Impacting Lives of Beginners: Mrs. Neena Bhatia, Principal ABC Public School

Impacting Lives of Beginners: Mrs. Neena Bhatia, Principal ABC Public School

  Who was your inspiration in Childhood ? My father was my inspiration in Childhood. He always preached us that luck sure comes at the door and knocks too but your efforts More »

Top of the Town: Ravindra Bhadana, MLA  Indian politician and a member of the 16th Legislative Assembly of Uttar Pradesh of India

Top of the Town: Ravindra Bhadana, MLA Indian politician and a member of the 16th Legislative Assembly of Uttar Pradesh of India

1. आपका बचपन में प्रेरणा स्त्रोत कौन था? मेरे पूज्य बाबाजी स्वर्गीय श्री रामसिंह जी । जो एक कृषक थे, एक सामाजिक व्यक्ति थे। उन्होंने जिंदगी में मुझे जीना सीखाया। प्ररेणा भी More »

Top of the Town: Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd.

Top of the Town: Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd.

Mr. Vikram Parakash Lamba, MD American Institute of English Language Pvt. Ltd. with 300+ Centers all across India Who was your inspiration in Childhood ? My mother and father were my source More »

Top of the town: Dr. Mohini Lamba, Director in American Kids Play School, Early Childhood Curriculum Developer, Montessori Teachers Trainer

Top of the town: Dr. Mohini Lamba, Director in American Kids Play School, Early Childhood Curriculum Developer, Montessori Teachers Trainer

Who was your inspiration in Childhood ? My inspiration was my family. I was surrounded by educators in my family. Ma Nanaji, Mamaji, my mother everybody was into academics. My Mamaji was More »

Top of the Town: Mrs. Monika Kohli, 52 years young model and actor, into print ads, T.V. commercials and movies

Top of the Town: Mrs. Monika Kohli, 52 years young model and actor, into print ads, T.V. commercials and movies

Who was your inspiration in Childhood ? I always believed that inspiration is from inside and not from outside. Only you can inspire yourself. Outward inspirations are momentary and do not stay More »

Top of the town: Respected Rajendra Aggarwal, MP

Top of the town: Respected Rajendra Aggarwal, MP

  Who was your inspiration in Childhood ? My dad and my uncle were my inspiration in my childhood. Both of them were associated with RSS. They inspired me to join RSS More »

Top of the town: Dr. Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker

Top of the town: Dr. Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker

Dr.Vishwajeet Bembi, renowned Physician and Social Worker Who was your inspiration in Childhood ? My mother was my inspiration in my childhood and she is still my inspiration. My brother had also More »

Top of the town: Mr. Rakesh Kohli, Chairman, Stag International known for sporting goods in different countries of the world.

Top of the town: Mr. Rakesh Kohli, Chairman, Stag International known for sporting goods in different countries of the world.

Who was your inspiration in Childhood ? My grandfather was my biggest inspiration. I had learnt the minutest details of life from him. I learnt a lot from him about business. Like More »

Top of the town: Mr. Prem Mehta, Principal City Vocational Public School

Top of the town: Mr. Prem Mehta, Principal City Vocational Public School

Who was your inspiration in Childhood ? I think in my childhood it was the national leaders like Gandhi ji and Nehru ji who inspired me the most because our exposure at More »

Top of the town: Dr. Mamta Varshney, Lecturer and Poetess

Top of the town: Dr. Mamta Varshney, Lecturer and Poetess

Who was your inspiration in Childhood? Radio was my source of inspiration as I used to listen to loads of music and radio and tape recorder were the only source to listen More »

 

बाल वैज्ञानिकों के लिए शांति निकेतन विद्यापीठ में शुरू होगी अटल टिकरिंग लैब

शांति निकेतन विद्यापीठ में बनेगी अटल टिकरिंग साइंटिफिक लैब

नगीन   सिटी ऑफिस   में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्या विभा गुप्ता ने  बताया कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार के नीति आयोग द्वारा  मेरठ से शांति निकेतन विद्यापीठ को अटल टिकरिंग साइंटिकफिक लैब के लिए चयनित किया गया है। कक्षा छह से 12 वीं तक के बच्चों में इनोवेशन का बीजारोपण करने के लिए देशभर के स्कूलों में शुरू हुए अटल इनोवेशन मिशन में मेरठ को भी लैब मिल गई है।

