगर ने कहा था कि इसके लिए मनोरंजन कर विभाग से भी एनओसी ली जाये।

मनोरंजन कर विभाग ने बंद की आंखें
मेला आयोजन कराने वाली संस्था से अधिकारी और शहर के प्रभावशाली लोग जुड़े हैं। ऐसे में मनोरंजन कर विभाग भी आंख बंद करके बैठ गया। झूलों के टिकट पर नव वर्ष महोत्सव मेला, नौचंदी मैदान मेरठ के स्थान पर ‘उत्तराखंड मनोरंजन एवं विकास प्रदर्शनी, एमबी इंटर कालेज मैदान हल्द्वानी नैनीताल लिखा है। जिसे शिवानी एम्यूजमेंट द्वारा संचालित किया गया। इस पर पांच प्रतिशत की दर से टैक्स जोड़ते हुए कुल 40 रुपये कीमत दर्शायी गयी है। टिकट पर कहीं झूला भी दर्ज नहीं है।

इंस्पेक्टर से पूछकर बताऊंगा
मनोरंजन कर विभाग के सहायक आयुक्त एमके सिंह से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि झूले पर टैक्स वसूला जायेगा। जब उनसे पूछा गया कि हल्द्वानी की किसी प्रदर्शनी का टिकट झूला संचालक दे रहे हैं तो उस पर कैसे टैक्स निर्धारित करोगे, तो उन्होंने कहा कि इस संबंध में इंस्पेक्टर से पूछकर जवाब दे पाऊंगा।

वैरायटी शो की जानकारी ही नहीं
सहायक आयुक्त मनोरंजन कर को मेला परिसर में एक सप्ताह तक चले दो वैरायटी शो की जानकारी ही नहीं है। जबकि इस पर भी 40 रुपये का टिकट लगाया गया था। इस दौरान सैकड़ों लोगों ने रोजाना वैरायटी शो देखा था। यदि दोनों वैरायटी शो में प्रतिदिन औसतन एक हजार लोग भी आये, तो सप्ताह में सात हजार लोगों ने शो देखा होगा। शुल्क वसूली 2.80 लाख रुपये बैठती है और इस पर 70 हजार का टैक्स बनता है। इससे सहायक मनोरंजन कर आयुक्त की अनभिज्ञता भी सवालों के घेरे में आ गई है।

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