शांति निकेतन विद्यापीठ  में अटल टिकरिंग लैब स्थापित की जाएगी।  अटल टिंकरिंग लैब के जरिए उक्त कक्षाओं के बच्चे अपनी सोच और कल्पनाओं को मूर्त रूप दे सकेंगे। बच्चों में नई सोच, कल्पना और खोज के विचारों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित होने वाली इन लैब में बच्चों को प्रयोग करने के लिए सभी सुविधाएं मिलेंगी। प्रदेशभर में इस चरण के लिए नौ सौ से ज्यादा स्कूलों ने आवेदन किया था। स्कूलों में स्थापित होने वाली इन लैब के लिए नीति आयोग पांच वर्षों के लिए विभिन्न मदों में करीब 20 लाख रुपये की फंडिंग करेगा। साथ ही बच्चों के सर्वश्रेष्ठ प्रोजेक्ट को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का रास्ता भी मिलेगा।

जिले के यूपी बोर्ड, सीबीएसई, आईसीएसई आदि बोर्डों के 800 विद्यालयों में से  शांति निकेतन विद्यापीठ को  लैब के लिए चुने जाने पर विद्यालय मे प्रसन्नता की लहर व्याप्त है।

शोभायात्रा के चलते दिल्ली रोड पर लगी वाहनों की लंबी कतार

delhi road jaam during yaatra
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
शहर का जाम ट्रैफिक पुलिस के लिए मुसीबत बना हुआ है। मंगलवार को शहर में अलग-अलग स्थानों पर लोग जाम से जूझते देखे गए। दिल्ली रोड पर एक शोभायात्रा के चलते पुलिस ने वाहनों को रोकते हुए शोभायात्रा निकलवाई। इसके चलते वाहनों की लंबी कतार लग गई।

दोपहर के समय कचहरी पुल पर भीषण जाम की स्थिति बनी रही। लालकुर्ती पैठ बाजार से लेकर जीरो माइल तक भी वाहन जाम में फंसे रहे। जीरो माइल से बेगमपुल चौराहे तक भी जाम लगा रहा। दिल्ली रोड पर भैंसाली बस अड्डा, फैज-ए आम कॉलेज, केसरगंज, रेलवे रोड चौराहा और मेट्रो प्लाजा पर भी जाम की स्थिति बनी रही। घंटाघर, खैरनगर, सराफा बाजार, कबाड़ी बाजार, भूमिया का पुल और हापुड़ अड्डा चौराहा पर भी शाम को वाहन जाम में फंसे रहे। हापुड़ अड्डा पर पुलिया निर्माण के चलते ट्रैफिक पुलिस ने सौ मीटर तक बैरियर लगाकर वनवे कर रखा है, जिसके चलते सिटी बसों को गांधी आश्रम चौराहे से सूरजकुंड की तरफ निकाला गया। इसके अलावा मुख्य चौराहों पर भी जाम की समस्या बनी रही।

बसों को 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ा रहे चालक, स्पीड लिमिट है 60 की

roadways bus speed 80 km
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
यात्री सुविधा के नाम पर सीएम योगी से पुरस्कार लेने वाला रोडवेज विभाग ही यात्रियों की जान जोखिम में डाल रहा है। बसों की गति निर्धारित होने के बावजूद रोडवेज चालक लगातार स्पीड लिमिट क्रॉस कर रहे हैं। रोजाना करीब 150 बसों के ओवर स्पीड करने के अलर्ट कंट्रोल रूम को मिल रहे हैं, लेकिन अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।
यात्रियों के जीवन को सुरक्षित करने और डीजल औसत बेहतर करने के लिए सभी बसों की गति 60 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की है। बसों में व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लगाए गए हैं। वीटीएस के जरिये बसों की गति, लोकेशन आदि पर नजर रखने के लिए आरएम आफिस में वीटीएस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। सोमवार को अमर उजाला टीम ने कंट्रोल रूम का दौरा किया। वहां से मिले आंकड़ों के अनुसार दोपहर एक बजे तक रूटों पर गई बसों में से करीब 150 बसों का निर्धारित गति से ज्यादा गति पर चलाए जाने के अलर्ट आ चुके थे। इसमें सबसे ज्यादा सोहराबगेट डिपो की बसों के 71 अलर्ट थे। इसके बाद भैसाली डिपो की 27 बसें ओवर स्पीड मिली। सोहराबगेट डिपो की बस संख्या यूपी 15एटी-7943 16 बार ओवर स्पीड कर चुकी थी। जबकि बस संख्या यूपी 11टी-7372 ने 12 बार, यूपी 86टी-1059 ने 11 बार और मेरठ से मुजफ्फरनगर जा रही भैसाली डिपो की बस संख्या यूपी 82टी-4173 10 बार ओवर स्पीड कर चुकी थी। इस बस के 80 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक के अलर्ट मिले थे। इतना ही ऐसी अनेक बसें थी जो 10 से 16 बार ओवर स्पीड क्रास कर चुकी थी।

डेढ़ महीने में पांच बड़े एक्सीडेंट
ओवर स्पीड और लापरवाही के चलते छोटे-बड़े एक्सीडेंट तो अक्सर रोज ही होते हैं, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में पांच बड़ी दुर्घटना हुई हैं, जिनमें दो सिपाहियों, बस चालक समेत चार लोगों की मौत हो चुकी है और एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं। सोहराबगेट डिपो की बस संख्या यूपी 15बीटी-3109 का गत 30 अगस्त को मेरठ से फिरोजाबाद जाते समय रास्ते में एक्सीडेंट हुआ जिसमें 2 पुलिस वालों की मौत हो गई। बस संख्या यूपी 15बीटी- 4565 का गत 31 अगस्त का एक्सीडेंट हुआ जिमसें कई लोग घायल हुए। अनुबंधित बस संख्या यूपी 15बीटी-6039 का बुलंदशहर जाते समय एक्सीडेंट हुआ जिसमें बस चालक की मौत हो गई। इसके अलावा यूपी 15एटी-6283, यूपी 15एटी-7941 का भी एक्सीडेंट हुआ था जिसमें कई लोग घायल हुए थे।

तोड़ देते है वीटीएस का तार 
बस चालक अपना जुर्म छिपाने या ओवर स्पीड कर जल्द से जल्द चक्कर लगाने के लिए बस में लगे वीटीएस का तार तोड़ देते है ताकि वीटीएस में उनका जुर्म पकड़ में न आ सके। अधिकारियों का कहना है कि वीटीएस के तारे टूटने या खराब होने के आधा दर्जन से ज्यादा केस रोज आते हैं।

ओवर स्पीड से घटता है डीजल औसत
विभाग ने बेहतर डीजल औसत लाने वाले चालकों को पुरस्कृत करने नियम बना रखा है। तय स्पीड पर बस चलाने से ही यह संभव होता है। ओवर स्पीड करने पर डीजल औसत खराब हो जाता है। लेकिन अधिकतर बस चालक निर्धारित किलोमीटर पूरे करने के चक्कर में निर्धारित गति से अधिक गति से बस संचालित करते हैं।

रोडवेज बस के फर्स्ट एड बॉक्स में म्यूजिक सिस्टम

roadways bus fist aid box become music system
फाइल फोटोPC: अमर उजाला ब्यूरो
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक उपचार पेटिका) तो हैं, लेकिन उनमें प्राथमिक उपचार की दवाइयां ही नहीं हैं। अमर उजाला ने रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की स्थिति जानी तो तस्वीर चौंकाने वाली मिली। किसी बॉक्स में कपड़े रखे मिले तो कोई बिल्कुल खाली मिला। कई बसों में तो इन बॉक्स में म्यूजिक सिस्टम तक लगा दिए गए हैं।
ये है नियम
रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स का मकसद यह है कि स्वास्थ्य संबंधी कोई परेशानी होने या चोट आदि लगने पर यात्री को तुरंत प्राथमिक उपचार मिल जाए। मामला अगर गंभीर हो तो प्राथमिक उपचार के बाद उसे सुरक्षित अस्पताल तक पहुंचाया जाए। रोडवेज बसों में फर्स्ट एड बॉक्स की सुविधा अमूमन चालक  के पीछे लगे स्टैंड या फिर ऊपर सामान रखने की जगह छोटा बॉक्स बनाकर देने का नियम है। इन बॉक्स में पेट दर्द, सिर दर्द आदि की दवा और मरहम पट्टी की व्यवस्था होती है। खासकर लंबी दूरी की बसों में तो यह व्यवस्था आवश्यक रूप से रखने के आदेश उच्चाधिकारियों ने दे रखे हैं। लेकिन इन आदेशों की रोडवेज बसों में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

तो नहीं मिलेगा उपचार
सवाल यह है कि रोडवेज बस में सफर करने के दौरान यदि किसी यात्री को प्राथमिक उपचार देने की जरूरत पड़ जाए तो क्या होगा। क्योंकि इन फर्स्ट एड बॉक्स में न तो कोई दर्द निवारक गोली है और न ही कोई मरहम पट्टी की व्यवस्था। ऐसे में यात्रियों को प्राथमिक उपचार मौके पर कैसे मिलेगा।

चालक-परिचालक पर होगी कार्रवाई
रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक एसके बनर्जी का कहना है कि फर्स्ट एड बॉक्स में दवाइयां आदि रखनी अनिवार्य हैं। अगर दवाइयां नहीं हैं तो यह बताना चालक-परिचालक की जिम्मेदारी है। ऐसे चालक-परिचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने इसकी सूचना नहीं दी है। आरएम रोडवेज के अनुसार वे खुद बसों का निरीक्षण करेंगे। जिन बसों के फर्स्ट एड बॉक्स में दवाइयां नहीं मिलेंगी, उसके लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करेंगे।

फर्स्ट एड बॉक्स तो घरों से भी गायब
पहले घरों में भी फर्स्ट एड बॉक्स बनाए जाते थे, लेकिन अब जागरूकता के अभाव में वहां भी गायब होते जा रहे हैं। इस संबंध में आईएमए अध्यक्ष डॉ. वीरोत्तम तोमर का कहना है कि सभी घरों में फर्स्ट एड बॉक्स रखना चाहिए। यह काफी मदद करता है। इसमें सामान्य पेट दर्द, सिरदर्द, बुखार की दवाएं, मरहम, पट्टी और थर्मामीटर आदि रखें। प्राथमिक उपचार के बाद जरूरत पड़े तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

नाव हादसा : जान जोखिम में डालकर खेती करने जाते हैं कई गांवों के किसान

Farmers from many villages go to farming at risk
जान जोखिम में डालकर करने जाते हैं खेती
बागपत जनपद में दोघट थाना क्षेत्र के झूंडपुर, मिलाना, तवेला गढ़ी सहित कई अन्य गांवों के हजारों किसान और मजदूर जान जोखिम में डालकर हिंडन नदी पार कर खेती करने के लिए जाते हैं। कई बार बड़े हादसे भी हो चुके हैं, लेकिन शासन-प्रशासन ने आज तक किसानों का दर्द नहीं समझा। किसान हिंडन नदी पर वर्षों से पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
क्षेत्र के तवेला गढ़ी, झूंडपुर, मिलाना, पट्टी बंजारन गांव के हजारों किसानों की हिंडन नदी के दूसरी तरफ हजारों बीघा जमीन है। संबंधित किसान और मजदूर हर रोज भैंसा बुग्गी से या फिर तैर कर नदी को पार कर खेतों में काम करने के लिए जाते हैं। हिंडन नदी को पार करने में कई किसान एवं मजदूरों की जान भी जा चुकी है, लेकिन किसान फिर भी नदी पार करने को मजबूर हैं, क्योंकि नदी के उस पार उनकी हजारों बीघा जमीन है। जिस पर खेती करने के लिए जाते हैं। खेती से उनके घरों के चूल्हे चलते हैं।

शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारी ने नहीं ली कोई सुध

विधायक सहेंद्र सिंह रमाला

हिंडन नदी के रास्ते किसान को दो मिनट लगती है अपने खेतों तक जाने में और यदि किसान सरोरा पुल से होकर जाए तो उन्हें तीन से चार घंटे अपने खेतों तक जाने में लगते हैं। इसलिए किसान नदी के रास्ते जाना ही सही समझते हैं। संबंधित गांवों के किसान और मजदूर कई साल से जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से हिंडन नदी पर पुल निर्माण की मांग कर रहे है, लेकिन आज तक किसी भी जन प्रतिनिधि या शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारी ने उनकी कोई सुध नहीं ली। ग्राम प्रधान संजीव कुमार ने हिंडन नदी पर पुल बनाने की मांग की, ताकि तवेला गढ़ी, पट्टी बंजारन, झूंडपुर, मिलाना आदि गांवों के किसानों और मजदूरों को खेतों में जाने के लिए सुविधा मिल सके। पूर्व विधायक वीरपाल राठी ने भी विधानसभा में भी हिंडन नदी पर पुल बनाने का मुद्दा उठाया, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा।

विधानसभा में उठाएंगे मुद्दा: सहेंद्र सिंह 
रालोद नेता और छपरौली के विधायक सहेंद्र सिंह रमाला ने कहा विधानसभा में नदियों पर पुल के मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री से मिलकर ग्रामीणों की इस समस्या का समाधान कराएंगे।

Gap between India & rest is enormous: Luis Norton

India U-17 coach Luis Norton de Matos is under no illusion that the team will start matching the best teams in business at the World Cup with just two years of preparations. It’s not easy at the World Cup, he warns, but promises to give it all even if India’s chances in each of the three group matches are just five percent. Excerpts from an exclusive interview with the Portuguese coach…

Why Japan is pouring lakhs of crores in cut-rate loans to build infrastructure across India

I have a hidden agenda,” says Takema Sakamoto with a naughty grin. Dressed in kurtapyjama, paired with a half-jacket, he speaks fluent English, talks generously and is comfortable in his skin talking to the media — unlike most Japanese expats.

Sakamoto is the chief representative of JICA (Japanese International Cooperation Agency), and is talking about shifting to a new upgraded office this July. “We have a lot of Japanese expats. We needed better security.” For years, JICA functioned out of a dingy office at Gopaldas Bhawan in Connaught Place in central Delhi. It now operates out of the relatively swankier HT House on Kasturba Gandhi Marg — with better security.

There is another reason — Sakamoto’s hidden agenda — for the office shift. “We are the biggest bilateral donor body in India. We needed an appropriate office. A modern office to give a thrust to our presence in India,” he says candidly.

JICA is today the largest bilateral donor agency in India, having disbursed over Rs 1.5 lakh crore of soft loans to India since 2007-08. Out of 150 countries that JICA operates in, India is its biggest donee. “India has been the largest since 2008. But we have become much closer since 2015. We are now upgrading our older relationship to a newer and a very special one,” he says.

That new chapter in the India-Japan relationship was playing out in full glory in Gujarat this week. Amid hype and hope, Gandhinagar played host to the blossoming bromance between Japan’s PM Shinzo Abe and his Indian counterpart Narendra Modi. The stage was set for some big-ticket project announcements. A Rs 1.1 lakh crore Mumbai-Ahmedabad bullet train — for which Japan will dole out Rs 88,000 crore as soft loan — has grabbed most headlines. (Ironically, feasibility studies on the bullet train were done by the UPA government.) A part of the Make in India plan, the project will create jobs, entail technology transfer and local manufacturing. “Very quietly, JICA has surpassed World Bank and ADB in seamlessly executing large infrastructure projects in India,” says Vinayak Chatterjee, chairman, Feedback Infra.

The bullet train may be the most eye-catching but JICA’s spread is deep and wide. India-Japan will cooperate to connect Africa, Southeast Asia and India’s Northeast as part of the $40 billion Asia-Africa Growth Corridor (AAGC) programme, a counter to China’s Belt and Road Initiative. Deepening security and defence ties is high on the priority list. While the deal on US-2 amphibious aircraft has not yet stitched, discussions around unmanned ground vehicles, robotics, developing smart islands (think Andaman & Nicobar), among others, made headlines. Japan pledged support for infrastructure projects in the Northeast. The two countries signed 15 agreements in a range of areas, including infrastructure, skill development, security and disaster management. A project to build a convention centre in Varanasi has been cleared.

Investment Boost
Away from the media glare, on the ground there was some serious business afoot, with both JICA and Jetro ( Japan External Trade Organisation) playing a critical role. Some 450 Japanese honchos congregated at the Gandhinagar summit earlier this week, 250 of whom had flown down from Japan. The biggest shots included Mitsubishi Heavy Industries CEO and president Shunichi Miyanaga, Hitachi executive chairman Hiroaki Nakanishi, Suzuki Motor’s Osamu Suzuki, Sadayuki Sakakibara, chairman of Keidanren or the Japan Business Federation, Mitsui board chairman Masami Iijima, and Toyota Motor vice-chairman of board Shigeru Hayakawa. “An important trend this time was a big presence of executives from medium-sized ($1-10 billion) Japanese companies,” says a senior industry executive present at the summit in Gandhinagar on condition of anonymity.

DIPP and its Japanese counterpart have signed an agreement to promote Japanese investments in India. About 15 Japanese firms have signed agreements to invest in Gujarat. This includes Suzuki Motor’s plan to expand capacity, manufacture e-vehicles and set up a lithium-ion battery factory with Denso and Toshiba. Over 10 Japanese industrial townships are to be built in four states, including Gujarat and Rajasthan. There are plans to set up four Japan-India Institutes for Manufacturing ( JIMs) to train workers. 106 new waterways are to be jointly developed. Some serious discussions are on to work together on Iran’s Chabahar port and infrastructure projects in South Vietnam’s Mekong Delta region.

Hype or Truth
It’s not difficult to find sceptics to punch holes in the grand India-Japan spectacle. Some in the political circles call it the Bullet Election Train, as the summit precedes the upcoming Gujarat election. But there may be other more solid reasons for doubt. Consider: India’s bilateral trade with Japan is minuscule and, in fact, has been declining since the Modi government came to power in 2014. India’s exports to Japan have almost halved from $6.81 billion in 2013-14 to $3.85 billion in 2016-17. Imports from Japan, too, have fallen from a high of $12.5 billion in 2012-13 to $9.63 billion in 2016-17. As a result, bilateral trade has dipped from $18.61 billion in 2012-13 to $13.48 billion in 2016-17. This is despite the signing of the India-Japan Comprehensive Economic Partnership in 2011.

For perspective, India-Japan bilateral trade constitutes just around 1% of Japan’s total trade whereas for India it is a little over 2% of India’s total trade. This is in sharp contrast to bilateral trade ties with China, which is today India’s largest trade partner. Though skewed in China’s favour, India-China bilateral trade stood at $61.3 billion in 2016-17 with India’s export to China at $10.2 billion. Similarly, Japan’s trade ties with China are more robust. In 2016, Japan exported $113.9 billion (17.7% of its exports) to China and imported $156.6 billion with a trade deficit of -$42.7 billion.

Perhaps foreign direct investment (FDI) from Japan, which has been on the rise, may be a better proxy for the warm ties. From around $512 million in 2006, it today hovers around $4.7 billion. It more than doubled between 2013 and 2014 when it stood at $1.7 billion.

Japan-based Yoshihisa Tani, executive officer at Team Pasona, who till last year headed its India office, offers a ringside view. “The years 2015 and 2016 were not good. Japanese companies focused on Asean markets instead of India,” he says. Team Pasona is an HR consultancy that offers training and recruitment services to mostly Japan-headquartered MNCs. In Japan, language is a huge barrier, especially in services sectors like IT. “China has more than 2 million Japanese-speaking workers while India has just 20,000,” says a Delhi-based senior executive at an industry association. “Triggered by NTTDocomo and Ranbaxy-Daiichi (partnerships that ended bitterly), Japanese companies had turned wary about India. That is changing. Today, there is a greater willingness and confidence in India,” says Rohit Berry, partner (lead Japan corridor), KPMG India.

Sun Finally Rising?
Driven right from the top — by the two PMs — change seems to be afoot. The big focus is on capacity-building at every level — institutional, governmental and even workforce. “We are looking at real goals where we build good-quality projects that are stable, safe and sustainable,” says JICA’s Sakamoto. Bullet train — or Shinkansen as it is called in Japan — is a difficult project with very high safety and punctuality standards.

In the Northeast, 10 JICA experts are working on the ground, preparing manuals and masterplans for sustainable agriculture. While it is training state government officials to build capacity for project implementation, plans are afoot to send small batches of officials to Japan for in-class training. Working with siloed departments, JICA is fostering interdepartmental collaboration by being the bridge. Capacitybuilding and a mindset change seem to be recurrent themes. The latter revolves around developing habits such as not just building but also making people use public toilets, overall cleanliness, punctuality and safety. “We are happy to be a catalyst for change. We lend but we are not a bank. We want to see deeper change,” Sakamoto says.

Sandeep Singh, managing director of Tata Hitachi Construction Machinery, can feel it first-hand. Earlier this year, the Japanese government queried about his company’s training programmes for unemployed youth, outside of their own internal training programme for customers, vendors and the like. “We got the message that it is not enough. They insisted that Japanese firms like us train youth,” he says. This was followed up seriously until Singh committed to training 30 youth annually for in-demand skills like welding. “I was happy to see the seriousness. The Japanese government doesn’t take anything lightly. They have hired an agency to see this gets done,” he says.

Many other programmes are underway to boost bilateral economic ties. Six months ago, Japan rolled out its JITCO programme in India to help tackle manpower shortage in Japanese firms here. It is focused on ITI-trained, blue-collar workers, who will be taught hard and soft skills and will be sent to Japan for a three-year, on-the-job training programme. The first batch of 15 workers has just been placed in Japan and the plan is to send 500 workers in the first year.

Japan has tried its trinity development model — focused on aid, investment and trade — in many Asian countries like South Korea, Thailand and Malaysia. “… though not acknowledged by Beijing, Japan played a critical role in China’s development,” says Purnendra Jain, head, department of Asian studies, University of Adelaide. “Japan’s aid policy has almost become a model for new donors and is now appreciated by others like OECD, which were critical of its aid policy in the past,” he adds.

The two governments are talking about training and sending nurses to Japan. As part of the Look East policy, this programme will be focused on the Northeast where caregivers will be trained for Japan. In the CEO’s forum in Tokyo in 2016, there was an announcement to make the movie Love in Tokyo 2. Japan National Tourism Organisation recently set up its first India office in Delhi and Japan has announced the production of Love in Tokyo 2 to be directed by Imtiaz Ali.

On the ground, it seems the tide is beginning to turn. Japan Inc is putting money where its mouth is. “In Japan, we hear, the message to companies (from the government) is you should go to India,” says Tani of Team Pasona, whose India business is growing at over 20% annually. Says Berry of KPMG: “Japanese go slow. Step by step. But once they move they are there for the long term. They are extremely dependable and reliable partners.” Beyond automobiles, Japanese firms — especially midsized — are entering new sectors, including tractors, agrochemicals, real estate, construction, defence, infrastructure.

“India has stood by us in difficult times. It is our turn now. If you have a need, we are happy to support,” says Sakamoto. It, however, may not be an entirely one-way street. If India is getting loans at rock-bottom rates, don’t forget that Bank of Japan is providing no-interest funds to banks to encourage them to lend. Also, the loan for the bullet train is conditional on India sourcing 30% of the project (by value) from Japan. Playing a role in India’s ascent also helps Tokyo assert itself in the neighbourhood at a time when China is flexing its muscle.

When two countries cooperate, more often than not, it is for mutual benefit. India-Japan cooperation may be no different, although the next-generation technology that India gets in a cost-effective manner may ensure it is a substantial gainer.

Four Marquee Projects

BULLET TRAIN : Inaugurated earlier this week, JICA will provide Rs 88,000 crore to the Rs 1.1 lakh crore high-speed rail corridor between Ahmedabad and Mumbai. It will cover 508 km in 127 minutes. The project construction will create 24,000 direct and indirect jobs. To be completed by 2022, it will entail technology transfer and local manufacturing of key components.

NORTHEAST : Amid the standoff with China in Doklam, Japan is helping India with its Look East policy. A Rs 4,000 crore project to build highways and bridges and Rs 900 crore for hydro projects will help boost connectivity and infrastructure in the region, much to Chinese displeasure. Other projects are in the works like smart city, a biodiversity initiative in Sikkim and forest resource management in Tripura.

DELHI METRO : JICA introduced India to a world-class metro rail through DMRC in the 1990s. It funded 60% of Phase 1 of the project. Trains and stations that are friendly to women and the disabled coupled with a thrust on cleanliness and punctuality set new standards for the railways. Today, metro networks are either operational or being constructed in nine Indian cities with the government seeing scope for them in 50 more Indian cities.

DEDICATED FREIGHT CORRIDOR : JICA is partnering in India’s largest railway project, the Rs 81,459 crore Dedicated Freight Corridor (DFC), which will lead to faster movement of goods and will be completed by 2019. While the World Bank is funding the Eastern DFC, JICA’s Rs 38,722 crore loan will fund the Western DFC.

India, Australia resume ODI Rivalry

Virat Kohli and Co have been nothing but phenomenal in demolishing a below-par Sri Lankan side. However, Australia had an indifferent run with their early Champions Trophy exit and then they had a tough time levelling the Test series against Bangladesh.

Spurs stalemate adds to Wembley woes

Tottenham were held to a goalless draw by Swansea as Mauricio Pochettino saw his side’s Wembley woes continue on Saturday.

‘Kohli wants to set right example for young fans’

Virat Kohli has walked the talk by deciding not to endorse aerated soft drink Pepsi and fairness creams any more. The Indian skipper has said that as he doesn’t consume soft drinks or use fairness creams in real life, he does not want to be seen selling these products. His intention is to set the right example for his young fans.